Friday, May 5, 2017

केमोइंफॉर्मेटिक्स: रासायनिक सूचनाओं में करियर

केमोइंफॉर्मेटिक्स केमिस्ट्री की सबसे तेजी से विकसित होने वाली शाखा बन चुकी है। आने वाले समय में केमोइंफॉर्मेटिक्स का कोर्स करने वाले छात्रों को देश और विदेश में पर्याप्त अवसर मिलेंगे। इस बारे में बता रही हैं नमिता सिंह
इस समय हम ग्लोबल विलेज में जी रहे हैं। आईटी ने कई विधाओं को खुद से जोड़ कर उनका कायाकल्प करने का बीड़ा उठाया है। इसी प्रक्रिया के तहत आईटी का रसायन विज्ञान के साथ सम्मिलन दिन-ब-दिन परवान चढ़ता जा रहा है। इसके अंतर्गत रासायनिक सूचनाओं का संग्रहण, प्रबंधन, विश्लेषण एवं उनका समाधान संबंधी कार्य आते हैं। इस प्रचलित एवं कारगर विधा को नाम दिया गया ‘केमोइंफॉर्मेटिक्स’ अर्थात रसायन सूचना विज्ञान। केमोइंफॉर्मेटिक्स का सबसे ज्यादा उपयोग दवा बनाने वाली कंपनियां दवाओं की खोज में करती हैं। बाजार का विश्लेषण यही बता रहा है कि संभावनाओं एवं विस्तार को देखते हुए आने वाले कुछ वर्षों में यह क्षेत्र और अधिक चमकदार एवं रोजगारपरक हो सकता है, क्योंकि इसका ताल्लुक काफी हद तक आईटी से जुड़ा हुआ है।
बायोइंफॉर्मेटिक्स के दो दशक बाद केमोइंफॉर्मेटिक्स शाखा चलन में आई। आमतौर पर लोग बायोइंफॉर्मेटिक्स व केमोइंफॉर्मेटिक्स को एक ही मानते हैं, जबकि दोनों में काफी विविधता है। बायोइंफॉर्मेटिक्स में जहां कई तरह की विधाओं को शामिल किया जाता है, वहीं केमोइंफॉर्मेटिक्स उसी से निकली एक शाखा है, जिसमें ड्रग डिजाइन के प्रयोग व थ्योरी को भली-भांति समझा जाता है।
उच्च शिक्षा की दरकार
रसायन विज्ञान एवं आईटी से संबंधित होने के कारण इसके पाठय़क्रम में दाखिला लेने के लिए छात्रों को रसायन विज्ञान में कम से कम बीएससी होना चाहिए, तभी एमएससी में प्रवेश मिल पाता है। एमएससी दो वर्षीय पाठय़क्रम है। इसके उपरांत रिसर्च एवं एकेडमिक फील्ड में जाने का मार्ग प्रशस्त होता है। अधिकांश संस्थान स्नातक के पश्चात एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा एवं डिप्लोमा जैसे कोर्स भी करवाते हैं। इसकी अवधि एक से लेकर डेढ़ वर्ष तक होती है। विदेशों में सबसे ज्यादा प्रचलित एमएससी इन केमोइंफॉर्मेटिक्स है, जबकि भारत में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा की अधिक डिमांड है। कई संस्थान डिस्टेंस लर्निंग के जरिए भी पीजी डिप्लोमा कोर्स कराते हैं। योग्यता व कोर्स अवधि रेगुलर की तरह ही होती है।
पाठ्य़क्रम 
एमएससी इन केमोइंफॉर्मेटिक्स के अंतर्गत छात्रों को विशेष रूप से डाटा बेस, प्रोग्रामिंग, वेब टेक्नोलॉजी, डाटा माइनिंग एवं कम्प्यूटर द्वारा ड्रग डिजाइनिंग आदि कार्य शामिल हैं। पाठय़क्रम के दौरान छात्रों से कई तरह के प्रायोगिक प्रशिक्षण एवं प्रबंधन संबंधी कार्य कराए जाते हैं, जबकि पीएचडी आदि पाठय़क्रमों के अंतर्गत रिसर्च वर्क में ड्रग की खोज, डिजाइन एवं उसकी कंपोजिशन का अध्ययन किया जाता है। वैसे भी केमिस्ट्री की निर्भरता दिन-प्रतिदिन कम्प्यूटर पर बढ़ती ही जा रही है। नए आने वाले छात्रों की केमिस्ट्री के प्रति रुचि को देख कर पाठ्य़क्रम की रूपरेखा काफी हद तक उचित भी है। जहां तक पीजी डिप्लोमा के पाठय़क्रम का सवाल है तो वह विभिन्न मॉडय़ूल में बांटा गया है। इसमें केमोइंफॉर्मेटिक्स की बेसिक जानकारी से लेकर मॉडर्न कॉम्बिनेशन ऑफ केमिस्ट्री, ड्रग डिजाइन, केमिकल इंफॉर्मेशन सोर्स, मेडिसिनल केमिस्ट्री आदि को विस्तार से बताया जाता है।
स्वयं से सरोकार
पाठ्य़क्रम अथवा रोजगार के लिए छात्रों को अपने अंदर कई तरह के विशिष्ट गुण लाने पड़ते हैं। सर्वप्रथम उन्हें केमिस्ट्री के प्रति रुचि बढ़ाने, कम्प्यूटर स्किल्स मजबूत करने व रिसर्च वर्क के प्रति उत्साह जागृत करना आवश्यक हो जाता है। इसके अलावा इसमें प्रोफेशनल्स को धैर्यवान व परिश्रमी होना जरूरी है, क्योंकि कई बार किसी रिसर्च अथवा प्रोजेक्ट पर काम के दौरान लंबा समय व्यतीत होता है। साथ ही टीम वर्क, अनुशासन व बाजार में बदलाव को स्वीकार करने का गुण होना भी जरूरी है।
