Thursday, June 2, 2016

मैकेनिकल इंजीनियरिंग (टूल और डाई) में डिप्लोमा

यह छह सेमेस्टर पाठ्यक्रम स्विट्जरलैंड की सरकार के सहयोग से 1977 में शुरू किया गया था जो "टूल और डाई बनाने में उन्नत डिप्लोमा" का पुनर्गठन किया संस्करण है। इस कोर्स के लिए 54 सीटें हैं। प्रशिक्षण के सफल समापन पर प्रशिक्षणार्थियों "(टूल और डाई) मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा" से सम्मानित किया जाएगा ।
प्रथम वर्ष सामान्य प्रशिक्षण कार्यक्रम
कार्यशाला अभ्यास:
कार्यक्षेत्र पर कौशल आधारित प्रशिक्षण, हाथ उपकरण और उपकरणों को मापने का उपयोग, ड्रिलिंग के लिए परिचय, दोहन, मोड़, आकार देना, वेल्डिंग, टांका, टांकना और उपकरणों को फिर से नुकीला कर लेना। सटीक मशीन उपकरण के संचालन में प्रशिक्षण: नेतृत्व पेंच खराद , सार्वभौमिक मिलिंग मशीन, सतह की चक्की । विभिन्न विधानसभाओं बनाने के लिए उन्नत बेंच काम करना हैं। वैज्ञानिक उपकरण व साधन भागों और प्रोटोटाइप का निर्माण। प्रोग्रामिंग, सिमुलेशन का परिचय और सीएनसी मिलिंग और सीएनसी खराद पर काम करना।

दूसरे वर्ष विशेषज्ञता

कार्यशाला अभ्यास: -
3 सेमेस्टर: खराद और मिलिंग मशीन पर व्यापक व्यावहारिक काम करना हैं। इन मशीनों पर विशेष संलग्नक का प्रयोग करें । उचित क्लेम्पिंग (clamping) और एकत्रित पर प्रैक्टिकल निर्देश । कार्बाइड कटर का प्रयोग करना । अंतर विभाजन सिर के अनुप्रयोग । सतह की चक्की, बेलनाकार चक्की, उपकरण और कटर चक्की, एकल होंठ कटर चक्की और तीन आयामी उत्कीर्णन पर उन्नत प्रशिक्षण । प्रो/ई सॉफ्टवेयर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण ।
4 सेमेस्टर : परिचय और गुणवत्ता आश्वासन कमरे में बुनियादी गुणवत्ता आश्वासन उपकरण का उपयोग करना। विशेष मापक तकनीक । जिग बोरिंग मशीन और पंच - शेपर पर प्रशिक्षण। नौकरियों के लिए विभिन्न प्रकार की गर्मी उपचार। कठोरता परीक्षक का प्रयोग करना । प्रो/ई सॉफ्टवेयर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण ।

तीसरा साल

5 सेमेस्टर: विशेष प्रयोजन मशीन टूल्स और उनके संलग्नक अर्थात पर प्रशिक्षण। जिग पीस, प्रोफ़ाइल पीस, चिंगारी कटाव, और मिलिंग की नकल। बोरिंग मशीन के रूप में मिलिंग मशीन का प्रयोग करना। सतह / बेलनाकार पीसने पर विशेष पीस तकनीक । साइन मेज का प्रयोग करना। त्रिज्या और कोणीय ड्रेसिंग अनुलग्नक के साथ घूमने वाली व्हील पर एक विशेष प्रोफ़ाइल ड्रेसिंग। सीएनसी मिलिंग और प्रोग्रामिंग पर प्रशिक्षण। प्रो/ई सॉफ्टवेयर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण ।
6 सेमेस्टर: परीक्षण चलाने के लिए बिजली प्रेस, इंजेक्शन मोल्डिंग मशीन और हाइड्रोलिक प्रेस की स्थापना करने के लिए प्रेस उपकरण, नए नए साँचे, Jigs और स्थिरता आदि परिचय का विधानसभा पर व्यापक कार्यक्षेत्र प्रशिक्षण । गुणवत्ता आश्वासन कमरे में उन्नत प्रशिक्षण ( टूल रूम माइक्रोस्कोप , प्रोफाइल प्रोजेक्टर )। मोल्ड गुहा, हीरा पॉलिश चिपकाता का उपयोग करते हैं, अलग चमकाने एड्स और मर जाता है के उपयोग के उपयोग की चमकाने मशीन चमकाने प्रोफ़ाइल । उपकरण का डिजाइन । प्रो/ई सॉफ्टवेयर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण ।

सिद्धांत विषयों:

1 सेमेस्टर
इंजीनियरिंग गणित-I, एप्लाइड फिजिक्स, एप्लाइड रसायन विज्ञान, तकनीकी ड्राइंग-I, कार्यशाला प्रौद्योगिकी-I, संचार कौशल (अंग्रेजी और हिन्दी)
2 सेमेस्टर
इंजीनियरिंग गणित-II, बुनियादी बिजली प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, तकनीकी ड्राइंग-II, कार्यशाला प्रौद्योगिकी-II, सामग्री विज्ञान, कंप्यूटर इंजीनियरिंग
3 सेमेस्टर
आधुनिक मशीनिंग प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग मैकेनिक्स, सामग्री, माप एवं इंस्ट्रुमेन्टेशन्स, औद्योगिक इंजीनियरिंग और उत्पादन प्रबंधन, उपकरण डिजाइन-I, ढालना प्रौद्योगिकी-I की शक्ति
4 सेमेस्टर
मशीन डिजाइन, द्रव यांत्रिकी, मेक्ट्रोनिक्स: पीएलसी, हाइड्रोलिक्स और वायु-शास्र (Pneumatics); उपकरण का डिजाइन द्वितीय, ढालना प्रौद्योगिकी-II, प्रेसिजन इंजीनियरिंग
5 सेमेस्टर
थर्मल इंजीनियरिंग, सीएडी / सीएएम / सीएई (मॉडलिंग, सिमुलेशन, विश्लेषण, और निर्माण(Manug=facturing)), उद्यमिता विकास और प्रबंधन, डिजाइन नवाचार और विनिर्माण, जिग्स और फिक्स्चर, मशीन उपकरण डिजाइन के सिद्धांतों, उन्नत सामग्री प्रौद्योगिकी
6 सेमेस्टर
मैट्रोलोजी और कम्प्यूटर एडेड निरीक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण, विश्वसनीयता इंजीनियरिंग, कंप्यूटर एडेड डिजाइन और मसौदा (मैकेनिकल), डिजाइन और एमईएमएस(MEMS) का निर्माण, मैनुफैक्चरिंग (यूके), उत्पाद विकास

सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में डिप्लोमा

वैचारिक और व्यावहारिक दक्षता का सही मिश्रण के साथ सुसज्जित पेशेवर तकनीशियनों के एक वर्ग के उत्पादन में असली दुनिया में तेजी से विकासशील आईसीटी क्षेत्र का समर्थन करने के लिए।

परिणाम

डिप्लोमा धारकों राज्य के अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और तरीकों की एक व्यापक रेंज के साथ काम कर हाथ पर अनुभव इकट्ठा किया जाएगा। अपूर्णांश कॉलेज में हमारे स्नातकों को विदेशों में स्थानीय स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उच्च शैक्षिक और व्यावसायिक योग्यता के लिए एक मार्ग है, और होगा।

मान्यता

मलेशिया लोक सेवा विभाग (PSD) - पूरी तरह से Jabatan Perkhidmatan अवाम (जेपीए) द्वारा मान्यता प्राप्त मलेशियन योग्यता एजेंसी (MQA A8163) द्वारा मान्यता प्राप्त

नियोजनीयता

इस कोर्स के लिए इस तरह के रूप में निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों में औद्योगिक और व्यावसायिक संगठनों की एक विस्तृत रेंज में एक कैरियर के लिए ले जा सकता है:
  • आईटी टेक्निशियन
  • आईटी और उपयोगकर्ता समर्थन सेवा
  • वेब डेवलपर
  • नेटवर्क तकनीशियन
  • प्रोग्रामर
  • नेटवर्क तकनीशियन
तुम भी एक संबंधित विषय के क्षेत्र में या आईसीटी के शिक्षकों के एक मौजूदा कमी राष्ट्रीय स्तर के रूप में वहाँ आप सूचना प्रौद्योगिकी शिक्षण में एक कैरियर को आगे बढ़ाने सकता है एक उचित शिक्षा योग्यता के साथ पूर्ण डिग्री के लिए प्रगति के लिए चुन सकते हैं।

Tuesday, May 31, 2016

पॉलिटेक्निक है राइट ऑप्शन?


