Thursday, October 19, 2017

फर्नीचर डिजाइनिंग में बनाएं करियर,

एक समय तक फर्नीचर डिजाइनिंग का काम कारपेंटर ही करते थे, लेकिन आज के दौर में यह एक अलग प्रोफेशन बन चुका है। अगर आप की भी इसमें रुचि है और आप क्रिएटिव हैं तो फर्नीचर डिजाइनर बनकर करियर संवार सकते हैं। संबंधित ट्रेनिंग हासिल कर आप किसी कंपनी में जॉब कर सकते हैं या फिर अपना कारोबार भी शुरू कर सकते हैं। इस बारे में विस्तार से जानिए

पर्सनल स्किल्स
फर्नीचर डिजाइनिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए आपमें क्रिएटिव और आर्टिस्टिक सेंस का मजबूत होना अति आवश्यक है, साथ ही कम्युनिकेशन स्किल अच्छी होनी चाहिए। मार्केटिंग स्किल्स और बिजनेस की भी समझ अनिवार्य है। फर्नीचर डिजाइनिंग के क्षेत्र में काम करने के लिए मार्केट में डिजाइनिंग को लेकर क्या कुछ नया किया जा रहा है, उस ओर भी पैनी नजर रखनी होती है क्योंकि फर्नीचर डिजाइनर का काम एक बेजान लकड़ी में डिजाइन के जरिए उसे आकर्षक रूप देना होता है।

बढ़ रही है डिमांड
फर्नीचर डिजाइनिंग व्यवसाय अब केवल कारपेंटर का काम नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कुशल डिजाइनरों की मांग व्यापक स्तर पर बढ़ी है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले पांच वर्षों में बाजार में तकरीबन एक लाख फर्नीचर डिजाइनरों की मांग होगी।उल्लेखनीय है कि फर्नीचर डिजाइनिंग में पैसे कमाने के साथ-साथ अपनी कलात्मक क्षमता को अभिव्यक्त करने का मौका और सृजन की संतुष्टि का अहसास भी मिलता है।

एंट्री प्रोसेस
आमतौर पर फर्नीचर डिजाइनिंग कोर्स में प्रवेश के लिए शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास है, लेकिन कुछ संस्थानों में नामांकन के लिए आवेदन करते समय उम्मीदवार का किसी भी विषय  से 12वीं पास होना आवश्यक है। कुछ समय पहले तक फर्नीचर डिजाइनिंग के विभिन्न कोर्स सामान्यत: डिजाइनिंग केमुख्य कोर्स केअंतर्गत ही कराए जाते थे लेकिन वर्तमान में कई संस्थाओं में फर्नीचर डिजाइनिंग एक स्वतंत्र स्ट्रीम के रूप में भी पढ़ाया जाने लगा है।

मेन कोर्सेस
ट्रेनिंग कोर्सेस की बात करें तो इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए कई तरह के प्रोफेशनल कोर्स उपलब्ध हैं। कंप्यूटर एडेड डिजाइनिंग के जरिए भी फर्नीचर कला सीखी जा सकती हैै। इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए फर्नीचर डिजाइनिंग में डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स, बैचलर डिग्री कोर्स उपलब्ध हैं। सर्टिफिकेट कोर्स की अवधि एक साल की होती है, जबकि डिप्लोमा कोर्स दो साल की अवधि का होता है। फर्नीचर डिजाइनिंग केकई पाठ्यक्रमों केलिए प्रशिक्षण संस्थानों में प्रवेश अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद साक्षात्कार में उत्तीर्ण होने के बाद दिया जाता है। इस परीक्षा में आपकी कलात्मक प्रतिभा और सोच को भी परखा जाता है। देश के प्रतिष्ठित नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ डिजाइनिंग, अहमदाबाद में फर्नीचर डिजाइनिंग केपोस्ट ग्रेजुएट कोर्स उपलब्ध हैं। यहां प्रवेश केलिए अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा इंटीरियर डिजाइनिंग के तीन वर्षीय डिप्लोमा कोर्स में भी फर्नीचर डिजाइनिंग एक महत्वपूर्ण भाग होता है। इंटीरियर डिजाइनिंग के पाठ्यक्रम में दाखिला लेने के बाद फर्नीचर डिजाइनिंग में अल्पकालिक विशेषज्ञता कोर्स भी किया जा सकता है