कार्यक्षेत्र का संसार
पिछले तीन वर्षों में इस क्षेत्र में संभावनाएं काफी प्रबल हुई हैं। खासतौर पर फार्मास्यूटिकल, एग्रोकेमिकल एवं बॉयोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज में प्रशिक्षित लोगों की भारी कमी महसूस की गई है। केमोइंफॉर्मेटिक्स में एमएससी करने वाले छात्र प्रारंभ में केमोइंफॉर्मेटिक्स साइंटिस्ट, प्रोजेक्ट मैनेजर, केमोइंफॉर्मेटिक्स डेवलपर, ड्रग डिस्कवरी साइंटिस्ट, एसोसिएट रिसर्च साइंटिस्ट, कम्प्यूशनल केमिस्ट, केमिकल डाटा साइंटिस्ट, रेगुलेटरी अफेयर्स, सीनियर इंफार्मेशनल एनालिस्ट, इंफार्मेशनल ऑफिसर, डाटा ऑफिसर, सॉफ्टवेयर टैस्टर, सपोर्ट एनालिस्ट, बिजनेस एनालिस्ट कार्यक्षेत्र के अवसरों को देखते हुए निम्न क्षेत्रों में सामने आ सकते हैं-
फार्मास्यूटिकल/केमिकल इंडस्ट्री सेक्टर,
आईटी/कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर सेक्टर,
हॉस्पिटल/हेल्थ ऑथारिटी,
शोध के क्षेत्र में
आमदनी
इस क्षेत्र में आमदनी भी भरपूर होती है। शुरुआती दिनों में भले ही कुछ संघर्ष की स्थिति आ जाए, पर एक समय के बाद सब कुछ पटरी पर आ जाता है। प्रारंभ में प्रोफेशनल्स को 15-20 हजार रुपए प्रतिमाह मिलते हैं। अनुभव बढ़ जाने पर यही रकम 35-40 हजार रुपए प्रतिमाह तक पहुंच जाती है। इसके अलावा फ्रीलांसिंग में प्रतिदिन या पैकेज के हिसाब से पेमेंट दिया जाता है। विदेशों में काफी आकर्षक पैकेज मिलता है।
संभावनाएं
छात्रों को रोजगार मिलने की आस एवं संभावनाओं को देखते हुए प्रमुख सरकारी एवं गैर सरकारी कंपनियों में अवसर सामने आते रहते हैं। देश के साथ-साथ विदेश में भी रोजगार के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। पार्ट टाइम व स्वतंत्र रूप से भी इस क्षेत्र में काम किया जा सकता है।
एक्सपर्ट्स व्यू/
देश में भी हैं बेशुमार मौकेएक समय ऐसा था, जब कोर्स करने के पश्चात छात्रों को विदेश की ओर रुख करना पड़ता था। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। वर्तमान समय केमोइंफॉर्मेटिक्स के लिए काफी अच्छा है। सफलतापूर्वक कोर्स करने के पश्चात कई भारतीय कंपनियां छात्रों को आकर्षक पैकेज पर काम दे रही हैं। सबसे ज्यादा मौके फार्माकेमिकल में सामने आ रहे हैं, जबकि पढ़ाई के लिहाज से डिस्टेंस लर्निंग का भी चलन बढ़ा है। जिन छात्रों को डिस्टेंस लर्निंग की प्रक्रिया के तहत कोर्स समझ में नहीं आता, उन्हें फैकल्टी उपलब्ध करा कर इसके प्रमुख टॉपिक से अवगत कराया जाता है। इसमें मेल व फीमेल दोनों के लिए समान रूप से अवसर मिलते हैं। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे जो भी पढ़ें, पूरे मन से पढ़ें।
अंशुल कुमार, प्रोग्राम डायरेक्टर,
इंस्टीटय़ूट ऑफ केमोइंफॉर्मेटिक्स,
नोएडा
फैक्ट फाइल
प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान
भारतीय संस्थान
मालाबार क्रिश्चियन कॉलेज, कोझिकोड
वेबसाइट
 - www.mcccalicut.org
इंस्टीटय़ूट ऑफ केमोइंफॉर्मेटिक्स स्टडीज, नोएडा
वेबसाइट
 - www.cheminformaticscentre.org
जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
वेबसाइट
 - www.jamiahamdard.ac.in
विदेशी संस्थान
जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी,
वेबसाइट
 -  www.jhu.edu
मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी,
वेबसाइट
 - www.manchester.ac.uk
शेफिल्ड यूनिवर्सिटी,
वेबसाइट
 - www.shef.ac.uk/courses
इंडियाना यूनिवर्सिटी,
वेबसाइट
 - www.informatics.indiana.edu