10वीं-12वींके बाद टेक्निकल कोर्स में एडमिशन लेने के इच्छुक स्टूडेंट्स के लिए पॉलिटेक्निक राइट ऑप्शन हो सकता है। वैसे, आज के जॉब मार्केट में पॉलिटेक्निक से जुड़े स्टूडेंट्स की जबरदस्त डिमांड है। आइए जानते हैं, पॉलिटेक्निक में कैसे एडमिशन लिया जा सकता है और क्या हैं इसके फायदे?
स्कूल की दुनिया से बाहर निकलते ही हर साल हजारों स्टूडेंट्स इंजीनियर बनने का सपना देखने लगते हैं, लेकिन कई स्टूडेंट्स महंगी फीस और अच्छे मा‌र्क्स नहीं आने की वजह से बड़े संस्थानों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई का सपना पूरा नहींकर पाते। ऐसे में 12वीं के बाद बीटेक की चार साल की डिग्री की बजाय 10वीं या 12वीं के बाद तीन साल का डिप्लोमा करके भी जॉब मार्केट में कदम रखने का ऑप्शन मौजूद है। ऐसे स्टूडेंट्स के लिए पॉलिटेक्निक सुनहरा अवसर लेकर आता है। यह उन्हें तकनीकी और व्यावसायिक कोर्स का अवसर प्रदान करता है। दरअसल, ये कोर्स ऐसे होते हैं, जिसे पूरा करने के बाद खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए या फिर अच्छी जगह नौकरी करने की स्किल से लैस करता है। 
क्या है पॉलिटेक्निक?
आमतौर पर पॉलिटेक्निक ऑ‌र्ट्स और साइंस से संबंधित डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स ऑफर करते हैं। इसे टेक्निकल डिग्री कोर्स के नाम से भी जाना जाता है। पॉलिटेक्निक से संबंधित टेक्निकल कोर्स भी ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) द्वारा संचालित होते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य स्टूडेंट्स के प्रैक्टिकल और टेक्निकल स्किल को इंप्रूव करना है। वैसे, पॉलिटेक्निक संस्थान कई तरह के होते हैं। राज्य स्तर पर सरकारी, निजी और महिला पॉलिटेक्निक संस्थान सक्रिय हैं। यहां से आप डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं। इसके तहत आमतौर पर फैशन डिजाइन, टेक्सटाइल डिजाइन, इंजीनियरिंग, मास कम्युनिकेशन, इंटीरियर डिजाइन, होटल मैनेजमेंट आदि से जुड़े कोर्स करवाए जाते हैं। कोर्स की अवधि एक से चार साल तक की होती है। इनमें दाखिला पाकर कम समय में ही अपने करियर में पंख लगा सकते हैं। इतना ही नहीं, कोर्स समाप्त होने के बाद जूनियर इंजीनियर बनने का रास्ता भी खुल जाता है। महिला पॉलिटेक्निक संस्थानों में महिलाओं पर केंद्रित स्किल वाले कोर्स होते हैं।
क्वालिफिकेशन
इस कोर्स में दाखिले के लिए 10वीं में कम से कम 50 फीसदी अंकों के साथ पास होना जरूरी है। ऐसे 
स्टूडेंट्स आगे चलकर बीटेक के लिए होने वाली परीक्षा में भी शामिल हो सकते हैं। उन्हें तीन साल के कोर्स के बाद डिग्री भी मिल जाती है। 10वीं पास स्टूडेंट्स को राज्य स्तर पर कई संस्थान मेरिट के आधार पर तो कई राज्य स्तरीय संस्थान कॉमन एंट्रेंस एग्जाम के जरिए दाखिला देते हैं। इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने वाले स्टूडेंट्स चाहें, तो आगे पढ़ाई करके बीटेक की डिग्री भी हासिल कर सकते हैं। इंजीनियरिंग कॉलेजों में ऐसे स्टूडेंट्स को लैटरल एंट्री के तहत दाखिला दिया जाता है।
खूब है डिमांड 
श्रीवेंकटेश्वरा यूनिवर्सिटी के चांसलर सुधीर गिरि के मुताबिक, सरकारी हो या फिर प्राइवेट सेक्टर्स, हर जगह जूनियर इंजीनियर्स की जबरदस्त डिमांड है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में लाखों डिप्लोमा होल्डर्स जूनियर इंजीनियर्स की जरूरत होगी। पॉलिटेक्निक कई लिहाज से फायदेमंद है। सबसे अहम बात यह है कि पॉलिटेक्निक में दाखिला लेने के लिए किसी बड़े एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की जरूरत नहीं है। देखा जाए तो, आज पॉलिटेक्निक से डिप्लोमा करने के बाद कंपनियों और संस्थानों में कई तरह के अवसर उपलब्ध हैं। बड़ी बात यह है कि उन्हें कंपनियों में आम प्रोफेशनल्स की तुलना में अच्छी सैलरी और सुविधाएं ऑफर की जाती हैं। 
सैलरी पैकेज
पॉलिटेक्निक डिप्लोमाधारी स्टूडेंट्स के लिए नौकरी हासिल करना आसान हो जाता है। पॉलिटेक्निक किए हुए प्रोफेशनल्स की शुरुआती सैलरी 15 से 20 हजार रुपये के बीच होती है। अगर आपने कोर्स के दौरान बेहतरीन परफॉर्म किया है, तो कैंपस इंटरव्यू में ही आपको नौकरी के कई अच्छे ऑफर मिल सकते हैं। 
पॉलिटेक्निक के खास कोर्स
मैकेनिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, पैकेजिंग टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिकल ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, अप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड इंस्ट्रूमेंटेशन, कम्प्यूटर इंजीनियरिंग, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी,माइनिंग इंजीनियरिंग, मेटलॉर्जिकल इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी, केमिकल इंजीनियरिंग, केमिकल इंजीनियरिंग इन प्लास्टिक ऐंड पॉलिमर्स, पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग, लेटर टेक्नोलॉजी, प्रिटिंग टेक्नोलॉजी, फुटवियर टेक्नोलॉजी, आर्किटेक्चर कोर्सेज, एयरक्राफ्ट मेंटिनेंस इंजीनियरिंग, मास कम्युनिकेशन, इंटीरियर डिजाइनिंग, होटल मैनेजमेंट, कॉमर्शियल ऐंड फाइन आर्ट, मास कम्युनिकेशन, इंटीरियर डिजाइन, ऑफिस मैनेजमेंट ऐंड कम्प्यूटर ऐप्लिकेशन, कम्प्यूटर साइंस आदि।

