Saturday, March 19, 2016

योग में कॅरियर बनाएं

योग से न सिर्फ आपका मानसिक संतुलन ठीक रहता है बल्कि कसरत, मेडिटेशन से आपकी बॉडी भी फिट रहती है और शारीरिक स्वास्थ्य भी ठीक रहता है। लोगों के फिट रहने की आदत ने योग में करियर की नई राहें खोल दी हंै। यही वजह है कि युवा योगा इंस्ट्रक्टर के रूप में करियर बना रहे हैं।जब हम बात योग की करते हैं तो हमारे जहन में सिर्फ आसन, प्राणायाम, ध्यान, मुद्राएं ही आती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। योग बहुत ही विस्तृत विषय है। इसका क्षेत्र कर्म योग, ज्ञान योग, हठ योग, मंत्र योग, कुंडली जागृति जैसे कई योग-विषयों तक है।
योग सिखाने के लिए जरूरी स्किल्स
(1)
योग में करियर बनाने के लिए जरूरी है कि आप एक अच्छे वक्ता हों। आप में एक व्यक्ति से लेकर ग्रुप तक को अपनी बात योग के जरिए समझाने की क्षमता होनी चाहिए।
(2)
योग टीचर बनने से पहले स्वंय भी योग के बारे में विस्तृत जानकारी हो। एक भी गलत आसन, कसरत नई बीमारी का जन्म दे सकती हैं।
योग में करियर से इनकम
योग को करियर चुनने की सोच रहे हैं तो यह अच्छा विचार है। लेकिन करियर बनाने से पहले इससे होने वाली आमदनी के बारे में जान लें। योग आप किसको करा रहे हैं इससे आपकी आमदनी तय होती है। कई योग शिक्षण संस्थान हैं जहां आपको नौकरी मिल सकती है। आप अपना काम शुरू कर सकते हैं। काम कितना मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप योग को कितना समझते हैं, दूसरों को योग से कितना प्रभावित कर पाते हैं। कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए स्ट्रेस मैनेजमेंट की क्लास लगाती हैं। इन क्लास को लेने वाले योग गुरु ही होते हैं। अगर आप बड़ी कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं तो इनकम ज्यादा होगी। अगर आप किसी अधिक आमदनी वाले परिवार, व्यक्ति या ग्रुप को योग करा रहे हैं तो आपकी इनकम ज्यादा होगी। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि आप फीस कितने में तय करा पाते हैं। योग को आप करियर चुन रहे हैं तो ये जान लीजिए कि इस क्षेत्र में काम के घंटे तय नहीं है। इतना तो तय है कि अधिकतर काम सुबह के समय मिलेंगे।
योग की बढ़ती मांग से विदेशों में भी काम के काफी अवसर हैं।
योग कोर्स कराने वाले कुछ संस्थान
आप इन सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों से योग सीख सकते हैं।
(1)
मोरारजी देसाई नेशनल इस्टीट्यूट ऑफ योग, दिल्ली
(
ग्रेजुएट करने के बाद यहां से 3 साल का बीएससी योगा साइंस, 1 साल का डिप्लोमा और कुछ पार्ट टाइम योग के कोर्स किए जा सकते हैं)
www.yogamdniy.nic.in
(2)
बिहार स्कूल ऑफ योगा, मुंगेर
(
यहां से 4 महीने और 1 साल का कोर्स कर सकते हैं)
www.biharyoga.net/bihar-yoga-bharati/byb-courses
(3)
भारतीय विद्या भवन, दिल्ली
(
यहां से आप 6 महीने से लेकर 1 साल तक का कोर्स कर सकते हैं)
www.bvbdelhi.org/yoga.html
(4)
अय्यंगर योग सेंटर, पुणे
(
यहां से आप योग का प्रशिक्षण ले सकते हैं)
http://iyengaryogakshema.org/
(5)
कैवल्यधाम योग इंस्टीट्यूट, पुणे
(
यहां से सर्टिफिकेट कोर्स इन योग, पीजी डिप्लोमा इन योग एजुकेशन, पीजी डिप्लोमा इन योग थिरैपी, फाउंडेशन कोर्स इन योग, एडवांस योग टीचर्स ट्रैनिंग, बीए- योग फिलोस्फी, मास्टर क्लास फॉर योग टीचर्स का कोर्स किया जा सकता है।)
http://kdham.com/college/
(6)
स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु
(
यह डीम्ड यूनिवर्सिटी है। यहां से रेगुलर और डिस्टेंस योगा कोर्स कर सकते हैं। योग में बीएससी, एमएससी, पीएचडी की डिग्री ले सकते हैं।)
  www.svyasa.org
(7)
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ योगिक साइंस एंड रिसर्च
(
यहां से योग में कई छोटे अंतराल के कोर्स से लेकर मास्टर डिग्री तक के कोर्स किए जा सकते हैं)
www.iiysar.co.in/
(8)
देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार, उत्तराखंड
(
यहां से आप योग मे बीएससी से लेकर पीएचडी तक के कोर्स कर सकते हैं)
www.dsvv.ac.in
(9)
द योग इंस्टीट्यूट सांताक्रूज, मुंबई
(
सन् 1918 में स्थापित इस योग संस्थान से योग की शिक्षा ली जा सकती है।)
http://theyogainstitute.org/
10-
गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार, उत्तराखंड
(
यहां से योग में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स किए जा सकते हैं।
http://gkv.ac.in/diplomayoga-certificate