Monday, May 1, 2017

7 नए कोर्सेज जिनमें लाखों में सैलरी

स्प्रिचुअल थियोलॉजी से लेकर फूड फोटोग्राफी तक कई नए कोर्सेज चलन में हैं. यहां ऐसे ही कुछ कोर्सेज की जानकारी दी जा रही हैं, जिन्हें चुनकर आप अपना करियर बना सकते हैं..1. लग्जरी ब्रांड मैनेजमेंट
अगर आपमें अच्छी चीजों के प्रति गहरा लगाव है और आपके अंदर सौंदर्यबोध है तो लग्जरी ब्रांड मैनेजमेंट आपके लिए अच्छा करियर हो सकता है. भारत में जिस तरह से दिनोदिन लग्जरी मार्केट विकसित होती जा रही है, उसे देखते हुए इस क्षेत्र में स्किल्ड रिटेल और सर्विस  प्रोफेशनल्स के लिए काफी मौके बनते जा रहे हैं.
लंदन स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मैनेजमेंट लग्जरी मैनेजमेंट में स्पेशलाइजेशन के साथ एमबीए का कोर्स करा रहा है. आप यह कोर्स फुलटाइम, पार्टटाइम या ऑनलाइन कर सकते हैं. रेगुलर एमबीए की पढ़ाई के साथ-साथ यह कोर्स स्टुडेंट्स को यह भी सिखाता है कि लग्जरी ब्रांड के लिए मार्केटिंग रणनीतियों और ब्रांड वैल्यू के बीच किस तरह संबंध बनाए जाएं.
नौकरी के मौके
कोर्स करने वाले ग्रेजुएट लग्जरी सेल्स एडवाइजर, विजुअल मर्चेडाइजर, लग्जरी इवेंट प्लानर बन सकते हैं. फैशन और लग्जरी कंसल्टेंट या वार्डरोब मैनेजर के तौर पर भी काम पा सकते हैं.
वेतन
शुरुआती वेतन प्रति माह 40,000 रुपये से 45,000 रुपये के बीच हो सकता है. यह आगे चलकर प्रति माह 5 लाख रु. तक भी पहुंच सकता है. इन नौकरियों में वेतन के अलावा कई तरह के इन्सेंटिव और अन्य सुविधाएं भी शामिल हो सकती हैं.
कहां से करें कोर्स? लंदन स्कूल ऑफ बिजनेस एंड फाइनांस के कई कैंपस लंदन, बर्मिंघम और मैनचेस्टर में हैं.
लग्जरी कनेक्ट बिजनेस स्कूल, गुडग़ांव.
www.isbf.org.uk
www.lcbs.edu.in;admission@org.uk
2. फूड फोटोग्राफी और स्टाइलिंग
जायकेदार और मन को लुभाने वाली मिठाइयों की आकर्षक तस्वीर खींचने का गुर सीखना हो तो लॉ कॉर्डन ब्लू के फूड फोटोग्राफी और स्टाइलिंग वर्कशॉप में दाखिला लें . इस कोर्स में आपको खाद्य पदार्थों की फोटोग्राफी के बुनियादी और मुख्य सिद्धांत सिखाए जाते हैं. इस कोर्स में फूड स्टाइलिंग के लिए प्लेट के डिजाइन, सही लाइटिंग और कैमरे की तकनीक के बारे में सभी जरूरी बारीकियां सिखाई जाती हैं.
आजकल जैसे हॉस्पिटेलिटी इंडस्ट्री में तेजी से इंटरनेशनल रेस्तरां श्रृंखलाओं का स्वागत हो रहा है और देशी रेस्तरां भी सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं, उसे देखते हुए यह कोर्स प्रशिक्षित फूड फोटोग्राफरों और स्टाइलिस्टों के लिए काम के बेहतरीन अवसर उपलब्ध करा सकता है. यह तीन दिन का कोर्स है और इसके लिए किसी शैक्षिक योग्यता की जरूरत नहीं है.
कोर्स की फीस: 550 पाउंड
नौकरी के मौके:
नौकरी के मौके आवेदकों को लग्जरी और फूड पत्रिकाओं में काम मिल सकता है. रेस्तरां, हॉस्पिटेलिटी कंसल्टेंट और फूड ब्लॉगिंग जैसी फील्ड हैं.
वेतन:
आप 30,000 रुपये और उससे ऊपर कमा सकते हैं, जो आपके काम पर निर्भर करता है.
कहां से करें कोर्स?
यह कोर्स सितंबर, 2015 में लंदन में ला कॉर्डन ब्लू कैंपस में आयोजित किया जा रहा है.
www.cordonbleu.edu
3 पॉलिटिकल कम्युनिकेशंस:
पिछले कुछ साल में राजनीति और चुनाव प्रचार के तरीकों में भारी बदलाव आया है, जैसा हाल के चुनावों में देखा गया है. राजनैतिक पार्टियां चुनाव के दौरान और उसके बाद भी अपने संपर्क विभाग की मदद के लिए मंजे हुए पेशेवर लोगों की सेवाएं लेने लगी हैं. गुडग़ांव स्थित द इंडियन स्कूल ऑफ कम्यूनिकेशंस एंड रेपुटेशन इन दिनों पॉलिटिकल कम्यूनिकेशंस में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स करा रहा है. इस कोर्स के तहत मैनेजिंग पॉलिटिकल सेंसटिविटीज, ऐज ऑफ सोशल इलेक्शंस और इवोल्युशन ऑफ पॉलिटिकल कम्यूनिकेशंस जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं. इन सभी विषयों में वर्तमान भारतीय राजनैतिक व्यवस्था पर विशेष जोर दिया जाता है.
नौकरी के मौके:
स्टूडेंट कोर्स करने के बाद राजनैतिक कार्यालयों में कम्यूनिकेशन मैनेजर की नौकरी पा सकते हैं या कम्यूनिकेशन कंसल्टेंसी एजेंसियों में काम कर सकते हैं.
वेतन:

नौकरी के पहले साल में 3.5 लाख से 4 लाख रुपये सालाना का वेतन पा सकते हैं.
कहां से करें कोर्स?
द इंडियन स्कूल ऑफ कम्यूनिकेशंस ऐंड रेपुटेशन
एमजीएफ मेट्रोपॉलिस, एमजी रोड, गुडग़ांव
www.scoreindia.org:office@scoreindia.org
4. टी टेस्टिंग:
आप अपनी सुबह की चाय के बारे में शायद एक राज की बात नहीं जानते हैं. आपकी मनपसंद चाय का स्वाद बढ़ाने के लिए चाय की पत्ती बनाने वाली कंपनियां लंबे समय से पेशेवर टी टेस्टरों की सेवाएं लेती आ रही हैं. ये टी टेस्टर चाय की पत्ती के स्वाद, उसकी क्वालिटी और तैयारी को जांचने के लिए पेशेवरों को नौकरी पर रखती हैं.
बेंगलुरू के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांटेशन मैनेजमेंट अपने सर्टिफिकेट प्रोग्राम के तहत चाय के बिजनेस मैनेजमेंट, मार्केट इन्फॉर्मेशन, टी टेस्टिंग की तकनीक और उसके तरीकों के बारे में अध्ययन कराता है. यह कोर्स टी बोर्ड ऑफ इंडिया और वाणिज्य मंत्रालय के सहयोग से कराया जाता है. टी उद्योग भी इस कोर्स को मान्यता देता है. इंस्टीट्यूट में टी टेस्टिंग की आधुनिक प्रयोगशाला मौजूद है, साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टी टेस्टिंग यूनिट के विशेषज्ञ स्टुडेंट्स को टी टेस्टिंग की तकनीक के बारे में शिक्षा देते हैं. स्टुडेंट्स को चाय को लेकर बाजार की जानकारी, मौकों और उसकी खपत के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाता है.
नौकरी के मौके:
कोर्स करने वाले ग्रेजुएट भारतीय और अंतरराष्ट्रीय चाय कंपनियों के अलावा चाय के खरीदारों के यहां भी नौकरियां पा सकते हैं. बेवरेज कंपनियां और चाय के बागान भी नौकरी के लिए अच्छी जगहें हैं.
वेतन:

शुरुआती वेतन सालाना 3 लाख रु. से 5 लाख रु. तक हो सकता है.
कहां से करें कोर्स
?
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांटेशन मैनेजमेंट, ज्ञान भारती कैंपस, पी.ओ. मलाथल्ली, बेंगलूरू
www.iipmb.edu.in;admissions@iipmb.edu.in
5. स्प्रिचुअल थियोलॉजी
आध्यात्मिकता, जो साइंस, आर्ट और आस्था पर आधारित अलग किस्म का अध्ययन है, बहुत से लोगों के लिए हैरान करने वाला विषय है. पर जो स्टुडेंट्स आध्यात्मिकता में दिलचस्पी रखते हैं, वे बेंगलूरू के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्प्रिचुअलिटी से डिप्लोमा कर सकते हैं. इस कोर्स में स्टुडेंट्स को पूरब और पश्चिम की आध्यात्मिकता के बारे में जानकारी दी जाती है. इसमें मनोविज्ञान, चर्च के उपदेश, यूथ एनिमेशन और सिविल लॉ के बारे में अध्ययन कराया जाता है. छात्रों को वैज्ञानिक विधिशास्त्र पर आधारित शोध निबंध तैयार करना होता है. उन्हें आश्रम के जीवन, अलग-अलग धर्मों के कार्यक्रमों और प्रार्थना सभाओं में हिस्सा लेना होता है ताकि उन्हें विभिन्न धर्मों में निहित आध्यात्मिक ज्ञान का परिचय मिल सके.
नौकरी के मौके:
इसके ग्रेजुएट आध्यात्मिक परामर्शदाता के रूप में काम कर सकते हैं. समाज सेवा में रुचि रखने वाले स्कूल में बच्चों को या घरों में बड़ी उम्र के लोगों को आध्यात्मिक सलाह या उपदेश दे सकते हैं.
वेतन: आध्यात्मिक कंसल्टेंट 18,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पा सकते हैं.
कहां से करें कोर्स?