Sunday, May 29, 2016

डिकोडिंग द डिसऑर्डर में करियर


ह्यूमन बॉडी में मौजूद क्रोमोजोम्स में करीब 25 से 35 हजार के बीच जीन्स होते हैं। कई बार इन जीन्स का प्रॉपर डिस्ट्रीब्यूशन बॉडी में नहीं होता है, जिससे थैलेसेमिया, हीमोफीलिया, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, क्लेफ्ट लिप पैलेट, न्यूरोडिजेनेरैटिव जैसी एबनॉर्मलिटीज या हेरेडिटरी प्रॉब्लम्स हो सकती है। इससे निपटने के लिए हेल्थ सेक्टर में ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट और दूसरे इनेशिएटिव्स लिए जा रहे हैं, जिसे देखते हुए जेनेटिक काउंसलिंग का रोल आज काफी बढ गया है। अब जो लोग इसमें करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए स्कोप कहीं ज्यादा हो गए हैं।

जॉब आउटलुक

एक अनुमान के अनुसार, करीब 5 परसेंट आबादी में किसी न किसी तरह का इनहेरेटेड डिसऑर्डर पाया जाता है। ये ऐसे डिसऑर्डर्स होते हैं, जिनका पता शुरुआत में नहीं चल पाता है, लेकिन एक जेनेटिक काउंसलर बता सकता है कि आपमें इस तरह के प्रॉब्लम होने की कितनी गुंजाइश है। काउंसलर पेशेंट की फैमिली हिस्ट्री की स्टडी कर इनहेरेटेंस पैटर्न का पता लगाते हैं। वे फैमिली मेंबर्स को इमोशनल और साइकोलॉजिकल सपोर्ट भी देते हैं।

स्किल्स रिक्वायर्ड

जेनेटिक काउंसलिंग के लिए सबसे इंपॉर्टेट स्किल है कम्युनिकेशन। इसके अलावा, कॉम्पि्लकेटेड सिचुएशंस से डील करने का पेशेंस। एक काउंसलर का नॉन-जजमेंटल होना भी जरूरी है, ताकि सब कुछ जानने के बाद मरीज अपना डिसीजन खुद ले सके। उन्हें पेशेंट के साथ ट्रस्ट बिल्ड करना होगा।

करियर अपॉच्र्युनिटीज

अगर इस फील्ड में ऑप्शंस की बात करें, तो हॉस्पिटल में जॉब के अलावा प्राइवेट प्रैक्टिस या इंडिपेंडेंट कंसलटेंट के तौर पर काम कर सकते हैं। इसी तरह डायग्नॉस्टिक लेबोरेटरीज में ये फिजीशियन और लैब के बीच मीडिएटर का रोल निभा सकते हैं। कंपनीज को एडवाइज देने के साथ टीचिंग में भी हाथ आजमा सकते हैं। वहीं, जेनेटिक रिसर्च प्रोजेक्ट्स में स्टडी को-ओर्डिनेटर के तौर पर काम कर सकते हैं। बायोटेक और फार्मा इंडस्ट्री में भी काफी मौके हैं।

