Thursday, July 5, 2018

शेयर बाजार, सेंसेक्स में करियर

शेयर बाजार सिर्फ शेयरों में निवेश और लाभ कमाने की इच्छा तक ही सीमित नहीं है। यहां आप रिलेशनशिप मैनेजर से शुरुआत करके टेक्निकल एनालिस्ट तक का सफर तय कर सकते हैं और अपना भविष्य बेहतर बना सकते हैं।
शेयर बाजार में केवल निवेश के जरिए पैसे कमाने का ही अवसर नहीं है, बल्कि अब आप अपने सपनों को करियर का आकार भी दे सकते हैं। मौजूदा समय में रिलायंस कैपिटल, एंजेल ब्रोकिंग, रेलीगेयर, शेयरखान, यूनिकॉन सॉल्युशन, कार्वी और भारती इन्वेस्टमेंट जैसी कई बड़ी कंपनियां हैं, जहां रोजगार के ढेरों मौके हैं। आने वाले दिनों में मुकेश अंबानी जैसे और कई दिग्गज एस्सेट मैनेजमेंट और इक्विटी बाजार में कदम रखने वाले हैं। इसके अलावा पिछले कुछ सालों से विदेशी संस्थागत निवेशक (एफएफआई) भी भारतीय शेयर बाजारों में खूब पैसा लगा रहे हैं। यानी इक्विटी मार्केट, म्युचअल फंड, कमोडिटी बाजार, करेंसी बाजार का और विस्तार होगा। जाहिर है इसे देखते हुए इस क्षेत्र में और बूम आएगा और प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी।
इस क्षेत्र में रिलेशनशिप मैनेजर, पोर्टफोलियो मैनेजर, टेक्निकल एंड  फंडामेंटल एनालिस्ट, ट्रेडर और डीलर की मांग बढ़ेगी। अगर आप एमबीए हैं तो भी यह क्षेत्र मुफीद रहेगा। बीएनपी फिनकॉर्प के सीईओ एके निगम का मानना है कि इस क्षेत्र में आने वाले प्रोफेशनल्स को बेसिक सर्टिफेकेशन कोर्स करना तो जरूरी है ही, साथ ही यह भी देखें कि आपका रुझान किस तरफ है। आप इक्विटी मार्केट में जाना चाहते हैं कि कमोडिटी बाजार में या म्युचुअल फंड में। सबसे पहले तो आपको बीएसई या एनएसई से एनसीएफएम के पेपर क्लियर करने होंगे, यानी अगर आप कमोडिटी में कदम रख रहे हैं तो कमोडिटी का पेपर पास करना होगा। सर्टिफिकेशन कोर्स करके आप किसी ब्रोकरेज कंपनी में बतौर रिलेशनशिप मैनेजर जॉब शुरू कर सकते हैं। लेकिन अगर आपको इस क्षेत्र में और आगे जाना है तो प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट पर भी ध्यान देना होगा। यानी फंडामेटल एनालिस्ट बनने के लिए कंपनियों की नेटवर्थ किस क्षेत्र में है, उस क्षेत्र का भविष्य क्या है, कंपनियों की भावी योजनाओं के बारे में मूलभूत जानकारी आदि बातें जानना जरूरी है। टेक्निकल एनालिसिस पर भी ध्यान देना होगा। इसके अलावा इस क्षेत्र में आपको रोजाना अपडेट रहने की जरूरत है कि कंपनी कौन सा नया प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है और वह उस पर कितना निवेश करेगी। इसके अलावा विदेशी शेयर बाजार, कच्चे तेल की कीमतें भी घरेलू शेयर बाजार की दिशा तय करती हैं, इनकी समझ भी जरूरी है।
रिलेशनशिप मैनेजर से होगी शुरुआत
अगर आप इस क्षेत्र में करियर बनाने जा रहे हैं तो सबसे पहले आपको रिलेशनशिप मैनेजर से शुरुआत करनी होगी। रिलेशनशिप मैनेजर का काम ग्राहकों को वित्तीय उत्पादों के बारे में जानकारी देना और डीमैट खोलना और केवाईसी (नो योर क्लाइंट) को पूरा करना होता है। इसमें कुछ ग्राहक ऑफिस आकर निवेश करते हैं तो कुछ मामलों में आपको संबधित व्यक्ति के घर जाकर फार्म भरना होगा। इस तरह से आपकी लोगों के प्रति जानकारी बढ़ेगी और कंपनी का विश्वास भी हासिल होने लगेगा। एक समय आपके पास निवेशकों की लंबी फेहरिस्त होगी। इसके बाद पोर्टफोलियो मैनेजर बन सकते हैं। इसके लिए आपकी इक्विटी, कमोडिटी, म्युचुअल और डेट मार्केट की गहरी समझ जरूरी है। तभी आप निवेशकों का पैसा सुरक्षित रख पाएंगे।
