Thursday, July 14, 2016

ओशनोग्राफी में करियर का रोमांच

आपको जोखिम लेना पसंद है और लीक के हटकर कुछ करने की चाहत है, तो आप ओशनोग्राफी के फील्ड में कदम रख सकते हैं। ओशनोग्राफी का आशय समुद्र विज्ञान से है। इसके अंतर्गत समुद्र तथा इसमें पाए जाने वाले जीव-जंतुओं के बारे में अध्ययन किया जाता है। वैसे, यह तो हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी के दो-तिहाई से अधिक हिस्से में समुद्र है। दरअसल, यह एक ऐसा विज्ञान है जिसमें बायोलॉजी, केमिस्ट्री, जियोलॉजी, मेटियोरोलॉजी और फिजिक्स के सिद्धांत लागू होते हैं। यह एक रोमांच से भरा क्षेत्र है, जहां आपको हमेशा कुछ न कुछ सीखने को मिलता है।

क्वालिफिकेशन
विज्ञान विषयों जुड़े स्टूडेंट्स ओशनोग्राफी का कोर्स कर सकते हैं। इसके हर क्षेत्र में गणित की जरूरत पड़ती है, लेकिन मैरीन रिसर्च के लिए पोस्ट ग्रेजुएट या डॉक्टरेट की उपाधि होना जरूरी है। इसके अधिकतर कोर्स तीन वर्षीय होते हैं। समुद्र विज्ञान असल में एक अंत: विषयक अध्ययन है, जिसमें जीव विज्ञान, भौतिकी, रसायन विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान तथा मौसम विज्ञान को भी काफी हद तक शामिल किया जाता है।

यह मूलत: शोध एवं अनुसंधान पर आधारित प्रोफेशनल विषय है। इसमें अधिकांश समय समुद्र की लहरों एवं प्रयोगशाला में व्यतीत होता है। अन्य विषयों की भांति इस क्षेत्र में भी उपशाखाएं मौजूद हैं और युवा अपनी दिलचस्पी के अनुसार करियर निर्माण के लिए इनका चयन कर सकते हैं। इन उपशाखाओं में प्रमुख हैं : समुद्री जीव विज्ञान, भूगर्भ समुद्र विज्ञान, रासायनिक समुद्र विज्ञान आदि। महत्व की दृष्टि से किसी भी उपशाखा को कम करके नहीं आंका जा सकता है।


पर्सलन स्किल
महासागरों के बारे में जानने और नया खोजने की उत्सुकता, सी वर्दीनेस (ओशन सिकनेस न होना), शारीरिक क्षमता, सहनशीलता, अकेलेपन और बोरियत के बीच मानसिक संबल बनाए रखना, टीम में काम करने के लिए सही माहौल बनाए रखना आवश्यक है। इन सबके अलावा तैराकी और डाइविंग में प्रशिक्षित होना यहां की प्राथमिक योग्यताओं में शामिल है।

वर्क प्रोफाइल
विकासशील देशों के लिए ओशनोग्राफी का काफी महत्व है। इस क्षेत्र में काम करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यह उन लोगों का स्वागत करता है जिन्हें समुंद्र अपार गहराई से के बारे में जानने और सीखने की जिज्ञासा है। इनके कार्य में नमूने चुनना, सर्वे करना और अत्याधुनिक उपकरणों से डाटा का आकलन करना शामिल है। इस क्षेत्र में काम करने वालों को ओशनोग्राफर कहा जाता है। इनके काम में पानी के घुमाव और बहाव की दिशा, उसकी फिजिकल व केमिकल सामग्री के आकलन का कार्य शामिल है। इससे यह भी पता चलता है कि इनका तटीय इलाकों, वहां के मौसम और आबोहवा पर क्या असर होता है।

इस क्षेत्र से ज्यादातर केमिस्ट, फिजिसिस्ट, बायोलॉजिस्ट और जियोलॉजिस्ट जुड़े रहते हैं, जो अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल ओशन स्टडीज में करते हैं। यह पूरी तरह अध्ययन से जुड़ा क्षेत्र है। ऐसे में इस काम को करने के लिए समुद्र में लंबा वक्त गुजारना पड़ सकता है। इसके लिए मानसिक स्तर पर मजबूती की जरूरत होती है। इस काम में थोड़ा अनुभव होने के बाद अधिकांश लोगों को उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप अलग-अलग तरह का काम सौंपा जाता है। जिसमें मैरीन बायोलॉजी, जियोलॉजिकल ओशनोग्राफी, फिजिकल ओशनोग्राफी और केमिकल ओशनोग्राफी शामिल है।

केमिकल ओशनोग्राफी- यहां पानी के संयोजन और क्वालिटी का आकलन होता है। यह समुद्र की तलहटी में होने वाले केमिकल रिएक्शन पर नजर रखते हैं। इनका मकसद ऐसी टेक्नोलॉजी भी खोज निकालना है जिससे समुद्र से महत्वपूर्ण बातें पता लगाई जा सकें। बढ़ते प्रदूषण के चलते इनके काम की चुनौतियां और बढ़ती जा रही हैं। आज कल समुंद्र में आर्थिक हलचल की वजह से केमिकल ओशनोग्राफर की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है।

जियोलॉजिकल ओशनोग्राफी- जियोलॉजिकल और जियोफिजिकल ओशनोग्राफर्स सी-फ्लोर की वास्तविक स्थिति के बारे में पता लगाने का काम करते हैं। समुद्र की तलहटी में पाए जाने वाले खनिजों की जानकारी भी यहीं से पता लगती है। यही लोग पता लगाते हैं कि समुद्र की भीतरी चट्टानें किस तरह और कितने समय के अंतराल में बनी हैं।

फिजिकल ओशनोग्राफी- फिजिकल ओशनोग्राफी समुद्र के अध्ययन की विधा है। फिजिकल ओशनोग्राफर्स तापमान, लहरों की गति व चाल, ज्वार, घनत्व और करंट का पता लगाते हैं। यह ऐसा कार्यक्षेत्र है जहां समुद्र, मौसम और आबोहवा तीनों का जुड़ाव होता है।

