Saturday, June 25, 2016

अर्थसाइंस में भविष्य

पृथ्वी के उदगम, विकास और इसके अंदर और बाहर चलने वाली हलचलों को जानना खासा रोचक है। क्या अन्य ग्रहों पर कोई जीवन है? चन्द्रमा, मंगल, बृहस्पति और अन्य ग्रहों पर क्या संसाधन उपलब्ध हैं? इनमें क्या बदलाव आ रहे हैं? सिकुड़ते ग्लेशियरों का महासागरों और जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ रहा है? इस तरह की तमाम बातें और अनसुलझी पहेलियों के बारे में डाटा एकत्र करने का काम भूवैज्ञानिक करते हैं, उसका विश्लेषण करते हैं और एक निष्कर्ष पर पहुंचने का प्रयास करते हैं।
आज जब पूरे विश्व की धरती को लेकर तरह-तरह की खबरें आ रही हैं, इसे समझने और उसकी तह तक जाने के लिए ऐसे विशेषज्ञों की अच्छी-खासी जरूरत पड़ रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस क्षेत्र में कुशल वैज्ञानिक और विशेषज्ञों की मांग को ध्यान में रखते हुए अर्थसाइंस का पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू किया है। खास बात यह कि एमएससी इन अर्थसाइंस नाम से प्रचारित इस कोर्स में प्रवेश का दरवाजा बारहवीं कक्षा के बाद ही खोला गया है। पांच साल के इस कोर्स को पूरा करने के बाद सीधे करियर अपनाने या चुनने का मौका मिलता है।
क्या है कोर्स में?
इस कोर्स में पहले तीन साल स्नातक स्तर की पढ़ाई होती है। इसके बाद सीधे एमएससी में दाखिला मिलता है। कुल 10 सेमेस्टर हैं। इसमें अर्थसाइंस के विविध पहलुओं जैसे भूभौतिकी, जल विज्ञान, समुद्र विज्ञान, वातावरणीय विज्ञान, ग्रहीय विज्ञान, मौसम विज्ञान, पर्यावरणीय विज्ञान और मृदा विज्ञान को व्यापक तौर पर पढ़ने व समझने का मौका मिलता है। महाद्वीपों के खिसकने, पर्वतों के बनने, ज्वालामुखी फटने के क्या कारण हैं, वैश्विक पर्यावरण किस तरह परिवर्तित हो रहा है, पृथ्वी प्रणाली कैसे काम करती है, हमें औद्योगिक कूड़े का निपटान कैसे और कहां करना चाहिए, भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए समाज की ऊर्जा और पानी की बढ़ती मांग को कैसे पूरा किया जा सकता है, जिस तरह विश्व की जनसंख्या बढ़ रही है, क्या हम उसके लिए पर्याप्त खाद्य तैयार कर सकते हैं तथा किस प्रकार खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं, ये सब चीजें अर्थसाइंस के अध्ययन क्षेत्र में हैं।
भूवैज्ञानिक समस्याओं को सुलझाने और संसाधन प्रबंधन, पर्यावरणीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा मानव कल्याण के लिए सरकारी नीतियों को तैयार करने में प्रयुक्त अनिवार्य सूचना या डाटाबेस उपलब्ध कराते हैं। कोर्स के दौरान खनन, तेल व प्राकृतिक गैस, भूजल, कोयला, जियो तकनीक, जीआईएस व रिमोट सेंसिंग, पर्यावरण अध्ययन, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन जैसे कई क्षेत्रों को जानने और समझने का अवसर दिया जाता है। इनसे जुडे क्षेत्रों में से एक क्षेत्र में छात्रों को आगे चल कर स्पेशलाइजेशन चुनना होता है। यह काम एमएससी स्तर पर होता है। एमएससी में चार पेपर थ्योरी के हैं। इसके अलावा कई पेपर वैकल्पिक हैं, जिसमें से छात्र किसी एक को चुन कर अपना करियर बना सकता है।
कोर्स के दौरान छात्रों को दो तरह की ट्रेनिंग भी दी जाती है। पहले स्तर पर हर साल छात्रों को फील्ड ट्रिप पर भेजा जाता है। एमएससी स्तर पर समर ट्रेनिंग और समर इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग के अलावा डिजर्टेशन का काम पूरा करना होता है। यहां फील्ड वर्क के बहुत विकल्प हैं।
शाखाएं
अर्थसाइंस की कई शाखाएं हैं। इनमें पर्यावरण अध्ययन, माइनिंग, जियोटेक्नोलॉजी, डिजास्टर मैनेजमेंट, एटमॉसफेरिक साइंस, जियोहैजर्डस, क्लाइमेट चेंज, ओशनोग्राफी, रिमोट सेंसिंग, एप्लायड हाइड्रोजियोलॉजी, काटरेग्राफी और जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम आदि प्रमुख हैं।
अवसर हैं कहां
कोर्स के छात्र के लिए राज्य और केन्द्र सरकार में जियोलॉजिस्ट बनने के कई अवसर हैं। एमएससी पास छात्रों के लिए जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा समय-समय पर जियोलॉजिस्ट की भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की जाती है। सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड भी इस कोर्स के छात्रों को काम करने का अवसर मुहैया कराता है। इसमें हाइड्रोजियोलॉजिस्ट के रूप में उसी स्केल पर नियुक्ति होती है, जिस स्केल पर जियोलॉजिस्ट की। इनके अलावा पीएचडी करने के बाद साइंटिस्ट पद पर भर्ती होती है। ये सभी पद ग्रेड ए स्तर के अधिकारी के हैं। रिसर्च संस्थाओं के अलावा आजकल निजी कंपनियों में एग्जिक्यूटिव के रूप में भी क्लास वन पद पर इसके विशेषज्ञ रखे जा रहे हैं।
ओएनजीसी, वेदांता, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड, ईएसएसआर, केर्न इंडिया जैसी कई कंपनियां हैं, जहां इनकी मांग है। पीएचडी करने वालों के लिए रिसर्च एसोसिएट और अध्यापन के भी मौके हैं। इसके अलावा इनकी मांग देश में जहां पेयजल के लिए काम हो रहा है या फिर सीमेंट, माइनिंग आदि के कामों में इस कोर्स के छात्रों की मांग है।
दाखिला कैसे
इसमें बारहवीं की मेरिट के आधार पर दाखिला दिया जाता है। साइंस के छात्र के लिए बारहवीं में भौतिकी, गणित और रसायनशास्त्र पढ़ा होना जरूरी है, तभी उसे दाखिला दिया जाता है। हंसराज कॉलेज इस कोर्स की कट ऑफ लिस्ट निकाल कर मेरिट के हिसाब से दाखिला देता है। आईआईटी प्रवेश परीक्षा पास करने वाले को कट ऑफ में 5 फीसदी की छूट दी जाती है। ओबीसी वर्ग के लिए कट ऑफ में दस फीसदी तक रियायत है।
फैक्ट फाइल
कोर्स कराने वाले संस्थान
इस कोर्स की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में होती है। हालांकि दाखिला हंसराज कॉलेज में हो रहा है। वहां छात्रों को मुख्य पेपर के लिए नहीं, बल्कि उसके साथ पढ़ाए जाने वाले स्पेशलाइजेशन पेपरों के लिए जाना होता है। मुख्य कोर्स की पढ़ाई और क्लास जियोलॉजी विभाग में होती है। कुल 25 सीटें हैं।
विश्वविद्यालय में इसके अलावा जियोलॉजी ऑनर्स का कोर्स रामलाल आनंद कॉलेज में चलाया जा रहा है, लेकिन अर्थसाइंस का सिलेबस इससे थोड़ा भिन्न है। यह कोर्स इसके अलावा देश में आईआईटी खड़गपुर और रुड़की में चलाया जा रहा है।
दिल्ली विश्वविद्यालय, हंसराज कॉलेज
आईआईटी, खड़गपुर और रुड़की
पांडिचेरी यूनिवसिटी, पुड्डुचेरी
इंडियन स्कूल ऑफ माइंस, धनबाद
फैक्ट फाइल
स्कॉलरशिप
इस कोर्स में आईआईटी संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए आयोजित गेट पास करने के बाद छात्रों को 8 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। एमएससी के बाद एमफिल या पीएचडी की पढ़ाई पूरी करने के लिए जेआरएफ यानी जूनियर रिसर्च फेलोशिप के रूप में करीब 20 हजार रुपये मिलते हैं।
एमफिल स्तर पर केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में सरकार की ओर से करीब तीन हजार रुपए प्रतिमाह स्कॉलरशिप दी जाती है।
पीएचडी में यह राशि पांच हजार प्रतिमाह है। अर्थ विज्ञान के क्षेत्र में शोध कार्य के लिए अन्य सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं भी स्कॉलरशिप देती हैं। यह रिसर्च कार्यों, पीएचडी या पोस्ट डॉक्टरेट फेलोशिप के लिए दी जाती है।
वेतन
इस कोर्स के छात्रों को रिसर्च संस्थान 30 हजार से लेकर 40 हजार तक के पैकेज पर ले जा रही हैं। निजी क्षेत्रों में युवाओं की सैलरी स्किल को देखते हुए तय की जाती है। जियोलॉजिस्ट का वेतनमान भी 40 हजार रुपये से 50 हजार रुपये है।
कॉलेज शिक्षण और रिसर्च एसोसिएट के रूप में वेतनमान शुरुआती तौर पर 40 से 45 हजार रुपये है।
कोचिंग संस्थान
कोर्स में दाखिला आमतौर पर 12वीं के अंकों के आधार पर होता है। भौतिकी, रसायनशास्त्र और गणित की पृष्ठभूमि से लैस छात्रों को ही इंटीग्रेटेड एमएससी अर्थसाइंस में दाखिला मिलता है। अगर चाहें तो बारहवीं के बोर्ड में इन विषयों में अच्छे अंक लाने के लिए कोचिंग संस्थान की मदद ले सकते हैं। अपने पास किसी स्तरीय कोचिंग का चुनाव कर सकते हैं। जो छात्र आईआईटी प्रवेश परीक्षा में सफल होकर इधर आना चाहते हैं, वे भी कोचिंग की मदद ले सकते हैं।
एजुकेशन लोन
कॉलेज में इससे जुड़े कोर्स में दाखिले की फीस बहुत कम है, इसलिए लोन की जरूरत नहीं पड़ती। विदेश में पीचएडी की पढ़ाई के लिए बैंक में लोन आदि की व्यवस्था है।
अवसर 
स्नातक की डिग्री हासिल कर चुके छात्रों के लिए बीएड करने के बाद शिक्षण, टूरिज्म में सर्टिफिकेट कोर्स करके टूर एंड ट्रेवल्स एजेंसी आदि में काम के अवसर मिलते हैं। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होकर बैंक व अन्य निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों में नौकरी कर सकते हैं। सरकारी क्षेत्र की ओर देखें तो यूपीएससी की परीक्षा में शामिल होकर आईएएस, आईपीएस बन सकते हैं।
अगर इतिहास की अच्छी समझ है तो ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनने वाले धारावाहिक या फिल्म में पटकथा लेखन का काम कर सकते हैं। एमए, एमफिल करने के बाद कॉलेजों में अध्यापन का काम करने के काफी अवसर हैं। पुरातत्व विभाग से डिप्लोमा कोर्स करने के बाद केन्द्र व राज्य सरकार के संग्रहालयों में काम किया जा सकता है।