किसी एक क्षेत्र में निवेश करना बेहतर तरीका नहीं माना जा सकता। कोई भी पोर्टफोलियो बनाने के लिए उसमें इनका कॉम्बीनेशन जरूरी है। एक पोर्टफोलियो मैनेजर निवेशक के पैसे को डायवर्सिफाइड करके अच्छा रिटर्न दिलाने का काम करता है। यानी किसी क्षेत्र में गिरावट का दौर चल रहा है तो उसको दूसरे क्षेत्र से पूरा करना। एक संतुलित पोर्टफोलियो ही अच्छे पोर्टफोलियो मैनेजर की पहचान है। कुछ पोर्टफोलियो मैनेजर तो हर महीने 30 हजार से डेढ़ लाख रुपए प्रति महीने तक कमाते हैं।
इसी तरह से जब आप शेयर बाजार में कुछ साल काम कर लेते हैं तो कंपनियों के बारे में अच्छी-खासी जानकारी जुटा लेते हैं तो आप उस क्षेत्र का टेक्निकल एनालिसिस करने लगते हैं। आज टेक्निकल एनालिस्ट की बाजार में बहुत मांग है। अगर आपको बाजार के उतार-चढ़ाव की अच्छी-खासी समझ हो गई है तो आप खुद भी निवेश करके पैसा बना सकते हैं और अपना और अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं। यानी आपके दोनों हाथों में लड्डू होना तय है।
फैक्ट फाइल
स्टॉक बाजार में करियर के लिए कोर्स हैं अनेक
बीएसई (बांबे स्टॉक एक्सचेंज) ट्रेनिंग इंस्टीटय़ूट बीटीआई के नाम से  जाना जाता है। यह पूंजी बाजार पर 3 महीने का पार्टटाइम सर्टिफिकेट प्रोग्राम -बीएसई सर्टिफिकेशन ऑन सिक्योरिटीज मार्केट्स (बीसीएसएम) जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के साथ मिल कर चलाता है। यह वित्तीय बाजार में काफी लोकप्रिय कार्यक्रम है। इसमें सफल होने वाले अभ्यर्थियों को मुंबई विश्वविद्यालय की ओर से सर्टिफिकेट मिलता है। यह कोर्स कोई भी ग्रेजुएट सब-ब्रोकर, इन्वेस्टमेंट कंसल्टेंट, पोर्टफोलियो मैनेजर, डिपॉजिटरीय प्रोफेशनल्स, डीपी बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां, म्युचुअल फंड, कस्टोडियन, क्लीयरिंग हाउस और फाइनेंशियल इंस्टीटय़ूट एवं मैनेजमेंट के छात्र कर सकते हैं। अभ्यर्थी बीटीआई या क्षेत्रीय कार्यालयों में टेस्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं।
कोर्स
एडवांस प्रोग्राम ऑन डेरिवेटिव्स
एडवांस प्रोग्राम ऑन स्टॉक मार्केट
अकाउंटिंग ऑफ फाइनेंशियल इंस्ट्रुमेंट एंड डेरिवेटिव्स
अस्बा (एप्लीकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट)
बेसिक कोर्स ऑन स्टॉक मार्केट
कमोडिटी एंड कमोडिटी डेरिवेटिव्स
स्टॉक एनालिसिस
पूंजी बाजार से जुड़े करीब 40 कोर्स हैं। ज्यादा जानकारी के लिए बीएसई की वेबसाइट पर लॉगइन कर सकते हैं।
वेबसाइट:  www.bseindia.com
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की ओर से 1998 से सर्टिफिकेट कोर्स सर्टिफिकेशन इन फाइनेंशियल मार्केट्स (एनसीएफएम) कोर्स चलाया जा रहा है। आप ऑनलाइन टेस्ट देना चाहते हैं तो एनएसई की वेबसाइट पर लॉग इन कर सकते हैं। एनएसई ने देशभर के बड़े शहरों में अपने टेस्ट सेंटर बनाए हैं, इनके माध्यम से भी टेस्ट दे सकते हैं।
फाइनेंशियल मार्केट्स,
डेरिवेटिव्स मार्केट,
कैपिटल मार्केट,
सिक्योरिटीज मार्केट,
डेब्ट मार्केट,
करेंसी मार्केट,
डिपॉजिटरी
ऑपरेशंस मॉडय़ूल,
एएमएफआई (म्युचुअल फंड) मॉडय़ूल।
बेवसाइट : www.nseindia.com
एक्सपर्ट व्यू
बाजार की समझ जरूरी
अतुल गुप्ता
ब्रांच हेड ब्रोकरेज फर्म रेलीगेयर
वैसे तो शेयर बाजार में काम करने के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सर्टिफिकेट प्रोग्राम 10+2 के बाद किए जा सकते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि पूंजी बाजार में करियर बनाने के लिए ग्रेजुएशन होना जरूरी है। केवल सर्टिफिकेट कोर्स करने से ही काम नहीं चल सकता। यह आपको किसी ब्रोकरेज कंपनी के साथ करियर शुरू करने का मौका तो देता है, लेकिन इस क्षेत्र में आने के लिए सबसे जरूरी चीजें हैं मेहनत, लगन और धैर्य