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्प्रिचुअलिटी, पी.बी. नंबर 5639, डॉ. राजकुमार रोड, राजाजी नगर, फर्स्ट ब्लॉक, बेंगलूरू
www.iisirituality.org;iispirituality@yahoo.com
6 फुटबॉल इंडस्ट्रीज में एमबीए:
यूनिवर्सिटी ऑफ लीवरपूल विश्व में एकमात्र यूनिवर्सिटी है जो फुटबॉल इंडस्ट्रीज में एमबीए की डिग्री देती है. इस कोर्स का लक्ष्य स्टुडेंट्स को आधुनिक स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में मैनेजमेंट की नौकरी के लिए जरूरी योग्यता उपलब्ध कराना है. फुटबॉल मैनेजमेंट में बिजनेस के सिद्धांतों को लागू करके स्टुडेंट बिल्कुल अलग तरह से मैनेजमेंट थियोरी को समझने लगते हैं. इस कोर्स के तहत प्रैक्टिकल वोकेशनल ट्रेनिंग भी दी जाती है, जिससे स्टुडेंट्स में कम्युनिकेशन और लीडरशिप की योग्यता विकसित होती है ताकि वे पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा लोकप्रिय फुटबॉल के खेल में मैनेजर के तौर पर अपना करियर बना सकें.
लीवरपूल उत्तर-पश्चिम इंग्लैंड में फुटबॉल की गतिविधियों का केंद्र है, जिस वजह से इस कोर्स के स्टुडेंट्स को इंग्लिश फुटबॉल क्लबों से संपर्क बनाने का मौका मिल जाता है. यह यूनिवर्सिटी यूनियन ऑफ यूरोपियन फुटबॉल एसोसिएशनों और कई सारे फुटबॉल क्लबों जैसे संगठनों के साथ कार्य-आधारित प्रोजेक्ट करती है. यहां कोर्स के दौरान इन संस्थानों से अतिथि वक्ता आते हैं और स्टुडेंट्स को अपने अनुभवों और जानकारियों से रू-ब-रू कराते हैं.
नौकरी के मौके:
इस कोर्स के ग्रेजुएट फुटबॉल क्लबों और विभिन्न लीग में मैनेजर की नौकरी पा सकते हैं और अपने ज्ञान को फुटबॉल के मैदान में लागू कर सकते हैं.
वेतन:
अलग-अलग क्लबों में वेतन भी अलग-अलग हो सकता है. फिर भी शुरुआती वेतन सालाना 20,000 पौंड से लेकर 25,000 पौंड तक हो सकता है.
कहां से करें कोर्स:
यूनिवर्सिटी ऑफ लीवरपूल फाउंडेशन
बिल्डिंग, ब्राउनलो हिल, लीवरपूल
www.IIv.ac.uk
7. एथिकल हैकिंग:
कंप्यूटर प्रेमियों के लिए यह अच्छी खबर है. वे अब कोडिंग के ऊबाऊ काम से हटकर कुछ बेहद चुनौतीपूर्ण काम कर सकते हैं. ज्यादातर लोग हैकिंग को खराब शब्द मानते रहे हैं और उसे चोरी वाला काम समझते हैं लेकिन अब ऐसे पेशेवर लोगों की मांग बढ़ रही है जो हैकिंग के खतरों को अच्छी तरह समझते हैं. ये लोग हैकिंग के सारे दांवपेच जानने के कारण उसके खतरों का मुकाबला कर सकते हैं और हैकिंग करने वालों की कोशिशें नाकाम कर सकते हैं. कोलकाता में इंडियन स्कूल ऑफ एथिकल हैकिंग के सह-संस्थापक अबीर अतार्थी और संदीप सेनगुप्त कहते हैं, 'इन दिनों हैकिंग की घटनाएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं इसलिए उन्हें रोकने के लिए हैकिंग के जानकार ऐसे पेशेवरों की जरूरत महसूस की जाने लगी है जो कॉर्पोरेट नेटवर्कों और वेबसाइटों को हैक होने से बचा सकें. कंपनी की अनुमति से एथिकल या वैध हैकर कॉर्पोरेट नेटवर्क की तह में जाता है और उसकी सुरक्षा के लिए कुछ नए उपाय निकालता है.'
इंडियन स्कूल ऑफ एथिकल हैकिंग वैध या नैतिक कहे जानी वाली हैकिंग पर सर्टिफिकेट कोर्स कराता है. इस कोर्स में यह भी सिखाया जाता है कि सुरक्षित कोडिंग कैसी लिखी जाए, ताकि वेबसाइटों को हैक होने से रोका जा सके. यह संस्थान कई तरह के अन्य विशेषज्ञता वाले कोर्स भी कराती है, जैसे कि नेटवर्क पेनेट्रेशन टेस्टिंग और वेब ऐप्लिकेशन पेनेट्रेशन टेस्टिंग और वेब ऐप्लिकेशन पेनेट्रेशन टेस्टिंग जिनका अध्ययन अतिरिक्त रूप से किया जा सकता है.
नौकरी के मौके:
एथिकल हैकरों को नेटवर्क पेनेट्रेशन टेस्टिंग और वेब पेनेट्रेशन टेस्टर के रूप में नौकरी मिल सकती है. वे खुद को आइटी सिक्योरिटी ऑडिटर और सिक्योरिटी एनालिस्ट के तौर पर पेश कर सकते हैं.
वेतन:
इस कोर्स के वे ग्रेजुएट जिनके पास बीटेक या एमसीए की भी डिग्री है उन्हें शुरुआती वेतन के तौर पर प्रति माह 27,000 से 30,000 रु. मिल सकते हैं. जिनके पास किसी अन्य विषय की डिग्री है उन्हें शुरुआत में प्रतिमाह 20,000 रु. का वेतन मिल सकता है.
कहां से करें कोर्स?
आइएसओईएच साल्टलेक
इनफिनिटी बेंचमार्क बिल्डिंग, साल्टलेक इलेक्ट्रानिक्स कांप्लेक्स, सेक्टर-5, कोलकाता.
www.isoeh.com;info@isoeh.com