मैरीन बायोलॉजी- समुद्र की अतल गहराइयों में बसने वाले जीव-जंतुओं की अपनी एक अलग रंग-बिरंगी दुनिया होती है। ये जीव-जंतु हमारे लिए कितने और कैसे उपयोगी हो सकते हैं, इनसे जुडे विभिन्न पहलुओं का अध्ययन मैरीन बायोलॉजिस्ट ही करते हैं। इस विषय के अध्ययन से कई क्षेत्रों में अनगिनत लाभ मिलते हैं। मैरीन बायोलॉजिस्ट की मदद से ही आज कई कंपनियां तेल और गैस के स्त्रोतों का पता लगा पाने में सक्षम साबित हो रही हैं। उल्लेखनीय है कि भारत का समुद्री तट भी करीब सात हजार किलोमीटर में फैला हुआ है। इस तरह देखा जाए, तो समुद्री संसाधनों की हमारे देश में भी कोई कमी नहीं है। समुद्री लहरों के साथ गोते लगाकर और सागर की अतल गहराई में इन संसाधनों की खोज करना न केवल बेहद रोमांचक है, बल्कि देश और करियर के लिहाज से भी बेहतर है।

रोजगार की संभावनाएं
ओशनोग्राफर्स निजी, सार्वजनिक और कई सरकारी संस्थानों में वैज्ञानिक, इंजीनियर या तकनीशियन बतौर नौकरी पा सकते हैं। सरकार से जुड़े जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, मेटिरियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और डिपार्टमेंट ऑफ ओशनोग्राफी में रोजगार की संभावनाएं मौजूद हैं। निजी क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों, मैरीन इंडस्ट्री या इस क्षेत्र से जुड़ी रिसर्च संबंधी संस्थाओं में भी रोजगार के बेहतर विकल्प हैं। देश में समुद्र विज्ञान विभाग, ऑयल इंडिया, भारतीय भौगोलिक सर्वेक्षण विभाग, समुद्र आधारित उद्योगों आदि में बतौर वैज्ञानिक, इंजीनियर अथवा तकनीकी प्रशिक्षित व्यक्ति के रूप में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।


सैलरी पैकेज
पोस्ट ग्रेजुएट के बाद इस क्षेत्र में करियर की शुरुआत करने पर 15-20 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। पीएचडी डिग्रीधारियों का वेतन शुरुआती दौर में 15-25 हजार रुपये हो सकता है। हालांकि हर कंपनियों में सैलरी स्ट्रक्चर अलग-अलग होती है।


इंस्टीट्यूट वॉच
u गोवा यूनिवर्सिटी, गोवा
www.goauniversity.org

u यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास
www.unom.ac.in

u कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी, कोच्चि
www.cusat.ac.in

u मैंगलौर यूनिवर्सिटी
www.mangaloreuniversity.ac.in

u उत्कल यूनिवर्सिटी
www.utkal-university.org

u अन्नामलाई यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु
www.annamalaaiuniversity.ac.in

u भावनगर यूनिवर्सिटी, गुजरात
www.bhavuni.edu

u कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी, केरल
www.cusat.ac.in

u पांडिचेरी यूनिवर्सिटी, पांडिचेरी
www.pondiuni.org

u बरहामपुर यूनिवर्सिटी, उडीसा
www.bamu.nic.in

Wednesday, July 13, 2016

आर्ट रेस्टोरेंट में कॅरियर

दुनियाभर में किसी भी देश की विरासत संपन्नता इतनी नहीं है जितनी भारत की है। हमारे देश की विरासत को देखने दुनियाभर से लोग आते है और यहां के ऐतिहासिक स्थलों की प्रशंसा करते नही थकते है।
वहीं विरासत की सार-संभाल करना भारत सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन आप भी इनकी देखरेख में अपना योगदान देकर आर्ट रेस्टोरेशन में अपना क्रियर बना सकते है।
 आर्ट रेस्टोरेशन प्रोफेशनल पेंटिंग का ही एक अलग रूप है, जिसमें पुरानी हवेलियों या किलों की खराब हो चुकी आर्ट को फिर से नया बनाया जाता है। प्राचीन कलाकृतियां, मूर्तियां, पेंटिंग्स आदि किसी भी देश की अमूल्य धरोहर समझी जाती है। कलाकृतियों के संरक्षण और रख-रखाव का काम आर्ट रेस्टोरेंट द्वारा किया जाता है।
शैक्षिक योग्यता:
आर्ट रेस्टोरर बनने के लिए फाइन आर्ट और रसायन विज्ञान में स्नातक होना अनिवार्य है। इस क्षेत्र में दो साल का मास्टर डिग्री कोर्स कराया जाता है। जिसके तहत पेंटिंग रेस्टोरेशन, मेटल वर्क, टेक्सटाइल, पेपर वर्क और मैन्यूस्क्रिप्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है।
 कंजर्वेशन में मास्टर डिग्री कोर्स करने के लिए केमिस्ट्री, जियोलॉजी, फिजिक्स, बॉटनी, जूलोजी, कंप्यूटर साइंस, फाइन आर्ट्स, हिस्ट्री, हिस्ट्री ऑफ आर्ट, आर्कियोलॉजी, म्यूजियोलॉजी में से किसी एक विषय में ग्रेजुएट की डिग्री होनी आवश्यक है।
कॅरियर संभानाएं:
ऐतिहासिक इमारतों को संजोकर रखने में पुरातत्व विभाग के रेस्टोरर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। रेस्टोरेशन का काम सिर्फ सरकारी विभागों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने एक उद्योग का रूप ले लिया है. इस कोर्स को करने के बाद आपको आर्ट गैलरी, म्यूजियम सहित कई जगहों पर काम मिल जाता है।
शुरू में आपको अनुभव हासिल करने के लिए किसी अच्छे आर्ट रेस्टोरर के साथ काम करना पड़ सकता है। कुछ साल का अनुभव होने के बाद आप अपना प्राइवेट वर्क भी शुरू कर सकते हैं।
प्रमुख संस्थान:
नेशनल म्यूजियम इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली
सिंहगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चरर, पुणे
दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ हैरिटेज रिसर्च एंड मैनेजमेंट, दिल्ली
नेशनल रिसर्च लैबोरेटरी फॉर कंजरवेशन ऑफ कल्चरल प्रॉपर्टी, लखनऊ