Monday, July 2, 2018

लिक्विड इंजीनियरिंग में कैरियर

निजी कंपनियों के भारतीय पेट्रोलियम कारोबार में प्रवेश करने से लिक्विड इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए कॅरियर के और अधिक अवसर उत्पन्न होने लगे हैं... 

लिक्विड इंजीनियरिंग का संबंध मुख्य रूप से पेट्रोलियम पदार्थों से है। इन दिनों पेट्रोलियम पदार्थों की आवश्यकता जीवन में काफी बढ़ गई है। इसके बिना कई दैनिक कार्य संभव नहीं हैं। इस क्षेत्र में भारत एशिया के तेल और प्राकृतिक गैस बाजार में बड़ा खिलाड़ी बनकर उभर रहा है। इस समय भारत में इस क्षेत्र से लाखों लोग प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से जुड़े हैं। 

बढ़ती जरूरत
हमारे देश में जिन क्षेत्रों का बहुत तेजी से विकास हो रहा है, पेट्रोलियम और ऊर्जा उनमें से एक है। भारत की बड़ी इंडस्ट्रीज में पेट्रोलियम इंडस्ट्री का क्रम सबसे ऊपर आता है। तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग तथा अन्य तेल कंपनियां इस क्षेत्र में भारी लाभ अर्जित रही हैं। पेट्रोलियम और विभिन्न पेट्रो प्रोडक्ट्स के बढ़ते इस्तेमाल के कारण इस फील्ड में कुशल पेशेवरों की काफी मांग रही है।

कार्य प्रकृति
तेल उद्योग को अपस्ट्रीम (अन्वेषण और उत्पादन) तथा डाउनस्ट्रीम (रिफाइनिंग, मार्केटिंग और वितरण) क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें सभी स्तरों पर कॅरियर निर्माण के शानदार अवसर उपलब्ध हैं। लिक्विड (पेट्रोलियम) उद्योग के तहत भूगर्भशास्त्रियों, जियो फिजिस्ट और पेट्रोलियम इंजीनियरों के लिए अपस्ट्रीम गतिविधियों एवं केमिकल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इंस्ट्रूमेंटेशन और प्रोडक्शन इंजीनियरों के लिए डाउनस्ट्रीम गतिविधियों में कॅरियर के विकल्प उपलब्ध हैं। पेट्रोलियम इंजीनियर विभिन्न क्षेत्रों में इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, ठेकेदारों और ड्रिलिंग स्टाफ के साथ मिलकर काम करते हैं। 

कोर्स कैसे-कैसे 
लिक्विड (पेट्रोलियम) इंजीनियरिंग के कोर्स अंडरग्रेजुएट तथा पोस्ट ग्रेजुएट दोनों स्तरों पर संचालित किए जाते हैं। बीटेक के 4 वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र तथा गणित विषयों में 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। एमटेक पाठ्यक्रम पेट्रोलियम, पेट्रोकेमिकल, केमिकल तथा मैकेनिकल इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए खुला है। यह जरूरी नहीं कि इस सेक्टर का द्वार केवल पेट्रोलियम इंजीनियरों के लिए ही खुला है। मार्केटिंग और प्रबंधन क्षेत्र के युवाओं के लिए भी इसमें काफी अवसर हैं। 


मौके कहां-कहां
पेट्रोलियम से संबंधित स्नातकों के लिए कॅरियर निर्माण के तमाम उजले अवसर उपलब्ध हैं। पेट्रोलियम इंजीनियरों की बढ़ती मांग का ही परिणाम है कि इन्हें अच्छे वेतन पर आकर्षक रोजगार देने के लिए पेट्रोलियम कंपनियां हमेशा तैयार रहती हैं।

चूंकि सारी दुनिया में सुरक्षित तथा किफायती ऊर्जा संसाधनों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है, इसलिए इन प्रोफेशनल की मांग का सिलसिला आगामी दशकों में भी जारी रहेगा। पेट्रोलियम उत्पादन कंपनियों, कंसल्टिंग इंजीनियरिंग कंपनियों, कुओं की खुदाई करने वाली कंपनियों के साथ-साथ ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम तथा रिलायंस पेट्रोकेमिकल्स के अलावा रिसर्च और शैक्षणिक संस्थानों में आकर्षक वेतनमान पर रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं।

इस क्षेत्र में पैसों की कोई कमी नहीं है। पेट्रोलियम इंजीनियरों के लिए प्रोफेशनल कॅरियर के अलावा रिसर्च के क्षेत्र में भी अच्छे अवसर� हैं। वह रिसर्च लैब में बतौर साइंटिस्ट या रिसर्च फेलो के रूप में अनुसंधान तथा विकास कार्य कर सकते हैं। विदेशों, खास तौर पर खाड़ी देशों में भी पेट्रोलियम इंजीनियरों के लिए कॅरियर निर्माण के ढेरों अवसर मौजूद हैं। 

मुख्य संस्थान
राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी, रायबरेली
इंडियन ऑयल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम मैनेजमेंट, गुड़गांव
इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम मैनेजमेंट, गांधीनगर
इंडियन स्कूल ऑफ माइंस, धनबाद
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, देहरादून
इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी, गांधीनगर

Sunday, July 1, 2018

फोटोग्राफी में बनाए कॅरि‍यर

फोटोग्राफी एक कला है जिसमें विजुअल कमांड के साथ-साथ टेक्निकल नॉलेज भी जरूरी है। फोटोग्राफी एक बेहतर कॅरि‍यर ऑप्शन साबित हो सकता है उन सभी छात्रों के लिए जिन्हें नेचर से प्यार है। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी एक ऐसी फील्ड है जहां एक तरफ घने जंगलों के बीच खूंखार जानवरों को अपने कैमरे में कैद करने व उनके अलग-अलग मूवमेंट्स को दुनिया के सामने लाने का रोमांच है तो वहीं दूसरी तरफ इस क्षेत्र में खतरे भी कम नहीं हैं।
 
