Wednesday, April 12, 2017

फाइनांशियल मार्कीट्स में करियर

अनेक उतार-चढ़ाव तथा रिटेल निवेशकों के निम्न आधार के बावजूद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज एशिया का छठा तथा विश्व का 14वां सबसे विशाल मुद्रा बाजार है। देश में कुछ अन्य स्टॉक एक्सचेंज के अलावा दुनिया भर में अनेक स्टॉक एक्सचेंज मौजूद हैं जहां हर दिन अरबों-खरबों का लेन-देन होता है। इस क्षेत्र में कार्य करने वालों के पास उज्ज्वल करियर बनाने के असीमित अवसर होते हैं। वित्तीय सेवा पेशेवरों की मांग अब केवल स्टॉक ब्रोकरेज फर्म्स तक ही सीमित नहीं है बल्कि बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों में भी उनकी काफी जरूरत होती है। 

जानकारों की राय में 
फाइनांशियल मार्कीट्स से संबंधित कोर्सों के तहत छात्रों को बाजार को बेहतर ढंग से समझने तथा मिलने वाले मौकों का अधिक से अधिक लाभ उठाने का कौशल प्रदान किया जाता है। अनेक संस्थान इस विषय से संबंधित नवीन कोर्स शुरू कर रहे हैं जिनसे छात्रों को इस क्षेत्र के बारे में नवीनतम बदलावों से जागरूक करवाया जाता है। 

सम्भावनाएं

जो छात्र फाइनांशियल मार्कीट्स संबंधी कोर्स सफलतापूर्वक करते हैं वे बैंकों में इन्वैस्टमैंट बैंकर्स या रिलेशनशिप मैनेजर, इंश्योरैंस कम्पनियों में वैल्थ मैनेजर के अलावा एनालिस्ट, पोर्टफोलियो मैनेजर, सर्विलांस / कम्प्लायंस / रैगुलेशन मैनेजर, डिजीटल कंटैंट डिवैल्पर्स एवं रिस्क मैनेजर के तौर पर भी कार्य कर सकते हैं। 

शुरूआत 
इस क्षेत्र में आमतौर पर युवाओं को बतौर एनालिस्ट नियुक्त किया जाता है। कार्पोरेट फाइनांस में वे मुख्यत: आंकड़ों का आकलन लगाने का काम करते हैं। वे फर्म्स  की फाइनांशियल रिर्पोटस का अध्ययन करते हैं। शोध में कार्य करने वाले एनालिस्ट कम्पनियों तथा सैक्टर्स की हल-चल पर नजर रखते हैं। एनालिस्ट्स को ट्रेडिंग करने की स्वीकृति नहीं मिलती जब तक वे  अपनी योग्यता एवं कौशल को पूरी तरह सिद्ध नहीं कर देते हैं क्योंकि इस काम में गलती की जरा भी गुंजाइश नहीं होती है। यहां गलती भारी नुक्सान का कारण बनती है।
 
अनुभव हासिल करने के बाद एनालिस्ट्स को एसोसिएट के पद पर नियुक्ति मिलती है। वैसे एम.बी.ए. डिग्री धारी सीधे इस पद पर भी नियुक्ति प्राप्त करते हैं। वे अपनी टीम में काम का बंटवारा तथा निरीक्षण का काम करते हैं। इसके बाद वे वाइस प्रैजीडैंट के पद पर पदोन्नत होते हैं जो एनालिस्ट तथा एसोसिएट्स के काम पर नजर रखते हैं। वे कस्टमर्स के अधिक करीब रहते हैं। प्रतिभाशाली वाइस प्रैजीडैंट्स को एग्जीक्यूटिव डायरैक्टर, फिर मैनेजिंग डायरैक्टर के पदों पर नियुक्ति मिलती है। इस क्षेत्र में करियर की शुरूआत करने तथा अनुभव हासिल करने के लिए बेहतर होगा कि युवा किसी कम्पनी में बतौर इंटर्न काम शुरू करें। 