Monday, July 11, 2016

मर्चेंट नेवी बनकर करे लहरों से अठखेलियां

समुद्र की लहरों पर अठखेलियां करने के साथ अगर आपको विदेशों की सैर करने का शौक है तो निश्चय ही आपके लिए मर्चेंट नेवी का करियर मददगार साबित हो सकती है। दरअसल यह फील्ड रोमांच और साहस से भरा होता है। पर आपके अंदर थोड़े से सब्र और साहस के साथ कुछ नया जानने व करने की ललक होनी चाहिए। अगर ऐसा है तो निश्चय ही आप मर्चेंट नेवी बनकर बुलंदियों तक जा सकते हैं। बता रहे हैं मनीष झा- 
नौसेना से अलग: मर्चेंट नेवी में जहाज के सामान और लोगों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करते हैं। इसलिए अगर आप जहाज पर काम करना चाहते हैं, पर नौसेना में नहीं तो मर्चेंट नेवी आपके लिए एक बेहतर करियर विकल्प है। अक्सर लोगों को मर्चेंट नेवी का नाम सुनते ही ऐसा लगता है कि यह नौसेना का हिस्सा है, जबकि ऐसा नहीं है। 
क्या है मर्चेंट नेवी: मर्चेंट नेवी के तहत यात्री जहाज, मालवाहक जहाज, तेल और रेफ्रिजरेटेड जहाज आते हैं। इन जहाजों के संचालन के लिए एक ट्रेंड टीम की जरूरत होती है, जिसमें तकनीकी टीम से लेकर क्रू मेंबर तक शामिल होते हैं। जहाज में काम करने वाले प्रफेशनल्स जहाज के संचालन, तकनीकी रखरखाव और यात्रियों को कई प्रकार की सेवाएं देते हैं। इनकी ट्रेनिंग विशिष्ट और मेहनत से भरी होती है। इसके तहत बड़े व्यापारिक और यात्री जहाजों का बेड़ा है। 
आवश्यक योग्यता: समुद्री इंजिनियरिंग में बीएससी की डिग्री हासिल करने के बाद मर्चेंट नेवी में जा सकते हैं। भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित विषयों के साथ 12वीं पास करने के बाद आप किसी जहाज में डेक कैडेट के रूप में प्रवेश ले सकते हैं। यहां आप तीन साल तक काम करते हुए प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। नेविगेटिंग ऑफिसर या नौ-संचालन अधिकारी के रूप में नियुक्ति के लिए प्रशिक्षण के बाद भूतल परिवहन मंत्रलय द्वारा ली जाने वाली दक्षता परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक होता है। इसके अलावा उम्मीदवारों को शारीरिक और मानसिक रूप से भी फिट होना चाहिए। नेविगेशन का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कैप्टन श्रेणी के अधिकारी के रूप में नियुक्ति होती है। 
रोजगार के अवसर: भारत इंटरनैशनल ट्रेड का सबसे बड़ा केंद्र बनता जा रहा है, जिसमें समुद्री परिवहन हमेशा से ही सहायक रहा है। इसलिए मर्चेंट नेवी काफी डिमांड में है। भारत के अलावा फ्रांस, ब्रिटेन, नॉर्वे, जापान, ग्रीस और सिंगापुर की बड़ी शिपिंग कंपनियों में भी डिमांड है। 
इनकम: शुरूआत में 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह, लेकिन अनुभव बढऩे के साथ-साथ वेतन में बढ़ोत्तरी होती है। पद और अनुभव के साथ 10-15 लाख रुपये महीना भी कमा सकते हैं। 
अधिक जानकारी: जहाजरानी महानिदेशालय, जहाज भवन, बालचंद-हीराचंद मार्ग, बलार्ड एस्टेट, मुंबई तथा मरीन इंजिनियरिंग रिसर्च इंस्टिटय़ूट ताराटोला रोड, कोलकाता के अलावा शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की वेबसाइट www.shipindia.com और इग्नू की वेबसाइट www.ignou.ac.in पर सर्च सकते हैं। 
शैक्षणिक योग्यता: विज्ञान विषयों के साथ 10+2 पास छात्र जेईई के माध्यम से कोर्स कर सकते हैं। कुछ कोर्सेज के लिए 10वीं पास होना आवश्यक है। अधिकतम आयु सीमा 20 वर्ष सामान्य और 25 वर्ष एससी व एसटी के लिए है। 
प्रशिक्षण संस्थान 
लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज ऑफ अडवांस मरीन टाइम स्टडीज ऐंड रिसर्च, मुंबई 
www.imu.tn.nic.in 
ट्रेनिंग शिप चाणक्य, नवी मुंबई 
www.dgshipping.com 
इंडियन मेरिटाइम यूनिवर्सिटी, चेन्नै 
www.imu.tn.nic.in 
मरीन इंजिनियरिंग ऐंड रिसर्च संस्थान, कोलकाता 
www.merical.ac.in 