फोटोग्राफी एक क्रिएटिव क्षेत्र है जिसमें वर्तमान में बेहतर कॅरि‍यर की संभावनाएं मौजूद हैं। एक अच्छा वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर बनने के लिए बेसिक फोटोग्राफी की जानकारी होना बेहद जरूरी है। हालांकि एक साधारण डिजिटल कैमरा लेकर शौकिया तौर पर शुरुआत की जा सकती है। एक-दो साल का अनुभव हो जाने के बाद डिजिटल एसएलआर ख़रीद कर प्रोफेशनली इस क्षेत्र में एंट्री की जा सकती है।
सैलरी पैकेज
अभी तक यह क्षेत्र हमारे देश में ज्यादा फेमस नहीं था तो कमाई के साधन भी सीमित थे, लेकिन ग्लोबलाइजेशन के बाद अब इस क्षेत्र में अच्छा पैसा कमाया जा सकता है। किसी संस्थान से जुड़ने पर आसानी से 10 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह की कमाई हो सकती है। एक अनुभवी वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर प्रतिमाह आसानी से एक लाख रुपए कमा सकता है। इसके अलावा कुछ सीनियर फोटोग्राफर्स भी अपने असिस्टेंट रखते हैं, जो न केवल सिखाते हैं बल्कि 10 से 12 हजार रुपए का स्टाइपेंड भी देते हैं।योग्यता
फोटोग्राफी एक क्रिएटिव क्षेत्र है जिसमें वर्तमान में बेहतर करियर की संभावनाएं मौजूद हैं। बारहवीं या ग्रेजूएशन करने के बाद इस क्षेत्र में प्रवेश लिया जा सकता है। फोटोग्राफी का कोर्स सरकारी और निजी स्तर पर कई संस्थान कराते हैं। एक अच्छा वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर बनने के लिए बेसिक फोटोग्राफी की जानकारी होना बेहद जरूरी है। 

कोर्स और संस्थान
किसी भी सरकारी या निजी संस्थान से फोटोग्राफी का कोर्स करने के बाद इस क्षेत्र में प्रवेश किया जा सकता है। हालांकि भारत में अभी इस क्षेत्र के लिए कोई स्पेशलाइज्ड कोर्स उपलब्ध नहीं है। फोटोग्राफी में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट दो तरह के कोर्स कराए जाते हैं।

1. इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट इन एजुकेशन एंड एडवांस्ड स्टडीज, अहमदाबाद । 
2. कॉलेज ऑफ आर्ट्स, तिलक मार्ग, दिल्ली एजेके मास कम्युनिकेशन सेंटर, जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली ।
3. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद । 
4. सेंटर फॉर रिसर्च आर्ट ऑफ फिल्म्स ऐंड टेलीविजन नई दिल्ली । 
5. दिल्ली स्कूल ऑफ फोटोग्राफी । 6. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फोटोग्राफी, मुंबई

Thursday, June 28, 2018

सुगंध चिकित्सा में करियर

करियर के क्षेत्र में आ रहे बदलावों के चलते आज ऐसे विकल्पों का बोलबाला है, जो अपने आप में विशेषज्ञता रखते हैं। यह विकल्प पूरी तरह से प्रोफेशनल होते हैं। इन्हीं में से एक विकल्प है सुगंध चिकित्सा (स्मैल थैरेपी) का। ब्रिटेन और यूरोप में लोकप्रियता हासिल करने के बाद सुगंध चिकित्सा ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। 

जहाँ तक भारत की बात की जाए तो हमारी सभ्यता में प्राचीनकाल से ही सुगंध चिकित्सा का बोलबाला रहा है। भारत इत्र, सुगंधित तेलों और इनका उत्पादन करने वाली इंडस्ट्री का अपना एक विशेष महत्व है। आयुर्वेद में सुगंधित तेलों से शरीर की मालिश करने की विधि का उपयोग होता है इसके अलावा इत्र, धूप, अगरबत्ती जैसी वस्तुएँ भी भारतीय सभ्यता से बहुत लंबे समय से जुड़ी हुई हैं। 

आज सुगंध चिकित्सा न सिर्फ इलाज, बल्कि रोजगार के लिहाज से भी भारत में व्यापक संभावनाओं भरे विकल्प के तौर पर विकसित हो रही है। 

नेचुरल चीजों के प्रति बढ़ते रुझान के कारण आज सेहत सुधार में भी सुगंध चिकित्सा का इस्तेमाल किया जाने लगा है। भारत में सुगंध चिकित्सा के माध्यम से प्रकृति की ओर वापसी की धारणा को फिर से प्रचलित करने का श्रेय अगर किसी को दिया जाए तो इस कतार में शहनाज हुसैन, ब्लॉसम कोचर और भारती तनेजा जैसे नाम उभकर सामने आते हैं, जिन्होंने आम आदमी को ऐसे विकल्प दिए, जिनके चलते वह एक बार फिर से प्राकृतिक उत्पादों में विश्वास करने लगा है। 

प्रकृति के प्रति इसी लगाव के कारण आज भारत के प्राकृतिक उत्पादों की माँग भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी खूब देखने को मिल रही है। वर्तमान में आलम यह है कि विज्ञान के विकास के चलते आज यह क्षेत्र बेहद विस्तृत हो गया है और एक इंडस्ट्री के रूप में तब्दील हो चुका है। 

आज भारी संख्या में लोग अपनी बीमारियों का इलाज प्राकृतिक सुगंध चिकित्सा में खोज रहे हैं। आम और खास आदमी की इसी बढ़ती रूचि के कारण सुगंध चिकित्सा आज एक रोजगार विकल्प का रूप ले चुकी है। 