जॉब आॅप्शंस
दिनों-दिन बढ़ती मांग और स्वर्णिम भविष्य की कल्पनाओं के कारण फर्नीचर डिजाइनिंग करियर के रूप में आज युवाओं में बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। किसी प्रतिष्ठित संस्थान से फर्नीचर डिजाइनिंग का कोर्स करने के बाद किसी भी डिजाइनर के साथ काम किया जा सकता है। फर्नीचर डिजाइनिंग का कोर्स करने के बाद अपना व्यवसाय भी शुरू किया जा सकता है या इस क्षेत्र में काम कर रही प्रतिष्ठित कंपनियों से जुड़कर काम कर सकते हैं। भारत में फर्नीचर निर्माण के क्षेत्र में कई विदेशी कंपनियाँ भी आ चुकी हैं। रचनात्मकता और नए डिजाइन के लिए कुशलता के साथ-साथ प्रशिक्षण की भी जरूरत होती है इसीलिए क्षेत्र में करियर की असीम संभावनाओं को देखते हुए अनेक संस्थानों ने फर्नीचर डिजाइनिंग के कोर्स शुरू किए हैं।
आप इस क्षेत्र में कई बड़ी कंपनियों के लिए डिजाइनिंग का कार्य कर सकते हैं। कंप्यूटर स्किल्स और कंप्यूटर वर्क की मदद से अपने कार्य को अंजाम दे सकते हैं। अगर आप अपना स्वयं का रोजगार शुरू करना चाहते हैं,तो डिग्री या डिप्लोमा के आधार पर बैंक से लोन मिल जाता है। फर्नीचर की कई बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां समय-समय पर अपने यहां नियुक्तियां निकालती हैं। इसके अलावा कई प्रशिक्षण संस्थान भी इस फील्ड के अनुभवी लोगों को रोजगार केअवसर मुहैया कराते हैं।

इनकम
फर्नीचर डिजाइनिंग के क्षेत्र में अनुभव का महत्व सबसे ज्यादा है। उसी आधार पर बाजार में प्रोफेशनल की मांग बढ़ती है। इस फील्ड में अनुभव के आधार पर ही इनकम का दायरा निर्धारित होता है। आजकल फर्नीचर डिजाइनर्स के लिए स्वतंत्र रूप से कार्य करना काफी महत्वपूर्ण है। इस तरह आप एक साथ कई कंपनियों से जुड़ सकते हैं और उनकेलिए डिजाइनिंग कर सकते हैं। प्रशिक्षुओं से कंप्यूटर स्किल्स और कंप्यूटर वर्क की उम्मीद की जाती है। इंटीरियर  डिजाइनिंग केक्षेत्र में हुए क्रांतिकारी बदलाव ने फर्नीचर डिजाइनिंग को आज अच्छी इनकम वाला व्यवसाय बना दिया है। फर्नीचर डिजाइनर का शुरुआती वेतन दस से बीस हजार रुपए प्रतिमाह तक हो सकता है। इसकेबाद अनुभव के आधार पर वेतन बढ़ता जाता है। अगर आप स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं तो आय लाखों रुपए में हो सकती है।

प्रमुख संस्थान
एनआईडी, अहमदाबाद
गवर्नमेंट पोलीटेक्निक कॉलेज, चंडीगढ़
इंस्टीट्यूट आॅफ फर्नीचर डिजाइनिंग, पटियाला
गवर्नमेंट पॉलीटेक्निक कॉलेज, लखनऊ
इंडियन प्लाइवुड इंडस्ट्रीज रिसर्च इंस्टीट्यूट, बैंगलुरु

Tuesday, October 17, 2017

कोशिकाओं की आणविक जीव विज्ञान में पीएचडी

डॉक्टरेट कार्यक्रम 'कोशिकाओं की आणविक जीव विज्ञान "न्यूरोसाइंसेस और आण्विक बायोसाइंसेज के लिए गौटिंगेन ग्रेजुएट स्कूल (GGNB) के एक सदस्य है। यह आणविक बायोसाइंसेज के लिए गौटिंगेन केंद्र (GZMB) द्वारा आयोजित किया जाता है और गौटिंगेन विश्वविद्यालय, biophysical रसायन विज्ञान, प्रायोगिक चिकित्सा के लिए मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के लिए मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट, और जर्मन प्राइमेट सेंटर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है।

शोध उन्मुख कार्यक्रम और अंग्रेजी में सिखाया जाता है, जो जैव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, चिकित्सा के क्षेत्र में एक मास्टर की डिग्री (या समकक्ष), या संबंधित क्षेत्रों रखने वाले छात्रों के लिए खुला है।

कार्यक्रम है जो कोशिकाओं के अध्ययन के लिए उत्साह का हिस्सा पिछले शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों से छात्रों को स्वीकार करता है। प्रशिक्षण कैसे सेल भाग्य और टोपोलॉजी निर्धारित कर रहे हैं की एक तुलनात्मक समझ प्राप्त करने के उद्देश्य से है, कैसे व्यापक जीनोमिक विश्लेषण उपकरणों को लागू करने का एक महत्वपूर्ण भावना, और स्थापित करने और सेलुलर कार्यों के लिए वैचारिक मॉडल का परीक्षण करने की क्षमता।
अनुसंधान

यह कार्यक्रम किया जा रहा है कि कैसे कोशिकाओं की 'subcellular मॉड्यूल' आनुवंशिक जानकारी, विनियमन, शरीर विज्ञान और टोपोलॉजी के स्तर पर बातचीत और समारोह अग्रणी सवाल के साथ, सेल और उसके विनियामक नेटवर्क के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण के उद्देश्य से अनुसंधान गतिविधियों को एकजुट करती है।