पद और कार्य 
डेक विभाग- जहाज के कप्तान, उप कप्तान, सहायक कप्तान, चालक। 
उप कप्तान- जहाज का दूसरा मुख्य अधिकारी उपकप्तान होता है जो कप्तान की सहायता करने के साथ-साथ डेक कर्मचारियों और माल लदान जैसी गतिविधियों पर नजर रखता है। 
सहायक कप्तान- फस्र्ट मेट और कप्तान को जहाज के कामकाज संचालन में सहयोग करना है। माल लादने और उतारने के समय मुख्य रूप से इसे रात्रि पाली की देखरेख करनी होती है। 
थर्ड मेट- सिग्नल उपकरणों, सुरक्षा और लाइफ बोट्स आदि की देखभाल करना। 
पायलट ऑफ शिप- जहाज की गति एवं दिशा तय करने जैसे कार्य करना। 
सेरंग-डेक कर्मचारियों पर नियंत्रण और सुपरवाइजरी का कार्य। 
इंजन विभाग- जहाज के इंजन पर नियंत्रण रखने वाले उपकरणों का रखरखाव व मरम्मत। 
जहाज इंजिनियर- सभी इंजनों, बायलरों, सेनेटरी उपकरणों, डेक मशीनरी व स्टीम कनेक्शनों के संचालन की जिम्मेदारी। 
इलेक्ट्रिकल ऑफिसर- इंजन रूम के सभी इलेक्ट्रिकल उपकरणों की देखभाल करना इनका काम है। 
नॉटिकल सर्वेयर- समंदर के नक्शे, चार्ट आदि तैयार करना। 
रेडियो ऑफिसर- डेक पर काम करने वालों पर नियंत्रण। 
सेवा विभाग- जहाज पर काम करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के रहने, भोजन की व्यवस्था का काम। 
कोर्सेज के स्वरूप 
12वीं (साइंस) 
डिग्री कोर्स: नॉटिकल साइंस ( 3 साल) 
और मरीन इंजिनियरिंग (4 साल) 
डिप्लोमा: 2 साल 
ग्रैजुएट मकैनिकल इंजिनियर्स: 1 साल 
डेक कैडेट: 3 माह 
10वीं (साइंस) 
प्री-सी कोर्स: 4 महीने 
डेक रेटिंग: 3 महीने 
इंजन रेटिंग: 3 महीने 
सेलून रेटिंग: 4 महीने 
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क्कष्टक्च और क्कष्टक्चरू से ओपन होता है मेडिकल का दरवाजा 
12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायॉलजी (पीसीबी) या फिजिक्स, केमिस्ट्री, बॉयलजी और मैथ्स (पीसीबीएम) की पढ़ाई करने के बाद आपके पास कई सारे विकल्प होते हैं। सिर्फ मेडिकल ही नहीं, अन्य भी कई ऐसे कोर्सेज हैं, जिनमें बेहतरीन करियर बनाया जा सकता है। बावजूद इसके आज भी मेडिकल का एक अलग क्रेज है। शायद यही वजह जीव विज्ञान की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स पहले मेडिकल ऐंट्रेस को ही क्रैक करने की सोचते हैं। बता रहे हैं मनीष झा- 
एमबीबीएस 
बैचलर ऑफ मेडिसिन ऐंड बैचलर ऑफ सर्जरी (एमबीबीएस) कोर्स बायॉलजीपहली पसंद है। ऐडमिशन ऑल इंडिया लेवल पर आयोजित होने वाली टेस्ट के आधार पर दिया जाता है। पहले यह स्टेट लेवल पर होता था। एम्स के एंट्रेस एग्जाम के अलावा सीबीएसई द्वारा आयोजित होने वाले ऐंट्रेस एग्जाम प्रमुख है। प्राइवेट कॉलेज भी अपने-अपने तरीके से ऐडमिशन देते हैं। 
बीडीएस 
12वीं में बायॉलजी की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स बीडीएस यानी बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (चार साल) का कर सकते हंै। कोर्स के साथ एक साल का इंटर्नशिप भी जुड़ा हुआ है। बीडीएस करने के बाद आप एक डेंटिस्ट के रूप में कोई अस्पताल जॉइन कर सकते हैं या फिर प्रैक्टिस शुरू कर सकते हैं। 
बीएएमएस 
फिजिक्स और केमिस्ट्री के साथ बायॉलजी की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स बीएएमएस यानी बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन ऐंड सर्जरी कर सकते हैं। यह कोर्स साढ़े पांच साल का होता है, जिसमें 1 साल का इंटर्नशिप होता है। 
वेटरनेरी साइंस 
देश में जानवरों के इलाज के लिए अच्छे डॉक्टरों की कमी है। आप बायॉलजी से 12वीं पास करने के बाद यह कोर्स कर सकते हैं। डिग्री लेने के बाद सरकारी नौकरी ही नहीं, प्राइवेट प्रैक्टिस भी कर सकते हैं। 
हेल्थकेयर / पैरामेडिकल 
बायॉलजिकल साइंस के फील्ड में तकनीक के इस्तेमाल से जुड़े यह कोर्स आपके लिए फार्मा, रिसर्च, फूड प्रॉडक्ट्स, ऐग्रिकल्चर और केमिकल इंडस्ट्री में प्रवेश के लिए प्लैटफॉर्म तैयार करता है। सीधे मेडिकल में न जा सकने वालों के लिए यह भी एक ऑप्शन है। फिजियोथेरपिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, सोनोग्राफर, रेडियोलॉजिस्ट, एमआरई और एमएलटी जैसे जॉब्स कर सकते हैं। 
माइक्रोबायॉलजी 
माइक्रोऑर्गेनिज्म की पढ़ाई और उसके ऐप्लीकेशन से संबंधित इस कोर्स में नंबर और टेस्ट दो प्रोसेस के आधार पर ऐडमिशन मिलता है। सरकारी नौकरियों के अलावा फार्मा, रिसर्च, फूड प्रॉडक्ट्स, एग्रीकल्चर सेक्टर्स में जॉब्स हैं। फॉर्मा और फूड ऐंड बेवरेज इंडस्ट्री में माइक्रोबायॉलॉजिस्ट की भारी मांग है। 
क्रिमिनॉलजी 
क्राइम के नेचर और कारण से जुड़े इस सब्जेक्ट को करने के बाद आप सरकारी और फॉरेंसिक लैब्स में काम करने के अलावा आप टीचिंग का भी काम कर सकते हैं। 
जेनेटिक्स 
रिसर्चर या जेनेटिक काउंसिलर के तौर पर काम कर सकते हैं। इस कोर्स में जीनों की बनावट और उनके काम करने के तरीके पढ़ाए जाते हैैं। 
बीएससी नर्सिंग 
महिलाओं के लिए यह कोर्स बेहतरीन माना जाता है। बीएससी करने के बाद सरकारी और प्राइवेट, दोनों सेक्टरों में अच्छी नौकरी है। टेस्ट के आधार पर दिया जाता है। ऐडमिशन टेस्ट के आधार पर मिलता है। 
फॉरेंसिक साइंस 
क्राइम से जुड़ी चीजों का विश्लेषण करने में दिलचस्पी रखने वाले स्टूडेंट्स के लिए फॉरेंसिक साइंस का कोर्स बेस्ट ऑप्शन है। आप इसे करने के बाद फॉरेंसिक साइंटिस्ट बन सकते हैं। 
ऐग्रिकल्चर साइंस 
खेती की बारीकियों से लेकर मार्केटिंग तक को हैंडल करना सिखाया जाता है। यह कोर्स कई सरकारी कॉलेजों में उपलब्ध है। 12वीं में कम से कम 50-60 पर्सेंट अंक होना चाहिए। ऐडमिशन टेस्ट के आधार पर होता है। 
ऐग्रिकल्चरल इंजिनियरिंग 
यह सब्जेक्ट ऐग्रिकल्चर के तकनीकी पक्ष की समझ पैदा करता है। इसके तहत ऐग्रिकल्चरल मशीनरी और सिंचाई से लेकर डेयरी इंजिनियरिंग तक शामिल है। रोजगार की संभावनाएं काफी है। 
बायोइंफॉर्मेटिक्स 
इसमें बायो केमिस्ट्री, माल्युकुलर बायॉलजी और इंफॉर्मेशन टेक्नॉलजी शामिल है। बायॉलजी से जुड़ी समस्याओं को कंप्यूटर का इस्तेमाल करके दूर किया जाता है। यह कोर्स काफी डिमांड में है। 
बायोकेमिस्ट्री 
जीव-जंतुओं के भीतर होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं के अध्ययन से जड़ा यह विषय है। केमिस्ट्री में जहां मूल रूप से शरीर के बाहर होने वाले प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है, वहीं बायोकेमिस्ट्री में अंदरूनी प्रतिक्रियाओं पर फोकस होता है। फॉर्मा व फूड इंडस्ट्री में करियर बना सकते हैं। 
फॉर्मा कोर्सेज 
देश में फॉर्मा इंडस्ट्री के तेजी से हुए विकास के बाद इस कोर्स की डिमांड बढ़ गई है। मार्केटिंग वाले को शुरुआत में भी अच्छे पैसे मिलते हैं। 
Top Medical Colleges in Mumbai 
Seth GS Medical College and KEM Hospital 
Topiwala National Medical College 
Grant Medical College 
Padmashree Dr DY Patil Dental College and Hospital 
RA Podar Ayurved Medical College 
Terna Medical College 
Rajiv Gandhi Medical College 
Nair Hospital Dental College 
Mahatma Gandhi Medical College 
KJ Somaiya Medical College 

