Thursday, July 7, 2016

वित्तीय बाजार में कैरियर

पारंपरिक इंजीनियर, डॉक्टर या बैंक कर्मचारी से इतर शेयर बाजार, कमोडिटी मार्केट, प्राइवेट इक्विटी और म्युचुअल फंड का ब्रेन कारोबारियों के साथ-साथ नौकरी करने से इच्छुक को भी पसंद आ रहा है। स्टॉक मार्केट शब्द जितना छोटा है, कैरियर के लिहाज से इसमें संभावनाएं उतनी ही अधिक हैं। आमतौर पर स्टॉक मार्केट को ट्रेडिंग से ही जोड़कर देखा जाता है। दरअसल ट्रेडिंग के अलावा भी स्टाक मार्केट से जुड़े कई पहलू है। स्टाक मार्केट की नब्ज पहचानने वालों के लिए बाजार अपने दरवाजे खोल रहा है। बड़ी प्राइवेट इक्विटी फार्मस रिसर्चर्स अैर विश्लेषकों को बाजार की चाल समझने के लिए नियुक्त कर रही हैं। अब तक बाजार में संभावनाएं बढ़ रही है तो बाजार के लिए प्रोफेशनल की भी मांग बढ़ रही है। दिल्ली के कैरियर काउंसलर जितिन चावला के मुताबिक स्टाक मार्केट में कैरियर एक बढ़िया विकल्प है। स्टाक मार्केट में आप न सिर्फ एक ट्रेडर, बल्कि किसी ब्रोकरेज फर्म में रिलेशनशिप मैनेजर, टेलीकालर या रिसर्च टीम की हिस्सा भी बन सकते है। रिलेशनशिप मैनेजर का काम क्वाइंट्स बनाना है। वे क्लाइंटस की इच्छानुसार उन्हें शेयरों की जानकारी देते है। आज कल सब कुछ आनलाइन होने लगा है, इसलिए टेलीकालर्स की डिमांड भी बाजार में काफी है। आपका पैसा किस कंपनी के शेयर में लगाया जाए, इसके लिए रिसर्च टीम विभिन्न कंपनियों के पोर्टफोलियो की रिसर्च भी करता है। अगर आप चाहें तो स्टाक मार्केट में किसी के साथ काम करने के बाद छोटी इन्वेस्टमेन्ट के साथ अपना काम भी शुरू कर सकते हैं। स्टाक मार्केट के साथ- साथ कमोडिटी मार्केट के साथ-साथ कमोडिटी मार्केट में या म्युचुअल फंडस में अपना काम करने वालों की भी कमी नहीं है। कम इंवेस्टमेन्ट पर आप चाहें तो शेयर मार्केट की आनलाइन साइट्स से ही अपना कारोबार शुरू कर सकते हैं। शेयर बाजार से लंबे समय से जुड़े दिल्ली के एक सब  ब्रोकर वीबी गुप्ता का कहना है कि जब हम मार्केट से जुड़े थे, तब कोई क्वालिफिकेशन जरूरी नहीं थी। अब नेशनल स्टाक एक्सचेंज और बाम्बे स्टाक एक्सचेंज ने अपने ट्रेडर्स के लिए फाइनेन्शियल मार्केट में सर्टिफिकेशन एनसीएफएम के लिए एग्जाम शुरू कर दिया है। अगर आप एनएसई में कारोबार करना चाहते हैं तो आपको बाजार की बेसिक जानकारी वाला यह एग्जाम पास करना होगा। उनकी मानें तो एक सब ब्रोकर ठीक ठाक बाजार में एक दिन में 5, 000 से 10, 000 रुपए तक कमा सकता है। मार्केट बूम की स्थिति में कमाई और भी बढ़ जाती है।
योग्यता- डिप्लोमा कोर्स के लिए:- स्टाक मार्केट में काम के लिए कोई निश्चित योग्यता नहीं है। इसमें 12 वीं के बाद विभिन्न डिप्लोमा कोर्स के जरिए अपना भविष्य बना सकते है।
पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स के लिए- स्टाक मार्केट के साथ-साथ फाइनेंशियल और कैपिटल मार्केट को जानने के लिए आज कई पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सेज उपलब्ध है। इनमें प्रवेश की योग्यता 12 वीं के साथ-साथ किसी भी विषय में ग्रेजुएशन है। एमबीए कोर्स के लिए- एमबीए में प्रवेश के लिए ग्रेजुएशन के साथ-साथ फाइनेंशियल मार्केट में कम से कम दो वर्षों के अनुभव लिए हुए छात्रों को प्राथमिकता मिलती है। कोर्सेज-ह्व डिप्लोमा इन स्टाक मार्केट ट्रेडिंग, सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर सीएफपी सर्टिफिकेशन,  पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन एडवांस फाइनेंशियल प्लानिंग एंड वेल्थ मैनेजमेंट। पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन कैपिटल मैनेजमेंट।  एमबीए इन कैपिटल मार्केट्स। 
सभी डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स की अवधि तीन माह और उससे अधिक, पोस्ट ग्रेजुएट्स डिप्लोमा कोर्स की अवधि एक साल व एमबीए प्रोग्राम की अवधि दो साल है।
पत्राचार कोर्सेज- नौकरी करने वालों के लिए भी कई बिजनेस स्कूल पत्राचार कोर्सेज चला रहे हैं।
 वेलिंग्कर इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट डेवलपमेंट एंड रिसर्च, माटुंगा मुंबई, डिप्लोमा इन कमोडिटीज मार्केट। अवधि तीन महीने।

 इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ फाइनेंशियल प्लानिंग आईआईएफपी कनाट प्लेस, दिल्ली सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानिंग। अवधि-6 महीने।

