Wednesday, May 10, 2017

एयरोनॉटिकल इंजीनियर में करियर

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग का क्षेत्र इंजीनियरिंग शिक्षा का सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। इसमें करियर निर्माण की बहुत ही उजली संभावनाएं हैं। इसके तहत नागरिक उड्डयन, स्पेस रिसर्च, डिफेंस टेक्नोलॉजी आदि के क्षेत्र में नई तकनीकों का विकास किया जाता है। यह क्षेत्र डिजाइनिंग, निर्माण, विकास, परीक्षण, ऑपरेशंस तथा कमर्शियल व मिलिट्री एयरक्राफ्ट के पुर्जों के साथ-साथ अंतरिक्ष यानों, उपग्रहों और मिसाइलों के विकास से भी संबंध‍ित है।
एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग ने विश्व का परिदृश्य ही बदल दिया है। यह ऐसा क्षेत्र है, जिसमें नई व आकर्षक
संभावनाओं की कोई सीमा नहीं है। एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग के तहत डिजाइनिंग, नेविगेशनल गाइडेंस एंड कंट्रोल सिस्टम, इंस्ट्रूमेंटेशन व कम्युनिकेशन अथवा प्रोडक्शन मैथड के साथ ही साथ वायुसेना के विमान, यात्री
विमान, हेलिकॉप्टर और रॉकेट से जुड़े कार्य शामिल हैं।
क्या है काम?
एयरोनॉटिकल इंजीनियर के प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं: यात्री विमान के यंत्रों, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का रखरखाव एवं प्रबंधन, विमान संबंधी रेडियो और रडार का संचालन, उड़ने से पहले विमान की हर कोण से जांच, विमान में ईंधन की रीफिलिंग, विमान बनाने वाली कंपनियों में विमान संबंधी यंत्रों तथा उपकरणों की डिजाइनिंग तथा डेवलपमेंट आदि।
हिंदी टाइपिंग टेस्ट देने जा रहे हैं तो जान ले ये टिप्‍स
कौन-से कोर्स?
इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए आपके पास एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बीई तथा बीटेक की ग्रेजुएट डिग्री
अथवा कम से कम एयरोनॉटिक्स में तीन वर्षीय डिप्लोमा होना चाहिए। इस क्षेत्र में आईआईटी के अलावा कुछ
इंजीनियरिंग कॉलेजों में डिग्री तथा पोस्ट डिग्री पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा पाठ्यक्रम कुछ पॉलीटेक्निक कॉलेजों में भी उपलब्‍ध है। बीई तथा बीटेक पाठ्यक्रम के लिए 12वीं परीक्षा भौतिकी एवं गणित के साथ पास होना जरूरी है। आईआईटी तथा विभिन्न राज्यों में स्थित इंजीनियरिंग कॉलेजों के एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग के बीई पाठ्यक्रम में विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से प्रवेश दिया जाता है। स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए चयन प्रवेश परीक्षाओं में प्राप्त मेरिट के आधार पर किया जाता है। जिन संस्थानों में एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, वे सामान्यत: क्वॉलिफाइंग ग्रेड के रूप में जेईई स्कोर को मान्य करते हैं। भारत सरकार द्वारा अध‍िमान्य एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री चार वर्ष की पढ़ाई के बाद प्रदान की जाती है, जबकि डिप्लोमा पाठ्यक्रम तीन वर्ष की अवध‍ि के होते हैं।
इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स द्वारा आयोजित एसोसिएट मेंबरशिप एक्जामिनेशन के माध्यम से सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों के कर्मचारी अथवा एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमाधारी उम्मीदवार दूरस्थ शिक्षा प्रणाली द्वारा बीई पाठ्यक्रम कर सकते हैं। एसोसिएट मेंबरशिप एक्जामिनेशन की परीक्षा द एयरोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा ली जाती है। यह डिग्री एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग डिग्री के समकक्ष मान्यता रखती है। कुछ
संस्थानों द्वारा एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में एमटेक और पीएचडी पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाते हैं।
ये स्किल्स भी जरूरी
एयरोनॉटिकल इंजीनियर बनने के लिए उम्मीदवार के पास व्यापक दृष्टिकोण होना नितांत आवश्यक है। उसके पास गणितीय शुद्धता और डिजाइन कौशल, कम्प्यूटर दक्षता और अच्छी कम्युनिकेशन स्किल होनी चाहिए।
उम्मीदवार को योजना बनाने तथा दबाव में काम करने में भी निपुण होना चाहिए। उसे शारीरिक व मानसिक रूप से पूर्णत: फिट होना चाहिए।
आकर्षक वेतन
सरकारी क्षेत्रों में कार्यरत एयरोनॉटिकल इंजीनियरों को सरकार द्वारा निर्धारित वेतनमान दिया जाता है जबकि निजी संस्थानों के इंजीनियरों को कंपनी द्वारा निर्धारित बहुत ही आकर्षक वेतनमान प्रदान किया जाता है। जहां सरकारी क्षेत्र का आरंभिक वेतनमान 25 से 35 हजार रुपए मासिक होता है, वहीं निजी क्षेत्र में 50 हजार से डेढ़ लाख रुपए मासिक तक वेतन दिया जाता है। एयरलाइंस के इंजीनियरों को मुफ्त हवाई यात्रा के साथ-साथ चिकित्सा, आवास आदि ढेरों सुविधाएं भी मिलती हैं।
कहां हैं जॉब्स?
एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, सरकारी एवं निजी एयरलाइंस के साथ-साथ एयरक्राफ्ट निर्माण इकाइयों में करियर के उजले अवसर उपलब्‍ध हैं। एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग का पाठ्यक्रम
सफलतापूर्वक पास कर चुके युवाओं को इंडियन हेलिकॉप्टर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, निजी तथा सरकारी एयरलाइनों के साथ- साथ एयरक्राफ्ट निर्माण इकाइयों में करियर उपलब्‍ध है। भारतीय एयरोनॉटिकल इंजीनियरों
को फ्लाइंग क्लबों, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की बंगलुरु, कानपुर, नासिक आदि डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेट्रीज, नेशनल एयरोनॉटिकल लैब, सिविल एविएशन विभाग के साथ-साथ रक्षा सेवाओं तथा इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) में करियर के उजले अवसर उपलब्ध हैं।
एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग का कोर्स करने के उपरांत सरकारी संस्थानों में प्रवेश परीक्षा के माध्यम से एयरोनॉटिकल इंजीनियर को ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी या जूनियर इंजीनियर के पद पर नियुक्ति दी जाती है। इनकी रुचि व एप्टीट्यूट के आधार पर इन्हें एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, ओवरहॉल या सपोर्ट विभाग में टेक्निकल ट्रेनिंग दी जाती है। प्रशिक्षण के बाद ये असिस्टेंट एयरक्राफ्ट इंजीनियर्स या असिस्टेंट टेक्निकल ऑफिसर के पद पर
नियुक्त किए जाते हैं।
भविष्य में पदोन्नाति के लिए इन्हें विभागीय परीक्षा पास करनी पड़ती है। एयरलाइंस, हवाई जहाज निर्माण कारखानों, एयर टर्बाइन प्रोडक्शन प्लांट्स या एविएशन इंडस्ट्री के डिजाइन डेवलपमेंट विभागों में इनके लिए करियर निर्माण के बहुत अच्छे अवसर हैं।
प्रमुख संस्थान
राईट ब्रदर्स इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग, नई दिल्ली
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग, देहरादून
हिंदुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी, चेन्नई
मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, चेन्नई
नेहरू कॉलेज ऑफ एयरोनॉटिक्स एंड एप्लाइड साइंस, कोयम्बटूर
पार्क कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कोयम्बटूर
इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग एंड इंफर्मेशन टेक्नोलॉजी, पुणे
इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स एंड इंजीनियरिंग, भोपाल