Friday, March 18, 2016

मीटियरोलॉजी में कैरियर

मौसम की अनिश्चितताओं ने सदियों से लोगों को प्रभावित किया है। मौसम के व्यवहार पर कई कारणों का असर होता है। धरती के वातावरण के संपर्क में आने वाली हर चीज का प्रभाव मौसम पर पड़ता है जिसकी वजह से विश्वभर में भिन्न-भिन्न जगहों पर भिन्न-भिन्न मौसम दर्ज किया जाता है।

वातावरण पर पड़े असर और मौसम के बदलाव के अध्ययन को मीटियरोलॉजी कहा जाता है। मीटियरोलॉजिस्ट (मौसम विशेषज्ञ) मौसम का अनुमान लगाकर भविष्यवाणी करते हैं।

धरती और उसके उपग्रहों का अध्ययन, उनकी क्रिया और उनके ट्रैक में बदलाव को दर्ज करके मौसम का अनुमान लगाने का कार्य मीटियरोलॉजिस्ट ही करते हैं। वे विशाल भौगोलिक क्षेत्र तक विस्तारित मौसम के मानचित्रों का अध्ययन करते हैं और मौसम उपग्रहों के आंकड़े हासिल कर उनसे मौसम का अनुमान लगाते हैं।

एक मीटियरोलॉजिस्ट तापमान, हवा, आर्द्रता, नमी और हवाई जहाजों के उड़ने की स्थितियों का पूर्वानुमान करते हैं। गणित समूह से स्नातक करने के उपरांत किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से मीटियरोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन कर सकते हैं। मीटियरोलॉजिकल विभाग में ज्वॉइन करने के बाद भी आपको मीटियरोलॉजी में ट्रेनिंग दी जाती है।

मीटियरोलॉजी का कोर्स करने के बाद आप विशेषज्ञ के रूप में काम कर सकते हैं। एक मीटियरोलॉजिस्ट वेदर फॉरकास्ट या क्लाइमेटोलॉजिस्ट के रूप में काम करते हैं। फिजिकल मीटियरोलॉजिस्ट रिसर्च सेंटर और इंडस्ट्रियल मीटियरोलॉजिस्ट धुएं पर नियंत्रण और वायु प्रदूषण आदि पर कार्य कर सकते हैं। ये कृषि योजना पर भी काम करते हैं।

इन्हें कुछ विशेष जगहों पर विशेष कार्य के लिए नियुक्त किया जाता हैः

1. मौसम उपग्रहों, मौसम रडार और मौसम मानचित्रों द्वारा दिए गए संकेतों को पहचानकर मौसम का पूर्वानुमान करना।

2. सैनिक बल में पायलट को मौसम संबंधित जानकारियों पर प्रशिक्षण देने।

3. बंदरगाहों पर प्रतिकूल मौसम में जहाजों को सही दिशा बताने।

4. जानकारियों को एकत्रित कर चार्ट्स और मौसम का नक्शा बनाना।

5. कई बार खराब मौसम जैसे तूफान, बाढ़ की तीव्रता व सुनामी जैसी आपदाओं का पूर्वानुमान लगाना।

6. एग्रीकल्चरिस्ट्स, शिपिंग और मरीन क्षेत्र के साथ-साथ मीडिया और आम लोगों के लिए मौसम संबंधी जानकारियां प्रस्तुत करना।

7. योजनकारों के साथ मिलकर योजना, विद्युत, सिंचाई, कृषि व जल प्रबंधन के क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण और उपयोगी योजनाएं बनाना आदि।

यहां से करें कोर्स
- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटियरोलॉजी
- आईआईटी खड़गपुर
- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरू
- शिवाजी यूनिवर्सिटी, कोल्हापुर