Thursday, June 23, 2016

वित्तीय बाजार में कैरियर

पारंपरिक इंजीनियर, डॉक्टर या बैंक कर्मचारी से इतर शेयर बाजार, कमोडिटी मार्केट, प्राइवेट इक्विटी और म्युचुअल फंड का ब्रेन कारोबारियों के साथ-साथ नौकरी करने से इच्छुक को भी पसंद आ रहा है। स्टॉक मार्केट शब्द जितना छोटा है, कैरियर के लिहाज से इसमें संभावनाएं उतनी ही अधिक हैं। आमतौर पर स्टॉक मार्केट को ट्रेडिंग से ही जोड़कर देखा जाता है। दरअसल ट्रेडिंग के अलावा भी स्टाक मार्केट से जुड़े कई पहलू है। स्टाक मार्केट की नब्ज पहचानने वालों के लिए बाजार अपने दरवाजे खोल रहा है। बड़ी प्राइवेट इक्विटी फार्मस रिसर्चर्स अैर विश्लेषकों को बाजार की चाल समझने के लिए नियुक्त कर रही हैं। अब तक बाजार में संभावनाएं बढ़ रही है तो बाजार के लिए प्रोफेशनल की भी मांग बढ़ रही है। दिल्ली के कैरियर काउंसलर जितिन चावला के मुताबिक स्टाक मार्केट में कैरियर एक बढ़िया विकल्प है। स्टाक मार्केट में आप न सिर्फ एक ट्रेडर, बल्कि किसी ब्रोकरेज फर्म में रिलेशनशिप मैनेजर, टेलीकालर या रिसर्च टीम की हिस्सा भी बन सकते है। रिलेशनशिप मैनेजर का काम क्वाइंट्स बनाना है। वे क्लाइंटस की इच्छानुसार उन्हें शेयरों की जानकारी देते है। आज कल सब कुछ आनलाइन होने लगा है, इसलिए टेलीकालर्स की डिमांड भी बाजार में काफी है। आपका पैसा किस कंपनी के शेयर में लगाया जाए, इसके लिए रिसर्च टीम विभिन्न कंपनियों के पोर्टफोलियो की रिसर्च भी करता है। अगर आप चाहें तो स्टाक मार्केट में किसी के साथ काम करने के बाद छोटी इन्वेस्टमेन्ट के साथ अपना काम भी शुरू कर सकते हैं। स्टाक मार्केट के साथ- साथ कमोडिटी मार्केट के साथ-साथ कमोडिटी मार्केट में या म्युचुअल फंडस में अपना काम करने वालों की भी कमी नहीं है। कम इंवेस्टमेन्ट पर आप चाहें तो शेयर मार्केट की आनलाइन साइट्स से ही अपना कारोबार शुरू कर सकते हैं। शेयर बाजार से लंबे समय से जुड़े दिल्ली के एक सब ब्रोकर वीबी गुप्ता का कहना है कि जब हम मार्केट से जुड़े थे, तब कोई क्वालिफिकेशन जरूरी नहीं थी। अब नेशनल स्टाक एक्सचेंज और बाम्बे स्टाक एक्सचेंज ने अपने ट्रेडर्स के लिए फाइनेन्शियल मार्केट में सर्टिफिकेशन एनसीएफएम के लिए एग्जाम शुरू कर दिया है। अगर आप एनएसई में कारोबार करना चाहते हैं तो आपको बाजार की बेसिक जानकारी वाला यह एग्जाम पास करना होगा। उनकी मानें तो एक सब ब्रोकर ठीक ठाक बाजार में एक दिन में 5, 000 से 10, 000 रुपए तक कमा सकता है। मार्केट बूम की स्थिति में कमाई और भी बढ़ जाती है।
योग्यता- डिप्लोमा कोर्स के लिए:- स्टाक मार्केट में काम के लिए कोई निश्चित योग्यता नहीं है। इसमें 12 वीं के बाद विभिन्न डिप्लोमा कोर्स के जरिए अपना भविष्य बना सकते है।
पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स के लिए- स्टाक मार्केट के साथ-साथ फाइनेंशियल और कैपिटल मार्केट को जानने के लिए आज कई पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सेज उपलब्ध है। इनमें प्रवेश की योग्यता 12 वीं के साथ-साथ किसी भी विषय में ग्रेजुएशन है। एमबीए कोर्स के लिए- एमबीए में प्रवेश के लिए ग्रेजुएशन के साथ-साथ फाइनेंशियल मार्केट में कम से कम दो वर्षों के अनुभव लिए हुए छात्रों को प्राथमिकता मिलती है। कोर्सेज-ह्व डिप्लोमा इन स्टाक मार्केट ट्रेडिंग, सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर सीएफपी सर्टिफिकेशन,  पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन एडवांस फाइनेंशियल प्लानिंग एंड वेल्थ मैनेजमेंट। पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन कैपिटल मैनेजमेंट।  एमबीए इन कैपिटल मार्केट्स।
सभी डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स की अवधि तीन माह और उससे अधिक, पोस्ट ग्रेजुएट्स डिप्लोमा कोर्स की अवधि एक साल व एमबीए प्रोग्राम की अवधि दो साल है।
पत्राचार कोर्सेज- नौकरी करने वालों के लिए भी कई बिजनेस स्कूल पत्राचार कोर्सेज चला रहे हैं।
 वेलिंग्कर इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट डेवलपमेंट एंड रिसर्च, माटुंगा मुंबई, डिप्लोमा इन कमोडिटीज मार्केट। अवधि तीन महीने।
 इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ फाइनेंशियल प्लानिंग आईआईएफपी कनाट प्लेस, दिल्ली सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानिंग। अवधि-6 महीने।
एनएमआईएमएस, मुंबई, महाराष्ट्र डिप्लोमा इन फाइनेंशियल मैनेजमेंट। अवधि एक वर्ष। पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन फाइनेंशियल मैनेजमेंट अवधि-दो वर्ष।