Sunday, May 7, 2017

जोअलॉजी: जीव-जंतुओं संग पाएं मंजिल

जीव-जंतु प्रेमियों को निश्चय ही उनके साथ समय बिताना अच्छा लगता है। आप अपने इसी प्रेम को अपने करियर में भी बदल सकते हैं। प्राणि विज्ञान या जोअलॉजी जीव विज्ञान की ही एक शाखा है, जिसमें जीव-जंतुओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। इसमें प्रोटोजोआ, मछली, सरीसृप, पक्षियों के साथ-साथ स्तनपायी जीवों के बारे में अध्ययन किया जाता है। इसमें हम न सिर्फ जीव-जंतुओं की शारीरिक रचना और उनसे संबंधित बीमारियों के बारे में जानते हैं, बल्कि मौजूदा जीव-जंतुओं के व्यवहार, उनके आवास, उनकी विशेषताओं, पोषण के माध्यमों, जेनेटिक्स व जीवों की विभिन्न जातियों के विकास के साथ-साथ विलुप्त हो चुके जीव-जंतुओं के बारे में भी जानकारी हासिल करते हैं।
अब आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि प्राणि विज्ञान में किस-किस प्रकार के जीवों का अध्ययन किया जाता है। जवाब है, इस पाठय़क्रम के तहत आप लगभग सभी जीवों, जिनमें समुद्री जल जीवन, चिडियाघर के जीव-जंतु, वन्य जीवों, यहां तक कि घरेलू पशु-पक्षियों के जीव विज्ञान एवं जेनेटिक्स का अध्ययन करते हैं। आइए जानते हैं कि इस क्षेत्र में प्रवेश करने का पहला पड़ाव क्या है?
प्राणि विज्ञान के क्षेत्र में आने के लिए सबसे पहले आपको स्नातक स्तर पर जोअलॉजी की डिग्री लेनी होगी। आमतौर पर यह विषय देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में विज्ञान के विभिन्न विषयों की तरह ही तीन वर्षीय डिग्री पाठय़क्रम के तहत पढ़ाया जाता है।
योग्यता 
जोअलॉजी या प्राणि विज्ञान में स्नातक में प्रवेश के लिए जरूरी है कि छात्र 12वीं कक्षा विज्ञान विषयों, जीव विज्ञान, भौतिकी, रसायन विज्ञान के साथ-साथ गणित से उत्तीर्ण करें। स्नातकोत्तर में प्रवेश के लिए छात्रों का स्नातक स्तर पर 50 प्रतिशत के साथ जोअलॉजी विषय उत्तीर्ण करना जरूरी है।
पाठय़क्रम
बी. एससी. जोअलॉजी (प्राणि विज्ञान)
बी. एससी. जोअलॉजी एंड इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी (डबल कोर)
बी. एससी. बायो-टेक्नोलॉजी, जोअलॉजी एंड केमिस्ट्री
बी. एससी. बॉटनी, जोअलॉजी एंड केमिस्ट्री
एम. एससी. मरीन जोअलॉजी
एम. एससी. जोअलॉजी विद स्पेशलाइजेशन इन मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी
एम. एससी. जोअलॉजी
एम. फिल. जोअलॉजी
पी. एचडी. जोअलॉजी
फीस 
स्नातक स्तर के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय में फीस लगभग 6,500-10,000 रुपये तक हो सकती है। स्नातकोत्तर और उससे आगे की शिक्षा के लिए फीस संबंधित जानकारी के लिए संबंधित विश्वविद्यालय या संस्थान से संपर्क करें।
ऋण एवं स्कॉलरशिप 
स्नातक स्तर पर जहां तक ऋण की बात है तो अभी यहां ऋण के लिए कोई खास सुविधा नहीं है, जबकि विभिन्न कॉलेज व विश्वविद्यालय अपने छात्रों के लिए स्कॉलरशिप जरूर मुहैया कराते हैं। स्नातक से आगे की पढ़ाई के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या यूजीसी के साथ-साथ विभिन्न अनुसंधानों में जुटे विभागों या संस्थानों की ओर से भी स्कॉलरशिप की सुविधा प्राप्त की जा सकती है।
यह पाठय़क्रम किसी अन्य प्रोफेशनल कोर्स की तरह नहीं है, जहां स्नातक की डिग्री के साथ ही आप काम के लिए तैयार हो जाते हैं। आमतौर पर माना जाता है कि कम से कम स्नातकोत्तर की डिग्री के साथ जोअलॉजी की किसी खास शाखा में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद आप इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं देंगे।
शिक्षा सलाहकार अशोक सिंह का कहना है, ‘अगर आप अनुसंधान और शोध के क्षेत्र में आना चाहते हैं तो जोअलॉजी में बी.एससी. के बाद आप एम.एससी. और फिर पीएच.डी. करें। लेकिन छात्रों के लिए 12वीं के स्तर पर ही यह निर्णय लेना जरूरी है कि वे अनुसंधान व शोध के क्षेत्र में आगे जाना चाहते हैं या शिक्षा में।’
प्राणि विज्ञान चूंकि जीव विज्ञान की ही एक शाखा है, जो जीव-जंतुओं की दुनिया से संबंधित है, इसलिए यहां पक्षियों के अध्ययन में विशेषज्ञता हासिल करने वाले को पक्षी वैज्ञानिक, मछलियों का अध्ययन करने वाले को मत्स्य वैज्ञानिक, जलथल चारी और सरीसृपों का अध्ययन करने वाले को सरीसृप वैज्ञानिक और स्तनपायी जानवरों का अध्ययन करने वालों को स्तनपायी वैज्ञानिक कहा जाता है। जोअलॉजिस्ट की जिम्मेदारी जानवरों, पक्षियों, कीड़े-मकौड़ों, मछलियों और कृमियों के विभिन्न लक्षणों और आकृतियों पर रिपोर्ट तैयार करना और विभिन्न जगहों पर उन्हें संभालना भी है। एक जोअलॉजिस्ट अपना काम जंगलों आदि के साथ-साथ प्रयोगशालाओं में भी करता है, जहां वे उच्च तकनीक की मदद से अपने जमा किए आंकड़ों को रिपोर्ट की शक्ल देता है और एक सूचना के डेटाबैंक को बनाता है। जोअलॉजिस्ट सिर्फ जीवित ही नहीं, बल्कि विलुप्त हो चुकी प्रजातियों पर भी काम करते हैं।
संभावनाएं
जोअलॉजी में कम से कम स्नातकोत्तर की डिग्री लेने के बाद छात्रों के सामने विभिन्न विकल्प हैं। सबसे पहला विकल्प है कि वे बी.एड. करने के बाद आसानी से किसी भी स्कूल में अध्यापक पद के लिए योग्य हो जाते हैं। इस क्षेत्र में विविधता की वजह से छात्रों के सामने काफी संभावनाएं मौजूद हैं। वे किसी जोअलॉजिकल या बोटैनिकल पार्क, वन्य जीवन सेवाओं, संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं, राष्ट्रीय उद्यानों, प्राकृतिक संरक्षण संस्थाओं, विश्वविद्यालयों, फॉरेंसिक विशेषज्ञों, प्रयोगशालाओं, मत्स्य पालन या जल जगत, अनुसंधान एवं शोध संस्थानों और फार्मा कंपनियों के साथ जुड़ सकते हैं। इसके अलावा कई टीवी चैनल्स मसलन नेशनल जीअग्रैफिक, एनिमल प्लैनेट और डिस्कवरी चैनल आदि को अक्सर शोध और डॉक्यूमेंटरी फिल्मों के लिए जोअलॉजिस्ट की जरूरत रहती है।
वेतन 
अगर आप शिक्षा जगत से जुड़ते हैं तो सरकारी और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से निर्धारित वेतन पर नौकरी करेंगे। आमतौर पर एक बी. एड. अध्यापक का वेतन 32 से 35 हजार रुपये प्रति माह होता है। अगर आप एक फ्रेशर के रूप में अनुसंधान और शोध क्षेत्र में प्रवेश करेंगे तो आप प्रति माह 10 से 15 हजार रुपये कमा सकते हैं।
नए क्षेत्र
करियर काउंसलर जितिन चावला की राय में आजकल जोअलॉजी के छात्रों में वाइल्ड लाइफ से संबंधित क्रिएटिव वर्क और चैनलों पर काम करने के प्रति काफी रुझान है, लेकिन यह आसान काम नहीं है। ऐसे काम की डिमांड अभी भी सीमित है। हालांकि इन दिनों निजी स्तर पर चलाए जा रहे फिश फार्म्स काफी देखने में आ रहे हैं। जोअलॉजी के छात्रों के लिए यह एक बढिया व नया करियर विकल्प हो सकता है, खासकर प्रॉन्स फार्मिंग शुरू करने का।
मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज के जोअलॉजी डिपार्टमेंट की हेड प्रोफेसर स्मिता कृष्णन का कहना है कि जोअलॉजी के छात्रों के लिए इको टूरिज्म, ह्यूमन जेनेटिक्स और वेटरनरी साइंसेज के क्षेत्र खुल रहे हैं। जोअलॉजी में डिग्री के बाद वेटरनरी साइंसेज या एनिमल साइंस से संबंधित कोर्सेज किए जा सकते हैं।
करियर एक्सपर्ट कुमकुम टंडन के अनुसार कम्युनिकेशन जोअलॉजिस्ट के तौर पर इलेक्ट्रॉनिक संवाद माध्यमों का उपयोग करते हुए आप जोअलॉजी की जानकारी के प्रसार-विस्तार के क्षेत्र में सक्रिय हो सकते हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री में प्लानिंग और मैनेजमेंट लेवल पर अहम भूमिका निभा सकते हैं। समुद्री जीवों और पशुओं की विलुप्त होती प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में अपना करियर बनाने की सोचें। यह वक्त की जरूरत है कि जोअलॉजिस्ट को जीअग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम और पशुओं की ट्रैकिंग से संबंधित तकनीकों को मिला कर काम करना आता हो।