हैल्थ कम्युनिकेशन में करियर

आज हैल्थ कम्युनिकेशन सर्वाधिक तेजी से विकासित हो रहा कम्युनिकेशन फील्ड है। हैल्थ कम्युनिकेशन के तहत आमतौर पर जनता तक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी सूचना एवं स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न विषयों पर जनता सहित स्वास्थ्य कर्मियों में जागरूकता फैलाने का कार्य किया जाता है। 

क्या है हैल्थ कम्युनिकेशन
साधारण शब्दों में कहें तो इस क्षेत्र का मुख्य कार्य लोगों को जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के बारे में जागरूक करना तथा जनस्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर कार्य करना होता है।

कम्युनिकेशन यानी संचार जनस्वास्थ्य का एक अहम हिस्सा है। इसके बिना हम न तो कभी इस बारे में जागरूक हो पाते कि धूम्रपान के कितने खतरे हैं तथा न ही इस तथ्य को जान पाते कि दूषित सूई के इस्तेमाल से भी एच.आई.वी./एड्स फैलता है। 
इसके तहत रोगियों एवं हैल्थ कर्मियों के मध्य संबंध सुधारना, जन स्वास्थ्य अभियानों की योजना तैयार करना एवं उनका आयोजन तथा स्वस्थ जीवनशैली को मीडिया में प्रचारित करना भी शामिल है। हैल्थ कम्युनिकेशन का मकसद केवल जनता को स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के बारे में जागरूक करना ही नहीं है बल्कि स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने वाले स्थलों की पहचान करने में उनकी सहायता करना भी है। 
जन स्वास्थ्य संचार विशेषज्ञ अच्छी तरह जानते हैं कि प्रभावी संचार में लोगों की धारणाओं, विश्वास एवं आदतों को बदलने की ताकत होती है। वे प्रभावित करने वाले संदेशों के माध्यम से लोगों तक पहुंच कर उन्हें महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मुद्दों के बारे में अवगत करते हैं। समाचार पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो, टी.वी., फिल्मों, इंटरनैट, मोबाइल कम्युनिकेशन, थिएटर से लेकर मनोरंजन के पारम्परिक तौर-तरीकों आदि का प्रयोग जनता तक पहुंच बनाने के लिए किया जाता है।  इन दिनों हैल्थ कम्युनिकेशन एक्सपर्ट्स मोबाइल संदेशों, ब्लॉग्स, सोशल नैटवर्किंग वैबसाइट्स आदि नवीनतम विधियों का भी इस्तेमाल करने लगे हैं। 

एक उम्दा एवं बेहतर ढंग से किए जाने वाले हैल्थ कम्युनिकेशन के प्रयास में लोगों का गहरा जुड़ाव होता है। इसकी मदद से लोग उपयुक्त जानकारी एवं जागरूकता के आधार पर सोच-समझ कर सही फैसले ले सकते हैं। 

कोर्स एवं योग्यता
कई विश्वविद्यालयों के कम्युनिकेशन विभाग हैल्थ कम्युनिकेशन को अपने एक विषय के रूप में पढ़ा रहे हैं। इन कोर्सों में दाखिले की योग्यता आमतौर पर बायोलॉजी विषय सहित बैचलर डिग्री होती है। वैसे बैचलर डिग्री स्तर पर विषयों की अनिवार्यता विश्वविद्यालयों  के अपने मापदंडों पर भी निर्भर करती है। 

इस विषय के कोर्स करवाने वाले मैडीकल संस्थान आमतौर पर मैडीकल के छात्रों को ही दाखिले में प्राथमिकता देते हैं। प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला प्रवेश परीक्षा तथा साक्षात्कार के आधार पर दिया जाता है। अब तो कई मैनेजमैंट इंस्टीच्यूट्स भी हैल्थ कम्युनिकेशन को हैल्थ मैनेजमैंट के एक विषय के रूप में पढ़ा रहे हैं। 

पाठ्यक्रम
इन कोर्सों में आमतौर पर कम्युनिकेशन ट्रेनिंग, पब्लिक रिलेशन्स, कम्युनिकेशन रिसर्च, मीडिया राइटिंग एवं रिर्पोटिंग सिखाई जाती है। हैल्थ कम्युनिकेशन के छात्र स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के बारे में जनता की समझ को आकार देने में सक्षम कम्युनिकेशन एवं मीडिया के महत्व बारे सीखते हैं। वे हैल्थ एडवोकेसी, स्वास्थ्य संबंधी संदेश तैयार करना तथा हैल्थकेयर सर्विसेज को प्रोत्साहित करने की रणनीतियां तैयार करने का ज्ञान भी प्राप्त करते हैं।