1.King Edward Memorial (KEM) Hospital 
Parel 
Phone- 91-22-2410 7000 
2.Topiwala National Medical College 
Phone- 022 2308 1490 
3. Grant Medical College 
Sir J J Hospital, Byculla 
Phone:: 022 2373 5555 
4. Dr DY Patil Dental College and Hospital 
CBD Belapur 
Phone - 22 39486000 
5. RA Podar Ayurved Medical College 
Worli 
Phone::: 022 2493 3533 
6. Terna Medical College 
Nerul, Navi Mumbai 
Phone:-022 2772 0563 
7. Rajiv Gandhi Medical College 
Kalwa 
Phone::(022) 5348790 
8 Nair Hospital Dental College 
Mumbai Central 
Phone-:096 54 999202 
9. Mahatma Gandhi Medical College 
Phone: 022-27423404, 27421723, 5618116 
10. v®. KJ Somaiya Medical College 
Sion (East) 
Phone: (022) 24020932, (022) 24020933 

Sunday, July 10, 2016

एमएससी रासायनिक जीव विज्ञान और दवा डिजाइन


लीड्स विश्वविद्यालय सिखाया पहली बार शुरू की रासायनिक जीवविज्ञान में एमएससी की डिग्री ब्रिटेन और पाठ्यक्रम में रसायन विज्ञान की रॉयल सोसायटी की ओर से मान्यता प्राप्त करने के लिए ब्रिटेन में पहले दो एमएससी पाठ्यक्रम में से एक था. रसायन विज्ञान में एक उपयुक्त पहली डिग्री के साथ कार्यक्रम से स्नातक चार्टर्ड रसायनज्ञ (CChem) स्थिति के पुरस्कार के लिए शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा. एमएससी पाठ्यक्रम दृढ़ता से अनुसंधान परिषदों और दवा उद्योग द्वारा समर्थित किया गया है.

पाठयक्रम विवरण

इस एमएससी रासायनिक जीव विज्ञान और दवा डिजाइन दोनों पर केंद्रित है. रासायनिक जीवविज्ञान जैविक और चिकित्सा समस्याओं का रासायनिक उपकरण और विचारों के आवेदन पत्र है. दृष्टिकोण अत्यधिक अंतःविषय है और, उदाहरण के लिए, प्रोटीन वैज्ञानिकों के साथ सिंथेटिक दवा की दुकानों की बातचीत शामिल हो सकता है. विशिष्ट जैविक गुणों के साथ अणुओं तैयार किया जा सकता है या स्क्रीनिंग द्वारा की खोज की जा सकती है. हाथ में छोटा सा अणु उपकरणों के साथ, प्रोटीन के साथ उनकी बातचीत biophysical तरीकों का उपयोग कर जांच की जा सकती है और सेलुलर फिजियोलॉजी पर प्रभाव की स्थापना की.
आप एक "समस्या आधारित" दृष्टिकोण का उपयोग रासायनिक जीव विज्ञान, बायोफिज़िक्स और औषधीय रसायन विज्ञान में Astbury केंद्र भर के विशेषज्ञों द्वारा सिखाया जाएगा. इसके अलावा, दवा उद्योग से अतिथि व्याख्याताओं रासायनिक जीवविज्ञान और नशीली दवाओं के डिजाइन के औद्योगिक रूप से प्रासंगिक अनुप्रयोगों में विशेषज्ञता प्रदान करते हैं. इस परास्नातक पाठ्यक्रम रासायनिक जीवविज्ञान में एक कोर विषय में स्नातक की डिग्री के बीच की खाई, और सही मायने में अंतःविषय अनुसंधान पुल. पाठ्यक्रम छात्रों की विभिन्न पृष्ठभूमि का लाभ लेने के लिए बनाया गया है. आप शानदार अनुसंधान सुविधाओं में बहु मिलियन निवेश से benefitting, वास्तविक जीवन अनुसंधान समस्याओं को हल करने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करना होगा. बल्कि एक ही अनुशासन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, की तुलना में आप हाथ में समस्या का उचित रूप में रासायनिक या जैविक या तो दृष्टिकोण का उपयोग करने के लिए सीखना होगा. सबसे स्नातक डिग्री के विपरीत, नित्य आकलन पर ज्यादा जोर दिया है.
पाठ्यक्रम की सटीक सामग्री पाठ्यक्रम विशिष्ट और अप करने की तारीख है कि यह सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से समीक्षा कर रहा है. निरंतर मूल्यांकन स्वरूपों की विस्तृत श्रृंखला आप अपने सामान्य कौशल में सुधार करने की अनुमति देगा, और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता को सुधारने के लिए. मॉड्यूल का निरंतर मूल्यांकन के भाग के रूप में, आप मौखिक प्रस्तुतियों की एक विस्तृत श्रृंखला दे देंगे; लेख, निबंध और शोध रिपोर्टों कम तैयार; कम्प्यूटेशनल व्यायाम प्रदर्शन; और समूह आधारित समस्या को सुलझाने की गतिविधियों का कार्य.