Wednesday, April 26, 2017

साइबर एक्सपर्ट्स में कैरियर

आज लगभग हर क्षेत्र में इंटरनेट या कम्प्यूटर का उपयोग होने लगा है और इस पर लोगों की निर्भरता भी लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन कुछ लोग इसका बेजा इस्तेमाल भी करने लगे हैं। हैकर्स दूसरों के अकाउंट और महत्वपूर्ण डाटा को आसानी से उड़ा ले जाते हैं। हालांकि शुरू-शुरू के दिनों में इंटरनेट का इस्तेमाल महज रिसर्च और महत्वपूर्ण सूचनाओं को हासिल करने के उद्द्ददेश्य से ही किया जा रहा था, पर अब जिस तरह से इंटरनेट का प्रयोग तेजी से बढ़ने लगा है, कुछ उसी रफ्तार से साइबर क्राइम भी बढ़ रहा है। इससे निपटने के लिए साइबर लॉ और इसके एक्सपर्ट्स की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है।
साइबर क्राइम
पूरी दुनिया में साइबर स्पेस का अपना एक कानून है, जिसका मकसद इंटरनेट के माध्यम से होने वाले अपराधों पर लगाम लगाना है। इंटरनेट के जरिए अंजाम दिए जाने वाले अपराधों के हाइटेक रूप को ही साइबर क्राइम कहा जाता है। इसके अंतर्गत इंटरनेट द्वारा क्रेडिट कार्ड चोरी, ब्लैकमेलिंग, स्टॉकिंग, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क  फ्रॉड, पोर्नोग्राफी आदि जैसी आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया जाता है।
साइबर लॉ एक्सपर्ट्स की बढ़ती डिमांड
इन दिनों में जैसे-जैसे कम्प्यूटर पर लोगों की निर्भरता बढ़ती जा रही है। साइबर क्राइम बढ़ने की आशंका भी उसी रफ्तार से बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में साइबर क्राइम पर लगाम लगाने के लिए एक्सपर्ट्स की आने वाले दिनों में अच्छी खासी डिमांड होगी। सामान्य कानून और पुलिस इस तरह के अपराधों से निपटने में सक्षम नहीं है। साइबर क्राइम से निपटने में वे लोग ही माहिर होते हैं, जो साइबर लॉ केविशेषज्ञ होने के साथ-साथ साइबर क्रिमिनल्स की हाइटेक टेक्निक से भी वाकिफ होते हैं।
साइबर की दुनिया में एंट्री
यदि आप साइबर एक्सपर्ट बनकर साइबर क्राइम पर फंदा कसना चाहते हैं, तो 12वीं के बाद इस तरह के कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। कानून, टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट, अकाउंट आदि क्षेत्रों से जुड़े स्टूडेंट्स या पेशेवर लोग भी इस तरह के कोर्स कर सकते हैं। जिन छात्रों ने पहले से ही लॉ कोर्स किया है। उन्हें लॉ के केवल बेसिक्स ही नहीं पढ़ने होंगे, बल्कि साइबर क्राइम और इससे निपटने के तरीके सीखने होंगे।
साइबर लॉ कोर्स
साइबर लॉ का क्षेत्र काफी व्यापक है। यहां तकनीकी विषयों के साथ-साथ कानूनी पहलुओं का भी अध्ययन किया जाता है। इसके पाठ्यक्रम में टेक्नोलॉजी और लॉ दोनों विषयों के बारे में विस्तृत रूप से पढ़ाया जाता है। कोर्स स्ट्रक्चर इस प्रकार है :
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राइट आॅफ सिटीजंस और ई-गवर्नेंस
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इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ऐक्ट
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मैनेजमेंट और इससे जुड़े विषय
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लॉ आॅफ डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट
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बौद्धिक संपदा अधिकार संबंधी मुद्दे
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साइबर लॉ से जुड़े इंटरनेशनल पहलुओं का अध्ययन
करियर आॅप्शंस
इन दिनों साइबर लॉ के क्षेत्र में करियर आॅप्शंस की कोई कमी नहीं है। आइए जानते हैं, कौन-कौन से वे क्षेत्र हैं, जिनमें आप अपना करियर बना सकते हैं
रिसर्च का क्षेत्र : रिसर्चर के रूप में देश की प्रमुख यूनिवर्सिटी, लॉ-फर्म्स, मल्टीनेशनल कंपनियों, गवर्नमेंट डिपार्टमेंट्स आदि में काम करने का खूब मौके हंै। अब्रॉड यूनिवर्सिटीज में हायर स्टडी के लिए स्कॉलरशिप भी मिल सकती है।
ट्रेनिंग के क्षेत्र : मल्टीनेशनल कंपनियों, बड़े कॉर्पोरेट हाउसेज, सरकारी और पुलिस डिपार्टमेंट्स में ट्रेनर के तौर पर। देश के जाने-माने ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स के फैकल्टी मेंबर के तौर पर। साइबर लॉ को करियर के रूप में अपनाकर संबंधित मुकदमों के निपटाने वाले विशेषज्ञ वकील बन सकते हैं।
मनी मीटर 
भारत में साइबर क्राइम तेजी से उभरता हुआ करियर क्षेत्र है। इस लिए इस क्षेत्र में सैलरी पैकेज भी काफी दमदार है। शुरू-शुरू में आपकी सैलरी प्रति माह 15 से 20 हजार रुपये होती है।
इंस्टीट्यूट्स वॉच
  • सिम्बॉयोसिस सोसायटी लॉ कॉलेज, पुणे
  • आसियान स्कूल आॅफ सायबर लॉ, पुणे
  • सेंटर आॅफ डिस्टेंस एजुकेशन, हैदराबाद
  • इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद
  • साइबर लॉ कॉलेज, नावी
  • अमेटी लॉ स्कूल, दिल्ली
  • डिपार्टमेंट आॅफ लॉ, दिल्ली यूनिवर्सिटी