अवसर
इस विषय में कोर्स करने के बाद छात्र हैल्थ एजुकेटर, स्कूल हैल्थ केयर एडमिनिस्ट्रेटर, मैडीकल ग्रांट्स राइटर, हैल्थ कम्युनिकेटर, क्लीनिक पब्लिक रिलेशन्स एग्जीक्यूटिव, हैल्थ कम्युनिकेशन एनालिस्ट, रिसर्च एनालिस्ट, मैडीकल ट्रेनिंग सुपरवाइजर, हैल्थ डिवैल्पमैंट एजैंसियों में कम्युनिकेशन मैनेजर, होस्पाइस मैनेजर, हैल्थ केयर काऊंसलर, हैल्थ एडवोकेट आदि के रूप में नियुक्त हो सकते हैं। 
उपरोक्त विभिन्न पदों पर वे सरकारी स्वास्थ्य संगठनों, एजैंसियों एवं विभागों, अकादमिक एवं शोध संगठनों, अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों, मीडिया संस्थानों, स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य कर रहे गैर-सरकारी संगठनों में आसानी से रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।

पारिश्रमिक
इस फील्ड में पारिश्रमिक युवाओं की योग्यता, विशेषज्ञता के स्तर तथा उनके नियोक्ता पर निर्भर करता है। आमतौर पर शुरूआती स्तर पर युवाओं को 10 से 15 हजार रुपए प्रतिमाह मिल सकते हैं। 

प्रमुख संस्थान

इंस्टीच्यूट ऑफ हैल्थ, मैनेजमैंट एंड रिसर्च, जयपुर, राजस्थान (दिल्ली, बेंगलूर एवं कोलकाता में भी संस्थान की शाखाएं हैं)

टाटा इंस्टीच्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुम्बई, महाराष्ट्र

मणिपाल यूनिवर्सिटी, मैंगलोर, कर्नाटक

Wednesday, March 16, 2016

साइकोलॉजी में करियर

बदलती जीवनशैली तथा बढती महत्वाकांक्षाओं के कारण तनाव बढ रहे हैं, जिनसे छुटकारा पाने व जीवनशैली से सामंजस्य स्थापित करने के लिए साइकोलॉजिस्ट्स की मदद ली जा रही है। साइकोलॉजी  ट्रीटमेंट बिना दवाइयों का सेवन किए और सोच में परिवर्तन लाने पर आधारित होता है। यही कारण है कि इसकी लोकप्रियता दिनोंदिन बढ रही है।
उपलब्ध कोर्स
बीए/बीए ऑनर्स इन साइकोलॉजी (3 वर्ष)
एमए/एमएससी इन साइकोलॉजी (2 वर्ष)
पीजी डिप्लोमा इन साइकोलॉजी (2 वर्ष)
कैसे मिलेगी एंट्री
बीए या बीए ऑनर्स इन साइकोलॉजी में दाखिले के लिए 50 प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं पास होना अनिवार्य है। इसके अलावा आप पीजी या डिप्लोमा भी कर सकते हैं, जिसके लिए 55 प्रतिशत अंकों के साथ साइकोलॉजी विषय में स्नातक डिग्री आवश्यक है। एमफिल या पीएचडी करने के लिए 55  प्रतिशत अंकों के साथ साइकोलॉजी में पीजी जरूरी है।
क्या हैं विकल्प
इस क्षेत्र में रोजगार की कोई कमी नहीं है। साइकोलॉजिस्ट्स सरकारी व निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, यूनिवर्सिटी, स्कूलों, सरकारी एजेंसियों, प्राइवेट इंडस्ट्रीज, रिसर्च आर्गेनाइजेशंस, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और कॉर्पाेरेट हाउसेस में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। पारंपरिक साइकोलॉजिस्ट्स क्षेत्रों में स्पेशलाइजेशन के अलावा कुछ नए क्षेत्र सामने आए हैं। आपके लिए इनमें भी काफी अवसर हो सकते हैं।
आवश्यक गुण
सफल साइकोलॉजिस्ट्स बनने के लिए अच्छी कम्युनिकेशन स्किल्स, धैर्यशील तथा सभी उम्र के लोगों के साथ काम करने की कला होनी चाहिए। इसके साथ ही साइकोलॉजिस्ट्स के लिए सेंसिटिव, केयरिंग, आत्मविश्वासी होने के साथ क्लाइंट को संतुष्ट करने की योग्यता भी आवश्यक है।
सैलरी पैकेज
इस क्षेत्र में सैलरी आपके कार्य क्षेत्र तथा अनुभव पर निर्भर करती है। शुरुआती दौर में आप लगभग 8,000 से 10,000 रुपये प्रतिमाह कमा सकते हैं। कुछ वर्षों के अनुभव के बाद कमाई 15,000 से 20,000  रुपये प्रतिमाह तक हो सकती है। अगर आप एक्सपीरियंस के बाद खुद की प्रैक्टिस करते हैं, तो कहीं अधिक कमा सकते हैं।
कहां से करें
जामिया मिलिया इस्लामिया, जामिया नगर, नई दिल्ली
दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली
एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोलॉजी ऐंड अलॉइड साइंसेस, नोएडा
अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी,अलीगढ
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी
यूनिवर्सिटी ऑफ इलाहाबाद, इलाहाबाद
पटना यूनिवर्सिटी, पटना
रांची यूनिवर्सिटी, रांची
गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर
पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ
यूनिवर्सिटी ऑफ पुणे, पुणे
नागपुर यूनिवर्सिटी, नागपुर
यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई, मुंबई
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर
यूनिवर्सिटी ऑफ कोलकाता, कोलकाता  