एनएमआईएमएस, मुंबई, महाराष्ट्र डिप्लोमा इन फाइनेंशियल मैनेजमेंट। अवधि एक वर्ष। पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन फाइनेंशियल मैनेजमेंट अवधि-दो वर्ष।
संभावनाएं
स्टाक मार्केट ट्रेडिंग कोर्स- इस कोर्स के साथ आप किसी भी इक्विटी फर्म या आनलाइन ब्रोकरेज फर्म के साथ अपना कारोबार कर सकते हैं।
पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स- स्टाक मार्केट के बेसिक से आगे बढ़ने और बाजार की बारीकियां को व्यवहारिक तौर पर समझाने के लिए वित्तीय बाजार संबंधित विभिन्न पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स किए जा सकते हैं। अगर आप किसी भी विषय में ग्रेजुएट हैं और प्राइवेट इक्विटी फंड, म्युचुअल फंड, मुद्रा विनिमय कारोबार, डेरिवेटिव्स, कमोडिटी मार्केट में विशेषज्ञता हासिल करनाचाहते हैं तो इस कोर्स से आपको इन क्षेत्रों की ओर बारीक जानकारी मिलेगी।
एमबीए कैपिटल मार्केट-
इस कोर्स के बाद प्रमुख फाइनेंशियल फील्डस जैसे इक्विटी, कमाडिटी मार्केट मुद्रा विनिमय और डेरिवेटिव्स में ढेरों संभावनाएं हैं, इसके साथ बैंक, ट्रेजरी, या कारपोरेट में ट्रेडिंग, इंवेस्टमेंट बैंक में आईपीओ या एमएंडए के लिए रिसर्चर या एडवाइजर पेंशन फंडस, हेज फंडस और म्युचुअल फंड्स में काम कर सकते हैं।
कंपनी सेकेट्री (सीएस कोर्स)- नये नियमों के मुताबिक बाजार से जुड़ी कंपनियों को एक सीएस नियुक्त करना अनिवार्य है। इसके चलते सीएस पढ़ने वाले भी इस तरफ का रेयर बना सकते हैं।
प्रमुख संस्थान-ह्व बीएलबी इंस्टीटयूट ऑफ फाइनेंशियल मार्केट्स बीआईएफएम गुलाब भवन, चौथी मंजिल, 6 बहादुर शाह जफर मार्ग, नयी दिल्ली-1100021 फोन- 01-43702201-02 । 
 द इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ फाइनेंशियल प्लानिंग (आईआईएफपी) 6 ए, आत्माराम हाउस, 1 टालस्टाय मार्ग, कनाटप्लेस, नयी दिल्ली- 110001 । 

 निरमा यूनिवर्सिटी इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट। सारखेज-गांधी नगर हाईवे पोस्ट चंदलोडिया, वाया गोटा, अहमदाबाद, 382481, गुजरात। फोन- 02717-241900-04 ।

 नारसी मांजी इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एनएमआईएमएस एसबीकेएम, एनएमआईएमएस  यूनिवर्सिटी, वीएल मेहता रोड, जेवीपीडी, वीएल मेहता रोड, जेवीपीडी स्क्रीम मुंबई, महाराष्ट्र-400056, फोन-022-261836881। 

द इंस्टीटयूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया, आईसीएसआई हाउस, 22, इंडस्ट्रियल एरिया, लोदी रोड, नयी दिल्ली-110003 फोन-011-41504444।