प्रमुख नियोक्ता

बैंक, पोर्टफोलियो मैनेजर्स, ब्रोकरेज फर्म्स , कमोडिटी ट्रेडर्स, म्यूचुअल फंड्स, वैंचर कैपिटल तथा प्राइवेट इक्विटी फंड्स आदि।

कहां से सीखें 
- गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली

- नैशनल इंस्टीच्यूट ऑफ फाइनांशियल मैनेजमैंट, फरीदाबाद, उत्तर प्रदेश

(इन संस्थानों में फाइनांशियल मार्कीट्स में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा करवाया जाता है)

Sunday, April 9, 2017

ऐप डेवलपर में करियर

एक स्मार्टफोन कितना भी शानदार और नई टेक्नोलॉजी से अपग्रेडेड क्यों न हो, जब तक उसमें लेटेस्ट ऐप्स न चलते हों, ग्राहक उसे खरीदने में झिझकते हैं। इन ऐप्स के कारण ही स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इसी के साथ बढ़ रहे हैं, ऐप डेवलपमेंट में करियर बनाने के अवसर। अगर आपको भी स्मार्टफोन्स की लेटेस्ट ऐप्स के बारे में जानने और उनके टेक्निकल पहलुओं को समझने में दिलचस्पी है, तो आप बन सकते हैं बेहतरीन ऐप डेवलपर।
एक अनुमान के मुताबिक स्मार्टफोन्स का बाजार मोबाइल ऐप्स के कारण दोगुनी तेजी से बढ़ रहा है। साफ है कि लोग अपनी सुविधा के लिए हर काम में मोबाइल ऐप्स को इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं। यही कारण है कि
आज फैशन से लेकर स्वास्थ्य और शिक्षा तक के लिए कई ऐप्स बाजार में अपनी जगह तो बना ही चुके हैं, ऐप डेवलपर्स के लिए भी उपलब्‍ध‍ियों के नए दरवाजे खुल रहे हैं। अगर आपको भी इन मोबाइल ऐप्स के फंक्शन और
टेक्नोलॉजी को जानने व समझने में रुचि है, तो आप ऐप डेवेलपर के तौर पर करियर बना सकते हैं।
क्या है काम?
ऐप डेवलपर्स उन सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स या प्रोग्रामर्स को कहते हैं, जो ऐप्स की डिजाइनिंग, डेवलपमेंट और टेस्टिंग का काम किसी एक या सभी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम्स के लिए करते हैं। मोबाइल ऐप ऐसा सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है, जो मोबाइल उपकरणों पर चलता है। कुछ मोबाइल ऐप्स सिर्फ किसी खास मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे आईओएस, विंडोज या एंड्रॉयड पर ही रन करते हैं। इन्हें नेटिव मोबाइल ऐप्स कहते हैं। जबकि कुछ ऐप्स
मोबाइल वेब-बेस्ड ऐप्स होते हैं, जो हर तरह के मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम पर रन करते हैं।
कौन-से कोर्स?
इस फील्ड में करियर बनाने के लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और कम्प्यूटर वि‍षय होना जरूरी हैं। इसके बाद आप इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीटेक या एमसीए कर सकते हैं। ऐप डेवलपर्स के पास सी, सी++ व ऑब्जेक्टिव सी जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस में प्रोफीशिएंसी होनी जरूरी है। ऐप डेवलपिंग कोर्स में आपको यूआई डिजाइन के बेसिक्स सिखाए जाते हैं। आप किसी एक ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए ऐप डेवलपिंग में स्पेशलाइजेशन भी कर सकते हैं।
जरूरी स्किल्स
एक ऐप डेवलपर को कम्प्यूटर और प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस में रुचि होना जरूरी है। चूंकि आपका पूरा दिन मोबाइल ऐप की जरूरतों को लिखने और उन्हें समझने में जाएगा, इसलिए आपमें धैर्य और टेक्निकल व डिजाइनिंग आस्पेक्ट्स को समझने की क्षमता होनी चाहिए। इसके अलावा आपमें यूजर एक्सपीरियंस जानने के लिए बेहतर
कम्युनिकेशन स्किल्स होनी भी जरूरी है।
वर्क प्रोफाइल
ऐप डेवलपर्स की तीन मुख्य भूमिकाएं होती हैं:
मोबाइल यूआई डिजाइनर: ये प्रोफेशनल्स किसी ऐप के कलात्मक और क्रिएटिव दोनों पहलुओं पर काम
करते हैं।
यूजर एक्सपीरियंस एंड यूजेबिलिटी एक्सपर्ट: ये ह्यूमन इंटरैक्शन को समझते हुए मैट्रिक्स के इस्तेमाल के तरीके को आसान बनाते हैं।
एप्लिकेशन डेवलपर या इंजीनियर: ये ऑपरेटिंग सिस्टम के हिसाब से ऐप्स की प्रोग्रामिंग और आर्किटेक्चर पर काम करते हैं। 
भविष्य की संभावनाएं
आप बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनीज जैसे टीसीएस, माइक्रोसॉफ्ट, ओरैकल, एसएपी, सीमैंटेक, एचसीएल आदि के
लिए काम कर सकते हैं। अब तो दूसरी कॉर्पोरेट कंपनीज भी ऐप्स डिजाइन करने के लिए ऐप डेवपलर्स को हायर करती हैं। 
कमाई कितनी?
बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनीज में शुरुआती एनुअल पैकेज 5-6 लाख रुपए तक होगा। अनुभव प्राप्त करने के बाद आपका
एनुअल पैकेज 15-20 लाख रुपए तक हो सकता है। इस क्षेत्र की खासियत है कि इसमें अनुभव के साथ सैलरी में वृद्धि तेजी से होती है और विदेश में काम करने का मौका भी मिलता है।
प्रमुख संस्थान
आईएसएम यूनिवर्सिटी 
सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कम्प्यूटिंग
इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस नेटवर्क टेक्नोलॉजी
इंटरनेशनल अकेडमी फॉर सर्टिफिकेशन एंड ट्रेनिंग
सीमएजु: स्कूल ऑफ प्रो-एक्सप्रेशनिज्म 
एनआईआईटी