Tuesday, March 15, 2016

शेयर बाजार, सेंसेक्स में करियर

शेयर बाजार सिर्फ शेयरों में निवेश और लाभ कमाने की इच्छा तक ही सीमित नहीं है। यहां आप रिलेशनशिप मैनेजर से शुरुआत करके टेक्निकल एनालिस्ट तक का सफर तय कर सकते हैं और अपना भविष्य बेहतर बना सकते हैं।
शेयर बाजार में केवल निवेश के जरिए पैसे कमाने का ही अवसर नहीं है, बल्कि अब आप अपने सपनों को करियर का आकार भी दे सकते हैं। मौजूदा समय में रिलायंस कैपिटल, एंजेल ब्रोकिंग, रेलीगेयर, शेयरखान, यूनिकॉन सॉल्युशन, कार्वी और भारती इन्वेस्टमेंट जैसी कई बड़ी कंपनियां हैं, जहां रोजगार के ढेरों मौके हैं। आने वाले दिनों में मुकेश अंबानी जैसे और कई दिग्गज एस्सेट मैनेजमेंट और इक्विटी बाजार में कदम रखने वाले हैं। इसके अलावा पिछले कुछ सालों से विदेशी संस्थागत निवेशक (एफएफआई) भी भारतीय शेयर बाजारों में खूब पैसा लगा रहे हैं। यानी इक्विटी मार्केट, म्युचअल फंड, कमोडिटी बाजार, करेंसी बाजार का और विस्तार होगा। जाहिर है इसे देखते हुए इस क्षेत्र में और बूम आएगा और प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी।
इस क्षेत्र में रिलेशनशिप मैनेजर, पोर्टफोलियो मैनेजर, टेक्निकल एंड फंडामेंटल एनालिस्ट, ट्रेडर और डीलर की मांग बढ़ेगी। अगर आप एमबीए हैं तो भी यह क्षेत्र मुफीद रहेगा। बीएनपी फिनकॉर्प के सीईओ एके निगम का मानना है कि इस क्षेत्र में आने वाले प्रोफेशनल्स को बेसिक सर्टिफेकेशन कोर्स करना तो जरूरी है ही, साथ ही यह भी देखें कि आपका रुझान किस तरफ है। आप इक्विटी मार्केट में जाना चाहते हैं कि कमोडिटी बाजार में या म्युचुअल फंड में। सबसे पहले तो आपको बीएसई या एनएसई से एनसीएफएम के पेपर क्लियर करने होंगे, यानी अगर आप कमोडिटी में कदम रख रहे हैं तो कमोडिटी का पेपर पास करना होगा। सर्टिफिकेशन कोर्स करके आप किसी ब्रोकरेज कंपनी में बतौर रिलेशनशिप मैनेजर जॉब शुरू कर सकते हैं। लेकिन अगर आपको इस क्षेत्र में और आगे जाना है तो प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट पर भी ध्यान देना होगा। यानी फंडामेटल एनालिस्ट बनने के लिए कंपनियों की नेटवर्थ किस क्षेत्र में है, उस क्षेत्र का भविष्य क्या है, कंपनियों की भावी योजनाओं के बारे में मूलभूत जानकारी आदि बातें जानना जरूरी है। टेक्निकल एनालिसिस पर भी ध्यान देना होगा। इसके अलावा इस क्षेत्र में आपको रोजाना अपडेट रहने की जरूरत है कि कंपनी कौन सा नया प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है और वह उस पर कितना निवेश करेगी। इसके अलावा विदेशी शेयर बाजार, कच्चे तेल की कीमतें भी घरेलू शेयर बाजार की दिशा तय करती हैं, इनकी समझ भी जरूरी है।
रिलेशनशिप मैनेजर से होगी शुरुआत
अगर आप इस क्षेत्र में करियर बनाने जा रहे हैं तो सबसे पहले आपको रिलेशनशिप मैनेजर से शुरुआत करनी होगी। रिलेशनशिप मैनेजर का काम ग्राहकों को वित्तीय उत्पादों के बारे में जानकारी देना और डीमैट खोलना और केवाईसी (नो योर क्लाइंट) को पूरा करना होता है। इसमें कुछ ग्राहक ऑफिस आकर निवेश करते हैं तो कुछ मामलों में आपको संबधित व्यक्ति के घर जाकर फार्म भरना होगा। इस तरह से आपकी लोगों के प्रति जानकारी बढ़ेगी और कंपनी का विश्वास भी हासिल होने लगेगा। एक समय आपके पास निवेशकों की लंबी फेहरिस्त होगी। इसके बाद पोर्टफोलियो मैनेजर बन सकते हैं। इसके लिए आपकी इक्विटी, कमोडिटी, म्युचुअल और डेट मार्केट की गहरी समझ जरूरी है। तभी आप निवेशकों का पैसा सुरक्षित रख पाएंगे।