Saturday, July 2, 2016

राजनीतिक विज्ञान से पाएं करियर



राजनीति विज्ञान एक सामाजिक विज्ञान है, जो राजनीति के सिद्धांत और व्यवहार तथा राजनीतिक व्यवस्था के विवेचन एवं विश्लेषण से जुड़ा हुआ है। इस विषय के कई उपभाग हैं । जैसे-राजनीतिक सिद्धांत, लोक नीति, राष्ट्रीय राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध,  तुलनात्मक राजनीति आदि। इससे पता चलता है कि यह विषय व्यापक क्षेत्र को कवर करता है तथा इस विषय का अध्ययन करने के बाद विविध क्षेत्रों में एवं विभिन्न भूमिकाओं में कार्य करने का अवसर मिल सकता है…
राजनीति अपने पुरातन स्वरूप में बड़े बदलाव कर रही है, जो पूरी दुनिया की सामाजिक संरचनाओं को भी प्रभावित कर रही है। ढेरों ऐसे संगठन इस बदलाव को समझने और नई रणनीतियों को बनाने के लिए बन रहे हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। तमाम राजनीतिक दल अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए नए तरीके और आइडियाज पर काम कर रहे हैं। थिंक टैंक और संगठन तक में आधुनिक तौर तरीकों से बदलाव किए जा रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों की बाजार में मांग पैदा हो रही है जो इन बदलावों को बेहतर तरीके से समझते हों या राजनीतिक समझ को बेहतर करने में सक्षम हों। पॉलिटिकल साइंटिस्ट और थिंक टैंक जैसे नए पदनामों के साथ राजनीति विज्ञान ने आधुनिक दुनिया में बेहतर करियर बनाने के ढेरों नए अवसर पैदा किए हैं। राजनीतिक सिद्धांत, लोकनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक संबंध और तुलनात्मक राजनीति जैसे क्षेत्र उनका स्वागत करने के लिए हाथ पसारे खड़े हैं।
क्या पढ़ना होगा
राजनीति विज्ञान में स्नातक के अलावा इंटेलेक्चुअल प्रॅपर्टी राइट्स, इंटरनेशनल रिलेशंस, लोकल गवर्नेंस, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, पॉलिटिक्स, पब्लिक पॉलिसी में स्नातकोत्तर, एमफिल और पीएचडी की जा सकती है। क्षेत्र विशेष में अपनी विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए मिनिस्ट्री, पंचायती राज, इंडियन पॉलिटिकल सिस्टम और गुड गवर्नेंस में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सेज भी भारत में उपलब्ध हैं।
सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं
राजनीति विज्ञान सिर्फ  विचार समझने और विकसित करने तक ही सीमित नहीं है बल्कि उसे प्रचारित और प्रसारित करने तक आगे बढ़ चुकी है। यह जनमत निर्माण के लिए सोचने से आगे लिखने और बेहतर वक्ता होने तक की मांग करती है इसलिए इस क्षेत्र में करियर निर्माण के लिए सोचने वाले युवाओं को अपने पूरे व्यक्तित्व पर भी काम करना होगा। इस विधा में महारत रखने वाले उम्मीदवारों के लिए लॉ फर्म्स, मार्केटिंग रिसर्च फम्स, फील्ड रिसर्च, लॉ इंफोर्समेंट एजेंसी जैसे पुलिस एवं न्यायालय आदि, पब्लिशिंग फर्म्स, राजनीतिक दल और विभिन्न व्यवसायों में ढेरों बेहतरीन जॉब ऑफर्स इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा वे पॉलिसी एनालिस्ट, पॉलिटिकल कंमेटेटर, पॉलिटिकल राइटर, सर्वे कंडक्टर, प्री पोल एनालिस्ट, पब्लिक अफेयर्स रिसर्च एनालिस्ट, पब्लिक ओपिनियन एनालिस्ट, कैम्पेन वर्कर, कैम्पेन डिजाइनर, विभिन्न मीडिया समूहों या अखबार में पॉलिटिकल कॉरसपॉन्डेंट या बिजनेस एडमिनिस्ट्रेटर जैसे पद संभाल सकते हैं।
यहां से कर सकते हैं कोर्स
*     हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला
*     पीजी कालेज, धर्मशाला(हिमाचल प्रदेश)
*     राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बिलासपुर
*     राजकीय सनातकोत्तर महाविद्यालय, सरकाघाट
*     राजकीय महाविद्यालय, बैजनाथ
*     दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
*     हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद
*     कलकत्ता विश्वविद्यालय, प. बंगाल
*     पुणे श्विवविद्यालय, पुणे
*     बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
*     हिंदू कालेज, दिल्ली
*     पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
राजनीति विज्ञान का अन्य समाज विज्ञानों से संबंध
समाजशास्त्रों में पारस्परिक अंतर्निर्भरता पाई जाती है। कोई भी एक समाज विज्ञान समाज का उचित एवं समग्र अध्ययन नहीं कर सकता। इसलिए तमाम समाजशास्त्र आपस में संबंधित हैं और अंतर्शास्त्रीय अध्ययन पद्धति ने फिर से समाजशास्त्रों के इस संबंध को उभार दिया है। आज राजनीतिक अर्थशास्त्र, राजनीतिक नैतिकता, राजनीतिक इतिहास, राजनीतिक समाजशास्त्र, राजनीतिक मनोविज्ञान तथा राजनीतिक भूगोल आदि विभिन्न राजनीति विज्ञान की नई शाखाओं का खुलना इस बात का प्रतीक है कि राजनीति विज्ञान अन्य समाज विज्ञानों से संबंध स्थापित किए बिना नहीं चल सकता।
बदलता स्वरूप
यूनानी विचारकों के समय से लेकर आधुनिक काल तक के विभिन्न चिन्तकों, सिद्धांतवेत्ताओं और विश्लेषकों के योगदानों से राजनीति विज्ञान के रूप, अध्ययन सामग्री एवं उसकी परंपराएं समय-समय पर परिवर्तित होती रही हैं। तद्नुरूप इस विषय का निरंतर विकास होता रहा है। इस विकासक्रम में राजनीति विज्ञान के अध्ययन के संबंध में दो प्रमुख दृष्टिकोणों का उदय हुआ है। परंपरागत दृष्टिकोण एवं आधुनिक दृष्टिकोण। पारंपरिक या परंपरागत दृष्टिकोण राज्य प्रधानता का परिचय देता है जबकि आधुनिक दृष्टिकोण प्रक्रिया प्रधानता का।
वेतनमान
इस क्षेत्र में वेतनमान इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस पद पद हैं और क्या आप का क्षेत्र सरकारी है या निजी क्षेत्र में आप कार्यरत हैं। स्कूल में अध्यापन कार्य में आरंभ में 10 से 15 हजार तक वेतन मिलता है। कालेज में 35 से 40 हजार तक वेतनमान है।
महत्त्व