Monday, April 24, 2017

सॉइल साइंस में कॅरिअर

शिक्षण से लेकर रिसर्च और मिट्टी के संरक्षण से लेकर कंसल्टिंग जैसे कई अवसर कॅरिअर विकल्प के रूप में सॉइल साइंटिस्ट के लिए उपलब्ध हैं। एग्रीकल्चरल रिसर्च काउंसिल अपने सभी रिसर्च संस्थानों के साथ मृदा वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी नियोक्ता है। इसके अलावा सॉइल साइंटिस्ट डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर, विश्वविद्यालयों, कृषि सहकारी समितियों, खाद निर्माताओं और रिसर्च संस्थानों के द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। 

एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन के रूप में मृदा एक अहम तत्व है। मृदा विज्ञान में मिट्टी का अध्ययन एक प्राकृतिक संसाधन के रूप में किया जाता है। इसके अंतर्गत मृदा निर्माण, मृदा का वर्गीकरण, मृदा के भौतिक, रासायनिक तथा जैविक गुणों और उर्वरकता का अध्ययन किया जाता है। बीते सालों में फसल उत्पादन, वन उत्पाद और कटाव नियंत्रण में मिट्टी के महत्व को देखते हुए मृदा विज्ञान के क्षेत्र में रोजगार के ढेरों अवसरों का सृजन हुआ है। अब देश भर में बड़ी संख्या में सॉइल टेस्टिंग व रिसर्च लैबोरेट्रीज स्थापित हो रही हैं। इनमें से हरेक को प्रशिक्षित पेशेवरों की जरूरत होती है, जो मिट्टी के मापदंडों का मूल्यांकन कर सकें ताकि उसकी गुणवत्ता को सुधारा जा सके। ऐसे में यह क्षेत्र रोजगार के अवसरों से भरपूर है।
क्या करते हैं सॉइल साइंटिस्ट