Tuesday, March 14, 2017

स्पा थैरेपी में करियर

बात करियर की करें तो आजकल विकल्पों की तो जैसे भरमार है। ऐसे में बड़ा मुश्किल हो जाता है खुद के लिए एक बेहतर करियर का चुनाव करना। अगर आप कुछ हटकर करना चाहते हैं तो स्पा थैरेपी में अपने हाथ आजमा सकते हैं। स्वस्थ रहने और स्वस्थ दिखने की चाह सभी की होती है। आज ऐसी कई थेरेपी मौजूद हैं, जिनके इस्तेमाल से न सिर्फ शरीर, बल्कि मन भी स्वस्थ रहता है। यही कारण है कि अब देश में वेलनेस इंडस्ट्री जोर पकड़ रही है और बतौर बिजनेस सामने आ रही है। इसी का एक हिस्सा है स्पा थेरेपी। कुशल लोगों की कमी से जूझ रही इस इंडस्ट्री में रोजगार की काफी संभावनाएं हैं।
स्पा थेरेपी क्या है?
स्पा थेरेपी में मसाज, हाइड्रो थेरेपी, हाथों तथा पैरों के उपचार तथा चेहरे के लिए ब्यूटी ट्रीटमेंट शामिल है। इन थेरेपीज के माध्यम से हमारी मांसपेशियां, हड्डियां, पाचन प्रणाली, श्वसन प्रणाली, भावनात्मक, दिमागी और नाड़ी तंत्र बेहतर प्रदर्शन करते हैं। इनसे थकान, भारीपन, मांसपेशियों की कठोरता आदि समस्याएं खत्म होती हैं।