संभावनाएं
स्टाक मार्केट ट्रेडिंग कोर्स- इस कोर्स के साथ आप किसी भी इक्विटी फर्म या आनलाइन ब्रोकरेज फर्म के साथ अपना कारोबार कर सकते हैं।
पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स- स्टाक मार्केट के बेसिक से आगे बढ़ने और बाजार की बारीकियां को व्यवहारिक तौर पर समझाने के लिए वित्तीय बाजार संबंधित विभिन्न पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स किए जा सकते हैं। अगर आप किसी भी विषय में ग्रेजुएट हैं और प्राइवेट इक्विटी फंड, म्युचुअल फंड, मुद्रा विनिमय कारोबार, डेरिवेटिव्स, कमोडिटी मार्केट में विशेषज्ञता हासिल करनाचाहते हैं तो इस कोर्स से आपको इन क्षेत्रों की ओर बारीक जानकारी मिलेगी।
एमबीए कैपिटल मार्केट-
इस कोर्स के बाद प्रमुख फाइनेंशियल फील्डस जैसे इक्विटी, कमाडिटी मार्केट मुद्रा विनिमय और डेरिवेटिव्स में ढेरों संभावनाएं हैं, इसके साथ बैंक, ट्रेजरी, या कारपोरेट में ट्रेडिंग, इंवेस्टमेंट बैंक में आईपीओ या एमएंडए के लिए रिसर्चर या एडवाइजर पेंशन फंडस, हेज फंडस और म्युचुअल फंड्स में काम कर सकते हैं।
कंपनी सेकेट्री (सीएस कोर्स)- नये नियमों के मुताबिक बाजार से जुड़ी कंपनियों को एक सीएस नियुक्त करना अनिवार्य है। इसके चलते सीएस पढ़ने वाले भी इस तरफ का रेयर बना सकते हैं।
प्रमुख संस्थान-ह्व बीएलबी इंस्टीटयूट ऑफ फाइनेंशियल मार्केट्स बीआईएफएम गुलाब भवन, चौथी मंजिल, 6 बहादुर शाह जफर मार्ग, नयी दिल्ली-1100021 फोन- 01-43702201-02 ।
 द इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ फाइनेंशियल प्लानिंग (आईआईएफपी) 6 ए, आत्माराम हाउस, 1 टालस्टाय मार्ग, कनाटप्लेस, नयी दिल्ली- 110001 ।
 निरमा यूनिवर्सिटी इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट। सारखेज-गांधी नगर हाईवे पोस्ट चंदलोडिया, वाया गोटा, अहमदाबाद, 382481, गुजरात। फोन- 02717-241900-04 ।
 नारसी मांजी इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एनएमआईएमएस एसबीकेएम, एनएमआईएमएस  यूनिवर्सिटी, वीएल मेहता रोड, जेवीपीडी, वीएल मेहता रोड, जेवीपीडी स्क्रीम मुंबई, महाराष्ट्र-400056, फोन-022-261836881।
द इंस्टीटयूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया, आईसीएसआई हाउस, 22, इंडस्ट्रियल एरिया, लोदी रोड, नयी दिल्ली-110003 फोन-011-41504444।

Monday, June 20, 2016

रसायन विज्ञान में B.S.

एमएससी की पेशकश की है लगभग 30 वर्षों के लिए अब डिग्री। इस साल के रूप में, हम एक संशोधित और होनहार बी एस / बी एस + M.Sc पेशकश करने के लिए बेहद उत्साहित हैं। रसायन विज्ञान में कार्यक्रम। उसी के लिए पाठ्यक्रम वर्तमान छात्रों से प्रतिक्रिया के साथ शिक्षकों द्वारा विकसित किया गया है, और इससे पहले कार्यक्रम की अखंडता को बरकरार रखे हुए है, जबकि यह अधिक एकजुट, लचीला बनाने और निवेश छात्र उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए अधिक से अधिक मौका देता है। हमारे पाठ्यक्रम Chemistry- भौतिक, जैविक, और अकार्बनिक के तीन मुख्य शाखाओं दोनों सैद्धांतिक और प्रायोगिक में एक में गहराई से समझ प्रदान करता है। यह भी अन्य fields- भौतिक विज्ञान, गणित, इंजीनियरिंग, और humanities- में एक प्रारंभिक आधार प्रदान करता है और आप ऐच्छिक और नाबालिगों के माध्यम से आगे का पता लगाने के लिए अनुमति देता है। एक ही समय में, यह दोनों विभाग ऐच्छिक और सम्मान के माध्यम से चौड़ाई और गहराई में रसायन विज्ञान के भीतर विकल्पों की एक श्रृंखला की अनुमति देता है। इन सुविधाओं है कि पारंपरिक परास्नातक और स्नातक कार्यक्रमों भारत में की पेशकश से हमारे कार्यक्रम भेद कर रहे हैं। इस विभाग का एक हिस्सा होने के नाते भी एक संकाय है कि विविध और अत्यधिक उनके काम में सम्मान है के लिए जोखिम प्रदान करता है। परास्नातक कार्यक्रम स्वाभाविक एक प्रोफेसर की देखरेख में नए शोध के अन्वेषण की आवश्यकता है। यहाँ तक कि इस के अलावा, विभाग की अनुमति देता है और विभिन्न क्षेत्रों में एक बहुत ही प्रारंभिक चरण से निवेश हासिल करने के लिए एक रुचि स्नातक के अवसरों की अधिकता के लिए प्रोत्साहित करती है। विभाग देश में सबसे अच्छा प्रायोगिक सुविधाओं, और व्यापक कम्प्यूटेशनल शक्ति के कुछ घरों। हम भी मजबूत अंतर्विभागीय और औद्योगिक सहयोग किया है। 

रसायन विज्ञान का अवलोकन

रसायन विज्ञान में विभिन्न स्तरों पर इस मामले की घटना के अध्ययन है, और निम्नलिखित के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है:

सैद्धांतिक रसायन विज्ञान

यह क्षेत्र उन्हें उनके मौलिक आणविक स्तर को कम करने और उन्हें शारीरिक बलों के संदर्भ में अध्ययन करके रासायनिक घटना को समझने के लिए प्रयास करता है। क्षेत्र के प्राथमिक लक्ष्यों में से एक लगातार आणविक सिस्टम के व्यवहार को सफलतापूर्वक और सही मॉडल के लिए नई समझ विकसित करना है। खेतों सबसे बड़े पैमाने पर इस काम में शामिल क्वांटम मैकेनिक्स और सांख्यिकीय यांत्रिकी हैं। अनुप्रयोगों बायोफिज़िक्स, जैव रसायन और दवा से, भौतिक विज्ञान, और स्पेक्ट्रोस्कोपी को लेकर। इस क्षेत्र भौतिकी और गणित के साथ रसायन विज्ञान के एक ओवरलैप है।

और्गॆनिक रसायन

कार्बनिक रसायन विज्ञान में एक आधार है कि आप के साथ परिचित हैं जनरल कार्बनिक रसायन विज्ञान और जैविक प्रतिक्रियाओं के साथ शुरू होता है, और उसके गहरे पहलुओं और आवेदन करने के लिए पर ले जाता है। संश्लेषण कार्बनिक रसायन है, जो दवा डिजाइन, प्राकृतिक उत्पादों के निर्माण, कटैलिसीस में लागू किया जाता है की एक बड़ी घटक है। अन्य अनुप्रयोगों semiconducting जैविक पॉलिमर और कार्बनिक सौर कोशिकाओं में शामिल हैं। शोध और labwork माध्यम से, हम प्रतिक्रियाओं है कि संश्लेषण और इस तरह नियंत्रित regioselectivity, stereoselectivity, और chemoselectivity सिद्धांतों के रूप में गठन सीखते हैं। हम भी बड़े पैमाने स्पेक्ट्रोस्कोपी और रासायनिक विधि का उपयोग कर कार्बनिक यौगिकों का विश्लेषण सीखते हैं।

विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान और स्पेक्ट्रोस्कोपी

विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान जुदाई, पहचान और कृत्रिम रूप से संश्लेषित यौगिकों या रसायनों प्राकृतिक स्रोतों से पृथक की मात्रा का ठहराव शामिल है। विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान ज्यादातर labwork के रूप में पता लगाया है। स्पेक्ट्रोस्कोपी आणविक दुनिया की एक तस्वीर प्राप्त करने के लिए प्रयोग किया जाता है। एमआरआई स्कैन एनएमआर स्पेक्ट्रोस्कोपी के रूप में इसी अवधारणा पर आधारित हैं। पाठ्यक्रम सामग्री स्पेक्ट्रोस्कोपी, स्पेक्ट्रोस्कोपी के विभिन्न प्रकार के निहित क्वांटम यांत्रिक प्रकृति के लिए परिचय।

अकार्बनिक रसायन शास्त्र

अकार्बनिक रसायन संरचना और सहसंयोजक पॉलिमर धातुओं से गैर धातु को लेकर तत्वों, गैसों और ईओण लवण करने के लिए ठोस का बना यौगिकों की एक विस्तृत श्रृंखला की जेट शामिल हैं। कोर पाठ्यक्रम की अवधि और उसके परिणामों, चुंबकत्व, जटिल गठन और जेट सहित संक्रमण धातुओं के गुणों पर ध्यान केंद्रित। अकार्बनिक रसायन हाइड्रोजन गैस भंडारण सामग्री आणविक मैग्नेट में आवेदन, उत्प्रेरक, ईंधन, कृषि आदि पाता है

Computational रसायन विज्ञान

कंप्यूटर, काल्पनिक या प्रयोगात्मक दुर्गम अणुओं और रासायनिक प्रणालियों संभव करने के लिए उपयोग कर दिया है। यह सूक्ष्म स्तर (यहां तक ​​कि व्यक्तिगत अणुओं) या कम समय फ्रेम शामिल (सिर्फ एक femtosecond के रूप में ज्यादा!) सिमुलेशन भौतिक बलों की एक बुनियादी समझ का उपयोग करें कि की मदद से इस मामले का अध्ययन है। यह प्रोटीन का अध्ययन करने के लिए स्थूल बंधन तोड़ने के एक अध्ययन से भिन्न होता है। इस अध्ययन के कार्यक्रमों है कि अणुओं और परमाणुओं के रसायन विज्ञान के एक सैद्धांतिक और सांख्यिकीय समझ का उपयोग के बीच बातचीत अनुकरण का उपयोग करता है। यह क्षेत्र एक दो तरफा दृष्टिकोण, समझ और कम्प्यूटेशनल रसायन विज्ञान के तरीकों से विकसित हो रहा है, साथ ही परिणाम है कि प्राप्त कर रहे हैं का विश्लेषण करने के लिए देता है। इस विधि अक्सर सैद्धांतिक रसायन विज्ञान के साथ हाथ में हाथ जाता है।

भौतिक रसायन

भौतिक रसायन विज्ञान स्थूल और आणविक स्तर पर बात, रसायन, और अणुओं के भौतिक गुणों का अध्ययन करता है। जबकि आणविक स्तर पर, रासायनिक बांड की क्वांटम यांत्रिक गुणों उनके प्रयोगात्मक manifestation- स्पेक्ट्रोस्कोपी में अध्ययन कर रहे हैं स्थूल गुण, thermodynamic और विद्युत शामिल हैं। biomolecules के thermodynamic के गुण बहुत रुचि के हैं और हमारे विभाग में बड़े पैमाने पर अध्ययन कर रहे हैं। Electrochemistry बढ़त समस्याओं को काटने, उदाहरण के लिए सौर कोशिकाओं की है कि में विशद जानकारी देता है।

बी एस कार्यक्रम

बी एस कार्यक्रम ऐसी है कि एक छात्र एक स्नातक की डिग्री के साथ स्नातक करने के लिए, या एक अतिरिक्त वर्ष के साथ आगे बढ़ाने के लिए एक और अधिक गहन और अनुसंधान गहन मास्टर्स डिग्री चुनते (एम.एससी। कैमिस्ट्री) विकल्प चुन सकते हैं संरचित है। विकल्प के चौथे वर्ष के लिए खुला है। एक इच्छुक छात्र भी सम्मान विभाग द्वारा की पेशकश की ऐच्छिक की एक सूची से 24 क्रेडिट (4 पाठ्यक्रम) को पूरा करने से एक सम्मान की डिग्री प्राप्त कर सकते हैं। यह आपको रसायन विज्ञान की एक उप डोमेन में विशेषज्ञ का अवसर देता है। एक निगरानी लर्निंग परियोजना (एसएलपी) जो कि एक साहित्य सर्वेक्षण या अपने तीसरे वर्ष में एक अनुसंधान परियोजना के रूप में हो सकता है के रूप में 12 इन 24 क्रेडिट का - छात्रों को भी पूरा करने के लिए 6 विकल्प चुन सकते हैं।