किसी एक क्षेत्र में निवेश करना बेहतर तरीका नहीं माना जा सकता। कोई भी पोर्टफोलियो बनाने के लिए उसमें इनका कॉम्बीनेशन जरूरी है। एक पोर्टफोलियो मैनेजर निवेशक के पैसे को डायवर्सिफाइड करके अच्छा रिटर्न दिलाने का काम करता है। यानी किसी क्षेत्र में गिरावट का दौर चल रहा है तो उसको दूसरे क्षेत्र से पूरा करना। एक संतुलित पोर्टफोलियो ही अच्छे पोर्टफोलियो मैनेजर की पहचान है। कुछ पोर्टफोलियो मैनेजर तो हर महीने 30 हजार से डेढ़ लाख रुपए प्रति महीने तक कमाते हैं।
इसी तरह से जब आप शेयर बाजार में कुछ साल काम कर लेते हैं तो कंपनियों के बारे में अच्छी-खासी जानकारी जुटा लेते हैं तो आप उस क्षेत्र का टेक्निकल एनालिसिस करने लगते हैं। आज टेक्निकल एनालिस्ट की बाजार में बहुत मांग है। अगर आपको बाजार के उतार-चढ़ाव की अच्छी-खासी समझ हो गई है तो आप खुद भी निवेश करके पैसा बना सकते हैं और अपना और अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं। यानी आपके दोनों हाथों में लड्डू होना तय है।
फैक्ट फाइल
स्टॉक बाजार में करियर के लिए कोर्स हैं अनेक
बीएसई (बांबे स्टॉक एक्सचेंज) ट्रेनिंग इंस्टीटय़ूट बीटीआई के नाम से जाना जाता है। यह पूंजी बाजार पर 3 महीने का पार्टटाइम सर्टिफिकेट प्रोग्राम -बीएसई सर्टिफिकेशन ऑन सिक्योरिटीज मार्केट्स (बीसीएसएम) जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के साथ मिल कर चलाता है। यह वित्तीय बाजार में काफी लोकप्रिय कार्यक्रम है। इसमें सफल होने वाले अभ्यर्थियों को मुंबई विश्वविद्यालय की ओर से सर्टिफिकेट मिलता है। यह कोर्स कोई भी ग्रेजुएट सब-ब्रोकर, इन्वेस्टमेंट कंसल्टेंट, पोर्टफोलियो मैनेजर, डिपॉजिटरीय प्रोफेशनल्स, डीपी बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां, म्युचुअल फंड, कस्टोडियन, क्लीयरिंग हाउस और फाइनेंशियल इंस्टीटय़ूट एवं मैनेजमेंट के छात्र कर सकते हैं। अभ्यर्थी बीटीआई या क्षेत्रीय कार्यालयों में टेस्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं।
कोर्स
एडवांस प्रोग्राम ऑन डेरिवेटिव्स
एडवांस प्रोग्राम ऑन स्टॉक मार्केट
अकाउंटिंग ऑफ फाइनेंशियल इंस्ट्रुमेंट एंड डेरिवेटिव्स
अस्बा (एप्लीकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट)
बेसिक कोर्स ऑन स्टॉक मार्केट
कमोडिटी एंड कमोडिटी डेरिवेटिव्स
स्टॉक एनालिसिस
पूंजी बाजार से जुड़े करीब 40 कोर्स हैं। ज्यादा जानकारी के लिए बीएसई की वेबसाइट पर लॉगइन कर सकते हैं।
वेबसाइट:  www.bseindia.com
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की ओर से 1998 से सर्टिफिकेट कोर्स सर्टिफिकेशन इन फाइनेंशियल मार्केट्स (एनसीएफएम) कोर्स चलाया जा रहा है। आप ऑनलाइन टेस्ट देना चाहते हैं तो एनएसई की वेबसाइट पर लॉग इन कर सकते हैं। एनएसई ने देशभर के बड़े शहरों में अपने टेस्ट सेंटर बनाए हैं, इनके माध्यम से भी टेस्ट दे सकते हैं।
फाइनेंशियल मार्केट्स,
डेरिवेटिव्स मार्केट,
कैपिटल मार्केट,
सिक्योरिटीज मार्केट,
डेब्ट मार्केट,
करेंसी मार्केट,
डिपॉजिटरी
ऑपरेशंस मॉडय़ूल,
एएमएफआई (म्युचुअल फंड) मॉडय़ूल।
बेवसाइट : www.nseindia.com
एक्सपर्ट व्यू
बाजार की समझ जरूरी
अतुल गुप्ता
ब्रांच हेड ब्रोकरेज फर्म रेलीगेयर