योग्यता
हालांकि क्वालिफाइड स्पा थेरेपिस्ट बनने के लिए कई कोर्स हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्रशिक्षण लेना ही बेहतर होता है। आप हाईस्कूल करने के बाद भी कोर्सेज में प्रवेश ले सकते हैं।

इस फील्ड में वही सफल हो सकता है, जो क्लाइंट की जरूरतों को समझ सके। क्लाइंट से विनम्र भाव से बात करने और उसकी आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर उनकी पूर्ति करने में सफल हो सके। इसके अलावा कपड़े साफ रखने से लेकर चलने-फिरने के स्टाइल तक में आपको ध्यान बरतने की जरुरत है। फुल टाइम स्पा थेरेपिस्ट का काम आठ से दस घंटे का होता है और सुबह की तुलना में शाम को अधिक काम रहता है। साथ ही वीकएंड में भी काम की अधिकता रहती है।

कोर्स में क्या करवाया जाता है
छात्रों को विभिन्न तरह की मसाज और स्पा थेरेपी के बारे में पढ़ाया जाता है और मसाज के जरिये उन स्थितियों को जांचने के बारे में भी बताया जाता है, जिनका इलाज करना है। कोर्स में एरोमा थेरेपी, मसल स्टिम्युलेशन, सेनिटेशन आदि को भी शामिल किया जाता है।

वेतन
स्पा थेरेपिस्ट में नए प्रशिक्षुओं को 10 से 14 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। कुछ साल अनुभव प्राप्त करने के बाद उन्हें आसानी से 14 से 20 हजार रुपये मासिक मिल जाते हैं। यदि वे प्रबंधन के हिस्से हो जाते हैं तो उन्हें 30-80 हजार रुपये तक मिलते हैं।

अवसर
कोर्स करने के बाद इसमें जॉब की कमी नहीं रहती। ऐसे में जरूरी है कि आप खुद को कैसे अपडेट रखते हैं और क्लाइंट्स को किस तरह प्रभावित कर पाते हैं। स्पा थेरेपिस्ट को मसाज, ब्यूटी सैलून, हॉलिस्टिक हेल्थ क्लिनिक, फिटनेस सेंटर में नियुक्त किया जाता है।

इसके अलावा उन्हें खिलाडियों को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए खेल टीमों और स्पोर्ट्स क्लबों में भी रखा जाता है। नौकरी करने का मन न होने पर स्पा थेरेपिस्ट स्वतंत्र रूप से भी काम कर सकते हैं। अपनी इस भूमिका में वह क्लाइंट के घर जाकर या उसके कार्यस्थल पर पहुंच कर अपनी सेवाएं दे सकते हैं।