Saturday, June 18, 2016

सिविल इंजीनियरिंग: करियर

छोटे शहरों में भी विकास की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। रियल एस्टेट के कारोबार में आई चमक ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को रोशन किया है। इन्हीं में से एक प्रमुख क्षेत्र ‘सिविल इंजीनियिरग’ भी है। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कदम रखने वाले अधिकांश छात्र सिविल इंजीनियरिंग की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। वह रियल एस्टेट के अलावा भी कई सारे कंट्रक्शन कार्य जैसे पुल निर्माण, सड़कों की रूपरेखा, एयरपोर्ट, ड्रम, सीवेज सिस्टम आदि को अपने कौशल द्वारा आगे ले जाने का कार्य कर रहे हैं।
क्या है सिविल इंजीनियरिंग?जब भी कोई योजना बनती है तो उसके लिए पहले प्लानिंग, डिजाइनिंग व संरचनात्मक कार्यों से लेकर रिसर्च एवं सॉल्यूशन तैयार करने का कार्य किया जाता है। यह कार्य किसी सामान्य व्यक्ति से न कराकर प्रोफेशनल लोगों से ही कराया जाता है, जो सिविल इंजीनियरों की श्रेणी में आते हैं। यह पूरी पद्धति ‘सिविल इंजीनियरिंग’ कहलाती है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षित लोगों को किसी प्रोजेक्ट, कंस्ट्रक्शन या मेंटेनेंस के ऊपर कार्य करना होता है। साथ ही इस कार्य के लिए उनकी जिम्मेदारी भी तय होती है। ये स्थानीय अथॉरिटी द्वारा निर्देशित किए जाते हैं। किसी भी प्रोजेक्ट एवं परियोजना की लागत, कार्य-सूची, क्लाइंट्स एवं कांट्रेक्टरों से संपर्क आदि कार्य भी सिविल इंजीनियरों के जिम्मे होता है।
काफी व्यापक है कार्यक्षेत्रसिविल इंजीनियरिंगका कार्यक्षेत्र काफी फैला हुआ है। इसमें जरूरत इस बात की होती है कि छात्र अपनी सुविधानुसार किस क्षेत्र का चयन करते हैं। इसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में हाइड्रॉलिक इंजी..., मेटेरियल इंजी..., स्ट्रक्चरल इंजी.....,  अर्थक्वेक इंजी., अर्बन इंजी..., एनवायर्नमेंटल इंजी..., ट्रांसपोर्टेशन इंजी... और जियो टेक्निकल इंजीनियरिंग आदि आते हैं। देश के साथ-साथ विदेशों में भी कार्य की संरचना बढ़ती जा रही है। प्रमुख कंपनियों के भारत आने से यहां भी संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।
सिविल इंजीनियर बनने की योग्यतासिविल इंजीनियर बनने के लिए पहले छात्र को बीटेक या बीई करना होता है, जो 10+2 (भौतिकी, रसायन शास्त्र व गणित) या समकक्ष परीक्षा में उच्च रैंक प्राप्त करने के बाद ही संभव हो पाता है, जबकि एमएससी या एमटेक जैसे पीजी कोर्स के लिए बैचलर डिग्री होनी आवश्यक है। इन पीजी कोर्स में दाखिला प्रवेश परीक्षा के जरिए हो पाता है। इंट्रिग्रेटेड कोर्स करने के लिए 10+2 होना जरूरी है। बारहवीं के बाद पॉलिटेक्निक के जरिए सिविल इंजीनियरिंग का कोर्स भी कराया जाता है, जो कि डिप्लोमा श्रेणी में आते हैं।
प्रवेश प्रक्रिया का स्वरूपइसमें दो तरह से प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। एक पॉलीटेक्निनक तथा दूसरा जेईई व सीईई। इसमें सफल होने के बाद ही कोर्स में दाखिला मिलता है। कुछ ऐसे भी संस्थान हैं, जो अपने यहां अलग से प्रवेश परीक्षा आयोजित करते हैं। बैचलर डिग्री के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा जेईई (ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम) के जरिए तथा पीजी कोर्स के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा सीईई (कम्बाइंड एंट्रेंस एग्जाम) के आधार पर होती है।
ली जाने वाली फीससिविल इंजीनियरिंग के कोर्स के लिए वसूली जाने वाली फीस अधिक होती है। बात यदि प्राइवेट संस्थानों की हो तो वे छात्रों से लगभग डेढ़ से दो लाख रुपए प्रतिवर्ष फीस लेते हैं, जबकि आईआईटी स्तर के संस्थानों में एक से डेढ़ लाख प्रतिवर्ष की सीमा होती है। इसमें काफी कुछ संस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करता है, जबकि प्राइवेट संस्थानों का प्रशिक्षण शुल्क विभिन्न स्तरों में होता है।
आवश्यक अभिरुचिसिविल इंजीनियर की नौकरी काफी जिम्मेदारी भरी एवं सम्मानजनक होती है। बिना रचनात्मक कौशल के इसमें सफलता मिलनी या आगे कदम बढ़ाना मुश्किल है। नित्य नए प्रोजेक्ट एवं चुनौतियों के रूप में काम करना पड़ता है। एक सिविल इंजीनियर को शार्प, एनालिटिकल एवं प्रैक्टिकल माइंड होना चाहिए। इसके साथ-साथ संवाद कौशल का गुण आपको लंबे समय तक इसमें स्थापित किए रखता है, क्योंकि यह एक प्रकार का टीमवर्क है, जिसमें लोगों से मेलजोल भी रखना पड़ता है।
इसके अलावा आप में दबाव में बेहतर करने, समस्या का तत्काल हल निकालने व संगठनात्मक गुण होने चाहिए, जबकि तकनीकी ज्ञान, कम्प्यूटर के प्रमुख सॉफ्टवेयरों की जानकारी, बिल्डिंग एवं उसके सुरक्षा संबंधी अहम उपाय, ड्रॉइंग, लोकल अथॉरिटी व सरकारी संगठनों से बेहतर तालमेल, प्लानिंग का कौशल आदि पाठय़क्रम का एक अहम हिस्सा हैं।
रोजगार से संबंधित क्षेत्रएक सिविल इंजीनियर को सरकारी विभाग, प्राइवेट और निजी क्षेत्र की इंडस्ट्री, शोध एवं शैक्षिक संस्थान आदि में काम करने का अवसर प्राप्त होता है। अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा इसमें संभावनाएं काफी तेजी से बढ़ी हैं। इसका प्रमुख कारण रियल एस्टेट में आई क्रांति ही है। इसके चलते हर जगह बिल्डिंग, शॉपिंग, मॉल, रेस्तरां आदि का निर्माण किया जा रहा है। यह किसी भी यूनिट को रिपेयर, मेंटेनेंस से लेकर कंस्ट्रक्शन तक का कार्य करते हैं। बीटेक के बाद रोड प्रोजेक्ट, बिल्डिंग वक्र्स, कन्सल्टेंसी फर्म, क्वालिटी टेस्टिंग लेबोरेटरी या हाउसिंग सोसाइटी में अवसर मिलते हैं। केन्द्र अथवा प्रदेश सरकार द्वारा भी काम के अवसर प्रदान किए जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से रेलवे, प्राइवेट कंस्ट्रक्शन कंपनी, मिल्रिटी, इंजीनियरिंग सर्विसेज, कंसल्टेंसी सर्विस भी रोजगार से भरे हुए हैं। अनुभव बढ़ने के बाद छात्र चाहें तो अपनी स्वयं की कंसल्टेंसी सर्विस खोल सकते हैं।
इस रूप में कर सकते हैं कामसिविल इंजीनियरिंग
कंस्ट्रक्शन प्लांट इंजीनियर
टेक्निशियन
प्लानिंग इंजीनियर
कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट इंजीनियर
असिस्टेंट इंजीनियर
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर
सुपरवाइजर
प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर
साइट/प्रोजेक्ट इंजीनियर
सेलरीइसमें मिलने वाली सेलरी ज्यादातर केन्द्र अथवा राज्य सरकार के विभाग पर निर्भर करती है, जबकि प्राइवेट कंपनियों का हिसाब उससे अलग होता है। बैचलर डिग्री के बाद छात्र को 20-22 हजार रुपए प्रतिमाह तथा दो-तीन साल का अनुभव होने पर 35-40 हजार के करीब मिलने लगते हैं। मास्टर डिग्री करने वाले सिविल इंजीनियरों को 25-30 हजार प्रतिमाह तथा कुछ वर्षों के बाद 45-50 हजार तक हासिल होते हैं। इस फील्ड में जम जाने के बाद आसानी से 50 हजार रुपये तक कमाए जा सकते हैं। विदेशों में तो लाखों रुपए प्रतिमाह तक की कमाई हो जाती है।
एजुकेशन लोनइस कोर्स को करने के लिए कई राष्ट्रीयकृत बैंक देश में अधिकतम 10 लाख व विदेशों में अध्ययन के लिए 20 लाख तक लोन प्रदान करते हैं। इसमें तीन लाख रुपए तक कोई सिक्योरिटी नहीं ली जाती। इसके ऊपर लोन के हिसाब से सिक्योरिटी देनी
आवश्यक है।
प्रमुख संस्थान
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
वेबसाइट-
 www.iitd.ernet.in
(मुंबई, गुवाहाटी, कानपुर, खडगपुर, चेन्नई, रुड़की में भी इसकी शाखाएं मौजूद हैं)
बिड़ला इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटीएस), रांची
वेबसाइट
- www.bitmesra.ac.in
दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
वेबसाइट
- www.dce.edu
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ साइंस, बेंग्लुरू
वेबसाइट
- www.iisc.ernet.in
नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट एंड रिसर्च, नई दिल्ली
वेबसाइट-
  www.nicmar.ac.in( गुड़गांव, बेंग्लुरू, पुणे, मुंबई, गोवा में भी शाखाएं मौजूद)
  