सुगंध चिकित्सा के लगातार बढ़ते प्रभाव के कारण आज देश के कई शिक्षण संस्थानों ने इस विद्या का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शुरू कर दिया है। आज न केवल सरकारी, बल्कि कई गैर सरकारी संस्थान भी सुगंध चिकित्सा से जुड़े डिग्री, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स चला रहे हैं। इन संस्थानों में दाखिले की प्रक्रिया उसी तरह की होती है, जैसे कि अन्य प्रोफेशनल या परंपरागत कोर्सों के लिए होती है।  
इस थेरेपी से जुड़े सर्टिफिकेट स्तर के पाठक्रम में दाखिले के लिए शैक्षणिक योग्यता बारहवीं है। लेकिन अगर आप डिग्री या डिप्लोमा कोर्स करना चाहते हैं तो अधिकांश शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए आवेदक के पास बारहवीं कक्षा में रसायन विज्ञान विषय होना जरूरी है। सुगंध चिकित्सा के कई प्रोफेशनल पाठक्रमों में केवल कैमिस्ट्री विषय के साथ स्नातक उत्तीर्ण छात्रों को ही प्रवेश दिया जाता है।

सुगंध चिकित्सा का प्रशिक्षण प्राप्त कर आप एक सुगंध चिकित्सक के रूप में कार्य कर सकते हैं। प्रशिक्षण के उपरांत आप सुगंध चिकित्सक, सुगंधित पदार्थ विक्रेता, परामर्शदाता, सुगंधित पदार्थ के उत्पादन और व्यापार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस तरह अगर सही मायनों में देखें तो यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें आपको अपनी क्षमताओं और रुचि के अनुसार काम करने का मौका मिलता है। 

सुगंध चिकित्सा का कोर्स करने के उपरांत वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति का इस्तेमाल कर इलाज करने वाले अस्पतालों, अनुसंधान और विकास संगठन, सुगंधित तेल का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाली कंपनियों, स्पा सेंटर, पांच सितारा होटलों, खानपान के क्षेत्र में, औषधि और पौष्टिक आहार बनाने वाली कंपनियों तथा सौंदर्य प्रसाधन उद्योग में रोजगार की बहुत उजली संभावनाएं हैं। 
किसी प्रतिष्ठित संस्थान से सुगंध विज्ञान में प्रशिक्षण लेने के बाद सुगंध चिकित्सक के रूप में स्वयं का क्लिनिक शुरू किया जा सकता है, जिसमें सौंदर्य की साज-संभाल के अलावा अन्य रोगों का इलाज किया जा सकता है। सुगंध चिकित्सक के अलावा आप सुगंधित पदार्थ परामर्शदाता और इसके उत्पादन और व्यापार के क्षेत्र में भी कार्य कर सकते हैं। 

कहाँ से करे कोर्स-

शहनाज हुसैन वुमंस इंटरनेशनल स्कूल ऑफ ब्यूटी, ग्रेटर कैलाश, नई दिल्ली।

पिवोट पाइंट ब्यूटी स्कूल, कैलाश कॉलोनी, नई दिल्ली।

दिल्ली स्कूल ऑफ मैनेजमेंट सर्विस, आकाशदीप बिल्डिंग, नई दिल्ली।

सुगंध और स्वाद विकास केंद्र, मार्कण्ड नगर, कन्नौज, उत्तर प्रदेश ।

केलर एजुकेशन ट्रस्ट, वीजी वूसे कॉलेज, मुंबई।

Sunday, June 24, 2018

कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में करियर

आज के दौर में संचार जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। चाहे मोबाइल हो या टीवी यह हर इनसान की जरूरत है। क्या आप ऐसे जीवन की कल्पना कर सकते हैं जहाँ मोबाइल काम ना करे। अपने मन पंसद प्रोग्रामों को देखने के लिए आपके पास टेलीविजन ही ना हो। ऐसे जीवन की कल्पना करना भी आपको कितना डरावना लगता है ना। 

आपकी सुविधाओं को हकीकत में बदलने का काम किया है इलेक्ट्रॉनिक और कम्युनिकेशन इंजीनियरों ने। इनकी कला की बदौलत ही आज हर व्यक्ति पूरी दुनिया से जुड़ा हुआ है। अगर आप चाहें तो इस क्षेत्र में अपना भविष्य तलाश सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग का क्षेत्र बहुत ही विस्तृत व चुनौतीपूर्ण है। इसके अंतर्गत माइक्रोवेव और ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, डिजिटल सिस्टंस, सिग्नल प्रोसेसिंग, टेलीकम्युनिकेशन, एडवांस्ड कम्युनिकेशन, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इंजीनियरिंग की यह शाखा रोजमर्रा की जिंदगी में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। साथ ही इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिकल, पॉवर सिस्टम ऑपरेशंस, कम्युनिकेशन सिस्टम आदि क्षेत्रों में भी इसके महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता।

इस क्षेत्र में करियर बनाने की चाह रखने वाले छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक करना होगा। विभिन्न इंस्टिट्यूट छात्रों केलिए ढेर सारे विकल्प प्रस्तुत करता है। इस स्ट्रीम में छात्र विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं या दोहरी डिग्री भी कर सकते हैं। 

कम्युनिकेशन इंजीनियरों का मुख्य काम होता है कि वे न्यूनतम खर्चे पर सर्वश्रेष्ठ संभावित हल उपलब्ध करवाए। इस तरह वे रचनात्मक सुझाव निकालने में सक्षम हो पाते हैं। वे चिप डिजाइनिंग और फेब्रिकेटिंग के काम में शामिल होते हैं, सेटेलाइट और माइक्रोवेव कम्युनिकेशन जैसे एडवांस्ड कम्युनिकेशन, कम्युनिकेशन नेटवर्क साल्यूशन, एप्लिकेशन ऑफ डिफरेंट इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में काम करते हैं और इसलिए कम्युनिकेशन इंजीनियरों की सार्वजनिक और निजी दोनों ही क्षेत्रों में अच्छी खासी मांग होती है।