मॉडल प्रणाली, प्रोकीर्योट्स (जीवाणु और आर्किया) और यूकेरियोटिक रोगाणुओं संयंत्र के लिए और रोग मॉडल सहित पशु कोशिकाओं से लेकर संरक्षित सिद्धांतों की पहचान सक्षम करने से। इसके अलावा, प्लेटफार्मों जीनोम, प्रतिलेखन हस्ताक्षर, बड़े पैमाने पर प्रोटीन की पहचान, metabolomics, इमेजिंग, साथ ही बड़े पैमाने पर विश्लेषण और मात्रात्मक मॉडलिंग, संकाय सदस्यों, जो जैव सूचना विज्ञान में विशेषज्ञ हैं के द्वारा कवर के विश्लेषण के लिए उपलब्ध हैं।

दो प्रमुख विषयों के आसपास अनुसंधान केन्द्रों। सेल गुण और सेल भाग्य नियंत्रण, पूछ के साथ पहली सौदों कैसे कोशिकाओं को उनके प्रसार और अस्तित्व, उनके भेदभाव और समारोह, और बाहरी पोषक तत्वों से तनाव को लेकर संकेतों के लिए उनकी प्रतिक्रिया को नियंत्रित। इन परस्पर घटना विनियामक नेटवर्क के आधार पर कर रहे हैं, और उनकी समझ बहुत राज्यों में आम लक्षण की पहचान करने से फायदा होता है। दूसरा विषय टोपोलॉजी और intracellular डिब्बों की गतिशीलता के साथ संबंधित है। एक प्रमुख कार्य, एकीकृत सिद्धांतों और कैसे कोशिकाओं को प्राप्त करने के व्यक्तिगत विवरण की पहचान को बनाए रखने और उनके स्थानिक संगठन को समायोजित करने के लिए है।
अध्ययन

डॉक्टरेट कार्यक्रम 'कोशिकाओं की आणविक जीव विज्ञान "न्यूरोसाइंसेस और आण्विक बायोसाइंसेज के लिए गौटिंगेन ग्रेजुएट स्कूल (GGNB) के एक सदस्य है। ग्रेजुएट स्कूल एक संयुक्त मॉड्यूलर प्रशिक्षण कार्यक्रम है जो GGNB के बारह डॉक्टरेट कार्यक्रमों में योगदान के लिए प्रदान करता है और कहा कि सभी GGNB छात्रों के लिए खुला है। एक व्याख्यान और संगोष्ठी कार्यक्रम के अलावा, प्रशिक्षण (1) थीसिस समितियों द्वारा व्यक्तिगत परामर्श, (2) विशेष प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं में 1-3 सप्ताह के गहन तरीकों पाठ्यक्रम, के होते हैं प्रयोगशालाओं में (3) 2-3 दिन विधियों पाठ्यक्रम भाग लेने वाले शिक्षकों की, (4) इस तरह के वैज्ञानिक लेखन, प्रस्तुति कौशल, संचार, परियोजना प्रबंधन, टीम के नेतृत्व कौशल, संघर्ष के संकल्प, नैतिकता, और कैरियर के विकास, और (5) के छात्र का आयोजन वैज्ञानिक बैठकों, उद्योग के रूप में व्यावसायिक कौशल पाठ्यक्रम यात्रा, और सांस्कृतिक घटनाओं। छात्रों के पाठ्यक्रम और घटनाओं की एक बड़ी संख्या में से चुनने के द्वारा अपनी व्यक्तिगत पाठ्यक्रम दर्जी करने में सक्षम हैं।

कार्यक्रम है जो कोशिकाओं के अध्ययन के लिए उत्साह का हिस्सा पिछले शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों से छात्रों को स्वीकार करता है। प्रशिक्षण कैसे सेल भाग्य और टोपोलॉजी निर्धारित कर रहे हैं की एक तुलनात्मक समझ प्राप्त करने के उद्देश्य से है, कैसे व्यापक जीनोमिक विश्लेषण उपकरणों को लागू करने का एक महत्वपूर्ण भावना, और स्थापित करने और सेलुलर कार्यों के लिए वैचारिक मॉडल का परीक्षण करने की क्षमता। एक तुलनात्मक व्याख्यान श्रृंखला, आम तौर पर प्रति सत्र दो या दो से अधिक वक्ताओं द्वारा प्रस्तुत किया, विभिन्न प्रजातियों और यहां तक ​​कि राज्यों में अनुरूप घटनाएं शामिल हैं। विधियों पाठ्यक्रम जीनोम, प्रतिलेखन हस्ताक्षर, बड़े पैमाने पर प्रोटीन की पहचान, सेल आकृति विज्ञान और विनियमन, metabolomics के उच्च सामग्री के विश्लेषण, साथ ही बड़े पैमाने पर विश्लेषण और मात्रात्मक मॉडलिंग प्रतिभागियों जो जैव सूचना विज्ञान में विशेषज्ञता के माध्यम से विश्लेषण में सभी छात्रों की सहायता करेंगे।