फायदे एवं नुकसान
बड़े शहरों में अन्य प्रोफेशनल्स की अपेक्षा न्यू कमर को अधिक सेलरी
कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में बूम आने से प्रोफेशनल्स की भारी मांग
समाज व देश की प्रगति में भागीदार बनने पर अतिरिक्त खुशी
कई बार निर्धारित समय से अधिक काम करने से थकान की स्थिति
चिह्न्ति क्षेत्रों में शिफ्ट के रूप में काम करने की आवश्यकता
जॉब के सिलसिले में अधिक यात्राएं परेशानी का कारण

Thursday, June 16, 2016

राजनीतिक विज्ञान से पाएं करियर


राजनीति विज्ञान एक सामाजिक विज्ञान है, जो राजनीति के सिद्धांत और व्यवहार तथा राजनीतिक व्यवस्था के विवेचन एवं विश्लेषण से जुड़ा हुआ है। इस विषय के कई उपभाग हैं । जैसे-राजनीतिक सिद्धांत, लोक नीति, राष्ट्रीय राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध,  तुलनात्मक राजनीति आदि। इससे पता चलता है कि यह विषय व्यापक क्षेत्र को कवर करता है तथा इस विषय का अध्ययन करने के बाद विविध क्षेत्रों में एवं विभिन्न भूमिकाओं में कार्य करने का अवसर मिल सकता है…
राजनीति अपने पुरातन स्वरूप में बड़े बदलाव कर रही है, जो पूरी दुनिया की सामाजिक संरचनाओं को भी प्रभावित कर रही है। ढेरों ऐसे संगठन इस बदलाव को समझने और नई रणनीतियों को बनाने के लिए बन रहे हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। तमाम राजनीतिक दल अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए नए तरीके और आइडियाज पर काम कर रहे हैं। थिंक टैंक और संगठन तक में आधुनिक तौर तरीकों से बदलाव किए जा रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों की बाजार में मांग पैदा हो रही है जो इन बदलावों को बेहतर तरीके से समझते हों या राजनीतिक समझ को बेहतर करने में सक्षम हों। पॉलिटिकल साइंटिस्ट और थिंक टैंक जैसे नए पदनामों के साथ राजनीति विज्ञान ने आधुनिक दुनिया में बेहतर करियर बनाने के ढेरों नए अवसर पैदा किए हैं। राजनीतिक सिद्धांत, लोकनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक संबंध और तुलनात्मक राजनीति जैसे क्षेत्र उनका स्वागत करने के लिए हाथ पसारे खड़े हैं।
क्या पढ़ना होगा
राजनीति विज्ञान में स्नातक के अलावा इंटेलेक्चुअल प्रॅपर्टी राइट्स, इंटरनेशनल रिलेशंस, लोकल गवर्नेंस, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, पॉलिटिक्स, पब्लिक पॉलिसी में स्नातकोत्तर, एमफिल और पीएचडी की जा सकती है। क्षेत्र विशेष में अपनी विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए मिनिस्ट्री, पंचायती राज, इंडियन पॉलिटिकल सिस्टम और गुड गवर्नेंस में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सेज भी भारत में उपलब्ध हैं।
सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं
राजनीति विज्ञान सिर्फ  विचार समझने और विकसित करने तक ही सीमित नहीं है बल्कि उसे प्रचारित और प्रसारित करने तक आगे बढ़ चुकी है। यह जनमत निर्माण के लिए सोचने से आगे लिखने और बेहतर वक्ता होने तक की मांग करती है इसलिए इस क्षेत्र में करियर निर्माण के लिए सोचने वाले युवाओं को अपने पूरे व्यक्तित्व पर भी काम करना होगा। इस विधा में महारत रखने वाले उम्मीदवारों के लिए लॉ फर्म्स, मार्केटिंग रिसर्च फम्स, फील्ड रिसर्च, लॉ इंफोर्समेंट एजेंसी जैसे पुलिस एवं न्यायालय आदि, पब्लिशिंग फर्म्स, राजनीतिक दल और विभिन्न व्यवसायों में ढेरों बेहतरीन जॉब ऑफर्स इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा वे पॉलिसी एनालिस्ट, पॉलिटिकल कंमेटेटर, पॉलिटिकल राइटर, सर्वे कंडक्टर, प्री पोल एनालिस्ट, पब्लिक अफेयर्स रिसर्च एनालिस्ट, पब्लिक ओपिनियन एनालिस्ट, कैम्पेन वर्कर, कैम्पेन डिजाइनर, विभिन्न मीडिया समूहों या अखबार में पॉलिटिकल कॉरसपॉन्डेंट या बिजनेस एडमिनिस्ट्रेटर जैसे पद संभाल सकते हैं।
यहां से कर सकते हैं कोर्स
*     हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला
*     पीजी कालेज, धर्मशाला(हिमाचल प्रदेश)
*     राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बिलासपुर
*     राजकीय सनातकोत्तर महाविद्यालय, सरकाघाट
*     राजकीय महाविद्यालय, बैजनाथ
*     दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
*     हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद
*     कलकत्ता विश्वविद्यालय, प. बंगाल
*     पुणे श्विवविद्यालय, पुणे
*     बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
*     हिंदू कालेज, दिल्ली
*     पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
राजनीति विज्ञान का अन्य समाज विज्ञानों से संबंध
समाजशास्त्रों में पारस्परिक अंतर्निर्भरता पाई जाती है। कोई भी एक समाज विज्ञान समाज का उचित एवं समग्र अध्ययन नहीं कर सकता। इसलिए तमाम समाजशास्त्र आपस में संबंधित हैं और अंतर्शास्त्रीय अध्ययन पद्धति ने फिर से समाजशास्त्रों के इस संबंध को उभार दिया है। आज राजनीतिक अर्थशास्त्र, राजनीतिक नैतिकता, राजनीतिक इतिहास, राजनीतिक समाजशास्त्र, राजनीतिक मनोविज्ञान तथा राजनीतिक भूगोल आदि विभिन्न राजनीति विज्ञान की नई शाखाओं का खुलना इस बात का प्रतीक है कि राजनीति विज्ञान अन्य समाज विज्ञानों से संबंध स्थापित किए बिना नहीं चल सकता।
बदलता स्वरूप
यूनानी विचारकों के समय से लेकर आधुनिक काल तक के विभिन्न चिन्तकों, सिद्धांतवेत्ताओं और विश्लेषकों के योगदानों से राजनीति विज्ञान के रूप, अध्ययन सामग्री एवं उसकी परंपराएं समय-समय पर परिवर्तित होती रही हैं। तद्नुरूप इस विषय का निरंतर विकास होता रहा है। इस विकासक्रम में राजनीति विज्ञान के अध्ययन के संबंध में दो प्रमुख दृष्टिकोणों का उदय हुआ है। परंपरागत दृष्टिकोण एवं आधुनिक दृष्टिकोण। पारंपरिक या परंपरागत दृष्टिकोण राज्य प्रधानता का परिचय देता है जबकि आधुनिक दृष्टिकोण प्रक्रिया प्रधानता का।
वेतनमान
इस क्षेत्र में वेतनमान इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस पद पद हैं और क्या आप का क्षेत्र सरकारी है या निजी क्षेत्र में आप कार्यरत हैं। स्कूल में अध्यापन कार्य में आरंभ में 10 से 15 हजार तक वेतन मिलता है। कालेज में 35 से 40 हजार तक वेतनमान है।
महत्त्व
राजनीति विज्ञान का महत्त्व इस तथ्य से प्रकट होता है कि आज राजनीतिक प्रक्रिया का अध्ययन राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की राजनीति को समझने के लिए आवश्यक है। प्रक्रिया के अध्ययन से ही वास्तविक राजनीति एवं उनके भीतर अवस्थित तथ्यों का ज्ञान संभव है।