इंजीनियरिंग की इस ब्रांच में पेशेवरों के लिए नित नए दरवाजे खुलते रहते हैं। कम्युनिकेशन इंजीनियर टेलीकम्युनिकेशन, सिग्नल, सैटेलाइट और माइक्रोवेव कम्युनिकेशन आदि क्षेत्रों में काम की तलाश कर सकते हैं। कम्युनिकेशन इंजीनियरों को टीसीएस, मोटोरोला, इन्फोसिस, डीआरडीओ, इसरो, एचसीएल, वीएसएनएल आदि कंपनियों में अच्छी खासी सैलरी पर नौकरी मिलती है। 

एक सर्वे के मुताबिक इंजीनियरिंग क्षेत्र बहुत तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में से एक है। सर्वे के अनुसार अगले 10 सालों में इंजीनियरिंग के क्षेत्र की विकास दर 13.38 प्रतिशत होगी। 2007 में हुए ग्रेजुएट एक्जिट का सर्वे कहता है कि कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग पर मंदी का असर ना के बराबर हुआ है। इस क्षेत्र में अभी भी 86 प्रतिशत इंजीनियर काम कर रहे हैं और आने वाले समय में इनकी भारी माँग रहेगी। ब्यूरो ऑफ लेबर स्टेटिक्स की रिपोर्ट का मानना है कि इंजीनियरिंग एक ऐसा क्षेत्र है जो बहुत तेजी से विकास कर रहा है। 

इस क्षेत्र में इंजीनियर को 3.5 से 4 लाख रुपए प्रतिवर्ष औसतन वेतन मिल सकता है। अधिकतम वेतन 12 लाख रुपए प्रतिवर्ष तक हो सकता है।

कम्युनिकेशन इंजीनियर बनने की चाह रखने वाले छात्र इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, खड़गपुर, दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कालीकट से प्रोफेशनल कोर्स कर सकते हैं।

Sunday, June 17, 2018

चिप डिजाइन में करियर

टेक्‍नोलॉजी ने जहां लोगों के जीवन को सरल और आधुनिक बना दिया है, वहीं टेक्‍नोलॉजी के कई क्षेत्रों में करियर के शानदार विकल्‍प भी उभ्‍ार कर सामने आए हैं। टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में जो प्रगति हुई है उसमें चिप डिजाइनिंग इंडस्‍ट्री ने महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है। अगर आप भी इंजीनियरिंग में रूचि रखते हैं और साथ ही चैलेंजिंग काम करना चाहते हैं तो चिप डिजाइनिंग में करियर बना सकते हैं। चिप सिलिकॉन का एक छोटा और पतला टुकड़ा होता है जो मशीनों के लिए इंटीग्रेटेड सर्किट बेस का काम करता है। चिप डिजाइनिंग की मदद से बड़े आकार के उपकरणों को भी छोटे आकार में बदला जा सकता है।
बढ़ रही है डिमांड 
चिप डिजाइन के रूप में आप एक सुनहरा करियर बना सकते हैं। इसकी हर सेक्‍टर में मांग है। एक चिप डिजाइनर का मुख्‍य काम छोटी-बड़ी इलेक्‍ट्रॉनिक डिवाइसेस की कार्यक्षमता को बढ़ाना और उसे आसान बनाना है। मोबाइल, टीवी रिमोट से लेकर कंज्‍यूमर इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, ऑटोमोबाइल सेक्‍टर तक में चिप का इस्‍तेमाल हो रहा है। आप इस इंडस्ट्री से डिजाइन इंजीनियर, प्रोडक्ट इंजीनियर, टेस्ट इंजीनियर, सिस्टम्स इंजीनियर, प्रॉसेस इंजीनियर, पैकेजिंग इंजीनियर, सीएडी इंजीनियर आदि के रूप में जुड सकते हैं।
योग्‍यता 
चिप डिजानिंग में करियर बनाने के लिए आपके पास इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, टेली कम्‍यूनिकेशन या कम्‍प्‍यूटर साइंस में बीई या बीटेक डिग्री होना चाहिए। चिप डिजाइनिंग इंडस्‍ट्री में विशेष रूप से डिजाइन, प्रोडक्‍शन, टेस्टिंग, एप्‍लीकेशंस और प्रॉसेस इं‍जीनियरिंग शामिल होता है। वैसे इस क्षेत्र में कुछ संस्थानों द्वारा शॉर्ट टर्मकोर्सेस भी कराए जाते हैं, जिनका संबंध आईसी, सर्किट डिजाइन और माइक्रो प्रोसेसर से होता है।
जरूरी स्किल्‍स 
इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्‍छुक युवाओं को हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का नॉलेज होना जरूरी है। इसके अलावा अच्‍छी कम्‍यूनिकेशन स्किल्‍स, टीम वर्क, प्रॉब्‍लम सॉल्विंग एटिट्यूड बहुत जरूरी है। प्रोग्रामिंग और मैथमेटिकल स्किल्‍स बहुत जरूरी है। इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्‍छुक युवाओं को टेक्‍नोलॉजी डेवलपमेंट्स और लेटेस्‍ट इनोवेशन का ज्ञान होना जरूरी है।
प्रमुख संस्‍थान: 
- बिटमैपर इंट्रीगेशन टेक्नोलजी, पुणे, महाराष्ट्र
- सेंट्रल फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांसड कंप्यूटिंग, बेंगलूर 
- जामिया मिलीया इस्लामिया, नई दिल्ली