पाठयक्रम संरचना

रासायनिक जीवविज्ञान और दवाओं की खोज पाठ्यक्रम पांच मुख्य मॉड्यूल का एक सेट पर आ रही है:
  • रासायनिक जीवविज्ञान की नींव
  • रासायनिक जीवविज्ञान - उपकरण और अवधारणाओं
  • औषध विकास के औषधीय रसायन विज्ञान
  • उन्नत औषधीय रसायन विज्ञान
  • रासायनिक जीवविज्ञान में उभरते विषयों
एक साथ इन मॉड्यूल आप एक पूरी तरह से समकालीन रासायनिक जीव विज्ञान और दवाओं की खोज में ग्राउंडिंग के रूप में अच्छी तरह से अनुसंधान फ्रंटियर से विषयों को शुरू करने के रूप में दे देंगे. इसके अलावा आप असममित संश्लेषण के लिए कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी से विषयों की एक विस्तृत विविधता को कवर वैकल्पिक मॉड्यूल की एक विस्तृत श्रृंखला से चुनना होगा. पाठ्यक्रम का केन्द्र बिन्दु पूरक विशेषज्ञता के साथ दो पर्यवेक्षकों को शामिल अंतःविषय अनुसंधान परियोजना है. इस परियोजना को अपनी डिग्री के लिए मार्क का 50% योगदान देगा. स्कूल कि हितों एक क्षेत्र में, आप के लिए सही है कि परियोजना का चयन करने में मदद मिलेगी और आप को प्रेरित करेगा. परियोजना आगे अपने कैरियर लेने के लिए प्रमुख अनुसंधान अनुभव के साथ प्रदान करेगा. आप के पीछे मुख्य मॉड्यूल के साथ, आप आदर्श की जांच के लिए एक रोमांचक समस्या का चयन करने के लिए तैनात किया जाएगा. लीड्स में उपलब्ध विशेषज्ञता का विस्तार आप संश्लेषण, प्रोटीन इंजीनियरिंग और लेजर स्पेक्ट्रोस्कोपी के लिए कम्प्यूटेशनल ligand डिजाइन से तकनीक की एक विस्तृत श्रृंखला गठबंधन करने में सक्षम हो जाएगा मतलब है. इन तकनीकों में निम्नलिखित सामान्य क्षेत्रों के अधिक से एक अवधि आ सकते हैं:
  • जैविक रूप से सक्रिय अणुओं के संश्लेषण
  • औषधीय रसायन शास्त्र
  • एंजाइमिकी और निर्देशित विकास
  • Biophysical रसायन विज्ञान
  • रासायनिक आनुवंशिकी
एक एमएससी के छात्र के रूप में आप वैज्ञानिक लेखन सहित और मौखिक प्रस्तुतियों दे मॉड्यूल के लिए आवश्यक हैं कि जेनेरिक कौशल में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे. तुम दूसरे सत्र के शुरू में अपनी परियोजना का चयन करेंगे. फिर आप एक प्रारंभिक रिपोर्ट लिखने से पहले निर्देशित पढ़ने का एक कार्यक्रम शुरू होगा. तुम तो पीएचडी छात्रों और अनुभवी postdoctoral शोधकर्ताओं के साथ काम कर अपने पर्यवेक्षकों 'अनुसंधान प्रयोगशालाओं में चार महीने से अधिक खर्च करते हैं. अनुसंधान परियोजना के दौरान छात्रों को लीड्स में उपलब्ध हैं कि रासायनिक जीव विज्ञान में उत्कृष्ट अनुसंधान सुविधाओं के लिए उपयोग किया है.

करियर विकल्प

स्नातक स्तर की पढ़ाई पर, आप आदर्श शिक्षा और दवा या जैव प्रौद्योगिकी उद्योग में अंतःविषय अनुसंधान के लिए रखा जाएगा. आप भी इस तरह के पेटेंट का काम है, वैज्ञानिक प्रकाशन या वैज्ञानिक प्रशासन के रूप में एक विज्ञान से संबंधित कैरियर को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत स्थिति में होगा. इसके अलावा, इस पाठ्यक्रम रसायन शास्त्र और जीव विज्ञान के बीच इंटरफेस में काम है कि कंपनियों में एक कैरियर बनाने के लिए एक मजबूत स्थिति में परास्नातक छात्रों रखता है. दवा और जैव प्रौद्योगिकी उद्योगों के तेजी से एक मजबूत अंतःविषय पृष्ठभूमि के साथ शोधकर्ताओं की आवश्यकता है. हमारे स्नातकों में से कई ब्रिटेन और अंतरराष्ट्रीय स्तर में रासायनिक जीवविज्ञान और औषधीय रसायन विज्ञान में पीएचडी कार्यक्रमों पर स्थिति सुरक्षित है. Astbury केंद्र एमएससी पाठ्यक्रम से स्नातक छात्रों के लिए कई अवसरों की पेशकश रासायनिक जीवविज्ञान और औषधीय रसायन विज्ञान को शामिल पीएचडी कार्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला आयोजित करता है. एमएससी रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के बीच इंटरफेस में सिलवाया प्रशिक्षण प्रदान करता है, और इन बेहद प्रतिस्पर्धी स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में से एक पर एक जगह हासिल करने की अपनी संभावनाओं में वृद्धि होगी.

छात्रवृत्ति

रसायन विज्ञान के स्कूल 3,000 प्रत्येक £ लायक 10 आंशिक शुल्क डीन के अंतरराष्ट्रीय उत्कृष्टता छात्रवृत्ति, अप करने के लिए प्रदान करता है. ये पुरस्कार इस पूरे कार्यक्रम पर प्रवेश के लिए स्वीकार किया गया है, जो और पूरी अंतरराष्ट्रीय दर पर ट्यूशन फीस का भुगतान करने के लिए पात्र हैं, जो अंतरराष्ट्रीय उम्मीदवारों के लिए खुले हैं. पात्र आवेदकों स्वतः आवेदन के समय में इन पुरस्कारों के लिए विचार किया जाएगा, ताकि एक आवेदन पत्र को पूरा करने के लिए आवश्यक नहीं कर रहे हैं.