साक्षात्कार
संभावनाओं की यहां कोई कमी नहीं
जोअलॉजी विषय की बारीकियों और देश-विदेश में इस क्षेत्र की संभावनाओं के बारे में बता रही हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के मैत्रेयी कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रेनु गुप्ता
प्राणि विज्ञान के क्षेत्र में किस प्रकार के छात्र अपना भविष्य देख सकते हैं?
जोअलॉजी में वही छात्र प्रवेश लें, जिन्हें जीव-जन्तुओं से प्यार हो, साथ ही साथ वे व्यवहारिक भी हों। पहले तो कॉलेजों में प्रैक्टिकल्स के दौरान चीर-फाड़ भी करनी पड़ती थी, जिसे अब एनिमल एथिक्स के चलते बंद किया जा चुका है, बावजूद इसके छात्र को खुद को इतना मजबूत रखना चाहिए कि वे खून या जीवों से जुड़ी अन्य चीजों को देख कर परेशान न हो जाएं। उन्हें जानवरों से डर नहीं लगना चाहिए।
स्नातक के बाद छात्र किस प्रकार आगे बढ़ सकते हैं?
स्नातक तो जोअलॉजी की पहली सीढ़ी है। इससे आगे छात्र विभिन्न दिशाओं में आगे बढ़ सकते हैं। जो छात्र शिक्षा के क्षेत्र में आना चाहते हैं, वे स्नातक के बाद बी.एड. करके 8वीं कक्षा के छात्रों को विज्ञान विषय और स्नातकोत्तर के बाद बी.एड. व एम.एड. करके स्कूल में 10वीं व 12वीं तक के छात्रों को पढ़ा सकते हैं। इसके अलावा स्नातकोत्तर कर वे देश की अनुसंधान एवं शोध संस्थाओं में प्रोजेक्ट फेलो के रूप में शुरुआत कर सकते हैं। आज जोअलॉजी में विशेषज्ञता के लिए इतने विषय हैं कि वे जोअलॉजी विषयों के विशेषज्ञों के साथ-साथ माइक्रोबायोलॉजिस्ट, फूड टेक्नोलॉजिस्ट, एनवायर्नमेंटलिस्ट, इकोलॉजिस्ट आदि की भूमिका भी निभा सकते हैं।
इस क्षेत्र में करियर के लिहाज से क्या संभावनाएं हैं?
संभावनाओं की यहां कोई कमी नहीं है। आप स्नातक के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन और उसके आगे एम. फिल. व पीएच.डी. तक कर सकते हैं। अगर आप स्नातकोत्तर हैं तो वन्य जीवन जगत, अनुसंधान एवं शोध संस्थानों, शिक्षा क्षेत्र आदि में नाम कमा सकते हैं।
प्रमुख संस्थान
दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज, नई दिल्ली
www.dducollege.du.ac.in/
गार्डन सिटी कॉलेज, इंदिरा नगर, बेंगलुरू
www.gardencitycollege.edu/in/
अचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज, दिल्ली
andcollege.du.ac.in
मैत्रेयी कॉलेज, दिल्ली
www.maitreyi.ac.in/
देशबंधु कॉलेज, दिल्ली
www.deshbandhucollege.ac.in
श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, दिल्ली
www.svc.ac.in/academicpage1.html
सेंट एल्बर्ट्स कॉलेज, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, कोच्चि
www.alberts.ac.in/ug-courses/
पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज ऑफ साइंस, ओसमानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद
www.osmania.ac.in/oupgcs/
किरोड़ी मल कॉलेज, दिल्ली
www.kmcollege.ac.in/
नफा-नुकसान
प्रकृति के करीब रहने व उसे और करीब से जानने का मौका मिलता है।
इस दिशा में ज्ञान हासिल करने की कोई सीमा नहीं है। आप काफी आगे तक जानकारी के लिए देश-विदेश में शिक्षा हासिल कर सकते हैं।
बाकी क्षेत्रों के मुकाबले शुरुआत में यहां वेतन काफी कम है।