Wednesday, June 15, 2016

लैंडस्केपिंग आर्किटेक्चर में करियर

अगर आप बिल्डिंग निर्माण के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो लैडस्केपिंग आर्किटेक्चर आपके करियर के लिए बेहतर विकल्प होगा. यह क्षेत्र समय के साथ तेजी से विकास कर रहा है. अब बिल्डिंगों के इंटीरियर डिजाइन पर जितना ध्यान दिया जाता है उतना ही बिल्डिंग के आस-पास के आर्किटेक्चर पर.
क्या है लैंडस्केपिंग आर्किटेक्चर?
इसमें मुख्य रूप से बिल्डिंग के आउटडोर पब्लिक एरिया को प्राकृतिक रूप से डिजाइन किया जाता है, जिसमें वाटर बॉडी, स्टोन, टाइल्स, पेड़-पौधे को आकर्षक बनाया जाता है.
संबंधित कोर्स: इस कोर्स को करने के लिए साइंस स्ट्रीम से 12वीं पास होना जरूरी है. जिसके बाद आप इस विषय में ग्रेजुएशन तथा पोस्ट ग्रेजुएशन भी कर सकते हैं. लैंडस्केपिंग कोर्स से जुड़े अन्य कोर्सेज बीआर्क, बीएससी, एग्रीकल्चर में भी एडमिशन ले सकते हैं.
कहां से करें पढ़ाई?
सेंटर फॉर एनवॉयरमेंट प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद
स्कूल ऑफ प्लानिंग ऐंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली
एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग, नोएडा
डॉ. भानुबेन नानावती कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर फॉर वुमन, पुणे
डॉ. वाईएसपी इंस्टीट्यूट ऑफ हार्टिकल्चर एंड फॉरेस्टी, सोलन (हिमाचल प्रदेश)
कहां मिलेंगे अवसर:
इस क्षेत्र में निजी सेक्टरों में ज्यादा जॉब की संभावना रहती है. इस क्षेत्र में कंस्ट्रक्शन कंपनियों, हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म कंपनियों, फर्म्स में रोजगार पाने के भरपूर मौके हैं. अगर आप चाहें तो कॉन्ट्रैक्ट लेकर भी अपने हिसाब से काम कर सकते हैं. प्राइवेट के साथ-साथ सरकारी विभागों में भी अब अधिक से अधिक में रोजगार मिलने की संभावना बन रही है.

Tuesday, June 14, 2016

न्यूक्लियर साइंस में करियर

दुनिया भर में ऊर्जा की जरूरत लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में नाभिकीय ऊर्जा समस्या के समाधान के रूप में उभरकर सामने आई है। उसके माध्यम से जहां ऊर्जा की बचत की जा सकती है, वहीं इसकी लागत को भी कम किया जा सकता है। दुनिया की नाभिकीय ऊर्जा पर निर्भरता बढऩे के साथ तकरीबन हर देश न्यूक्लियर साइंस पर शोध कार्यों को तरजीह देने लगा है। इसके न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स और इंजीनियर्स की मांग में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है। 

भारत का 2025 तक विद्युत ऊर्जा के उपयोग को 25 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। भारत ने 2020 तक 20 हजार मेगावाट बिजली के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। विशेषज्ञों की मानें, तो नाभिकीय डील और ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों की वजह से आने वाले समय में इस क्षेत्र में एक लाख प्रशिक्षित लोगों की जरूरत होगी।


क्यों हैं भविष्य का क्षेत्र

एक अनुमान के मुताबिक, आज पूरे विश्व में पचास मिलियन टन हाइड्रोजन ईंधन का उपयोग किया जाता है। अगर आंकड़ों पर गौर करें, तो ऊर्जा के रूप में उपयोग करने पर नौ मिलियन टन हाइड्रोजन बीस से तीस मिलियन कार या आठ से नौ मिलियन घरों में ऊर्जा दे सकती है। इसके उपयोग से हमारी तेल के उपर निर्भरता कम हो जाएगी। आज भारत में विद्युत उत्पादन का करीब 3 प्रतिशत नाभिकीय ऊर्जा से होता है। इस क्षेत्र के विकास के लिए भारत सरकार ने कमर कस ली है। ऐसा माना जा रहा है कि अगले दो दशकों में यह कारोबार 100 बिलियन डॉलर का हो जाएगा।
 

इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी और न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप की हरी झंडी मिलने के बाद प्राइवेट सेक्टर की कई कंपनियां भी इस क्षेत्र में आ सकती हैं। जानकारों का मानना है कि न्यूक्लियर इंडस्ट्री अब काफी हद तक ग्लोबल हो चुकी है और कोई भी देश इस क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए दूसरों से अलग-थलग रहते हुए सिर्फ अपने आप पर निर्भर नहीं रह सकता। यह चीन और भारत जैसे देशों के संदर्भ में भी उतना ही सही है, जितना अमेरिका या यूरोप के संदर्भ में। उनका यह भी कहना है कि इस सेक्टर में शोध की व्यापक संभावनाएं हैं। वैसे देखा जाए, तो भारत पहले ही दुनिया में परमाणु शक्ति-संपन्न राष्ट्र का दर्जा हासिल कर चुका है। फिलहाल हमारे देश में 17 एटॉमिक पावर स्टेशन हैं। इसके अलावा छह और निर्माणाधीन हैं।

कैसी होनी चाहिए योग्यता

न्यूक्लियर इंजीनियरिंग क्षेत्र में एक अच्छी बात यह है कि यहां काम शुरू करने के लिए आपको न्यूक्लियर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट होना जरूरी नहीं है। फिजिक्स, केमिस्ट्री या मैथ्स विषय के डिग्रीधारी भी इससे जुड़े कुछ कार्यों के योग्य हो सकते हैं। इसमें विशेषज्ञता हासिल करने के लिए आप अमेरिका या कनाडा जैसे देश के किसी प्रतिष्ठित संस्थान से मास्टर्स डिग्री कर सकते हैं। वर्ल्ड न्यूक्लियर यूनिवर्सिटी जैसे कई अंतरराष्ट्ररीय संस्थान हैं, जो न्यूक्लियर एजुकेशन को मजबूती देने और न्यूक्लियर साइंस व टेक्नोलॉजी में भविष्य का नेतृत्व तैयार करने की दिशा में कार्यरत हैं। इस फील्ड में विज्ञान की मूलभूत जानकारियां, अपग्रेड होती तकनीक, विज्ञान की सामाजिक उपयोगिता के बारे में जानकारी होना जरूरी है। इस कोर्स का मुख्य मकसद ऐसे इंजीनियरों को तैयार करना है, जो नाभिकीय ऊर्जा के क्षेत्र में विशेषज्ञ हों।