राजनीति विज्ञान का महत्त्व इस तथ्य से प्रकट होता है कि आज राजनीतिक प्रक्रिया का अध्ययन राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की राजनीति को समझने के लिए आवश्यक है। प्रक्रिया के अध्ययन से ही वास्तविक राजनीति एवं उनके भीतर अवस्थित तथ्यों का ज्ञान संभव है।
अवसरों की  भरमार
सिविल सेवा
राजनीति विज्ञान सिविल सेवा और राज्य सिविल परीक्षाओं में एक ऑप्शनल विषय के रूप में काफी लोकप्रिय है। पढ़ने में सुविधाजनक होने, आसानी से पाठ्य सामग्री और कोचिंग की सुविधा उपलब्ध होने के कारण कम परिश्रम में अच्छे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। सामान्य अध्ययन (जनरल स्टडी) प्री एवं मुख्य परीक्षा के 25 फीसदी प्रश्न राजनीति शास्त्र से जुड़े होते हैं। इसके अलावा राजनीति विज्ञान देश-विदेश की घटनाओं के विश्लेषण के साथ ही निबंध लेखन को भी आसान बनाता है।
कानून
पॉलिटिकल साइंस का बैकग्राउंड लॉ करने के लिए अच्छा माना जाता है। एलएलबी करके कानून के क्षेत्र में स्थान बना सकते हैं।
समाज सेवा
राजनीति विज्ञान का अध्ययन समाज के विभिन्न अवयव, राजनीति संगठन आदि को समझने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है और इस प्रकार यह समाज सेवा और राजनीति के क्षेत्र में कार्य करने के लिए बहुत ही सहयोगी साबित हो सकता है। यह एक ऐसा विषय है, जो समाज सेवा के लिए प्रेरित करता है। समाज सेवा के जरिए जनप्रतिनिधि बना जा सकता है और लोकतंत्र को मजबूत करने में एक सशक्त भूमिका अदा की जा सकती है। राजनीति विज्ञान विषय में ग्रेजुएट होने पर एक बेहतर वक्ता तथा जनप्रतिनिधि बनने में सुविधा होती है।
राजनीतिक विश्लेषक
राजनीति विज्ञान में पीजी की डिग्री हासिल करने एवं राजनीतिक दर्शन, अंतरराष्ट्रीय संबंध, संविधान में दिलचस्पी रखने वाला राजनीतिक विश्लेषक बन सकता है। दूतावासों और स्वयंसेवी संगठनों में भी बेहतर अवसर हो सकते हैं। उच्च शिक्षा हासिल करके चुनाव विश्लेषक भी बना जा सकता है। इसके अलावा एमफिल या पीएचडी करने और किसी प्रोजेक्ट का अनुभव हासिल करने के बाद स्वतंत्र रूप से किसी सामाजिक विषय पर प्रोजेक्ट अपने हाथ में ले सकते हैं। कई राजनीतिक अनुसंधान एवं विश्लेषण संस्थानों में प्रतिष्ठित पदों पर कार्य करने का अवसर मिल सकता है।
उच्च शिक्षा में संभावनाएं
यदि राजनीति विज्ञान से बीए ऑनर्स करने के बाद बीएड करते हैं, तो किसी सरकारी या गैर सरकारी संस्थानों में इस विषय के शिक्षक बन सकते हैं। वहीं एमए करने के बाद नेट व पीएचडी करके किसी भी कालेज में लेक्चरर या प्रोफेसर भी बन सकते हैं।
पत्रकारिता
राजनीति विज्ञान का ज्ञान देश-विदेश की घटनाओं का विश्लेषण एवं समीक्षा करने में सक्षम बनाता है। मास कम्युनिकेशन और पत्रकारिता का कोर्स करके प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में नौकरी की तलाश की जा सकती है।
और भी हैं विकल्प
राजनीति विज्ञान से ऑनर्स करने के बाद बैंक, न्यायिक सेवा, भारतीय प्रशासनिक सेवा, विदेश सेवा, मानवाधिकार, वकालत, एमबीए, रिसर्च इंस्टीच्यूट, वर्ल्ड ट्रेड आर्र्गेनाइजेशन, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, पब्लिक रिलेशन आदि में भी नौकरी की तलाश की जा सकती है।
किस तरह का काम
किसी भी विषय की पढ़ाई करने वाला छात्र राजनीति विज्ञान को अपना सकता है। इसके लिए देश से संबंधित मसलों की गहन खोज-परख तथा जांच-पड़ताल करने की जरूरत होती है। राजनीति विज्ञान विभिन्न सरकारी विभागों की वित्तीय गतिविधियों पर नियंत्रण करने का अवसर देता है। बजट और उसकी प्रक्रिया के निर्धारण, उसकी विशेषताओं, उद्देश्यों तथा बजट के विभिन्न सिद्घांतों तथा बजट लागू करने में राजनीतिक विज्ञान का अपना महत्त्व होता है। यह कर्मचारी को संस्थान की अवधारणा तथा संगठन में मानव व्यवहार के आकलन में भी मदद करता है।
अर्थ एवं परिभाषा
‘राजनीति’ का पर्यायवाची अंग्रेजी शब्द ‘पॉलिटिक्स’ यूनानी भाषा के ‘पॉलिस’ शब्द से बना है जिसका अर्थ नगर अथवा राज्य है। प्राचीन यूनान में प्रत्येक नगर एक स्वतंत्र राज्य के रूप में संगठित होता था और पॉलिटिक्स शब्द से उन नगर राज्यों से संबंधित शासन की विद्या का बोध होता था। धीरे-धीरे नगर राज्यों का स्थान राष्ट्रीय राज्यों ने ले लिया अतः राजनीति भी राज्य के विस्तृत रूप से संबंधित विद्या हो गई। संक्षेप में राजनीति विज्ञान के अन्तर्गत राज्य, सरकार तथा अन्य सम्बंधित संगठनों व संस्थाओं काए मानव के राजनीतिक जीवन के संदर्भ में अध्ययन किया जाता है।
परिचय
राजनीति विज्ञान का उद्भव अत्यन्त प्राचीन है। यूनानी विचारक अरस्तू को राजनीति विज्ञान का पितामह कहा जाता है। यूनानी चिंतन में प्लेटो का आदर्शवाद एवं अरस्तू का बुद्धिवाद समाहित है। राजनीति शास्त्र या राजनीति विज्ञान अत्यन्त प्राचीन विषय है। प्रारंभ में इसे स्वतंत्र विषय के रूप में नहीं स्वीकारा गया। राजनीति विज्ञान का अध्ययन नीतिशास्त्र, दर्शनशास्त्र, इतिहास,एवं विधि शास्त्र आदि की अवधारणाओं के आधार पर ही करने की परंपरा थी। आधुनिक समय में इसे न केवल स्वतंत्र विषय के रूप में स्वीकारा गया अपितु सामाजिक विज्ञानों के सन्दर्भों में इसका पर्याप्त विकास भी हुआ।
शैक्षणिक योग्यता
12वीं के बाद राजनीति विज्ञान में स्नातक डिग्री ली जा सकती है और उसके बाद स्नातकोत्तर किया जा सकता है। पीएचडी का विकल्प भी इसमें खुला है। जो विद्यार्थी कला क्षेत्र में स्नातक करना चाहते हैं, वे राजनीति विज्ञान में ऑनर्स कर सकते हैं या पास कोर्स में एक विषय के रूप में इसे रख सकते हैं।
अध्ययन का विस्तृत क्षेत्र
राजनीति विज्ञान एक सामाजिक अध्ययन  है जो सरकार और राजनीति के अध्ययन से संबंधित है। राजनीति विज्ञान में ये तमाम बातें शामिल हैं। राजनीतिक चिंतन, राजनीतिक सिद्धांत, राजनीतिक दर्शन, राजनीतिक विचारधारा, संस्थागत या संरचनागत ढांचा, तुलनात्मक राजनीति, लोक प्रशासन, अंतरराष्ट्रीय कानून और संगठन आदि।