Friday, May 5, 2017

केमोइंफॉर्मेटिक्स: रासायनिक सूचनाओं में करियर

केमोइंफॉर्मेटिक्स केमिस्ट्री की सबसे तेजी से विकसित होने वाली शाखा बन चुकी है। आने वाले समय में केमोइंफॉर्मेटिक्स का कोर्स करने वाले छात्रों को देश और विदेश में पर्याप्त अवसर मिलेंगे। इस बारे में बता रही हैं नमिता सिंह
इस समय हम ग्लोबल विलेज में जी रहे हैं। आईटी ने कई विधाओं को खुद से जोड़ कर उनका कायाकल्प करने का बीड़ा उठाया है। इसी प्रक्रिया के तहत आईटी का रसायन विज्ञान के साथ सम्मिलन दिन-ब-दिन परवान चढ़ता जा रहा है। इसके अंतर्गत रासायनिक सूचनाओं का संग्रहण, प्रबंधन, विश्लेषण एवं उनका समाधान संबंधी कार्य आते हैं। इस प्रचलित एवं कारगर विधा को नाम दिया गया ‘केमोइंफॉर्मेटिक्स’ अर्थात रसायन सूचना विज्ञान। केमोइंफॉर्मेटिक्स का सबसे ज्यादा उपयोग दवा बनाने वाली कंपनियां दवाओं की खोज में करती हैं। बाजार का विश्लेषण यही बता रहा है कि संभावनाओं एवं विस्तार को देखते हुए आने वाले कुछ वर्षों में यह क्षेत्र और अधिक चमकदार एवं रोजगारपरक हो सकता है, क्योंकि इसका ताल्लुक काफी हद तक आईटी से जुड़ा हुआ है।
बायोइंफॉर्मेटिक्स के दो दशक बाद केमोइंफॉर्मेटिक्स शाखा चलन में आई। आमतौर पर लोग बायोइंफॉर्मेटिक्स व केमोइंफॉर्मेटिक्स को एक ही मानते हैं, जबकि दोनों में काफी विविधता है। बायोइंफॉर्मेटिक्स में जहां कई तरह की विधाओं को शामिल किया जाता है, वहीं केमोइंफॉर्मेटिक्स उसी से निकली एक शाखा है, जिसमें ड्रग डिजाइन के प्रयोग व थ्योरी को भली-भांति समझा जाता है।
उच्च शिक्षा की दरकार
रसायन विज्ञान एवं आईटी से संबंधित होने के कारण इसके पाठय़क्रम में दाखिला लेने के लिए छात्रों को रसायन विज्ञान में कम से कम बीएससी होना चाहिए, तभी एमएससी में प्रवेश मिल पाता है। एमएससी दो वर्षीय पाठय़क्रम है। इसके उपरांत रिसर्च एवं एकेडमिक फील्ड में जाने का मार्ग प्रशस्त होता है। अधिकांश संस्थान स्नातक के पश्चात एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा एवं डिप्लोमा जैसे कोर्स भी करवाते हैं। इसकी अवधि एक से लेकर डेढ़ वर्ष तक होती है। विदेशों में सबसे ज्यादा प्रचलित एमएससी इन केमोइंफॉर्मेटिक्स है, जबकि भारत में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा की अधिक डिमांड है। कई संस्थान डिस्टेंस लर्निंग के जरिए भी पीजी डिप्लोमा कोर्स कराते हैं। योग्यता व कोर्स अवधि रेगुलर की तरह ही होती है।
पाठ्य़क्रम 
एमएससी इन केमोइंफॉर्मेटिक्स के अंतर्गत छात्रों को विशेष रूप से डाटा बेस, प्रोग्रामिंग, वेब टेक्नोलॉजी, डाटा माइनिंग एवं कम्प्यूटर द्वारा ड्रग डिजाइनिंग आदि कार्य शामिल हैं। पाठय़क्रम के दौरान छात्रों से कई तरह के प्रायोगिक प्रशिक्षण एवं प्रबंधन संबंधी कार्य कराए जाते हैं, जबकि पीएचडी आदि पाठय़क्रमों के अंतर्गत रिसर्च वर्क में ड्रग की खोज, डिजाइन एवं उसकी कंपोजिशन का अध्ययन किया जाता है। वैसे भी केमिस्ट्री की निर्भरता दिन-प्रतिदिन कम्प्यूटर पर बढ़ती ही जा रही है। नए आने वाले छात्रों की केमिस्ट्री के प्रति रुचि को देख कर पाठ्य़क्रम की रूपरेखा काफी हद तक उचित भी है। जहां तक पीजी डिप्लोमा के पाठय़क्रम का सवाल है तो वह विभिन्न मॉडय़ूल में बांटा गया है। इसमें केमोइंफॉर्मेटिक्स की बेसिक जानकारी से लेकर मॉडर्न कॉम्बिनेशन ऑफ केमिस्ट्री, ड्रग डिजाइन, केमिकल इंफॉर्मेशन सोर्स, मेडिसिनल केमिस्ट्री आदि को विस्तार से बताया जाता है।
स्वयं से सरोकार
पाठ्य़क्रम अथवा रोजगार के लिए छात्रों को अपने अंदर कई तरह के विशिष्ट गुण लाने पड़ते हैं। सर्वप्रथम उन्हें केमिस्ट्री के प्रति रुचि बढ़ाने, कम्प्यूटर स्किल्स मजबूत करने व रिसर्च वर्क के प्रति उत्साह जागृत करना आवश्यक हो जाता है। इसके अलावा इसमें प्रोफेशनल्स को धैर्यवान व परिश्रमी होना जरूरी है, क्योंकि कई बार किसी रिसर्च अथवा प्रोजेक्ट पर काम के दौरान लंबा समय व्यतीत होता है। साथ ही टीम वर्क, अनुशासन व बाजार में बदलाव को स्वीकार करने का गुण होना भी जरूरी है।