कार्य का स्वरूप

एक न्यूक्लियर साइंटिस्ट के काम में इलेक्ट्रॉन, न्यूट्रॉन, प्रोटॉन जैसे सब-एटॉमिक पार्टिकल्स और विज्ञान में उनके प्रभाव और उपयोगिता के बारे में अध्ययन करना शामिल है। वे विभिन्न उद्देश्यों के लिहाज से इन सबएटॉमिक पार्टिकल्स को काम में लाने और इस्तेमाल के तौर-तरीकों का अध्ययन करते हैं। इसके अलावा, नाभिकीय ऊर्जा और नाभिकीय हथियारों के निर्माण के लिए विखंडन प्रक्रिया का अध्ययन करते हैं। परमाणु विज्ञानी सेफ्टी प्रोटोकॉल्स, परिष्कृत तकनीकों को तैयार करते हैं और नाभिकीय रिएक्शनों के नए इस्तेमाल संबंधी परीक्षणों को भी अंजाम देते हैं। दूसरी ओर नाभिकीय इंजीनियर लेबोरेट्रीज, इंडस्ट्रीज और यूनिवर्सिटीज के लिए नाभिकीय प्रक्रियाओं से संबंधित उपकरण और प्रणाली तैयार करते हैं ताकि नाभिकीय ऊर्जा के फायदे समाज तक पहुंच सकें। वे न्यूक्लियर फिजिक्स के सिद्धांतों के आधार पर एटॉमिक न्यूक्लियर के विश्लेषण संबंधी कार्य से जुड़े होते हैं।

इसमें नाभिकीय विखंडन सिस्टम्स और इसके घटकों खासकर नाभिकीय रिएक्टर्स, नाभिकीय पावर प्लांट्स और नाभिकीय हथियारों का उचित रखरखाव भी शामिल है। आज परमाणु विज्ञानी परमाणुओं और परमाणविक पदार्र्थों की विशेषताओं को जांचने के लिए परिष्कृत प्रयोगात्मक व सैद्धांतिक औजारों का इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ-साथ वे प्रकृति के बुनियादी संतुलन के आधार, सुपरनोवा की प्रकृति और कॉस्मॉस में पदार्थों की उत्पत्ति जैसे महत्वपूर्ण अंतर्विषयक सवालों के जवाब तलाशने में लगे हैं। नाभिकीय विज्ञान लगातार दूसरे क्षेत्रों पर भी अपना प्रभाव छोड़ रहा है। न्यूक्लियर साइंस में पीएचडी करने वाले आधे से ज्यादा अभ्यर्थी अपनी ट्रेनिंग के लिए मेडिसिन, इंडस्ट्री और नेशनल डिफेंस जैसे अहम क्षेत्रों को चुनते हैं।

शानदार अवसर हैं यहां

इस क्षेत्र में आने वाले समय में करियर की नई संभावनाएं पैदा होंगी। पर्यावरण और चिकित्सा के क्षेत्र में इसका स्कोप तेजी से बढ़ा है। लेकिन इसका सबसे प्रमुख इस्तेमाल ऊर्जा के रूप में है। नाभिकीय विखंडन के द्वारा ऊर्जा का उत्पादन करना एक बड़ी चुनौती है। नाभिकीय शिक्षा के क्षेत्र में डिपॉर्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी बढ़-चढ़ कर काम कर रहा है। भारत में नाभिकीय तकनीक का यह प्रमुख क्षेत्र है और वह सारे नाभिकीय स्टेशनों के डिजाइन, निर्माण और ऑपरेशन का काम देखता है। इसमें भíतयों का काम भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर, मुंबई देखता है।

 
डीएई का ट्रेनिंग कोर्स एक वर्ष की समय सीमा का होता है और इसमें इंजीनियर और वैज्ञानिकों का चयन राष्ट्रीय स्तर की लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के माध्यम से होता है। करियर के लिहाज से आप विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर सकते हैं। पावर जनरेशन में न्यूक्लियर रिएक्टर की डिजाइनिंग, कार्य विधि और उसकी सुरक्षा से जुड़े क्षेत्र में भी कई मौके हैं। मेडिसन करियर में डायगोनिस्टक इमेजिंग जैसे एक्सरे, मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग, अल्ट्रासाउंड, डायगोनिस्टक फोटोग्राफर के रूप में करियर बना सकते हैं। कृषि तथा खाद्य इंडस्ट्री में नाभिकीय तकनीक के इस्तेमाल द्वारा उन्नत तथा रोगविहीन फसलों के उत्पादन में रोजगार के अवसर बनते हैं।

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के मुताबिक, अमेरिका में हर साल न्यूक्लियर मेडिकल प्रक्रियाओं के संदर्भ में बीस लाख से ज्यादा विशेषज्ञों की जरूरत रहती है। परमाणु विज्ञानी अस्पतालों और मेडिकल रिसर्च फर्म्स में रोजगार पा सकते हैं। इसके अलावा, अनुसंधान व विकास से जुड़े कई और कार्यक्रमों व संस्थानों में भी उन्हें रोजगार मिल सकता है। यदि वे चाहें, तो न्यूक्लियर पावर प्लांट्स, सरकारी एजेंसियों, राष्ट्ररीय प्रतिरक्षा तंत्र के अलावा विभिन्न न्यूक्लियर व स्पेस संबंधी प्रोग्रामों को संचालित करने वाली राष्ट्ररीय व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी जुड़ सकते हैं।


शोध में मौका

नई जनरेशन के न्यूक्लियर पावर रिएक्टर डिजाइन तैयार करना, विखंडन के लिए रिएक्टर के डिजाइन तैयार करना, स्पेस एक्सप्लोरेशन के लिए नए पावर सोर्स बनाना सरीखे कई कामों में शोध जारी है। इसके अलावा, विभिन्न क्षेत्रों में रेडियोएक्टिव पदार्थ का उत्पादन, उसके औद्योगिक और चिकित्सकीय प्रयोग के क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी के रिसर्च और डेवलपमेंट के कई प्रोगाम संचालित होते हैं। जिनमें म्यूटेशन ब्रीडिंग, फसलों का जेनेटिक इंप्रूवमेंट, जमीन का आइसोटोप की सहायता से अध्ययन, कीटनाशकों के अवशेषों का विश्लेषण शामिल होता है।

क्या सोचते हैं लोग

इस क्षेत्र के बारे में लोगों की आमतौर पर धारणा यह है कि न्यूक्लियर साइंटिस्ट या न्यूक्लियर इंजीनियर के तौर पर कार्य करना बेहद खतरनाक है। हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है। न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स को कई मामलों में नाभिकीय पदार्र्थों के सीधे संपर्क में नहीं आना पड़ता। इसके अलावा नाभिकीय पावर प्लांट्स की बात करें तो यहां भी रेडियोएक्टिव उत्सर्जनों की मात्रा बहुत कम होती है और सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जाता है, लिहाजा किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। कर्मचारियों के लिए कार्य संबंधी सुरक्षित परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए ऑक्युपेशनल सेफ्टी व स्वास्थ्य प्रशासन द्वारा नाभिकीय व्यवस्थाओं पर कड़ी निगाह रखी जाती है।


सैलरी पैकेज

न्यूक्लियर साइंस के क्षेत्र में सैलरी अच्छी होती है। अंतरराष्ट्ररीय स्तर पर एक न्यूक्लियर साइंटिस्ट की औसत सैलरी 50,000 डॉलर तक हो सकती है। इस क्षेत्र से जुड़े ज्यादातर कार्यों में आपको आगे बढऩे के भी अच्छे अवसर मिलते हैं। चूंकि न्यूक्लियर साइंटिस्ट की अलग-अलग इंडस्ट्रीज में काफी मांग है, लिहाजा ग्रेजुएट्स के लिए यहां विकल्प चुनने के भी अनेक अवसर मौजूद हैं।

इंस्टीट्यूट वॉच

u दिल्ली विश्वविद्यालय।
www.du.ac.in
u गुरु जांभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार।
www.gju.ernet.in

u होमी भाभा नेशनल इंस्टीट्यूट।
www.hbni.ac.in

u आईआईटी, कानपुर, मुंबई, गुवाहाटी, दिल्ली, चेन्नई।
www.iitk.ac.in

u एनआईएसईआर, भुवनेश्वर।
niser.ac.in

u बीएचयू, वाराणसी।
www.bhu.ac.in

u बीआईटीएस, पिलानी।
www.bits-pilani.ac.in

u इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ माइंस, धनबाद।
www.ismdhanbad.ac.in