Friday, July 1, 2016

फोरेंसिक साइंस में करियर

आजकल अपराधिक घटनओं में लगातार इजाफा हो रहा है। लेकिन अपराधी कितने भी शातिर क्यों न हों, वे कोई न कोई सुराग छोड ही जाते हैं। और इन्हीं सूक्ष्म से सूक्ष्म साक्ष्य के सहारे फोरेंसिक एक्सपर्ट अपराधियों को बेनकाब करने में सफल हो जाते हैं। फोरेंसिक एक्सपर्ट विज्ञान के सिद्धांतों और नई तकनीकों का उपयोग करते हुए क्राइम का इन्वेस्टिगेशन करते हैं। इसके लिए एक्सपर्ट ब्लड, बॉडी फ्लूड, हेयर, फिंगरप्रिंट, फूटप्रिंट, टिशू आदि की मदद लेते हैं। आमतौर पर फोरेंसिक एक्सपर्ट पुलिस के साथ मिल कर ही काम करते हैं।
हाल के वर्षो में कुछ प्रमुख विश्वविद्यालयों में भी फोरेंसिक साइंस से संबंधित कोर्स शुरू हो गए हैं, जो कि कुछ वर्ष पहले तक नहीं था। इससे यही जाहिर होता है कि आज इस कोर्स की बहुत ज्यादा पॉपुलरिटी है। अमूमन गवर्नमेंट कॉलेजों या विश्वविद्यालयों में फोरेंसिक साइंस से संबंधित कोर्स की फीस प्राइवेट इंस्टीटयूट की तुलना में काफी कम होती है, लेकिन इन दिनों जिस तरह से आपराधिक घटनाओं में वृद्धि हो रही है, उससे फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की डिमांड काफी बढ गई है।
 इनके लिए रोजगार के अवसरों की अब कोई कमी नहीं है। गवर्नमेंट सेक्टर के साथ-साथ प्राइवेट संस्थानों में भी नौकरी की भरपूर संभावनाएं मौजूद हैं। आज करीब-करीब हर राज्य में फोरेंसिक लैब हैं। केवल यही नहीं, रीजनल और मोबाइल लैब्स की संख्या भी बढती जा रही है। वैसे, कुछ लैब में फोरेंसिक से जुडे स्टूडेंट्स को कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर भी रखा जाने लगा है। ऐसे में इस क्षेत्र से जुडे लोगों के लिए रोजगार की फिलहाल कोई समस्या नहीं है। खास बात यह है कि इन दिनों इस प्रोफेशन के प्रति युवाओं में बेहद क्रेज देखा जा रहा है।
कैसे मिलेगी एंट्री
फोरेंसिक साइंस में एंट्री के लिए साइंस बैकग्राउंड का होना जरूरी है। यदि आप साइंस सब्जेक्ट से 10+2 कर चुके हैं, तो फोरेंसिक साइंस में ग्रेजुएशन कर सकते हैं। ग्रेजुएशन के बाद फोरेंसिक साइंस और क्रिमिनोलॉजी में एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स में भी एंट्री ले सकते हैं। फोरेंसिक साइंस से मास्टर डिग्री कोर्स करने के लिए स्नातक में फिजिक्स, केमिस्ट्री, जूलोजी, बॉटनी, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, बी.फार्मा, बीडीएस और अप्लायड साइंस में से किसी एक में 60 प्रतिशत अंक होना जरूरी है। इसके अलावा, फोरेंसिक स्पेशलिस्ट (जो मृत्यु के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम करते हैं) बनने के लिए एमबीबीएस की डिग्री जरूरी है। इसके बाद फोरेंसिक साइंस में एमडी भी कर सकते हैं।
प्रमुख उपलब्ध कोर्स
देश में प्रमुख शिक्षण संस्थानों में फोरेंसिक साइंस से जुडे कई तरह के कोर्स उपलब्ध हैं :
u डिप्लोमा इन फोरेंसिक साइंस ऐंड क्रिमिनोलॉजी 
u बीएससी इन फोरेंसिक साइंस 
u पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन क्रिमिनोलॉजी ऐंड पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन
u एमएससी इन फोरेंसिक साइंस
u एमएससी इन क्रिमिनोलॉजी ऐंड फोरेंसिक साइंस
u एमएससी इन साइबर फोरेंसिक्स ऐंड इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी
u एमए क्रिमिनोलॉजी ऐंड क्रिमिनल जस्टिस।
कहां मिलेगी नौकरी
फोरेंसिक एक्सपर्ट के लिए गवर्नमेंट और प्राइवेट ऑर्गनाइजेशन में जॉब की अच्छी संभावनाएं हैं। यदि गवर्नमेंट एजेंसी की बात करें, तो फोरेंसिक साइंटिस्ट के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन (सीबीआई), स्टेट पुलिस फोर्स के क्राइम सेल में, गवर्नमेंट व स्टेट फोरेंसिक लैब, प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी आदि में काम करने का भरपूर मौका है। इसके अलावा, फोरेंसिक टीचर के रूप में भी करियर बनाने का भरपूर अवसर होता है। वैसे, गवर्नमेंट ऑर्गनाइजेशन में फोरेंसिक एक्सपर्ट को तकरीबन आठ से 10 हजार रुपये प्रति माह शुरू में सैलॅरी मिल जाती है। हालांकि, प्राइवेट एजेंसी में फोरेंसिक एक्सपर्ट की सैलॅरी आकर्षक होती है।
फोरेंसिक साइंस में स्पेशलाइज्ड फील्ड
इस क्षेत्र में आप निम्न क्षेत्र में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं : क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन, फोरेंसिक पैथोलॉजी/ मेडिसिन, फोरेंसिक एंथ्रोपालॉजी, फोरेंसिक डेंटिस्ट्री, क्लिनिकल फोरेंसिक मेडिसिन, फोरेंसिक एंटोमोलॉजी, फोरेंसिक सेरालॉजी, फोरेंसिक केमिस्ट, फोरेंसिक इंजीनियर, फोरेंसिक आर्टिस्ट व स्कल्पचर, टॉक्सिकोलॉजी आदि।
शिक्षण संस्थान
u इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस ऐंड क्रिमिनोलॉजी, बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी
u डिपार्टमेंट ऑफ फोरेंसिक साइंस, पंजाब यूनिवर्सिटी
u दिल्ली यूनिवर्सिटी
u डॉ. भीमराव अम्बेदकर यूनिवर्सिटी, आगरा
u लोक नायक जयप्रकाश नारायण नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी ऐंड फोरेंसिक साइंस, दिल्ली
u गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली

Thursday, June 30, 2016

फिटनेस ट्रेनर सुरक्षित करें, मजबूत भविष्य


गजनी फिल्म में आमिर खान के 8 पैक्स या ओम शांति ओम में शाहरुख के 6 पैक्स एब्स, बिना फिटनेस ट्रेनर के लिए यह इंपॉसिबल थे। बॉलीवुड में एक कहावत है कि बॉडी फिट, तो फिल्म हिट। अपने सेलिब्रिटी कस्टमर्स के जरिए इन्हें पॉपुलरिटी तो मिलती ही है, साथ ही मोटे पैकेज के रास्ते भी खुल जाते हैं। अगर आपमें फिटेनस का जुनून है, तो सत्यजीत चौरसिया, अलखस जोसेफ, मनीष अदविलकर जैसे फिटनेस व‌र्ल्ड के बडे नामों में आप भी शामिल हो सकते हैं।

वर्क प्रोफाइल

फिटनेस ट्रेनर का बेसिक काम क्लाइंट्स को फिजीकली फिट रखने के साथ लाइफ स्टाइल, प्रोफेशन और उम्र जैसे फैक्टर्स के मुताबिक एक्सरसाइज शेड्यूल तय करना है। ट्रेनर्स जिम में मशीनों से क्लाइंट्स को वेट, कॉर्डियो, स्ट्रेचिंग, मसल्स कंडीशनिंग एक्सरसाइज, रूटीन फॉलो कराते हैं।

करियर ऑपर्चुनिटीज

आज मल्टीनेशनल कंपनियों में वर्क करने वाले एग्जीक्यूटिव्स से लेकर टीनएजर्स तक हेल्थ कॉन्शियस हुए हैं। ऐसे में क्वालिफाइड फिटनेस ट्रेनर्स के लिए शानदार ऑपर्चुनिटीज हैं। जिम, होटल्स, हेल्थ क्लब, फिटनेस सेंटर्स, स्पो‌र्ट्स हॉस्टल में फिटनेस ट्रेनर की काफी डिमांड है।

क्वालिफिकेशन एंड स्किल्स

इसमें कामयाबी के लिए पेशेंस लेवल जरूरी है। यहां हर दिन टीनएजर्स से लेकर सीनियर सिटिजंस तक से वास्ता पडेगा। बढिया स्टेमिना अच्छी फिजीक, ह्यूमन एनाटॉमी केसाथ कम्युनिकेशन स्किल्स, इंट्रापर्सनल स्किल्स की भी जानकारी काम आती है।

ट्रेनिंग है मस्ट

आप यहां नाइक एयरोबिक्स कोर्स या रीबॉक इंस्ट्रक्टर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम जैसे ऑप्शंस सलेक्ट कर सकते हैं। स्पो‌र्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया भी स्पो‌र्ट्स एंड एथलेटिक्स ट्रेनिंग प्रोग्राम में जगह देता है। कई यूनिवर्सिटीज भी बैचलर इन फिजिकल एजुकेशन, मास्टर इन फिजिकल एजुकेशन जैसे कोर्स चलाते हैं।

ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स

-इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पो‌र्ट्स साइंस, नई दिल्ली

-लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन, ग्वालियर

-साई, नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पो‌र्ट्स, पटियाला

-साई, एनएस ईस्टर्न सेंटर, साल्ट लेक, कोलकाता

प्रोफेशनल कोर्स जरूरी

फिल्म गजनी में आमिर खान की बॉडी तराशने वाले मशहूर सेलिब्रिटी फिटनेस ट्रेनर सत्यजीत चौरसिया के मुताबिक फिट बॉडी के लिए रेगुलर एक्सरसाइज रिजाइम के साथ डिसिप्लिंड लाइफ, बैलेंस डाइट जरूरी है। इसकी प्रोफेशनल क्वॉलिफिकेशन हासिल करें, इंटरनेट पर ऑथेंटिक एक्सरसाइज वीडियोज देखकर और बुक्स की मदद से इंफॉर्मेशन गेन करें।