Saturday, July 9, 2016

पर्यावरण इंजीनियरिंग में कैरियर

पर्यावरण इंजीनियर नगर निगम की जल आपूर्ति और औद्योगिक अपशिष्ट उपचार प्रणाली को भी डिजाइन करते हैं । साथ ही साथ स्थानीय और विश्वव्यापी प्रदूषण के मुद्दों से मुखातिब होते हैं जैसे  अम्ल वर्षा , ग्लोबल वार्मिंग ,ओजोन क्षरण, जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण…
आज पूरी दुनिया पर्यावरणीय समस्याओं से जूझ रही है । जलवायु परिवर्तन की समस्या के कारण  पूरी मानवता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं । ऐसे में, जब कि हर जगह हरित अर्थव्यवस्था और हरित रोजगार की बातें हो रही हैं । पर्यावरण इंजीनियरिंग एक ऐसा ही क्षेत्र है जो व्यक्ति को पर्यावरण हितैषी रोजगार उपलब्ध करवाता है और प्राकृतिक संसाधनों की  गुणवत्ता का स्तर सुधारने में योगदान भी देता है । पर्यावरण की गंभीर होती स्थिति ने पर्यावरण इंजीनियरिंग के क्षेत्र में रोजगार की काफी संभावनाएं उपलब्ध करवा दी हैं। पर्यावरण इंजीनियरिंग हवा, पानी और भूमि संसाधनों में सुधार करने और प्रदूषित स्थानों को सुधारने के लिए विज्ञान और इंजीनियरिंग के सिद्धांतों का अनुप्रयोग है। पर्यावरण इंजीनियर खतरनाक-अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था करते हैं पर्यावरणीय खतरों का मूल्यांकन करते हैं, इन खतरों के  रोकथाम, के लिए योजना बनाते हैं और  सलाह मुहैया कराते हैं । पर्यावरण इंजीनियर नगर निगम की जल आपूर्ति और औद्योगिक अपशिष्ट उपचार प्रणाली को भी डिजाइन करते हैं । साथ ही साथ स्थानीय और विश्वव्यापी प्रदूषण के मुद्दों से मुखातिब होते हैं जैसे  अम्ल वर्षा, ग्लोबल वार्मिंग,ओजोन क्षरण जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण ।  लोगों को पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा और उत्पादों की ओर आकर्षित करना पर्यावरण इंजीनियरिंग का मुख्य क्षेत्र है ।
पर्यावरण इंजीनियरिंग के कार्य-क्षेत्र
पर्यावरण इंजीनियरिंग में कई प्रभाग हैं । प्रदूषक रासायनिक, जैविक ,थर्मल, रेडियोधर्मी और यांत्रिक भी हो सकते हैं  । इसलिए पर्यावरण इंजीनियरिंग का क्षेत्र बहुत व्यापक हो जाता है । इसमें प्रमुख रुप से निम्न  क्षेत्र शामिल हैं। कृषि इंजीनियरिंग जीवविज्ञान, रसायन इंजीनियरिंग, रसायन विज्ञान सिविल इंजीनियरिंग पारिस्थितिकी भूगोल भूविज्ञान खतरनाक अपशिष्ट जल उपचार
पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन 
इस खंड में इंजीनियर और वैज्ञानिक पर्यावरणीय स्थितियों पर भौतिक, रासायनिक, जैविक, सांस्कृतिक और सामाजिक आर्थिक घटकों  के प्रभाव का आकलन करते हैं ।  यह  मूल्यांकन करने के लिए वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग सिद्धांतों का प्रयोग किया जाता है ।
योग्यता
पर्यावरण इंजीनियरिंग को कैरियर बनाने के  इच्छुक अभ्यर्थी को प्लस के बाद पर्यावरण इंजीनियरिंग में बीएसी कर सकते हैं । पोस्ट ग्रेजुएशन में  पर्यावरण इंजीनियरिंग में बीएसी करने वालों के साथ बीई अथवा बीटेक डिग्रीधारक भी प्रवेश ले सककते हैं। इसके अतिरिक्त पर्यावरण इंजीनियरिंग के क्षेत्र में डिप्लोमा भी अभ्यर्थियों के बीच काफी लोकप्रिय है ।
संभावनाएं
पर्यावरण इंजीनियरिंग में रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। प्रदूषण नियंत्रक संस्थाओं में डिजायनर अथवा प्लानर  के रुप में आप कैरियर संवार सकते हैं। सरकारी और निजी संस्थाओं में रिसर्चर की  नियुक्ति आकर्षक वेतनमान पर की जाती है। विश्वविद्यालय स्तर पर प्राध्यापक के
रुप में भी आप अपने कैरियर की शुरुआत कर सकते हैं।
वेतनमान
कैरियर के शुरुआती दौर में एक पर्यावरण इंजीनियर को आसानी से 25 से 30 हजार रुपए मिल जाते हैं। पर्यावरण इंजीनियरिंग में एम टेक कर चुके लोगों का वेतनमान प्रायः 35 से 50 हजार रुपए तक होता है।
संस्थान
* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हौज खास, नई दिल्ली
* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर
* रुड़की विश्वविद्यालय, रुड़की
* दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
* मैसूर विश्वविद्यालय, मैसूर