वैसे तो शेयर बाजार में काम करने के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सर्टिफिकेट प्रोग्राम 10+2 के बाद किए जा सकते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि पूंजी बाजार में करियर बनाने के लिए ग्रेजुएशन होना जरूरी है। केवल सर्टिफिकेट कोर्स करने से ही काम नहीं चल सकता। यह आपको किसी ब्रोकरेज कंपनी के साथ करियर शुरू करने का मौका तो देता है, लेकिन इस क्षेत्र में आने के लिए सबसे जरूरी चीजें हैं मेहनत, लगन और धैर्य।

Monday, March 14, 2016

साइबर सिक्यूरिटी कोर्स

अपने डाटा को सुरक्षित रखना आज अमूमन हर कंपनी की जरूरत है। यही वजह है कि आज साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की मांग काफी बढ़ गई है। साइंस ही नहीं, बल्कि आर्ट्स और कॉमर्स बैकग्राउंड वाले छात्रों के लिए भी इस क्षेत्र में कई तरह के कोर्सेज हैं।

कंप्यूटर, इंटरनेट और नेटवर्क पर हमारी बढ़ती निर्भरता ने एक बहुत बड़े रोजगार क्षेत्र को जन्म दिया है जिसका नाम है साइबर सिक्योरिटी। आज बिजनेस, साइंटिफिक रिसर्च, शिक्षा आदि क्षेत्रों से संबंध रखने वाली तमाम तरह की कंपनियां व संस्थाएं, चाहे वह प्राइवेट हों या सरकारी, अपनी गोपनीय सूचनाएं व डाटा को कंप्यूटर में ही स्टोर करके रखती हैं। ऐसे में इन कंपनियों में ऐसे लोगों की भारी मांग है, जिन्हें सॉफ्टवेयर, सर्वर, नेटवर्क और प्रोटोकॉल की गहरी समझ हो और जो इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी व एथिकल हैकिंग के बारे में जानते हों।

स्पेशलाइजेशन्स और स्किल्स (Specialization and Skills): साइबर सिक्योरिटी क्षेत्र में कई तरह की स्पेशलाइजेशन्स हैं। अगर आप डाटा सिक्योरिटी में जाना चाहते हैं, तो कम्युनिकेशन और डाटा ट्रांसफर की बारीक जानकारी होनी चाहिए। सॉफ्टवेयर का डिजाइन, उसकी रचना और सुरक्षा की जानकारी बेहद जरूरी है। नेटवर्क डोमेन जैसे डिजिटल नेटवर्क, वीपीएन, वैन, लैन या फिर आईपी मैनेजमेंट में स्पेशलाइजेशन करने का आजकल काफी चलन है। सिक्योरिटी में एथिकल हैकिंग और इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी चुन सकते हैं। इसके अलावा साइबर क्राइम बढ़ने से साइबर फॉरेंसिक भी रोजगार की नई फील्ड के तौर पर उभरा है।

अन्य उभरते क्षेत्र (Extra Growing Sectors): ब्लैकबेरी और आईफोन जैसे एडवांस स्मार्टफोन्स और फेसबुक जैसी तमाम सोशल नेटवर्किंग साइट्स के बढ़ते इस्तेमाल ने साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं। साथ ही क्लाउड सिक्योरिटी और इंडस्ट्रियल सिस्टम की सुरक्षा जैसे विकल्प खुल रहे हैं। वेब एप्लीकेशेन्स की सुरक्षा पर भी पहले की तुलना में ज्यादा ध्यान दिया जाने लगा है।