Wednesday, June 29, 2016

सीखें प्रोग्रामिंग की भाषा

अगर आप इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी फील्ड में एंट्री करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपको सबसे पहले आईटी फील्ड की लैंग्वेज को समझना और सीखना जरूरी है। जानते हैं आईटी इंडस्ट्री में कौन-कौन सी लैंग्वेजेज डिमांड में हैं..
सी-लैंग्वेज
सी को मदर ऑफ ऑल प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज भी कहा जाता है। सभी पॉपुलर प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज सी से ही जन्मी हैं। एटी एंड टी बेल लैब्स में काम करने के दौरान डेनिस रिची ने 1972 में इसे डेवलप किया था। सी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली लैंग्वेज है। दुनिया के बेहतरीन कंप्यूटर आर्किटेक्चर्स और ऑपरेटिंग सिस्टम्स सी-लैंग्वेज बेस्ड हैं। सी-लैंग्वेज में स्ट्रक्चर्ड प्रोग्रामिंग के साथ क्रॉस प्लेटफॉर्म प्रोग्रामिंग की भी कैपेबिलिटी है। इसके सोर्स कोड में कुछ बदलाव करके कई कंप्यूटर प्लेटफॉ‌र्म्स और ऑपरेटिंग सिस्टम्स में इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि माइक्रोकंट्रोलर्स से लेकर सुपरकंप्यूटर्स में सी-लैंग्वेज का इस्तेमाल होता है। 
एचटीएमएल/सीएसएस
एचटीएमएल को हाइपर टेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज कहा जाता है, यह व‌र्ल्ड वाइड वेब के किसी भी कंटेंट की स्ट्रक्चरिंग मार्कअप लैंग्वेज है और इंटरनेट की कोर टेक्नोलॉजी है। एचटीएमएल के जरिए किसी भी वेबसाइट की स्ट्रक्चरिंग की जाती है। इस लैंग्वेज के जरिए इमेजेज और ऑब्जेक्ट्स को इंटरैक्टिव डिजाइनिंग में कनवर्ट किया जाता है। वहीं, कैसकेडिंग स्टाइल शीट्स (सीएसएस) स्टाइल शीट लैंग्वेज है, जो एचटीएमएल में कोडेड किसी भी डॉक्यूमेंट की डिजाइनिंग करने में यूज होती है। आमतौर पर एचटीएमएल और एक्सएचटीएमएल में कोडेड वेब पेजेज को सीएसएस एप्लीकेशन के जरिए ही स्टाइल किया जाता है। इसके अलावा यह किसी भी तरह के एक्सटेंसिबल मार्कअप लैंग्वेज (एक्सएमएल), स्केलेबल वेक्टर ग्राफिक्स (एसवीजी) और एक्सएमएल यूजर इंटरफेस लैंग्वेज (एक्सयूएल) डॉक्यूमेंट्स में यूज की जाती है। टैबलेट्स, स्मार्टफोंस और क्लाउड होस्टेड सर्विसेज की डिमांड बढ़ने से इसकी काफी डिमांड है। 
पीएचपी
हाइपरटेक्स्ट प्री-प्रोसेसर यानी पीएचपी सर्वर स्क्रिप्टिंग लैंग्वेज है, जिसका यूज वेब डेवलपमेंट के साथ आम प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में भी होता है। ओपन सोर्स होने की वजह से पीएचपी आज 24 करोड़ से ज्यादा वेबसाइट्स और 20 लाख वेब सर्वर्स में इस्तेमाल हो रहा है। कैहाइ-स्पीड स्क्रिप्टिंग और ऑगमेंटेड कंपाइलिंग कोड प्लग-इंस जैसी खासियतों के चलते इसे लैंग्वेजेज का फ्यूचर भी कहा जा रहा है। फेसबुक, विकीपीडिया और वर्डप्रेस जैसी हाई-प्रोफाइल साइट्स की पॉपुलरिटी के पीछे पीएचपी का ही हाथ है। 
जावा स्क्रिप्ट
जावा स्क्रिप्ट असल में ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेड स्क्रिप्टिंग लैंग्वेज है, जो जावा का हल्का वर्जन है। इसे क्लाइंट-साइड लैंग्वेज भी कहा जाता है, क्योंकि ईजी कमांड्स, ईजी कोड्स होने की वजह से यह क्लाइंट-साइड वेब ब्राउजर में इस्तेमाल की जाती है। आज जावा स्क्रिप्ट का इस्तेमाल वेब पेजेज में फॉ‌र्म्स ऑथेंटिकेशन, ब्राउजर डिटेक्शन और डिजाइन इंप्रूव करने में किया जा रहा है। आपके फेवरेट ब्राउजर क्रोम एक्सटेंशंस, एपल का सफारी एक्सटेंशंस, अडोब एक्रोबैट रीडर और अडोब क्रिएटिव सूट जैसी एप्लीकेशंस जावा स्क्रिप्ट कोडिंग के बिना अधूरी हैं। 
पायथन
बेहद ईजी कोड्स होने की वजह से कोई भी इसे बेहद आसानी से सीख सकता है। इसका इस्तेमाल वेबसाइट्स और मोबाइल एप्स की स्क्रिप्ट राइटिंग में काफी किया जाता है। पायथन और थर्ड पार्टी टूल्स की मदद से किसी भी प्रोग्राम को कंपाइल किया जा सकता है। इंस्टाग्राम, पिनटेरेस्ट, गूगल और याहू समेत कई वेब एप्लीकेशंस और इंटरनेट प्लेटफॉ‌र्म्स हैं, जहां पायथन का बखूबी इस्तेमाल हो रहा है। 
एसक्यूएल
स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लैंग्वेज यानी एसक्यूएल अपनी ओपन सोर्स होने की खासियतों के चलते डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम में सबसे ज्यादा यूज की जा रही है, जिससे डाटाबेस को मल्टी-यूजर एक्सेस देना संभव हो पाया है। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को अमेरिकन नेशनल स्टैंड‌र्ड्स इंस्टीट्यूट (एएनएसआइ) और इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर स्टैंड‌र्ड्स (आउएसओ) ने 1980 में 
डेवलप किया था। आज एसक्यूएल का इस्तेमाल डाटा इंसर्ट, क्वेरी, अपडेट एंड डिलीट, मोडिफिकेशन और डाटा एक्सेस कंट्रोल में किया जा रहा है।
विजुअल बेसिक
माइक्रोसॉफ्ट के डॉट नेट फ्रेमवर्क में विजुअल बेसिक का इस्तेमाल होता है और डॉट नेट फ्रेमवर्क के बिना माइक्रोसॉफ्ट विंडोज की कल्पना भी नहीं की जा सकती। विजुअल बेसिक माइक्रोसॉफ्ट के डॉट नेट फ्रेमवर्क की रीढ़ की हड्डी है। 1991 में माइक्रोसॉफ्ट ने इस इरादे के साथ इसे डेवलप किया था, ताकि डेवलपर्स आसानी से इसे सीख सकें और इस्तेमाल कर सकें। इसकी मदद से ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (जीयूआइ) एप्लीकेशंस, डाटाबेस एक्सेस, रिमोट डाटा ऑब्जेक्ट्स और एक्टिवएक्स कंट्रोल्स को डेवलप किया जा सकता है। 
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जावा
जावा लैंग्वेज को 1990 में सन माइक्रोसिस्टम्स के जैम्स गॉस्लिंग ने डेवलप किया था। जावा पूरी तरह से ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है। आज एमपी3 प्लेयर से लेकर बड़ी से बड़ी एप्लीकेशन जावा के बिना अधूरी है। जावा को दोबारा कंपाइल किए बिना ही एप्लीकेशन डेवलपर्स प्रोग्राम को किसी दूसरे प्लेटफॉर्म पर भी आसानी से चला सकते हैं यानी राइट वंस, रन एनीव्हेयर। इन दिनों जावा का इस्तेमाल एंटरप्राइजेज सॉफ्टवेयर, वेब बेस्ड कंटेंट, गेम्स, मोबाइल एप्स और एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम में बखूबी किया जा रहा है। 
सी++
मल्टी-पैराडाइम स्पैनिंग लैंग्वेज होने के चलते इसमें हाइ-लेवल और लो-लेवल लैंग्वेज, दोनों के फीचर हैं। सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को व्यापक बनाने के लिए 1979 में इसे शुरू किया गया था। सिस्टम्स सॉफ्टवेयर, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर, सर्वर व क्लाइंट एप्लीकेशंस और एंटरटेनमेंट सॉफ्टवेयर्स जैसे वीडियो गेम्स की लोकप्रियता के पीछे इस लैंग्वेज का अहम योगदान है। फायरफॉक्स, विनएंप और अडोबी के कई प्रोग्राम्स इस लैंग्वेज में ही लिखे गए हैं। 
ऑब्जेक्टिव-सी
ऑब्जेक्टिव-सी को ब्रैड कॉक्स और टॉम लव की कंपनी स्टेपस्टोन ने 1980 की शुरुआत में डेवलप किया था। यह ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिग लैंग्वेज है, जिसका इस्तेमाल सी लैंग्वेज के सपोर्ट में किया जाता है। इस लैंग्वेज का सबसे ज्यादा इस्तेमाल एपल आइओएस और मैक ओएस एक्स में हो रहा है।