Thursday, July 7, 2016

शेयर बाजार में कैरियर

शेयर बाजार सिर्फ शेयरों में निवेश और लाभ कमाने की इच्छा तक ही सीमित नहीं है। यहां आप रिलेशनशिप मैनेजर से शुरुआत करके टेक्निकल एनालिस्ट तक का सफर तय कर सकते हैं और अपना भविष्य बेहतर बना सकते हैं।
शेयर बाजार में केवल निवेश के जरिए पैसे कमाने का ही अवसर नहीं है, बल्कि अब आप अपने सपनों को करियर का आकार भी दे सकते हैं। मौजूदा समय में रिलायंस कैपिटल, एंजेल ब्रोकिंग, रेलीगेयर, शेयरखान, यूनिकॉन सॉल्युशन, कार्वी और भारती इन्वेस्टमेंट जैसी कई बड़ी कंपनियां हैं, जहां रोजगार के ढेरों मौके हैं। आने वाले दिनों में मुकेश अंबानी जैसे और कई दिग्गज एस्सेट मैनेजमेंट और इक्विटी बाजार में कदम रखने वाले हैं। इसके अलावा पिछले कुछ सालों से विदेशी संस्थागत निवेशक (एफएफआई) भी भारतीय शेयर बाजारों में खूब पैसा लगा रहे हैं। यानी इक्विटी मार्केट, म्युचअल फंड, कमोडिटी बाजार, करेंसी बाजार का और विस्तार होगा। जाहिर है इसे देखते हुए इस क्षेत्र में और बूम आएगा और प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी।
इस क्षेत्र में रिलेशनशिप मैनेजर, पोर्टफोलियो मैनेजर, टेक्निकल एंड फंडामेंटल एनालिस्ट, ट्रेडर और डीलर की मांग बढ़ेगी। अगर आप एमबीए हैं तो भी यह क्षेत्र मुफीद रहेगा। बीएनपी फिनकॉर्प के सीईओ एके निगम का मानना है कि इस क्षेत्र में आने वाले प्रोफेशनल्स को बेसिक सर्टिफेकेशन कोर्स करना तो जरूरी है ही, साथ ही यह भी देखें कि आपका रुझान किस तरफ है। आप इक्विटी मार्केट में जाना चाहते हैं कि कमोडिटी बाजार में या म्युचुअल फंड में। सबसे पहले तो आपको बीएसई या एनएसई से एनसीएफएम के पेपर क्लियर करने होंगे, यानी अगर आप कमोडिटी में कदम रख रहे हैं तो कमोडिटी का पेपर पास करना होगा। सर्टिफिकेशन कोर्स करके आप किसी ब्रोकरेज कंपनी में बतौर रिलेशनशिप मैनेजर जॉब शुरू कर सकते हैं। लेकिन अगर आपको इस क्षेत्र में और आगे जाना है तो प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट पर भी ध्यान देना होगा। यानी फंडामेटल एनालिस्ट बनने के लिए कंपनियों की नेटवर्थ किस क्षेत्र में है, उस क्षेत्र का भविष्य क्या है, कंपनियों की भावी योजनाओं के बारे में मूलभूत जानकारी आदि बातें जानना जरूरी है। टेक्निकल एनालिसिस पर भी ध्यान देना होगा। इसके अलावा इस क्षेत्र में आपको रोजाना अपडेट रहने की जरूरत है कि कंपनी कौन सा नया प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है और वह उस पर कितना निवेश करेगी। इसके अलावा विदेशी शेयर बाजार, कच्चे तेल की कीमतें भी घरेलू शेयर बाजार की दिशा तय करती हैं, इनकी समझ भी जरूरी है।
रिलेशनशिप मैनेजर से होगी शुरुआत
अगर आप इस क्षेत्र में करियर बनाने जा रहे हैं तो सबसे पहले आपको रिलेशनशिप मैनेजर से शुरुआत करनी होगी। रिलेशनशिप मैनेजर का काम ग्राहकों को वित्तीय उत्पादों के बारे में जानकारी देना और डीमैट खोलना और केवाईसी (नो योर क्लाइंट) को पूरा करना होता है। इसमें कुछ ग्राहक ऑफिस आकर निवेश करते हैं तो कुछ मामलों में आपको संबधित व्यक्ति के घर जाकर फार्म भरना होगा। इस तरह से आपकी लोगों के प्रति जानकारी बढ़ेगी और कंपनी का विश्वास भी हासिल होने लगेगा। एक समय आपके पास निवेशकों की लंबी फेहरिस्त होगी। इसके बाद पोर्टफोलियो मैनेजर बन सकते हैं। इसके लिए आपकी इक्विटी, कमोडिटी, म्युचुअल और डेट मार्केट की गहरी समझ जरूरी है। तभी आप निवेशकों का पैसा सुरक्षित रख पाएंगे।
किसी एक क्षेत्र में निवेश करना बेहतर तरीका नहीं माना जा सकता। कोई भी पोर्टफोलियो बनाने के लिए उसमें इनका कॉम्बीनेशन जरूरी है। एक पोर्टफोलियो मैनेजर निवेशक के पैसे को डायवर्सिफाइड करके अच्छा रिटर्न दिलाने का काम करता है। यानी किसी क्षेत्र में गिरावट का दौर चल रहा है तो उसको दूसरे क्षेत्र से पूरा करना। एक संतुलित पोर्टफोलियो ही अच्छे पोर्टफोलियो मैनेजर की पहचान है। कुछ पोर्टफोलियो मैनेजर तो हर महीने 30 हजार से डेढ़ लाख रुपए प्रति महीने तक कमाते हैं।
इसी तरह से जब आप शेयर बाजार में कुछ साल काम कर लेते हैं तो कंपनियों के बारे में अच्छी-खासी जानकारी जुटा लेते हैं तो आप उस क्षेत्र का टेक्निकल एनालिसिस करने लगते हैं। आज टेक्निकल एनालिस्ट की बाजार में बहुत मांग है। अगर आपको बाजार के उतार-चढ़ाव की अच्छी-खासी समझ हो गई है तो आप खुद भी निवेश करके पैसा बना सकते हैं और अपना और अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं। यानी आपके दोनों हाथों में लड्डू होना तय है।
फैक्ट फाइल
स्टॉक बाजार में करियर के लिए कोर्स हैं अनेक
बीएसई (बांबे स्टॉक एक्सचेंज) ट्रेनिंग इंस्टीटय़ूट बीटीआई के नाम से जाना जाता है। यह पूंजी बाजार पर 3 महीने का पार्टटाइम सर्टिफिकेट प्रोग्राम -बीएसई सर्टिफिकेशन ऑन सिक्योरिटीज मार्केट्स (बीसीएसएम) जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के साथ मिल कर चलाता है। यह वित्तीय बाजार में काफी लोकप्रिय कार्यक्रम है। इसमें सफल होने वाले अभ्यर्थियों को मुंबई विश्वविद्यालय की ओर से सर्टिफिकेट मिलता है। यह कोर्स कोई भी ग्रेजुएट सब-ब्रोकर, इन्वेस्टमेंट कंसल्टेंट, पोर्टफोलियो मैनेजर, डिपॉजिटरीय प्रोफेशनल्स, डीपी बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां, म्युचुअल फंड, कस्टोडियन, क्लीयरिंग हाउस और फाइनेंशियल इंस्टीटय़ूट एवं मैनेजमेंट के छात्र कर सकते हैं। अभ्यर्थी बीटीआई या क्षेत्रीय कार्यालयों में टेस्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं।
कोर्स
एडवांस प्रोग्राम ऑन डेरिवेटिव्स
एडवांस प्रोग्राम ऑन स्टॉक मार्केट
अकाउंटिंग ऑफ फाइनेंशियल इंस्ट्रुमेंट एंड डेरिवेटिव्स
अस्बा (एप्लीकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट)
बेसिक कोर्स ऑन स्टॉक मार्केट
कमोडिटी एंड कमोडिटी डेरिवेटिव्स
स्टॉक एनालिसिस
पूंजी बाजार से जुड़े करीब 40 कोर्स हैं। ज्यादा जानकारी के लिए बीएसई की वेबसाइट पर लॉगइन कर सकते हैं।
वेबसाइट:  www.bseindia.com
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की ओर से 1998 से सर्टिफिकेट कोर्स सर्टिफिकेशन इन फाइनेंशियल मार्केट्स (एनसीएफएम) कोर्स चलाया जा रहा है। आप ऑनलाइन टेस्ट देना चाहते हैं तो एनएसई की वेबसाइट पर लॉग इन कर सकते हैं। एनएसई ने देशभर के बड़े शहरों में अपने टेस्ट सेंटर बनाए हैं, इनके माध्यम से भी टेस्ट दे सकते हैं।
फाइनेंशियल मार्केट्स,
डेरिवेटिव्स मार्केट,
कैपिटल मार्केट,
सिक्योरिटीज मार्केट,
डेब्ट मार्केट,
करेंसी मार्केट,
डिपॉजिटरी
ऑपरेशंस मॉडय़ूल,
एएमएफआई (म्युचुअल फंड) मॉडय़ूल।
बेवसाइट : www.nseindia.com
एक्सपर्ट व्यू
बाजार की समझ जरूरी
अतुल गुप्ता
ब्रांच हेड ब्रोकरेज फर्म रेलीगेयर
वैसे तो शेयर बाजार में काम करने के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सर्टिफिकेट प्रोग्राम 10+2 के बाद किए जा सकते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि पूंजी बाजार में करियर बनाने के लिए ग्रेजुएशन होना जरूरी है। केवल सर्टिफिकेट कोर्स करने से ही काम नहीं चल सकता। यह आपको किसी ब्रोकरेज कंपनी के साथ करियर शुरू करने का मौका तो देता है, लेकिन इस क्षेत्र में आने के लिए सबसे जरूरी चीजें हैं मेहनत, लगन और धैर्य।