Thursday, June 14, 2018

फूड टेक्नोलॉजी में करिअर

खाद्यविज्ञान में खाद्य- सामग्रियों के चुनाव, संरक्षण, प्रसंस्करण, डिब्बाबंद (पैकेजिंग), वितरण और उपभोग की तकनीकों के बारे में जानकारी दी जाती है। ऐसे में जाहिर सी बात है करियर की संभावनाएं अपार है क्योंकि खाना और खिलाना तो चलता ही रहता है

बदलती जीवनशैली और व्यस्तता के कारण आज लोगों की खानपान की आदतें और शौक भी बदल गए हैं। ऐसे में खाने-पीने की चीजों में जो भी उन्हें आसान जरिया या विकल्प मौजूद मिलता है, उसी को आदत बना लेते हैं। इसी में है डिब्बा बंद भोजन और पेय पदार्थ जिस पर लोग आज निर्भर होने लगे हैं। ऐसी स्थिति में इन खाद्य पदार्थों का चलन बढ़ने के कारण युवाओं के लिए फूड टेक्नोलॉजी बेहतरीन करियर ऑप्शन के रूप में सामने आया है। खाद्यविज्ञान के सिद्धांतों का उपयोग करते हुए खाद्य-सामग्रियों के चुनाव, संरक्षण, प्रसंस्करण, डिब्बाबंद (पैकेजिंग), वितरण और उपभोग की तकनीकों को ही खाद्य प्रौद्योगिकी (फूड टेक्नोलॉजी) कहते हैं। खाद्य विज्ञान खाद्य के सभी तकनीकी पहलुओं से जुड़ा एक ऐसा विषय क्षेत्र है, जो फसल की कटाई से शुरू होता है तथा इसके पकाने और खपत के साथ समाप्त होता है। योग्यता- फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री बहुत ही व्यापक और फलता- फूलता इंडस्ट्री है, जिसमें जॉब की संभावनाएं भी अपार हैं। भारत में भी कुछ यूनिर्वसटिी फूड टेक्नोलॉजी और फूड साइंस में डिग्री कोर्सेज ऑफर कराते हैं। कुछ ऐसे भी संस्थान हैं, जहां फूड प्रॉसेसिंग में पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज उपलब्ध हैं। फूड टेक्नोलॉजी, फूड साइंस और होम साइंस के अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला के लिए 10 अ 2 लेवल में पीसीएम या पीसीबी होना चाहिए। एमएससी/मैनेजमेंट में दाखिला के लिए फूड टेक्नोलॉजी में बीएससी होना जरूरी है, जिसके लिए ग्रेजुएट/पोस्टग्रेजुएट डिग्री अनिवार्य है। होम साइंस ग्रेजुएट्स या न्यूट्रिशन और होटल मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स (फूड्स एंड बेवरेज) भी फूड प्रोडक्शन इंडस्ट्रीज, मार्केटिंग, प्रिजर्वेशन आदि में टीम की तरह काम कर सकते हैं। ऐसे में होम साइंस या न्यूट्रिशन में सभी स्नातक छात्रों के सामने कई ऑप्शन मौजूद हैं। फूड टेक्नोलॉजी क्षेत्र में स्नातक डिग्री में प्रवेश पाने के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी अथवा मैथमेटिक्स विषयों के साथ 10 अ 2 में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए। एमएससी कोर्स करने के लिए फूड टेक्नोलॉजी से संबंधित विषयों में स्नातक की डिग्री आवश्यक है।

पढ़ाई में शामिल विषय- फूड टेक्नोलॉजी तथा इससे संबंधित कोर्सेज के अंतर्गत खाद्य पदार्थो के उचित रख-रखाव से लेकर पैकेजिंग, फ्रीजिंग आदि की तकनीकी जानकारियां शामिल होती हैं। इसके अंतर्गत पोषक तत्वों का अध्ययन, फल, मांस, वनस्पति व मछली प्रसंस्करण आदि से संबंधित जानकारियां भी दी जाती हैं।

संभावनाएं- चूंकि भारत में भी अब भारी तादाद में लोग संशोधित व डिब्बाबंद खाद्य-पदार्थ इस्तेमाल करने लगे हैं, यही कारण है कि यह क्षेत्र मल्टीनेशनल कंपनियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। इसी आकर्षण के कारण कई मल्टीनेशनल कंपनियां जैसे मैक्डोनाल्ड, पेप्सी, कोका कोला के साथ ही कई विदेशी कंपनियां भी अपना कारोबार भारत में बढ़ाती जा रही हैं, जिससे इस फील्ड में शिक्षा हासिल कर रहे छात्रों के लिए ढेरों ऑप्शन व ऑपरच्युनिटी मौजूद है।