कार्यक्षेत्र का संसार
पिछले तीन वर्षों में इस क्षेत्र में संभावनाएं काफी प्रबल हुई हैं। खासतौर पर फार्मास्यूटिकल, एग्रोकेमिकल एवं बॉयोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज में प्रशिक्षित लोगों की भारी कमी महसूस की गई है। केमोइंफॉर्मेटिक्स में एमएससी करने वाले छात्र प्रारंभ में केमोइंफॉर्मेटिक्स साइंटिस्ट, प्रोजेक्ट मैनेजर, केमोइंफॉर्मेटिक्स डेवलपर, ड्रग डिस्कवरी साइंटिस्ट, एसोसिएट रिसर्च साइंटिस्ट, कम्प्यूशनल केमिस्ट, केमिकल डाटा साइंटिस्ट, रेगुलेटरी अफेयर्स, सीनियर इंफार्मेशनल एनालिस्ट, इंफार्मेशनल ऑफिसर, डाटा ऑफिसर, सॉफ्टवेयर टैस्टर, सपोर्ट एनालिस्ट, बिजनेस एनालिस्ट कार्यक्षेत्र के अवसरों को देखते हुए निम्न क्षेत्रों में सामने आ सकते हैं-
फार्मास्यूटिकल/केमिकल इंडस्ट्री सेक्टर,
आईटी/कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर सेक्टर,
हॉस्पिटल/हेल्थ ऑथारिटी,
शोध के क्षेत्र में
आमदनी
इस क्षेत्र में आमदनी भी भरपूर होती है। शुरुआती दिनों में भले ही कुछ संघर्ष की स्थिति आ जाए, पर एक समय के बाद सब कुछ पटरी पर आ जाता है। प्रारंभ में प्रोफेशनल्स को 15-20 हजार रुपए प्रतिमाह मिलते हैं। अनुभव बढ़ जाने पर यही रकम 35-40 हजार रुपए प्रतिमाह तक पहुंच जाती है। इसके अलावा फ्रीलांसिंग में प्रतिदिन या पैकेज के हिसाब से पेमेंट दिया जाता है। विदेशों में काफी आकर्षक पैकेज मिलता है।
संभावनाएं
छात्रों को रोजगार मिलने की आस एवं संभावनाओं को देखते हुए प्रमुख सरकारी एवं गैर सरकारी कंपनियों में अवसर सामने आते रहते हैं। देश के साथ-साथ विदेश में भी रोजगार के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। पार्ट टाइम व स्वतंत्र रूप से भी इस क्षेत्र में काम किया जा सकता है।
एक्सपर्ट्स व्यू/
देश में भी हैं बेशुमार मौकेएक समय ऐसा था, जब कोर्स करने के पश्चात छात्रों को विदेश की ओर रुख करना पड़ता था। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। वर्तमान समय केमोइंफॉर्मेटिक्स के लिए काफी अच्छा है। सफलतापूर्वक कोर्स करने के पश्चात कई भारतीय कंपनियां छात्रों को आकर्षक पैकेज पर काम दे रही हैं। सबसे ज्यादा मौके फार्माकेमिकल में सामने आ रहे हैं, जबकि पढ़ाई के लिहाज से डिस्टेंस लर्निंग का भी चलन बढ़ा है। जिन छात्रों को डिस्टेंस लर्निंग की प्रक्रिया के तहत कोर्स समझ में नहीं आता, उन्हें फैकल्टी उपलब्ध करा कर इसके प्रमुख टॉपिक से अवगत कराया जाता है। इसमें मेल व फीमेल दोनों के लिए समान रूप से अवसर मिलते हैं। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे जो भी पढ़ें, पूरे मन से पढ़ें।
अंशुल कुमार, प्रोग्राम डायरेक्टर,
इंस्टीटय़ूट ऑफ केमोइंफॉर्मेटिक्स,
नोएडा
फैक्ट फाइल
प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान
भारतीय संस्थान
मालाबार क्रिश्चियन कॉलेज, कोझिकोड
वेबसाइट
 - www.mcccalicut.org
इंस्टीटय़ूट ऑफ केमोइंफॉर्मेटिक्स स्टडीज, नोएडा
वेबसाइट
 - www.cheminformaticscentre.org
जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
वेबसाइट
 - www.jamiahamdard.ac.in
विदेशी संस्थान
जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी,
वेबसाइट
 -  www.jhu.edu
मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी,
वेबसाइट
 - www.manchester.ac.uk
शेफिल्ड यूनिवर्सिटी,
वेबसाइट
 - www.shef.ac.uk/courses
इंडियाना यूनिवर्सिटी,
वेबसाइट
 - www.informatics.indiana.edu