प्रायोगिक अनुसंधान डॉक्टरेट के अध्ययन के प्रमुख घटक का गठन किया और डॉक्टरेट कार्यक्रम के एक संकाय सदस्य की प्रयोगशाला  में आयोजित किया जाता है। डॉक्टरेट अनुसंधान परियोजनाओं को एक स्कूल चौड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम, सभी GGNB छात्रों को, जो एक जीवंत अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान समुदाय के सदस्य हैं के लिए पेशकश से पूरित कर रहे हैं। डॉक्टरेट कार्यक्रम की भाषा अंग्रेजी है।

Saturday, October 14, 2017

मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल, एफएमसीजी

लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट एेसी प्रक्रिया है, जिसमें जानकारी, गुड्स और अन्य संसाधनों को शुरुआत से लेकर सप्लाई तक कस्टमर की जरूरतों के अनुसार मैनेज किया जाता है। अन्य शब्दों मंे कहें, तो यह खरीद, ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज और मटीरियल के डिस्ट्रीब्यूशन को मैनेज करना है। सप्लाई चेन मैनेजमेंट इसका ही एक हिस्सा है, जिसमें इंवेंट्री, ट्रांसपोर्टेशन, वेयरहाउसिंग, मटीरियल हैंडलिंग और पैकेजिंग भी शामिल है। घर, ऑफिस अौर फैक्टरी में होने वाले मटीरियल की सप्लाई की जिम्मेदारी लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट कंपनी की होती है।
भारत में मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल, एफएमसीजी और ई-कॉमर्स में तेजी के कारण लॉजिस्टिक्स मार्केट के 2020 तक सालाना 12.17 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना है। भारत फिलहाल लॉजिस्टिक्स में जीडीपी का 14.4 फीसदी खर्च करता है, जो विकसित देशों में हाेने वाले 8 फीसदी खर्च से कहीं ज्यादा है। नेशनल स्किल डेवलपमेंट की रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल भारत के लॉजिस्टिक्स मार्केट में 1.7 करोड़ एम्प्लाॅई काम कर रहे हैं और 2022 तक 1.11 करोड़ अतिरिक्त एम्प्लॉई की आवश्यकता होगी।
देश के फ्रेट ट्रांसपोर्ट मार्केट के 2020 तक 13.35 फीसदी की सालाना दर से बढ़ने की संभावना है। देश के फ्रेट ट्रांसपोर्ट में लगभग 60 फीसदी हिस्सा रोड फ्रेट का है और 2020 तक इसके 15 फीसदी की सालाना दर से बढ़ने की संभावना है। लॉजिस्टिक्स कई प्रकार का हो सकता है जैसे प्रोडक्शन, बिज़नेस और प्रोफेशनल लॉजिस्टिक्स।
अधिकतर कोर्स पीजी स्तर के
लॉजिस्टिक मैनेजमेंट के क्षेत्र में कॅरिअर बनाने के लिए कई तरह के कोर्स उपलब्ध हैं। इसके लिए पार्ट टाइम, सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा और पीजी डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश लिया जा सकता है। किसी भी स्ट्रीम में बैचलर डिग्री करने वाले छात्र इसमें प्रवेश ले सकते हैं। प्रमुख कोर्स में पीजी डिप्लोमा इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट, एमबीए इन लॉजिस्टिक एंड सप्लाई चेन मैनेजमेंट, डिप्लोमा इन लॉजिस्टिक्स एंड पोर्ट मैनेजमेंट और एग्जीक्यूटिव पीजी डिप्लोमा इन बिज़नेस लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट एंड एससीएम शामिल हैं। शीर्ष संस्थानों में प्रवेश कैट, मैट, ज़ैट जैसी परीक्षाओं के स्कोर के आधार पर मिलता है। एग्जीक्यूटिव कोर्स में प्रवेश के लिए एक्सपीरियंस जरूरी है।
सभी तरह की कंपनियों में अवसर
छोटी और बड़ी सभी तरह की कम्पनियों में लॉजिस्टिक्स मैनेजर की जरूरत होती है। कई संस्थाएं विश्वभर में लॉजिस्टिक मैनेजर की नियुक्ति करती हैं। यह कम्पनियां मैन्युफैक्चरर, होलसेलर, इलेक्ट्रिसिटी सप्लायर, लोकल गवर्नमेंट से लेकर आर्मी और चैरिटी संस्थाएं भी हो सकती हैं। रिटेल, क्लियरिंग एंड फाॅरवर्डिंग कंपनी, कूरियर एंड सप्लाई चेन मैनेजमेंट एंटरप्राइजेस में कॅरिअर की बेहतर संभावनाएं होती हैं। इसमें कस्टमर सर्विस मैनेजर, लॉजिस्टिक मैनेजर, मटीरियल मैनेजर, पर्चेस मैनेजर और इंवेंट्री कंट्रोल मैनेजर के पदों पर जॉब की जा सकती है।
कमाई
इस क्षेत्र में सैलरी पैकेज आमतौर पर अच्छे होते हैं। फ्रेशर को क्वालिफिकेशन और संस्थान के आधार पर प्रति माह 12 हजार से 20 हजार रुपए तक मिलने की संभावना होती है। कुछ वर्ष के अनुभव के बाद 35 हजार से 50 हजार रुपए प्रति माह का सैलरी पैकेज मिल सकता है।