शुरुआत और कोर्सेज (Starting and Courses): इस क्षेत्र को भविष्य में प्रोफेशन बनाने के लिए 12वीं के बाद कंप्यूटर इंजीनियरिंग/ कंप्यूटर साइंस/ आईटी में बीटेक/बीई कर सकते हैं। इनमें दाखिले के लिए 12वीं पीसीएम से पास होना जरूरी है। इसके बाद कंप्यूटर साइंस/कंप्यूटर इंजीनियरिंग/नेटवर्क इंजीनियरिंग/ आईटी/ सायबर सिक्योरिटी/ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी या कंप्यूटर फॉरेंसिक में एमटेक का भी विकल्प है। इसके अलावा सिस्को और आईआईएसएससीसी (इंटरनेशनल इंफॉर्मेशन सिस्टम सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन कंसोर्टियम) के सर्टिफिकेशन कोर्स भी हैं। सिस्को (www.cisco.com) में सीसीएसपी, सीसीडीए, सीसीईएनटी जैसे कई कोर्सेज हैं। ये कोर्स आपकी प्रोफाइल को और मजबूत करेंगे। आईआईएसएससीसी (www.isc2.org) से आप एसएससीपी, सीएपी, सीएसएसएलसीपी आदि कोर्स कर सकते हैं। कोर्स के बाद सिक्योरिटी एनालिस्ट या एथिकल हैकर के तौर पर काम की शुरुआत कर सकते हैं। इसके बाद सिक्योरिटी कंसल्सटेंट, सिक्योरिटी ऑडिटर आदि अवसर भी हैं।

आर्ट्स व कॉमर्स के छात्र भी बना सकते हैं राह (Art and Commerce Students Can Also make their Careers): हालांकि इस फील्ड में साइंस से 12वीं कक्षा पास करने वाले छात्रों के लिए कोर्सेज व अवसरों की ज्यादा संभावना है, लेकिन आर्ट्स या कॉमर्स से 12वीं पास व ग्रेजुएट छात्रों के लिए देश के कई संस्थानों में इस क्षेत्र से संबंधित कोर्स हैं। गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) स्थित इंस्टीटूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी, सेंटर फॉर डिस्टेंस लर्निंग में पीजी डिप्लोमा इन साइबर सिक्योरिटी व एमएस इन साइबर लॉ ऐंड सिक्योरिटी कोर्स चलाए जाते हैं। किसी भी विषय में ग्रेजुएट इन कोर्सेज में प्रवेश ले सकता है। लेकिन एमएस कोर्स के लिए 50 प्रतिशत अंक होने अनिवार्य हैं। इसके अलावा यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास में भी किसी भी विषय से ग्रेजुएशन करने वाला व्यक्ति डिप्लोमा इन साइबर क्राइम ऐंड इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी कोर्स कर सकता है। पुणे स्थित एशियन स्कूल ऑफ साइबर लॉज में 12वीं पास व ग्रेजुएट्स के लिए कई तरह के कोर्स उपलब्ध हैं।

अच्छी सैलरी व सबके लिए मौके (Scope for Good Salary):इस क्षेत्र में साइंस ही नहीं, आर्ट्स व कॉमर्स बैकग्राउंड रखने वाले विद्यार्थी भी आ सकते हैं, बशर्ते उनमें दिनोंदिन एडवांस होती टेक्नोलॉजी को जानने की ललक हो, वह तार्किक ढंग से सोचते हों और उनमें समस्या की जड़ को समझने की काबिलियत हो। वर्तमान में 12वीं व ग्रेजुएशन, दोनों स्तरों पर संबंधित कोर्स उपलब्ध हैं। सबसे बड़ी बात है कि इस क्षेत्र में सैलरी भी काफी अच्छी होती है।

भारत में साइबर सिक्योरिटी इंडस्ट्री 40 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रही है। इसका कारोबार 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है। एक अनुमान के मुताबिक, अगले तीन सालों में इस इंडस्ट्री में 75 हजार साइबर सिक्योरिटी स्पेशलिस्ट को रोजगार मिलेगा।
कहाँ से आप कर सकते हैं साइबर सिक्यूरिटी कोर्स
देश में कौन-कौनसे आईआईटी संस्थान हैं जहाँ से आप कोर्स कर सकते हैं
  • इंडियन इंस्टीटूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद
  • इंस्टीटूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी, सेंटर ऑफ डिस्टेंस लर्निंग, गाजियाबाद
  • इंटरनेशनल इंस्टीटूट ऑफ टेक्निकल टेक्नोलॉजी, हैदराबाद
  • जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, स्कूल ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, हैदराबाद
  • एशियन स्कूल ऑफ साइबर लॉज, पुणे
  • यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास, चेन्नई
  • इंस्टीटूट ऑफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी, मुंबई