क्वॉलिफिकेशन

जेनेटिक काउंसलर बनने के लिए बायोलॉजी, जेनेटिक्स और साइकोलॉजी में अंडरग्रेजुएट की डिग्री के साथ-साथ लाइफ साइंस या जेनेटिक काउंसलिंग में एमएससी या एमटेक की डिग्री होना जरूरी है।

सैलरी

जेनेटिक काउंसलिंग के फील्ड में फाइनेंशियल स्टेबिलिटी भी पूरी है। हालांकि जॉब प्रोफाइल और सेक्टर के मुताबिक सैलरी वैरी करती है। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाला प्रोफेशनल महीने में 50 हजार रुपये तक अर्न कर सकता है, जबकि गवर्नमेंट डिपार्टमेंट में काम करने वाले महीने में 25 से 40 हजार के बीच अर्न कर सकते हैं।

ट्रेनिंग

-गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर

-कामिनेनी इंस्टीट्यूट, हैदराबाद

-संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट, लखनऊ

-सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज, बेंगलुरु

-महात्मा गांधी मिशन, औरंगाबाद

-जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, दिल्ली

-सर गंगाराम हॉस्पिटल, नई दिल्ली

एक्सपर्ट बाइट

जेनेटिक काउंसलिंग इंडिया में काफी तेजी से पॉपुलर हो रहा है। एप्लीकेशन के नजरिए से इसमें बहुत स्कोप है। नई लेबोरेटरीज खुल रही हैं, जिनके लिए जेनेटिक काउंसलर्स की काफी डिमांड है। वैसे, ट्रेडिशनल हॉस्पिटल्स के अलावा फार्मा कंपनीज में, कॉरपोरेट एनवॉयरनमेंट के बीच काम करने के पूरे मौके मिलते हैं। अब तक मेडिकल प्रोफेशन से जुडे स्टूडेंट्स ही इसमें आते थे, लेकिन अब नॉन-मेडिकल स्टूडेंट्स भी आ रहे हैं।