Thursday, October 12, 2017

होम साइंस में कॅरियर

दसवीं या बारहवीं पास करने वाले छात्रों के लिए साइंस, कॉमर्स और ह्यूमेनिटीज स्ट्रीम के बाद होम साइंस के रूप में एक और विकल्प होता है। करियर के लिहाज से यह विकल्प छात्रों और अभिभावकों के बीच बहुत ज्यादा चर्चित नहीं है। इसकी वजह कुछ गलत धारणाएं हैं, जो होम साइंस स्ट्रीम में मौजूद अवसरों की जानकारी न होने से छात्रों और अभिभावकों में बनी हैं। आज के कॉलम में पढ़िए  होम साइंस स्ट्रीम और उससे जुड़े तरक्की के आयामों के बारे में।
क्या है होम साइंस स्ट्रीम
यह एक ऐसी स्ट्रीम है, जिसे भ्रांतिवश सही संदर्भो में न समझकर सिर्फ लड़कियों के लिए मान लिया जाता है। काफी अभिभावक लड़कियों की शिक्षा को जरूरी मानते हैं, लेकिन वह इससे भी ज्यादा अहमियत इस बात को देते हैं कि लड़कियां घर और उसके कामकाज को संभालन में ज्यादा कुशल हों। होम साइंस की पढ़ाई में होम मैनेजमेंट के प्रशिक्षण के अलावा कई तरह के रोजगारों में उपयोगी कौशल का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। इसलिए यह कहना ठीक नहीं है कि यह स्ट्रीम सिर्फ लड़कियों के लिए ही उपयोगी है। इस स्ट्रीम के तहत मिलने वाले प्रशिक्षण का लाभ लड़के भी रोजगार कुशलता (इंप्लॉयबिलिटी स्किल) बढ़ाने में कर सकते हैं।
बदलती सामाजिक परिस्थितियों में घर और पारिवारिक जीवन के कल्याण और उनकी देखरेख के लिए आधुनिक ढंग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से युक्त होम मैनेजमेंट जरूरी है। इस जरूरत को पूरा करने की शिक्षा और उपयोगी प्रशिक्षण देने का कार्य होम साइंस करता है। यह ‘बेहतर जीवनशैली’ पर केंद्रित शिक्षा है और इसकी अवधारणा का मूल बिंदु पारिवारिक पारिस्थितिकी (इकोसिस्टम) का निर्माण है।
होम साइंस का विषय क्षेत्रइस स्ट्रीम के पाठय़क्रम में साइंस और ह्यूमेनिटीज के विषय भी शामिल होते हैं। इस कारण इस स्ट्रीम का अध्ययन क्षेत्र काफी व्यापक होता है। इसमें केमिस्ट्री, फिजिक्स, फिजियोलॉजी, बायोलॉजी, हाइजिन, इकोनॉमिक्स, रूरल डेवलपमेंट, चाइल्ड डेवलपमेंट, सोशियोलॉजी एंड फैमिली रिलेशन्स, कम्यूनिटी लिविंग, आर्ट, फूड, न्यूट्रिशन, क्लॉथिंग, टेक्सटाइल्स और होम मैनेजमेंट आदि विषय शामिल होते हैं।
10वीं के बाद है उपलब्ध
विषय के रूप में होम साइंस सीबीएसई और ज्यादातर राज्य बोर्डो में 11वीं और 12वीं कक्षा के स्तर पर उपलब्ध है। कॉलेज के स्तर पर इस विषय की उपलब्धता को देखें, तो यह देश के काफी विश्वविद्यालयों में तीन वर्षीय बैचलर डिग्री पाठय़क्रम के रूप में पढ़ाया जा रहा है। इस विषय के साथ बीए या बीएससी डिग्री हासिल की जा सकती है। होम साइंस में ग्रेजुशन के बाद इस विषय में मास्टर डिग्री की पढ़ाई करने के अलावा फैशन डिजाइनिंग, डाइटिटिक्स, काउंसलिंग, सोशल वर्क, डेवलपमेंट स्टडीज, इंटरप्रिन्योरशिप, मास कम्यूनिकेशन और कैटरिंग टेक्नोलॉजी आदि विषयों में भी पोस्ट ग्रेजुएशन किया जा सकता है। इस विषय के छात्रों के पास बीएड करने का भी विकल्प रहता है।
होम साइंस के प्रमुख पांच क्षेत्र
- फूड एंड न्यूट्रिशन ’रिसोर्स मैनेजमेंट
- ह्यूमन डेवलपमेंट ’फैब्रिक एंड अपेरल साइंस
- कम्यूनिकेशन एंड एक्सटेंशन
इन क्षेत्रों के अलावा कुछ अन्य विषय भी होम साइंस के पाठय़क्रमों में शामिल होते हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं-इंटरप्रिन्योरशिप, फैमिली लाइफ एजुकेशन, चाइल्ड डेवलपमेंट, टेक्सटाइल डिजाइनिंग, होम इकोनॉमिक्स, माइक्रोबायोलॉजी, पर्सनालिटी डेवलपमेंट, फूड प्रिजर्वेशन और फैशन डिजाइनिंग।
उपलब्ध पाठय़क्रम
- डिप्लोमा इन होम साइंस ’बीएससी (होम साइंस) ’बीएससी (ऑनर्स) होम साइंस
- बीएचएससी ’बीएससी (ऑनर्स)फूड एंड न्यूट्रिशन ’बीएससी (ऑनर्स) ह्यूमन डेवलपमेंट
- एमएससी (होम साइंस) ’पीएचडी
जरूरी गुण
- विश्लेषणात्मक सोच ’प्रायोगिक और तार्किक दृष्टिकोण ’वैज्ञानिक सूझबूझ ’चीजों को व्यवस्थित करने का हुनर - सौंदर्यबोध और रचनाशीलता
- प्रभावी संवाद कौशल
- विवेक के साथ घरेलू जुड़े कार्यों को करने में रुझान हो
- संतुलित नजरिया
रोजगार के मौके
- टेक्सटाइल के क्षेत्र में मर्चेडाइजर या डिजाइनर
- हॉस्पिटल और खाद्य क्षेत्र में न्यूट्रिशनिस्ट या डाइटिशियन
- टूरिस्ट रिजोर्ट, रेस्टोरेंट और होटल में हाउस कीपिंग कार्य की देखरेख
- शैक्षणिक या कामकाजी संस्थानों में कैंटरिंग सुविधा देने का कार्य
- खाद्य उत्पादों के निर्माण और विकास कार्यों का पर्यवेक्षण
- रिसोर्स मैनेजमेंट
- फैमिली काउंसलर
- सोशल वर्क और ह्यूमन डेवलपमेंट
- अनुसंधान और शिक्षण कार्य
- टेक्सटाइल, फूड, बेकिंग और कंफेक्शनरी के क्षेत्र में स्वरोजगार
संबंधित संस्थान
- दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली
- यूनिवर्सिटी ऑफ बॉम्बे, मुंबई
- आचार्य एनजी रंगा एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, हैदराबाद
- इलाहाबाद एग्रीकल्चरल इंस्टीटय़ूट, इलाहाबाद
- चंद्रशेखर आजाद यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, कानपुर
- यूनिवर्सिटी ऑफ कैलकटा, कोलकाता
- राजस्थान एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, बीकानेर
- राजेंद्र एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, पूसा
- नरेंद्र देव यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, फैजाबाद
- गोविंद बल्लभ पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर
- महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, उदयपुर
- सीएसके हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, पालमपुर