सॉइल साइंटिस्ट या मृदा वैज्ञानिक का प्राथमिक काम फसल की बेहतरीन उपज के लिए मृदा का विश्लेषण करना है। मृदा वैज्ञानिक मृदा प्रदूषण का विश्लेषण भी करते हैं, जो उर्वरकों और औद्योगिक अपशिष्ट से उत्पन्न होता है। इन अपशिष्टों को उत्पादक मृदा में परिवर्तित करने के लिए उपयुक्त तरीके और तकनीकियां भी वे विकसित करते हैं। इन पेशेवरों के वर्क प्रोफाइल में बायोमास प्रॉडक्शन के लिए तकनीकियों का इस्तेमाल शामिल है। वनस्पति पोषण, वृद्धि व पर्यावरण गुणवत्ता के लिए भी वे काम करते हैं। उर्वरकों का उपयोग सुझाने में भी मृदा वैज्ञानिक की भूमिका अहम होती है। सॉइल साइंस प्रोफेशनल मृदा प्रबंधन पर मार्गदर्शन करते हैं। चूंकि मृदा वैज्ञानिक रिसर्चर, डवलपर और एडवाइजर होते हैं, इसलिए वे अपने ज्ञान का इस्तेमाल बेहतरीन मृदा प्रबंधन के लिए करते हैं। मिट्टी की उर्वरकता और पानी के सही इस्तेमाल के लिए वे सलाह देते हैं। मिट्टी के अधिकतम सही उपयोग के लिए भी मृदा वैज्ञानिक जिम्मेदार होते हैं। मृदा क्षरण को वे रोकते हैं और यह भी सुनिश्चित करते हैं कि मिट्टी की उर्वरकता बरकरार और बेहतर रहे। मृदा वैज्ञानिक फील्ड के साथ-साथ लैबोरेट्री में काम करते हैं। वे डेटा बैंक, सिम्युलेशन मॉडल्स और कम्प्यूटर का उपयोग करते हैं।
क्या पढ़ना होगा

अध्ययन के मुख्य क्षेत्रों में सॉइल केमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, फिजिक्स, पेडोलॉजी, मिनरोलॉजी, बायोलॉजी, फर्टिलिटी, प्रदूषण, पोषण, बायोफर्टिलाइजर, अपशिष्ट उपयोगिता, सॉइल हेल्थ एनालिसिस शामिल हैं। छात्र सॉइल साइंस में बैचलर या मास्टर डिग्री ले सकते हैं। साथ ही वे सॉइल फॉर्मेशन (वह प्रक्रिया जिससे मिट्टी बनती है।), सॉइल क्लासिफिकेशन (गुणों के अनुसार मिट्टी का वर्गीकरण), सॉइल सर्वे (मिट्टी के प्रकारों का प्रतिचित्रण), सॉइल मिनरोलॉजी (मिट्टी की बनावट), सॉइल बायोलॉजी, केमिस्ट्री व फिजिक्स (मिट्टी के जैविक, रसायनिक व भौतिक गुण), मृदा उर्वरकता (मृदा में कितने पोषक तत्व है), मृदा क्षय जैसे क्षेत्रों में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं।
कॅरिअर के विकल्प

शिक्षण से लेकर रिसर्च और संरक्षण से लेकर कंसल्टिंग जैसे कई अवसर कॅरिअर विकल्प के रूप में मृदा वैज्ञानिकों के लिए उपलब्ध हैं। कृषि, वॉटर रिहैबिलिटेशन प्रोजेक्ट्स, सॉइल एंड फर्टिलाइजर टेस्टिंग लैबोरेट्रीज, ट्रांसपोर्टेशन प्लानिंग, आर्कियोलॉजी, मृदा उत्पादकता, लैंडस्केप डवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में मृदा वैज्ञानिकों की खासी मांग है। क्रॉप एडवाइजर से लेकर संरक्षणकर्ता बनने तक सॉइल साइंस यानी मृदा विज्ञान में अनगिनत अवसर हैं। पर्यावरण और एग्रो-कंसल्टिंग फर्म्स में इस क्षेत्र के पेशेवरों की प्रबंधकीय और एग्जीक्यूटिव पदों पर खासी जरूरत है। ऐसा चलन न केवल भारत, बल्कि विदेशों में है। इस फील्ड में रिसर्च आपको आईसीएआर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंचता सकती है। इतना ही नहीं फसल उत्पादकता और मृदा स्वास्थ्य को बरकरार रखने के लिए आने वाले सालों में अधिक रोजगार उत्पन्न होगा।
अवसर

एग्रीकल्चरल रिसर्च काउंसिल अपने सभी रिसर्च संस्थानों के साथ मृदा वैज्ञानिक की सबसे बड़ी नियोक्ता है। इसके अलावा मृदा वैज्ञानिक डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर, विश्वविद्यालयों, कृषि सहकारी समितियों, खाद निर्माताओं और रिसर्च संस्थानों के द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। मृदा वैज्ञानिक अपना व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं। वे एनालिस्ट या मृदा सर्वेक्षक और डवलपमेंट कंसल्टेंट के रूप में काम कर सकते हैं। वे अपने सेवाएं एग्रीकल्चरल इंडस्ट्री, डवलपमेंट, कॉपरेटिव, कॉमर्शिलय बैंक के कृषि विभागों को दे सकते हैं।
यहां से करें कोर्स

इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट, पूसा
http://www.iari.res.in/

तमिलनाडु एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, कोयंबटूर
http://www.tnau.ac.in/

पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना
http://www.pau.edu/

यूनिवर्सिटी ऑफ कलकत्ता, कोलकाता
http://www.caluniv.ac.in/

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी
http://www.bhu.ac.in/