Monday, May 1, 2017

7 नए कोर्सेज जिनमें लाखों में सैलरी

स्प्रिचुअल थियोलॉजी से लेकर फूड फोटोग्राफी तक कई नए कोर्सेज चलन में हैं. यहां ऐसे ही कुछ कोर्सेज की जानकारी दी जा रही हैं, जिन्हें चुनकर आप अपना करियर बना सकते हैं..1. लग्जरी ब्रांड मैनेजमेंट
अगर आपमें अच्छी चीजों के प्रति गहरा लगाव है और आपके अंदर सौंदर्यबोध है तो लग्जरी ब्रांड मैनेजमेंट आपके लिए अच्छा करियर हो सकता है. भारत में जिस तरह से दिनोदिन लग्जरी मार्केट विकसित होती जा रही है, उसे देखते हुए इस क्षेत्र में स्किल्ड रिटेल और सर्विस  प्रोफेशनल्स के लिए काफी मौके बनते जा रहे हैं.
लंदन स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मैनेजमेंट लग्जरी मैनेजमेंट में स्पेशलाइजेशन के साथ एमबीए का कोर्स करा रहा है. आप यह कोर्स फुलटाइम, पार्टटाइम या ऑनलाइन कर सकते हैं. रेगुलर एमबीए की पढ़ाई के साथ-साथ यह कोर्स स्टुडेंट्स को यह भी सिखाता है कि लग्जरी ब्रांड के लिए मार्केटिंग रणनीतियों और ब्रांड वैल्यू के बीच किस तरह संबंध बनाए जाएं.
नौकरी के मौके
कोर्स करने वाले ग्रेजुएट लग्जरी सेल्स एडवाइजर, विजुअल मर्चेडाइजर, लग्जरी इवेंट प्लानर बन सकते हैं. फैशन और लग्जरी कंसल्टेंट या वार्डरोब मैनेजर के तौर पर भी काम पा सकते हैं.
वेतन
शुरुआती वेतन प्रति माह 40,000 रुपये से 45,000 रुपये के बीच हो सकता है. यह आगे चलकर प्रति माह 5 लाख रु. तक भी पहुंच सकता है. इन नौकरियों में वेतन के अलावा कई तरह के इन्सेंटिव और अन्य सुविधाएं भी शामिल हो सकती हैं.
कहां से करें कोर्स? लंदन स्कूल ऑफ बिजनेस एंड फाइनांस के कई कैंपस लंदन, बर्मिंघम और मैनचेस्टर में हैं.
लग्जरी कनेक्ट बिजनेस स्कूल, गुडग़ांव.
www.isbf.org.uk
www.lcbs.edu.in;admission@org.uk
2. फूड फोटोग्राफी और स्टाइलिंग
जायकेदार और मन को लुभाने वाली मिठाइयों की आकर्षक तस्वीर खींचने का गुर सीखना हो तो लॉ कॉर्डन ब्लू के फूड फोटोग्राफी और स्टाइलिंग वर्कशॉप में दाखिला लें . इस कोर्स में आपको खाद्य पदार्थों की फोटोग्राफी के बुनियादी और मुख्य सिद्धांत सिखाए जाते हैं. इस कोर्स में फूड स्टाइलिंग के लिए प्लेट के डिजाइन, सही लाइटिंग और कैमरे की तकनीक के बारे में सभी जरूरी बारीकियां सिखाई जाती हैं.
आजकल जैसे हॉस्पिटेलिटी इंडस्ट्री में तेजी से इंटरनेशनल रेस्तरां श्रृंखलाओं का स्वागत हो रहा है और देशी रेस्तरां भी सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं, उसे देखते हुए यह कोर्स प्रशिक्षित फूड फोटोग्राफरों और स्टाइलिस्टों के लिए काम के बेहतरीन अवसर उपलब्ध करा सकता है. यह तीन दिन का कोर्स है और इसके लिए किसी शैक्षिक योग्यता की जरूरत नहीं है.
कोर्स की फीस: 550 पाउंड
नौकरी के मौके:
नौकरी के मौके आवेदकों को लग्जरी और फूड पत्रिकाओं में काम मिल सकता है. रेस्तरां, हॉस्पिटेलिटी कंसल्टेंट और फूड ब्लॉगिंग जैसी फील्ड हैं.
वेतन:
आप 30,000 रुपये और उससे ऊपर कमा सकते हैं, जो आपके काम पर निर्भर करता है.
कहां से करें कोर्स?
यह कोर्स सितंबर, 2015 में लंदन में ला कॉर्डन ब्लू कैंपस में आयोजित किया जा रहा है.
www.cordonbleu.edu
3 पॉलिटिकल कम्युनिकेशंस:
पिछले कुछ साल में राजनीति और चुनाव प्रचार के तरीकों में भारी बदलाव आया है, जैसा हाल के चुनावों में देखा गया है. राजनैतिक पार्टियां चुनाव के दौरान और उसके बाद भी अपने संपर्क विभाग की मदद के लिए मंजे हुए पेशेवर लोगों की सेवाएं लेने लगी हैं. गुडग़ांव स्थित द इंडियन स्कूल ऑफ कम्यूनिकेशंस एंड रेपुटेशन इन दिनों पॉलिटिकल कम्यूनिकेशंस में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स करा रहा है. इस कोर्स के तहत मैनेजिंग पॉलिटिकल सेंसटिविटीज, ऐज ऑफ सोशल इलेक्शंस और इवोल्युशन ऑफ पॉलिटिकल कम्यूनिकेशंस जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं. इन सभी विषयों में वर्तमान भारतीय राजनैतिक व्यवस्था पर विशेष जोर दिया जाता है.
नौकरी के मौके:
स्टूडेंट कोर्स करने के बाद राजनैतिक कार्यालयों में कम्यूनिकेशन मैनेजर की नौकरी पा सकते हैं या कम्यूनिकेशन कंसल्टेंसी एजेंसियों में काम कर सकते हैं.
वेतन:

नौकरी के पहले साल में 3.5 लाख से 4 लाख रुपये सालाना का वेतन पा सकते हैं.
कहां से करें कोर्स?
द इंडियन स्कूल ऑफ कम्यूनिकेशंस ऐंड रेपुटेशन
एमजीएफ मेट्रोपॉलिस, एमजी रोड, गुडग़ांव
www.scoreindia.org:office@scoreindia.org
4. टी टेस्टिंग:
आप अपनी सुबह की चाय के बारे में शायद एक राज की बात नहीं जानते हैं. आपकी मनपसंद चाय का स्वाद बढ़ाने के लिए चाय की पत्ती बनाने वाली कंपनियां लंबे समय से पेशेवर टी टेस्टरों की सेवाएं लेती आ रही हैं. ये टी टेस्टर चाय की पत्ती के स्वाद, उसकी क्वालिटी और तैयारी को जांचने के लिए पेशेवरों को नौकरी पर रखती हैं.
बेंगलुरू के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांटेशन मैनेजमेंट अपने सर्टिफिकेट प्रोग्राम के तहत चाय के बिजनेस मैनेजमेंट, मार्केट इन्फॉर्मेशन, टी टेस्टिंग की तकनीक और उसके तरीकों के बारे में अध्ययन कराता है. यह कोर्स टी बोर्ड ऑफ इंडिया और वाणिज्य मंत्रालय के सहयोग से कराया जाता है. टी उद्योग भी इस कोर्स को मान्यता देता है. इंस्टीट्यूट में टी टेस्टिंग की आधुनिक प्रयोगशाला मौजूद है, साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टी टेस्टिंग यूनिट के विशेषज्ञ स्टुडेंट्स को टी टेस्टिंग की तकनीक के बारे में शिक्षा देते हैं. स्टुडेंट्स को चाय को लेकर बाजार की जानकारी, मौकों और उसकी खपत के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाता है.
नौकरी के मौके:
कोर्स करने वाले ग्रेजुएट भारतीय और अंतरराष्ट्रीय चाय कंपनियों के अलावा चाय के खरीदारों के यहां भी नौकरियां पा सकते हैं. बेवरेज कंपनियां और चाय के बागान भी नौकरी के लिए अच्छी जगहें हैं.
वेतन:

शुरुआती वेतन सालाना 3 लाख रु. से 5 लाख रु. तक हो सकता है.
कहां से करें कोर्स
?
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांटेशन मैनेजमेंट, ज्ञान भारती कैंपस, पी.ओ. मलाथल्ली, बेंगलूरू
www.iipmb.edu.in;admissions@iipmb.edu.in
5. स्प्रिचुअल थियोलॉजी
आध्यात्मिकता, जो साइंस, आर्ट और आस्था पर आधारित अलग किस्म का अध्ययन है, बहुत से लोगों के लिए हैरान करने वाला विषय है. पर जो स्टुडेंट्स आध्यात्मिकता में दिलचस्पी रखते हैं, वे बेंगलूरू के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्प्रिचुअलिटी से डिप्लोमा कर सकते हैं. इस कोर्स में स्टुडेंट्स को पूरब और पश्चिम की आध्यात्मिकता के बारे में जानकारी दी जाती है. इसमें मनोविज्ञान, चर्च के उपदेश, यूथ एनिमेशन और सिविल लॉ के बारे में अध्ययन कराया जाता है. छात्रों को वैज्ञानिक विधिशास्त्र पर आधारित शोध निबंध तैयार करना होता है. उन्हें आश्रम के जीवन, अलग-अलग धर्मों के कार्यक्रमों और प्रार्थना सभाओं में हिस्सा लेना होता है ताकि उन्हें विभिन्न धर्मों में निहित आध्यात्मिक ज्ञान का परिचय मिल सके.
नौकरी के मौके:
इसके ग्रेजुएट आध्यात्मिक परामर्शदाता के रूप में काम कर सकते हैं. समाज सेवा में रुचि रखने वाले स्कूल में बच्चों को या घरों में बड़ी उम्र के लोगों को आध्यात्मिक सलाह या उपदेश दे सकते हैं.
वेतन: आध्यात्मिक कंसल्टेंट 18,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पा सकते हैं.
कहां से करें कोर्स?