प्लेसमेंट और प्रॉस्पेक्ट्स- फूड टेक्नोलॉजिस्ट का कार्य मुख्य रूप से होटल, फूड इंडस्ट्रीज, क्वालिटी कंट्रोल, हॉस्पिटल, पैकेजिंग, इंडस्ट्रीज, डिस्टिलरीज, सॉफ्ट ड्रिंक फैक्टरी, राइस मिल्स आदि में होता है। साथ ही मै नुफैक्चरिंग इंडस्ट्री में भी काम करने का मौका मिलता है। चाहें तो, अपनी विशेषताओं और ज्ञान के जरिए स्टोरेज मॉनिटरिंग, प्रोसेसिंग, हाइजिन टेम्प्रेचर मॉनिटरिंग (जांच व निगरानी करना) और एक्सपेरिमेंटिंग आदि में भी जॉब हासिल कर सकते हैं । फूड टेक्नोलॉजी को र्स करने के बाद खुद का बिजनेस या स्वरोजगार भी शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा तकनीकी संस्थाओं में शैक्षिक या प्रशिक्षक के पद पर भी कार्य कर सकते हैं। साथ ही इस फील्ड में शिक्षा हासिल करने के बाद फूड प्रॉसेसिंग इंडस्ट्री अलग-अलग फील्ड के प्रोफेशनल्स को मैनेजेरियल लेवल पर भी नियुक्ति प्रदान करता है। जैसे कि इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन मैनेजर्स मैनुफैक्चरिंग प्लांट्स के ऑपरेशन को कंट्रोल करने, मार्केटिंग औ र सेल्स कर्मचारी सेल्स प्रमोशन और मार्केटिंग में कार्यरत हो ने के अलावा फूड टेक्नोलॉजिस्ट रिसर्च लैबोरेट्रीज या ऑन प्रोडक्शन लाइंस में भी काम करने का मौका हासिल कर सकते हैं। जिसके तहत नया प्रोडक्ट डेवलप करने के साथ तैयार माल को टेस्ट करना और फूड क्वालिटी को कंट्रोल करने की जिम्मेदारी निभाते हैं। फूड टेक्नोलॉजिस्ट भविष्य पब्लिक सेक्टर के साथ प्राइवेट सेक्टर में भी उज्ज्वल है क्योंकि यहां सैलरी भी अच्छी मिलती है। उद्यम में भी लाभप्रद संभावना है, खासकर फूड प्रोसेसिंग बिजनेस में। जुलाई, 1988 में मिनिस्ट्री ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की स्थापना हुई थी, जो फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के विकास को प्रोत्साहित, नई दिशा देने के लिए स्थापित किया गया था। भारत में भी इन दिनों फॉरेन-टाइ-अप्स के साथ प्रोसेस्ड फूड चेन्स का विकास, फूड टेक्नोलॉजी फील्ड में जॉब प्रॉसपेक्टस को और भी बेहतर कर रहा है।

कार्य विवरण- फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के तहत वे सभी कार्य शामिल हैं, जिनसे खाने वाली चीजों की गुणवत्ता, स्वाद और रंग-रूप बरकरार रह सके। जैसे- मक्खन, सॉफ्ट ड्रिंक, जैम व जेली, फ्रूट जूस, बिस्कुट, आइसक्रीम आदि। इसके अलावा कच्चे और बने हुए माल की गुणवत्ता, स्टोरेज तथा हाइजिन आदि की निगरानी भी फूड टेक्नोलॉजिस्ट करते हैं। इसके अलावा फूड टेक्नोलॉजिस्ट मुख्य रूप से मैनुफैक्चरिंग प्रोसेस, फूड और ड्रिंक प्रोडक्ट्स के रेसेपी डेवलप करते हैं। नई रेसेपी और कॉन्सेप्ट को इन्वेंट करने के लिए डिस्कवर किये गये इंग्रीडिएंट्स और टेक्नोलॉ जी पर काम करते हैं। साथ ही फूड को सुधारने व परिवर्तित करने का भी काम करता है जैसे फैट-फ्री प्रोडक्ट्स और रेडी मील्स तैयार करना। इसके अलावा करंट कंज्यूमर मार्केट और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी रिसर्च करना ताकि न्यू प्रोडक्ट कॉन्सेप्ट डेवलप किया जा सके। सप्लायर्स से रॉ मटीरियल और अन्य सामग्री सलेक्ट करना भी इन्हीं का कार्य होता है।

गुण- फूड टेक्नोलॉजिस्ट को साइंटिफिक सोच वाला होना जरूरी है। बेहतरीन ऑब्जर्वेशन, साइंटिफिक और टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट में रु चि, हेल्थ व न्यूट्रिशन में रु चि, रिसर्च और डे वलपमेंट में खासकर ध्यान देने की क्षमता हो। इसके साथ ही जिम्मेदारी व टीम के साथ काम करने के अलावा कम्युनिकेशन स्किल भी बेहतर होनी चाहिए।

वेतन-शुरुआती स्तर पर फ्रेशर 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह आसानी से कमा सकते हैं। अनुभवी होने पर 30 से 35 हजार रु पये भी प्रतिमाह वेतन प्राप्त कर सकते हैं।

उपलब्ध कोर्स
बीएससी इन फूड साइंस बीएससी और एमएससी विद फूड एंड न्यूट्रिशन बीएससी इन फूड टेक्नोलॉजी (3 वर्ष) बीएससी विद फूड प्रिजर्वेशन (3वर्ष) बीटेक इन फूड इंजीनियरिंग (4 वर्ष) एमएससी इन फूड टेक्नोलॉजी (2वर्ष) एमएससी इन फूड साइंस फूड एनालिसिस और क्वालिटी एश्योरेंस/फूड साइंस टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा कोर्स

संस्थान

इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, मैदानगढ़ी, दिल्ली, यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली, दिल्ली जी. बी. पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रिकल्चर ऐंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर, उत्तराखंड बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, झांसी, उत्तर प्रदेश कानपुर यूनिवर्सिटी, कानपुर, उत्तर प्रदेश आचार्य एनजी रंगा एग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी, राजेन्द्र नगर, हैदराबाद कोलकाता विश्वविद्यालय, कोलकाता महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी, प्रियदशर्नी हिल्स, कोट्टयम, केरल, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर, पंजाब तमिलनाडु एग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी कोयम्बटू र मुंबई यूनिवर्सिटी, मुंबई नागपुर यूनिवर्सिटी, नागपुर सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट, मैसूर
(अंशुमाला,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,1.3.11)