Tuesday, October 10, 2017

आरजीसीबी में पीएचडी

बायोटेक्नोलॉजी के आधुनिक क्षेत्र में शोध करने के बाद कॅरियर की व्यापक संभावनाएं तलाशने के इच्छुक लोग राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी के लिए आवेदन कर सकते हैं । यहां इस फील्ड से जुड़ी कई स्ट्रीम्स में शोध करने के विकल्प मौजूद हैं। भारत सरकार का यह स्वायत्त संस्थान तिरूवनंतपुरम में है। आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पीएचडी आवेदन की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2015 निर्धारित की गई है।
आवेदन करने वाले लोगों में से योग्य उम्मीदवारों का चयन इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने वालों को ईमेल के जरिए सूचित किया जाएगा। इसके अलावा वेबसाइट पर भी उनके नाम डाले जाएंगे। आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आरजीसीबी में आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2015 निर्धारित की गई है।
कई हैं स्ट्रीम्स
आरजीसीबी में जिन फील्ड्स में पीएचडी का विकल्प उपलब्ध है, वे फील्ड्स इस प्रकार हैं- प्लांट बायोलॉजी, केमिकल बायोलॉजी, क्रोनिक डिसीज बायोलॉजी, ट्रॉपिकल डिसीज बायोलॉजी, कंप्यूटेशनल बायोलॉजी आदि।
क्या है अनिवार्य योग्यता
आवेदक ने संबंधित विषय में पीजी किया हो और इसमें उसने कम से कम 60 फीसदी अंक (ओजीपीए-6.0) हासिल किए हों। एससी/एसटी आवेदकों के लिए यह 50 फीसदी अंक (ओजीपीए- 5.0) है। पीजी के फाइनल ईयर के रिजल्ट का इंतजार कर रहे लोग भी आवेदन कर सकते हैं। आवेदक की अधिकतम उम्र 28 साल हो (एससी/एसटी को छूट)। आवेदक के पास यूजीसी/ सीएसआईआर/डीबीटी आदि की मान्य रिसर्च फैलोशिप होनी चाहिए।
कैसे होगा चयन
चूंकि आवेदकों के लिए पहले ही एक राष्ट्रीय स्तर की फैलोशिप के लिए क्वालिफाई करना अनिवार्य रखा गया है इसलिए चयन प्रक्रिया सिर्फ इंटरव्यू पर आधारित होगी। जिन आवेदकों को इंटरव्यू में बुलाया जाना है, उनके नाम वेबसाइट पर और ईमेल के जरिए 2 दिसंबर को भेज दिए जाएंगे।
कैसे करें आवेदन
आवेदन के लिए द्धह्लह्लश्च://ह्म्द्दष्ड्ढ. ह्म्द्गह्य.द्बठ्ठ पर जाकर फॉर्म डाउनलोड करें। इसे भरें और फॉर्म में बताए गए दस्तावेजों की प्रतियों व एप्लीकेशन फीस के डीडी के साथ इस पते पर भेजें-
Director, Rajiv Gandhi Centre for Biotechnology, Thycaud P.O., Thiruvananthapuram 695014, Kerala
फॉर्म के साथ डीडी
एप्लीकेशन फीस के रूप में फॉर्म के साथ 500 रुपए का डीडी भेजें। डीडी The Director, Rajiv Gandhi Centre for Bio technology,Thiruvananthapuram- 695014, Kerala के पक्ष में बनवाना है।