Thursday, May 26, 2016

फिलॉसफी के कोर्स

फिलॉसफी के क्षेत्र में वेतनमान ऊंचाइयां छूता है। टीचिंग के क्षेत्र में एक असिस्टेंट प्रोफेसर 30000 रुपए प्रतिमाह से ऊपर वेतनमान प्राप्त करता है। इसके अलावा एक प्रोफेसर 80000 रुपए प्रतिमाह प्राप्त करता है। आरकेएमवी शिमला में हर वर्ष 60 छात्राएं यह कोर्स करके निकल रही हैं। हिमाचल में इस समय 50 से अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़े हैं…
फिलॉसफी एक वैज्ञानिक विषय है, जिसमें सच्चाई और वास्तविकता के कारणों का पता लगाने के लिए तर्क का प्रयोग किया जाता है। एक व्यक्ति जो फिलॉसफी सीखता है, उसे फिलॉस्फर कहा जाता है और यह जीवन भर सीखी जाने वाली प्रक्रिया है। जिन्हें मेटाफिजिक्स, लॉजिक, रेशनलिज्म आदि में रुचि है, फिलॉसफी उन बुद्धिजीवियों के लिए यह उचित प्रोफेशन है। फिलॉसफी दूसरे विषयों की तरह नहीं है। दूसरी कई अकादमिक शिक्षा छात्रों को एक बेहतर कैरियर बनाने के लिए प्रदान करवाई जाती है, लेकिन फिलॉसफी इन सबसे अलग है। यह कोई ट्रेनिंग नहीं है, बल्कि जीवन भर सीखने वाली शिक्षा है। यदि आपकी रुचि इस क्षेत्र में है, तो यह एक बेहतर कैरियर विकल्प बन सकता है। फिलॉसफी की कुछ उप शाखाएं हैं, जिनमें से किसी एक को चुनकर आप बेहतर कैरियर बना सकते हैं, वे हैं-  एस्थेटिक्स ः यह मुख्य रूप से  सौंदर्य, रुचि और भावनात्मक सार्थकता पर आधारित शिक्षा है। एस्थेटिक्स मुख्य रूप से फिलॉसफी आफ आर्ट से संबंधित है। एपिस्टमोलॉजी ः इस शाखा में प्रकृति से लगाव, विश्वास और ज्ञान के बारे में बताया जाता है। एथिक्स ः यह अच्छे, कीमती और सही की शिक्षा है। इसमें अप्लायड नीति शास्त्र की शिक्षा भी दी जाती है। लॉजिक ः इसमें अच्छे तर्क-वितर्क की शिक्षा दी जाती है, वाद-विवाद के जरिए तर्कों को आंका जाता है। मेटाफिजिक्स ः यह शाखा वास्तविकता की असली पहचान की शिक्षा देती है।
शैक्षणिक योग्यता 
फिलॉसफी विषय में प्रवेश के लिए छात्र का बारहवीं पास होना आवश्यक होता है। इस कोर्स को करने की अवधि तीन साल की है। कई संस्थानों द्वारा इस कोर्स में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। फिलॉसफी के मुख्य कोर्सों में आप बीए, एमए, एमफिल और पीएचडी आदि कर सकते हैं। डाक्टर आफ फिलॉसफी में प्रवेश पाने के लिए छात्र का संबंधित विषय में एमफिल होना आवश्यक है। 
कोर्स 
फिलॉसफी के कोर्स आप दुनिया के किसी भी हिस्से से कर सकते हैं। एथिक्स और एस्थेटिक्स भी इस कोर्स का हिस्सा हैं। लॉजिक एक दूसरा हिस्सा है, जो फिलॉसफी के कोर्स में छात्रों को करवाया जाता है। भारत में कई सरकारी और निजी संस्थानों द्वारा फिलॉसफी में कोर्स करवाए जाते हैं। इसके मुख्य कोर्सों में आप बीए इन फिलॉसफी, अंडरग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफी, पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफी,  मास्टर डिग्री इन फिलॉसफी, पीएचडी इन फिलॉसफी, मास्टर आफ फिलॉसफी (लॉ), डाक्टर आफ फिलॉसफी (पार्ट टाइम), मास्टर आफ फिलॉसफी (एमफिल) इन इकोनोमिक्स, बीए (ऑनर्स) इन फिलॉसफी और डिप्लोमा इन फिलॉसफी एंड रिलीजन आदि कोर्स भी कर सकते हैं। बीए करने के बाद आप लिंग्विस्टिक्स, सोशियोलॉजी, साइकोलॉजी और यहां तक कि इतिहास के क्षेत्रों में आप उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। 
रोजगार की संभावनाएं  
इस कोर्स को करने के बाद ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए सरकारी, कारपोरेट क्षेत्रों में कई कैरियर विकल्प उपलब्ध रहते हैं। कारपोरेट क्षेत्र में एक फिलॉसफी ग्रेजुएट मैनपावर डिवेलपमेंट मैनेजर और मैनपावर सर्विसेज को-आर्डिनेटर के रूप में नौकरी प्राप्त कर सकता है। सरकारी क्षेत्र में आप एक आर्किविस्ट के रूप में काम कर सकते हैं। एक कंसल्टिंग फिलॉस्फर की मांग उनके विचारों और फिलॉसफी की वजह से पूरी दुनिया में रहती है। इसके अलावा एक फिलॉस्फर जर्नलिज्म और पब्लिशिंग इंडस्ट्री में एक राइटर और एडीटर के रूप में रोजगार प्राप्त कर सकता है। इसके साथ ही आप रिसर्च में भी जा सकते हैं। एक ग्रेजुएट डिग्री प्राप्त करने वाला दूसरे अन्य कई क्षेत्रों में नौकरी प्राप्त कर सकता है। इस क्षेत्र में निपुण व्यक्ति सरकारी और निजी फर्मों में बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। सरकारी और निजी स्कूलों में भी फिलॉसफी के क्षेत्र में ढेरों संभावनाएं हैं। इसके अलावा कालेजों और विश्वविद्यालयों में भी आप बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। यहां पर आप एक प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही आप भारत के अलावा विदेशों में अच्छे वेतनमान पर नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। यहां पर आप कारपोरेट क्षेत्रों में नौकरी प्राप्त करके बेहतर कमाई भी कर सकते हैं।
वेतनमान 
फिलॉसफी के क्षेत्र में वेतनमान ऊंचाइयां छूता है। टीचिंग के क्षेत्र में एक असिस्टेंट प्रोफेसर 30000 रुपए प्रतिमाह से ऊपर वेतनमान प्राप्त करता है। इसके अलावा एक प्रोफेसर 80000 रुपए प्रतिमाह प्राप्त करता है। 
कोर्स 
1.    बीए इन फिलॉसफी 
2.    अंडरग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफी 
3.    पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स इन फिलॉसफी   
4.    मास्टर डिग्री इन फिलॉसफी 
5.    पीएचडी इन फिलॉसफी 
6.    मास्टर आफ फिलॉसफी (लॉ)  
7.    डाक्टर आफ फिलॉसफी (पार्ट टाइम)  
8.    मास्टर आफ फिलॉसफी (एमफिल) इन    इकोनोमिक्स  
9.    बीए (ऑनर्स) इन फिलॉसफी 
10. डिप्लोमा इन फिलॉसफी एंड रिलीजन 
संस्थान 
1.  राजकीय कन्या महाविद्यालय, शिमला 
2.  गवर्नमेंट डिग्री कालेज, नालागढ़
3. महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक 
4.  एसआर गवर्नमेंट कालेज फार वूमेन, अमृतसर 
5.  गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर 
6.  पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला 
7.  देव समाज कालेज फार वूमन, फिरोजपुर 
8. डीएवी कालेज फार वूमन, अमृतसर 
9. पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ 
10. कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, कुुरुक्षेत्र 
11. गवर्नमेंट नेशनल कालेज, सिरसा 
12. दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

