Friday, December 23, 2016

वॉटर साइंस में करियर

जल का महत्व अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। एक ओर जहां यह जीवन देता है, वहीं दूसरी ओर कॅरियर के लिए भी यह कई तरह से उपयोगी बन गया है। कॅरियर के रूप में जल का महत्व शुद्ध पानी (फ्रेश वाटर) के लिए भी बढ़ा है और मेरिन वाटर लाइफ (समुद्री जल-जीवन) के लिए भी। इसी का अध्ययन एक्वाकल्चर कहलाता है। एक्वाकल्चरिस्ट तालाब, झील, नहर या समुद्र के इर्द-गिर्द काम करता है।
 
विषय का स्वरूप
जल की उपलब्धता, जल प्रदूषण आदि विषय इसके तहत आते हैं। फ्रेश वाटर और समुद्री जीव-जंतुओं के पालन-पोषण और उनके संरक्षण से संबंधित बातें भी इसमें शामिल हैं। मछलियों के पालन-पोषण, संरक्षण, उत्पादन और कारोबार से जुड़ी बातें भी इसके अंतर्गत आती हैं। उपयोगी जलीय वनस्पतियों से भी इस विषय का संबंध है। एक्वाक्ल्चर के अध्ययन का मुख्य उद्देश्य इससे संबंधित वस्तुओं को मानव जीवन के लिए उपयोगी बनाना है। इसके तहत जीव-जंतुओं के सामान्य आहार के अलावा दवाओं और अन्य आवश्यक चीजों के बारे में भी जानकारी दी जाती है। जलीय जीव-जंतुओं और पौधों की नस्लों को बेहतर बनाने की कोशिश भी इसमें की जाती है, जिसके लिए विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल होता है।

पाठ्यक्रम कैसे-कैसे
एक्वाकल्चर के कोर्स विभिन्न संस्थानों में उपलब्ध हैं। फिशरी साइंस में बीएफएससी और एमएफएससी जैसे कोर्स उपलब्ध हैं। बीएफएससी की अवधि 4 वर्ष, जबकि एमएफएससी की अवधि 2 वर्ष है। जो विद्यार्थी फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी से 12वीं उत्तीर्ण हों, वे ग्रेजुएशन स्तर के पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकते हैं। एमएससी इन मेरिकल्चर जैसा कोर्स भी उपलब्ध है। ग्रेजुएशन के बाद पीजी और रिसर्च लेवल के कोर्स में नामांकन कराया जा सकता है। इस फील्ड में कई शॉर्ट टर्म कोर्स भी हैं।

व्यक्तिगत योग्यता
जल, कृषि और प्रकृति में दिलचस्पी आपको इस क्षेत्र में सफल बनाएगी। दूरदराज के जलीय इलाकों में भी काम करने में रुचि होनी चाहिए।

मौके कहां-कहां
जिस तरह भारत में विस्तृत समुद्री क्षेत्र है तथा आंतरिक नदियों और जलाशयों की भरमार है, उससे एक्वाकल्चर के जानकारों को यहां कई तरह के अवसर मिलने लगे हैं। ऐसे एक्सपर्ट को विभिन्न एक्वाकल्चर फार्म्स में डिजाइन, कंस्ट्रक्शन और मैनेजमेंट से संबंधित अवसर प्राप्त होते हैं। फिश प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज और कृषि विज्ञान केंद्र के अलावा संबंधित रिसर्च सेंटरों में वैज्ञानिक के रूप में मांग बनी रहती है। सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएफटीआरआई), इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर), मेरिन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमपीईडीए) आदि में विशेषज्ञ मौके पाते हैं। मत्स्य पालन और जल वितरण से संबंधित स्वरोजगार के मौके भी हैं।