Monday, October 9, 2017

फार्माकोविजिलेंस में करियर

बचपन से मेडिसीन की पढ़ाई का सपना था पर सफलता नहीं मिलने की वजह से मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं ले पाए तो निराश होने की कोई बात नहीं. अब आपके पास एक ऐसा ऑप्‍शन है जो आपके अधूरे सपने को पूरा कर सकता है. हालांकि इस कोर्स को करने के बाद आप एमबीबीएस की डिग्री तो नहीं पा सकेंगे लेकिन एक डॉक्टर का फर्ज जरूर निभा सकेंगे.
हम यहां जिस कोर्स की बात कर रहे हैं उसका नाम है- फार्माकोविजिलेंस. दरअसल, दवाइयों से होने वाले किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट की पहचान, आकलन और बचाव के लिए फार्माकोलॉजिकल साइंस की मदद ली जाती है ताकि दवाइयों को ज्यादा सुरक्षित और उपयोगी बनाया जा सके.

अगर आपकी रुचि मेडिकल के क्षेत्र में है तो यह कोर्स आपके लिए ठीक रहेगा. इसके अलावा लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सजग और सुरक्षित रखने की भावना रखने वाले लोगों के लिए यह एक बेहतर करियर ऑप्शन है.
फार्माकोविजिलेंस का संबंध दवाइयों की उपलब्धता, डिस्ट्रीब्यूशन, पहुंच, इस्तेमाल और इससे जुड़ी दूसरी समस्‍याओं से भी है. इस फील्‍ड में विदेशों में भी नौकरियों की संभावनाएं हैं.
कोर्सेज:
सर्टिफिकेट इन फार्माकोविजिलेंस
डिप्लोमा इन फार्माकोविजिलेंस
विषय:
बेसिक प्रिंसिपल ऑफ फार्माकोविजिलेंस
रेगुलेशन इन फार्माकोविजिलेंस
फार्माकोविजिलेंस इन क्लिनिकल रिसर्च
ड्रग रिएक्शन
मैनेजमेंट ऑफ फार्माकोविजिलेंस डाटा
रिस्क मैनेजमेंट इन फार्माकोविजिलेंस
फार्माकोइपिडेमियोलॉजी
योग्यता: 
कम से कम 50 फीसदी अंकों के साथ केमिस्ट्री, बॉटनी, जूलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, जेनेटिक्स और बायोटेक से ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट या फार्मेसी और मेडिसिन में ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट.
चयन प्रक्रिया:
छात्रों का चयन एंट्रेंस टेस्ट, पर्सनल इंटरव्यू और स्क्रीनिंग टेस्ट पर आधारित होता है.
कहां मिलेगी नौकरी:
फार्माकोविजिलेंस से संबंधित कोर्स करने के बाद ग्लैक्सो, सन फार्मा, फाइजर, सिप्ला, निकोलस पिरामल जैसी फार्मास्युटिकल कंपनियों में नौकरी मिल सकती है. विदेशी फार्मा कंपनियां भी इस कोर्स को करने वाले भारतीय छात्रों को अच्छा पैकेज ऑफर करते हैं.
वेतन:
इस फील्ड में शुरुआत में 15 से 20 हजार रुपये मिलते हैं. वहीं, कुछ साल का अनुभव हासिल करने के बाद 30 से 40 हजार रुपये प्रतिमाह तक मिल सकते हैं
कहां से करें कोर्स:
इंस्टीट्यूट ऑफ क्लीनिकल रिसर्च, नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू, अहमदाबाद, हैदराबाद
वेबसाइट: www.icriindia.com
आईसीबीआईओ क्लीनिकल रिसर्च, बेंगलुरू
वेबसाइट: www.icbio.org
एम्पावर स्कूल ऑफ हेल्थ, दिल्ली
वेबसाइट: www.empower.net.in
आईडीडीसीआर, हैदराबाद
वेबसाइट: www.iddcr.com
जीआईटीएस एकेडमी, बेंगलुरू
वेबसाइट: www.gitsacademy.com
एकेडमी ऑफ क्लीनिकल रिसर्च एंड फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट, कोलकाता
महाराजा इंस्टीट्यूट मेडिकल साइंसेज, आंध्रप्रदेश
वेबसाइट: www.mimsvzm.org