Monday, May 23, 2016

जायके से भरपूर करियर

आज से 10-12 साल पहले तक कुकिंग स्किल्स को ज्यादा इंपॉर्र्टेस नहींदीजाती थी, लेकिन अब टाइम बदल चुका है। शेफ का रोल किचन तक लिमिटेड नहीं रहा। वह टीवी शोज होस्ट करने से लेकर बुक्स लिख रहे हैं, यानी यह एक ग्लैमरस करियर के तौर पर हमारे सामने आया है। आज शेफ का स्टेटस किसी सेलिब्रेटी से कम नहीं रह गया है। चैनल्स पर आने वाले कुकिंग से रिलेटेड रिएलिटी शोज की पॉपुलैरिटी में शेफ की अच्छी खासी भूमिका होती है। मशहूर शेफ कुणाल कपूर इसके एग्जांपल हैं। कुणाल को दूरदर्शन पर आने वाले शो दावत ने शेफ बनने के लिए इंस्पायर किया था। इनका कहना है कि जिनमें भी कुकिंग को लेकर राइट एटीट्यूड और स्पाइसेज की सही पहचान हो, वो शेफ के तौर पर अट्रैक्टिव करियर बना सकते हैं।
लीडरशिप क्वॉलिटीज
शुरुआती दौर में इस इंडस्ट्री में काफी हार्ड वर्क की जरूरत होती है। अलग-अलग कंट्रीज के लोगों की डाइट की जानकारी रखनी होती है कि वे क्या खाना पसंद करते हैं। एक शेफ के लिए यह जानना भी जरूरी होता है कि इंडिया की कौन सी रेसिपीज दूसरे कंट्री की किस रेसिपी से मैच करती है। एक बार यह समझ में आ गया, तो आगे आप खुद ही सक्सेस की नई मंजिलें तय करते जाएंगे। हां, कुणाल की एक बात पर ध्यान देना होगा कि एक अच्छे शेफ का अच्छा लीडर होना जरूरी है क्योंकि जैसे-जैसे वह करियर में आगे बढेगा, उसे फूड के क्वॉलिटी कंट्रोल, फाइनेंस मैनेजमेंट, मेन्यू प्लानिंग, हायरिंग और टीम मैनेजमेंट का भी ध्यान रखना होगा। इस तरह एक बार फील्ड में खुद को स्टैब्लिश कर लेंगे तो किसी सेलिब्रिटी से कम पहचान नहींहोगी आपकी।

ग्रोइंग सेक्टर

ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, 2016 तक शेफ और फूड प्रोफेशनल्स की एंप्लॉयमेंट रेट में 16 परसेंट का इजाफा हो सकता है। इस इंडस्ट्री में काफी जॉब ऑप्शंस हैं। होटल, रेस्टोरेंट, एयर कैटरिंग यूनिट्स, फूड प्रोसेसिंग कंपनीज, क्रूज लाइनर और कॉरपोरेट कैटरिंग यूनिट्स में शेफ के लिए नई अपॉच्र्युनिटीज क्रिएट हो रही हैं। इसके अलावा सेल्फ एंप्लॉयमेंट के भी ऑप्शन हैं। वैसे, कुणाल की ऐसे लोगों को एडवाइस है कि कोर्स करने के बाद अगर अपना वेंचर स्टार्ट करना चाहते हैं, तो पहले किसी अच्छे होटल में काम करें। एक्सपीरियंस होने पर ही आगे बढें।

इंटरनेशनल फूड का क्रेज

कुकिंग आज कोई डेली रूटीन या एक्टिविटी नहींरही गई। इसमें एक्सपेरिमेंट्स हो रहे हैं। लोगों का टेस्ट चेंज हो रहा है। उनमें इंडियन के अलावा इंटरनेशनल फूड का क्रेज बढा है, जिससे पूरी हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री को फायदा मिला है। कुणाल के अनुसार, कस्टमर्स की इस नई डिमांड को एक प्रोफेशनल शेफ ही पूरा कर सकता है। यह एक शेफ की ही रिस्पॉन्सिबिलिटी है कि वह कस्टमर के टेस्ट के मुताबिक, अलग-अलग तरह के कुजींस प्लान करे, इसलिए एक शेफ को चाइनीज, फ्रेंच, इटैलियन, कॉन्टिनेंटल, मैक्सिकन जैसे तमाम कुजींस की जानकारी होनी जरूरी है। इसी से वे लोगों का दिल जीत पाते हैं और उन्हें सक्सेस मिलती है। इन दिनों तो बहुत सारे इंडियन शेफ मैक्सिकन, मेडिटेरेनियन और सुशी जैसे फॉरेन कुजींस में स्पेशलाइजेशन कर रहे हैं।