Tuesday, June 28, 2016

एनर्जी इंजीनियरिंग में करियर

एनर्जी इंजीनियरिंग का कोर्स इन दिनों काफी पॉपुलर हो रहा है। यदि भविष्य की बात करें, तो इसकी मांग आगे भी बनी रहेगी। यदि आप इससे संबंधित कोर्स कर लेते हैं, तो करियर के लिहाज से बेहतर हो सकता है।
योग्यता व कोर्स
इस क्षेत्र में करियर की संभावनाएं तलाशने वाले छात्रों को बीई या बीटेक करने के लिए 12वीं में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान व गणित होना आवश्यक है। अगर आप चाहें, तो बीटेक करने के बाद एमटेक भी कर सकते हैं। अधिकतर संस्थानों में एडमिशन प्रवेश परीक्षाओं द्वारा दिया जाता है। वैसे एनर्जी में दक्षता या स्पेशलाइजेशन अंडर ग्रेजुएट स्तर पर उतना लोकप्रिय नहीं है, जितना पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर। मास्टर्स कोर्स में ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों और ऊर्जा के गैर परंपरागत स्रोतों में सुधार पर अधिक जोर दिया जाता है।
संभावनाएं
जलवायु में बदलाव और ग्लोबल वार्मिंग के बारे में बढी जागरूकता के चलते नौकरियों के बाजार में ऊर्जा इंजीनियरिंग की बहुत मांग है। विभिन्न सरकारी संस्थानों, खासकर विभिन्न राज्यों की नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसियों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की काफी मांग है। सरकार ने उद्योगों के लिए अब ऊर्जा ऑडिटिंग, ऊर्जा सरंक्षण और ऊर्जा प्रबंधन में स्पेशलाइजेशन करने वालों की नियुक्ति को भी अनिवार्य कर दिया है।
कार्य
एक एनर्जी इंजीनियर सिर्फ ऊर्जा के व्यावसायिक उपयोग को ही नहीं समझता, अपितु ऊर्जा खपत के पैटर्न का अनुमान भी लगाता है। करियर काउंसलर मीनाक्षी ठक्कर बताती हैं कि एक सफल एनर्जी इंजीनियर बनने के लिए तार्किक व विश्लेषणात्मक होना जरूरी है। इस क्षेत्र में बहुत अधिक लोगों से संपर्क करने की आवश्यकता नहीं पडती, इसलिए एक अंतर्मुखी व्यक्ति भी आसानी से एनर्जी इंजीनियर बन सकता है। साथ ही आपको कई बार बाहर भी जाना पड सकता है, इसलिए आपको घर से दूर रहने की भी आदत डालनी पडेगी। इसके अतिरिक्त आपको धैर्यशील व हमेशा अपडेट रहना चाहिए।
क्या कहती है रिपोर्ट
एनर्जी इंजीनियर के लिए सिर्फ भारत में ही नहीं, विदेश में भी काफी स्कोप है। बिजली मंत्रालय का अनुमान है कि अगले दशक के अंत तक बिजली उत्पा