सिमोजेन इंडिया
वेबसाइट: www.symogen.net

Wednesday, October 4, 2017

BMS में कैरियर

आज के इस मार्केटिंग के दौर में कई मल्टीनेशनल कंपनियां भारत में कारोबार कर रही हैं. इन अलग-अलग मल्टीनेशनल कंपनियों में मैनेजमेंट के छात्रों के लिए ढ़ेरों करियर के विकल्प हैं. मैनेजमेंट के क्षेत्र में अपना करियर बनाने की चाह रखनेवाले छात्रों के लिए बीएमएस एक बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकता है. 12वीं के बाद बीएमएस में तीन साल की बैचलर डिग्री लेकर आप मैनेजमेंट के क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं. आइए BMS में कैरियर के बारे में विस्तार से जानते हैं. BMS में कैरियर - बीएमएस का मतलब है 'बैचलर इन मैनेजमेंट स्टडीज '. बीएमएस कोर्स के दौरान मैनेजमेंट के बारे में थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल नॉलेज भी दी जाती है. बीएमएस में थ्योरी के अंतर्गत कॉमर्स, ऑर्गेनाइजेशनल बिहैवियर, मैथ्स और मार्केटिंग फाइनेंस जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं. जबकि प्रैक्टिकल नॉलेज के लिए कई सारे प्रोजेक्ट दिए जाते हैं. इस दौरान छात्रों को सिखाया जाता है कि कैसे बिजनेस की फील्ड में अलग-अलग हालात का सामना करना पड़ता है. BMS में कैरियर - एडमिशन के लिए ज़रूरी शर्तें इस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए बारहवीं में कम से कम 45 प्रतिशत नंबर आने ज़रूरी हैं. इस कोर्स में एडमिशन पाने के लिए एंट्रेंस टेस्ट देना पड़ता है और इस टेस्ट को पास करने के लिए छात्रों को इंटरव्यू और जीडी यानि ग्रुप डिस्कशन क्लीयर करना पड़ता है. BMS में कैरियर - कहां से करें ये कोर्स ? बारहवीं के बाद किया जाने वाला बीएमएस कोर्स देश के अधिकांश कॉलेजों में उपलब्ध है. भले आप किसी भी राज्य या फिर किसी भी शहर में क्यों न रहते हों. आप इस कोर्स को दिल्ली और मुंबई युनिवर्सिटी के अंतर्गत आनेवाले कई कॉलेजों के से कर सकते हैं. आपको बता दें कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में इस कोर्स की अवधि 4 साल है. जबकि मुंबई यूनिवर्सिटी में इस कोर्स की अवधि 3 साल है. बीएमएस के बाद करियर ऑप्शन बीएमएस कोर्स करने से न सिर्फ आपको बैचलर की डिग्री मिलती है बल्कि इससे आपको मैनेजमेंट के क्षेत्र में एक्सपर्ट बनने में भी मदद मिलती है. इस कोर्स के बाद छात्र सरकारी नौकरी के लिए कॉम्पटिटिव एग्ज़ाम की तैयारी भी कर सकते हैं इसके साथ ही बैंकिंग और फाइननेंस के क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं. इसके अलावा कई मल्टीनेशनल कंपनियों में आप प्रोडक्शन मैनेजर, एचआर मैनेजर, मार्केटिंग मैनेजर, इंफोर्मेशन सिस्टम मैनेजर, रिसर्च एक डेवलपमेंट मैनेजर और बिजनेस कंसल्टेंट के रुप में अपना करियर बना सकते हैं. BMS में कैरियर - इस क्षेत्र में मिलनेवाला पैकेज बीएमएस करने के बाद मैनेजमेंट के क्षेत्र में आप इंटर्नशिप के ज़रिए नौकरी की शुरूआत कर सकते हैं. हालांकि इस क्षेत्र में मिलनेवाली सैलरी कंपनी और काम के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. जहां तक शुरूआती सैलरी की बात है तो करीब 15 हज़ार से 20 हज़ार तक हो सकती है जबकि कुछ कंपनियां इससे ज्यादा सैलरी देती हैं. इस क्षेत्र में जैसे-जैसे आपका अनुभव बढ़ेगा आपकी कमाई में भी इज़ाफा होने लगेगा. अगर आप मैनेजमेंट में अपना भविष्य तलाश रहे हैं तो फिर बीएमएस कोर्स करके अपने भविष्य के सपने को साकार कर सकते हैं.