हॉस्पिटल में डिमांड

डेवलप्ड कंट्रीज में तो ज्यादातर हॉस्पिटल्स में शेफ काफी पहले से ही रखे जाते रहे हैं। अब यह ट्रेंड इंडिया में भी बढ रहा है। हालांकि अभी यह बडे हॉस्पिटल्स तक ही सीमित है, लेकिन जैसे-जैसे लोग हेल्थ को लेकर कॉन्शियस हो रहे हैं, हॉस्पिटल्स भी अच्छे शेफ्स हायर करने लगे हैं। आने वाले टाइम में इस फील्ड में भी काफी स्कोप देखने को मिलेगा।

गुड इंस्टीट्यूट मैटर्स
कुणाल के अनुसार, शेफ एक आर्टिस्ट की तरह है, जिसे कुकरी क्राफ्ट में स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग लेनी जरूरी है। इसलिए इस फील्ड में एंट्री करनी है, तो अच्छे इंस्टीट्यूट से होटल मैनेजमेंट का कोर्स करें। इसके लिए मिनिमम सीनियर सेकंडरी लेवल तक की एजुकेशन जरूरी है। आप द नेशनल काउंसिल ऑफ होटल मैनेजमेंट ऐंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी का एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करके भी इसमें एंट्री ले सकते हैं।

सैलरी

एक ट्रेनी को करियर के शुरुआती दौर में 10 से 15 हजार रुपये मिलने लगते हैं। एक्सपीरियंस बढने पर हर महीने 40 से 50 हजार रुपये सैलरी मिलती है। अगर फाइव स्टार होटल में जॉब मिल गई, तो इनकम 1 से 2 लाख रुपये या इससे भी अधिक हो सकती है।


Saturday, May 21, 2016

लैंडस्केपिंग आर्किटेक्चर में करियर

अगर आप बिल्डिंग निर्माण के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो लैडस्केपिंग आर्किटेक्चर आपके करियर के लिए बेहतर विकल्प होगा. यह क्षेत्र समय के साथ तेजी से विकास कर रहा है. अब बिल्डिंगों के इंटीरियर डिजाइन पर जितना ध्यान दिया जाता है उतना ही बिल्डिंग के आस-पास के आर्किटेक्चर पर.
क्या है लैंडस्केपिंग आर्किटेक्चर?
इसमें मुख्य रूप से बिल्डिंग के आउटडोर पब्लिक एरिया को प्राकृतिक रूप से डिजाइन किया जाता है, जिसमें वाटर बॉडी, स्टोन, टाइल्स, पेड़-पौधे को आकर्षक बनाया जाता है.
संबंधित कोर्स: इस कोर्स को करने के लिए साइंस स्ट्रीम से 12वीं पास होना जरूरी है. जिसके बाद आप इस विषय में ग्रेजुएशन तथा पोस्ट ग्रेजुएशन भी कर सकते हैं. लैंडस्केपिंग कोर्स से जुड़े अन्य कोर्सेज बीआर्क, बीएससी, एग्रीकल्चर में भी एडमिशन ले सकते हैं.
कहां से करें पढ़ाई?
सेंटर फॉर एनवॉयरमेंट प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद
स्कूल ऑफ प्लानिंग ऐंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली
एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग, नोएडा
डॉ. भानुबेन नानावती कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर फॉर वुमन, पुणे
डॉ. वाईएसपी इंस्टीट्यूट ऑफ हार्टिकल्चर एंड फॉरेस्टी, सोलन (हिमाचल प्रदेश)
कहां मिलेंगे अवसर:
इस क्षेत्र में निजी सेक्टरों में ज्यादा जॉब की संभावना रहती है. इस क्षेत्र में कंस्ट्रक्शन कंपनियों, हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म कंपनियों, फर्म्स में रोजगार पाने के भरपूर मौके हैं. अगर आप चाहें तो कॉन्ट्रैक्ट लेकर भी अपने हिसाब से काम कर सकते हैं. प्राइवेट के साथ-साथ सरकारी विभागों में भी अब अधिक से अधिक में रोजगार मिलने की संभावना बन रही है.