Monday, March 13, 2017

फिलॉसफी के कोर्स

फिलॉसफी के क्षेत्र में वेतनमान ऊंचाइयां छूता है। टीचिंग के क्षेत्र में एक असिस्टेंट प्रोफेसर 30000 रुपए प्रतिमाह से ऊपर वेतनमान प्राप्त करता है। इसके अलावा एक प्रोफेसर 80000 रुपए प्रतिमाह प्राप्त करता है। आरकेएमवी शिमला में हर वर्ष 60 छात्राएं यह कोर्स करके निकल रही हैं। हिमाचल में इस समय 50 से अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़े हैं
फिलॉसफी एक वैज्ञानिक विषय हैजिसमें सच्चाई और वास्तविकता के कारणों का पता लगाने के लिए तर्क का प्रयोग किया जाता है। एक व्यक्ति जो फिलॉसफी सीखता हैउसे फिलॉस्फर कहा जाता है और यह जीवन भर सीखी जाने वाली प्रक्रिया है। जिन्हें मेटाफिजिक्सलॉजिकरेशनलिज्म आदि में रुचि हैफिलॉसफी उन बुद्धिजीवियों के लिए यह उचित प्रोफेशन है। फिलॉसफी दूसरे विषयों की तरह नहीं है। दूसरी कई अकादमिक शिक्षा छात्रों को एक बेहतर कैरियर बनाने के लिए प्रदान करवाई जाती हैलेकिन फिलॉसफी इन सबसे अलग है। यह कोई ट्रेनिंग नहीं हैबल्कि जीवन भर सीखने वाली शिक्षा है। यदि आपकी रुचि इस क्षेत्र में हैतो यह एक बेहतर कैरियर विकल्प बन सकता है। फिलॉसफी की कुछ उप शाखाएं हैंजिनमें से किसी एक को चुनकर आप बेहतर कैरियर बना सकते हैंवे हैं-  एस्थेटिक्स ः यह मुख्य रूप से  सौंदर्यरुचि और भावनात्मक सार्थकता पर आधारित शिक्षा है। एस्थेटिक्स मुख्य रूप से फिलॉसफी आफ आर्ट से संबंधित है। एपिस्टमोलॉजी ः इस शाखा में प्रकृति से लगावविश्वास और ज्ञान के बारे में बताया जाता है। एथिक्स ः यह अच्छेकीमती और सही की शिक्षा है। इसमें अप्लायड नीति शास्त्र की शिक्षा भी दी जाती है। लॉजिक ः इसमें अच्छे तर्क-वितर्क की शिक्षा दी जाती हैवाद-विवाद के जरिए तर्कों को आंका जाता है। मेटाफिजिक्स ः यह शाखा वास्तविकता की असली पहचान की शिक्षा देती है।
शैक्षणिक योग्यता 
फिलॉसफी विषय में प्रवेश के लिए छात्र का बारहवीं पास होना आवश्यक होता है। इस कोर्स को करने की अवधि तीन साल की है। कई संस्थानों द्वारा इस कोर्स में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। फिलॉसफी के मुख्य कोर्सों में आप बीएएमएएमफिल और पीएचडी आदि कर सकते हैं। डाक्टर आफ फिलॉसफी में प्रवेश पाने के लिए छात्र का संबंधित विषय में एमफिल होना आवश्यक है। 
कोर्स 
फिलॉसफी के कोर्स आप दुनिया के किसी भी हिस्से से कर सकते हैं। एथिक्स और एस्थेटिक्स भी इस कोर्स का हिस्सा हैं। लॉजिक एक दूसरा हिस्सा हैजो फिलॉसफी के कोर्स में छात्रों को करवाया जाता है। भारत में कई सरकारी और निजी संस्थानों द्वारा फिलॉसफी में कोर्स करवाए जाते हैं। इसके मुख्य कोर्सों में आप बीए इन फिलॉसफीअंडरग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफीपोस्ट ग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफी,  मास्टर डिग्री इन फिलॉसफीपीएचडी इन फिलॉसफीमास्टर आफ फिलॉसफी (लॉ)डाक्टर आफ फिलॉसफी (पार्ट टाइम)मास्टर आफ फिलॉसफी (एमफिल) इन इकोनोमिक्सबीए (ऑनर्स) इन फिलॉसफी और डिप्लोमा इन फिलॉसफी एंड रिलीजन आदि कोर्स भी कर सकते हैं। बीए करने के बाद आप लिंग्विस्टिक्ससोशियोलॉजीसाइकोलॉजी और यहां तक कि इतिहास के क्षेत्रों में आप उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। 