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्प्रिचुअलिटी, पी.बी. नंबर 5639, डॉ. राजकुमार रोड, राजाजी नगर, फर्स्ट ब्लॉक, बेंगलूरू
www.iisirituality.org;iispirituality@yahoo.com
6 फुटबॉल इंडस्ट्रीज में एमबीए:
यूनिवर्सिटी ऑफ लीवरपूल विश्व में एकमात्र यूनिवर्सिटी है जो फुटबॉल इंडस्ट्रीज में एमबीए की डिग्री देती है. इस कोर्स का लक्ष्य स्टुडेंट्स को आधुनिक स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में मैनेजमेंट की नौकरी के लिए जरूरी योग्यता उपलब्ध कराना है. फुटबॉल मैनेजमेंट में बिजनेस के सिद्धांतों को लागू करके स्टुडेंट बिल्कुल अलग तरह से मैनेजमेंट थियोरी को समझने लगते हैं. इस कोर्स के तहत प्रैक्टिकल वोकेशनल ट्रेनिंग भी दी जाती है, जिससे स्टुडेंट्स में कम्युनिकेशन और लीडरशिप की योग्यता विकसित होती है ताकि वे पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा लोकप्रिय फुटबॉल के खेल में मैनेजर के तौर पर अपना करियर बना सकें.
लीवरपूल उत्तर-पश्चिम इंग्लैंड में फुटबॉल की गतिविधियों का केंद्र है, जिस वजह से इस कोर्स के स्टुडेंट्स को इंग्लिश फुटबॉल क्लबों से संपर्क बनाने का मौका मिल जाता है. यह यूनिवर्सिटी यूनियन ऑफ यूरोपियन फुटबॉल एसोसिएशनों और कई सारे फुटबॉल क्लबों जैसे संगठनों के साथ कार्य-आधारित प्रोजेक्ट करती है. यहां कोर्स के दौरान इन संस्थानों से अतिथि वक्ता आते हैं और स्टुडेंट्स को अपने अनुभवों और जानकारियों से रू-ब-रू कराते हैं.
नौकरी के मौके:
इस कोर्स के ग्रेजुएट फुटबॉल क्लबों और विभिन्न लीग में मैनेजर की नौकरी पा सकते हैं और अपने ज्ञान को फुटबॉल के मैदान में लागू कर सकते हैं.
वेतन:
अलग-अलग क्लबों में वेतन भी अलग-अलग हो सकता है. फिर भी शुरुआती वेतन सालाना 20,000 पौंड से लेकर 25,000 पौंड तक हो सकता है.
कहां से करें कोर्स:
यूनिवर्सिटी ऑफ लीवरपूल फाउंडेशन
बिल्डिंग, ब्राउनलो हिल, लीवरपूल
www.IIv.ac.uk
7. एथिकल हैकिंग:
कंप्यूटर प्रेमियों के लिए यह अच्छी खबर है. वे अब कोडिंग के ऊबाऊ काम से हटकर कुछ बेहद चुनौतीपूर्ण काम कर सकते हैं. ज्यादातर लोग हैकिंग को खराब शब्द मानते रहे हैं और उसे चोरी वाला काम समझते हैं लेकिन अब ऐसे पेशेवर लोगों की मांग बढ़ रही है जो हैकिंग के खतरों को अच्छी तरह समझते हैं. ये लोग हैकिंग के सारे दांवपेच जानने के कारण उसके खतरों का मुकाबला कर सकते हैं और हैकिंग करने वालों की कोशिशें नाकाम कर सकते हैं. कोलकाता में इंडियन स्कूल ऑफ एथिकल हैकिंग के सह-संस्थापक अबीर अतार्थी और संदीप सेनगुप्त कहते हैं, 'इन दिनों हैकिंग की घटनाएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं इसलिए उन्हें रोकने के लिए हैकिंग के जानकार ऐसे पेशेवरों की जरूरत महसूस की जाने लगी है जो कॉर्पोरेट नेटवर्कों और वेबसाइटों को हैक होने से बचा सकें. कंपनी की अनुमति से एथिकल या वैध हैकर कॉर्पोरेट नेटवर्क की तह में जाता है और उसकी सुरक्षा के लिए कुछ नए उपाय निकालता है.'
इंडियन स्कूल ऑफ एथिकल हैकिंग वैध या नैतिक कहे जानी वाली हैकिंग पर सर्टिफिकेट कोर्स कराता है. इस कोर्स में यह भी सिखाया जाता है कि सुरक्षित कोडिंग कैसी लिखी जाए, ताकि वेबसाइटों को हैक होने से रोका जा सके. यह संस्थान कई तरह के अन्य विशेषज्ञता वाले कोर्स भी कराती है, जैसे कि नेटवर्क पेनेट्रेशन टेस्टिंग और वेब ऐप्लिकेशन पेनेट्रेशन टेस्टिंग और वेब ऐप्लिकेशन पेनेट्रेशन टेस्टिंग जिनका अध्ययन अतिरिक्त रूप से किया जा सकता है.
नौकरी के मौके:
एथिकल हैकरों को नेटवर्क पेनेट्रेशन टेस्टिंग और वेब पेनेट्रेशन टेस्टर के रूप में नौकरी मिल सकती है. वे खुद को आइटी सिक्योरिटी ऑडिटर और सिक्योरिटी एनालिस्ट के तौर पर पेश कर सकते हैं.
वेतन:
इस कोर्स के वे ग्रेजुएट जिनके पास बीटेक या एमसीए की भी डिग्री है उन्हें शुरुआती वेतन के तौर पर प्रति माह 27,000 से 30,000 रु. मिल सकते हैं. जिनके पास किसी अन्य विषय की डिग्री है उन्हें शुरुआत में प्रतिमाह 20,000 रु. का वेतन मिल सकता है.
कहां से करें कोर्स?
आइएसओईएच साल्टलेक
इनफिनिटी बेंचमार्क बिल्डिंग, साल्टलेक इलेक्ट्रानिक्स कांप्लेक्स, सेक्टर-5, कोलकाता.
www.isoeh.com;info@isoeh.com