रोजगार की संभावनाएं  
इस कोर्स को करने के बाद ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए सरकारीकारपोरेट क्षेत्रों में कई कैरियर विकल्प उपलब्ध रहते हैं। कारपोरेट क्षेत्र में एक फिलॉसफी ग्रेजुएट मैनपावर डिवेलपमेंट मैनेजर और मैनपावर सर्विसेज को-आर्डिनेटर के रूप में नौकरी प्राप्त कर सकता है। सरकारी क्षेत्र में आप एक आर्किविस्ट के रूप में काम कर सकते हैं। एक कंसल्टिंग फिलॉस्फर की मांग उनके विचारों और फिलॉसफी की वजह से पूरी दुनिया में रहती है। इसके अलावा एक फिलॉस्फर जर्नलिज्म और पब्लिशिंग इंडस्ट्री में एक राइटर और एडीटर के रूप में रोजगार प्राप्त कर सकता है। इसके साथ ही आप रिसर्च में भी जा सकते हैं। एक ग्रेजुएट डिग्री प्राप्त करने वाला दूसरे अन्य कई क्षेत्रों में नौकरी प्राप्त कर सकता है। इस क्षेत्र में निपुण व्यक्ति सरकारी और निजी फर्मों में बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। सरकारी और निजी स्कूलों में भी फिलॉसफी के क्षेत्र में ढेरों संभावनाएं हैं। इसके अलावा कालेजों और विश्वविद्यालयों में भी आप बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। यहां पर आप एक प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही आप भारत के अलावा विदेशों में अच्छे वेतनमान पर नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। यहां पर आप कारपोरेट क्षेत्रों में नौकरी प्राप्त करके बेहतर कमाई भी कर सकते हैं।
वेतनमान 
फिलॉसफी के क्षेत्र में वेतनमान ऊंचाइयां छूता है। टीचिंग के क्षेत्र में एक असिस्टेंट प्रोफेसर 30000 रुपए प्रतिमाह से ऊपर वेतनमान प्राप्त करता है। इसके अलावा एक प्रोफेसर 80000 रुपए प्रतिमाह प्राप्त करता है। 
कोर्स 
1.    बीए इन फिलॉसफी 
2.    अंडरग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफी 
3.    पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफी   
4.    मास्टर डिग्री इन फिलॉसफी 
5.    पीएचडी इन फिलॉसफी 
6.    मास्टर आफ फिलॉसफी (लॉ)  
7.    डाक्टर आफ फिलॉसफी (पार्ट टाइम)  
8.    मास्टर आफ फिलॉसफी (एमफिल) इन    इकोनोमिक्स  
9.    बीए (ऑनर्स) इन फिलॉसफी 
10. डिप्लोमा इन फिलॉसफी एंड रिलीजन 
संस्थान 
1.  राजकीय कन्या महाविद्यालयशिमला 
2.  गवर्नमेंट डिग्री कालेजनालागढ़
3. महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटीरोहतक 
4.  एसआर गवर्नमेंट कालेज फार वूमेनअमृतसर 
5.  गुरु नानक देव यूनिवर्सिटीअमृतसर 
6.  पंजाबी यूनिवर्सिटीपटियाला 
7.  देव समाज कालेज फार वूमनफिरोजपुर 
8. डीएवी कालेज फार वूमनअमृतसर 
9. पंजाब यूनिवर्सिटीचंडीगढ़ 
10. कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटीकुुरुक्षेत्र 
11. गवर्नमेंट नेशनल कालेजसिरसा 
12. दिल्ली विश्वविद्यालयदिल्ली

Friday, March 10, 2017

Genetic Counsellor डिकोडिंग द डिसऑर्डर



ह्यूमन बॉडी में मौजूद क्रोमोजोम्स में करीब 25 से 35 हजार के बीच जीन्स होते हैं। कई बार इन जीन्स का प्रॉपर डिस्ट्रीब्यूशन बॉडी में नहीं होता है, जिससे थैलेसेमिया, हीमोफीलिया, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, क्लेफ्ट लिप पैलेट, न्यूरोडिजेनेरैटिव जैसी एबनॉर्मलिटीज या हेरेडिटरी प्रॉब्लम्स हो सकती है। इससे निपटने के लिए हेल्थ सेक्टर में ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट और दूसरे इनेशिएटिव्स लिए जा रहे हैं, जिसे देखते हुए जेनेटिक काउंसलिंग का रोल आज काफी बढ गया है। अब जो लोग इसमें करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए स्कोप कहीं ज्यादा हो गए हैं।

जॉब आउटलुक

एक अनुमान के अनुसार, करीब 5 परसेंट आबादी में किसी न किसी तरह का इनहेरेटेड डिसऑर्डर पाया जाता है। ये ऐसे डिसऑर्डर्स होते हैं, जिनका पता शुरुआत में नहीं चल पाता है, लेकिन एक जेनेटिक काउंसलर बता सकता है कि आपमें इस तरह के प्रॉब्लम होने की कितनी गुंजाइश है। काउंसलर पेशेंट की फैमिली हिस्ट्री की स्टडी कर इनहेरेटेंस पैटर्न का पता लगाते हैं। वे फैमिली मेंबर्स को इमोशनल और साइकोलॉजिकल सपोर्ट भी देते हैं।

स्किल्स रिक्वायर्ड

जेनेटिक काउंसलिंग के लिए सबसे इंपॉर्टेट स्किल है कम्युनिकेशन। इसके अलावा, कॉम्पि्लकेटेड सिचुएशंस से डील करने का पेशेंस। एक काउंसलर का नॉन-जजमेंटल होना भी जरूरी है, ताकि सब कुछ जानने के बाद मरीज अपना डिसीजन खुद ले सके। उन्हें पेशेंट के साथ ट्रस्ट बिल्ड करना होगा।

करियर अपॉच्र्युनिटीज

अगर इस फील्ड में ऑप्शंस की बात करें, तो हॉस्पिटल में जॉब के अलावा प्राइवेट प्रैक्टिस या इंडिपेंडेंट कंसलटेंट के तौर पर काम कर सकते हैं। इसी तरह डायग्नॉस्टिक लेबोरेटरीज में ये फिजीशियन और लैब के बीच मीडिएटर का रोल निभा सकते हैं। कंपनीज को एडवाइज देने के साथ टीचिंग में भी हाथ आजमा सकते हैं। वहीं, जेनेटिक रिसर्च प्रोजेक्ट्स में स्टडी को-ओर्डिनेटर के तौर पर काम कर सकते हैं। बायोटेक और फार्मा इंडस्ट्री में भी काफी मौके हैं।

क्वॉलिफिकेशन

जेनेटिक काउंसलर बनने के लिए बायोलॉजी, जेनेटिक्स और साइकोलॉजी में अंडरग्रेजुएट की डिग्री के साथ-साथ लाइफ साइंस या जेनेटिक काउंसलिंग में एमएससी या एमटेक की डिग्री होना जरूरी है।

सैलरी

जेनेटिक काउंसलिंग के फील्ड में फाइनेंशियल स्टेबिलिटी भी पूरी है। हालांकि जॉब प्रोफाइल और सेक्टर के मुताबिक सैलरी वैरी करती है। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाला प्रोफेशनल महीने में 50 हजार रुपये तक अर्न कर सकता है, जबकि गवर्नमेंट डिपार्टमेंट में काम करने वाले महीने में 25 से 40 हजार के बीच अर्न कर सकते हैं।

ट्रेनिंग

-गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर


-कामिनेनी इंस्टीट्यूट, हैदराबाद


-संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट, लखनऊ


-सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज, बेंगलुरु


-महात्मा गांधी मिशन, औरंगाबाद


-जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, दिल्ली


-सर गंगाराम हॉस्पिटल, नई दिल्ली


एक्सपर्ट बाइट

जेनेटिक काउंसलिंग इंडिया में काफी तेजी से पॉपुलर हो रहा है। एप्लीकेशन के नजरिए से इसमें बहुत स्कोप है। नई लेबोरेटरीज खुल रही हैं, जिनके लिए जेनेटिक काउंसलर्स की काफी डिमांड है। वैसे, ट्रेडिशनल हॉस्पिटल्स के अलावा फार्मा कंपनीज में, कॉरपोरेट एनवॉयरनमेंट के बीच काम करने के पूरे मौके मिलते हैं। अब तक मेडिकल प्रोफेशन से जुडे स्टूडेंट्स ही इसमें आते थे, लेकिन अब नॉन-मेडिकल स्टूडेंट्स भी आ रहे हैं।